समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को ‘पीडीए’ में ‘ए’ का मतलब ‘आधी आबादी’ बताया और कहा कि इनको समृद्ध करने के लिए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएंगे.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान ‘पीडीए’ शब्द पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों को संबोधित करने के लिए गढ़ा था.
अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ अग्रणी महिलाओं के साथ अपनी पत्नी सांसद डिंपल यादव समेत खुद की तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ‘‘आधी आबादी की पूरी आजादी व उनकी हिफाजत के साथ-साथ उनके हक-अधिकार, सशक्तीकरण व सबलीकरण के लिए हम सब सदैव कटिबद्ध-प्रतिबद्ध रहे हैं और रहेंगे.”
उन्होंने कहा, “जब परिवार-समाज और देश को मजबूत करने वालों को सम्मान मिलता है तो उनका मान और मनोबल दोनों बढ़ता है. हम पीडीए में शामिल ‘ए’ मतलब ‘आधी आबादी’ अर्थात हर बच्ची, युवती, नारी, महिला को सामाजिक-आर्थिक रूप से समान सम्मान देने और अपने पैरों पर खड़े होने व उन्हें समृद्ध करने के लिए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएंगे.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘समाजवादी पेंशन’’ को फिर से लाकर हम महिलाओं की ताकत बढ़ाएंगे और साथ ही ‘यूपी की संपूर्ण उन्नति’ के अपने संकल्प को निभाएंगे.
इससे पहले सपा चीफ ने कहा कि अगर 2027 में उनकी सरकार बनती है तो नारी समृद्धि सम्मान योजना शुरू की जाएगी. इस योजना के तहत गरीब परिवार की महिलाओं को हर साल 40000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी. वहीं पूर्व सीएम ने कहा कि फसल बदलनी है तो बीज बदलने होंगे, स्त्री के प्रति जब मूलभूत मानसिक बीज बदलेंगे तभी उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा.
इसी संदर्भ में ‘मालती देवी-मूर्ति देवी महिला सम्मान समारोह’ के माध्यम से हमने उन महिलाओं को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करने का प्रयास करा है जिनकी प्रतिभा, हिम्मत और सद्प्रयासों से नारी का सशक्त रूप उभर कर आया है.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.
Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे. बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है। नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी। नई सरकार का गठन कब होगा? राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है। इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है। क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा? अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा। संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन? नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। 2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। 3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा? अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं। विपक्ष की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। बिहार की राजनीति पर संभावित असर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं: बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था। आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
सीएम मोहन ने कहा कि बाबा साहेब के बताये मार्ग पर चलकर हमारा देश आज महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाने की ओर आगे बढ़ रहा है. मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal में मंगलवार को Mohan Yadav ने बोर्ड ऑफिस चौराहे स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी 136वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय और अविस्मरणीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि B. R. Ambedkar ने देश को एक ऐसा संविधान दिया, जिसमें हर नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। उन्होंने समतामूलक समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए जीवनभर संघर्ष किया और वंचित, शोषित एवं उपेक्षित वर्गों की आवाज बने। कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव ने भारतीय संविधान की मूल उद्देश्यिका का वाचन भी किया और “डॉ. भीमराव अम्बेडकर अमर रहें” के नारों के साथ माहौल को प्रेरणादायक बना दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने हमें समानता का अधिकार दिलाया और आज सरकार उसी दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है और बाबा साहेब के सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने सामाजिक समरसता और एकता को देश की प्रगति के लिए आवश्यक बताया। सीएम मोहन यादव ने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार ने बाबा साहेब की स्मृति को सहेजने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। Dr. Ambedkar Nagar (महू) में भव्य स्मारक निर्माण, भोपाल में फ्लाईओवर का नामकरण, सागर अभ्यारण्य का नामकरण और विभिन्न योजनाओं की शुरुआत उनके सम्मान में की गई है। साथ ही ग्वालियर में डॉ. अम्बेडकर धाम के निर्माण की योजना भी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बाबा साहेब से जुड़े प्रमुख स्थलों—महू (जन्मभूमि), लंदन (शिक्षा भूमि), नागपुर (दीक्षा भूमि), दिल्ली (महापरिनिर्वाण भूमि) और मुंबई (चैत्य भूमि)—को “पंचतीर्थ” के रूप में विकसित किया है, जो उनके जीवन संघर्ष और आदर्शों को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री ने महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी जोर देते हुए कहा कि बाबा साहेब ने स्त्री शिक्षा और अधिकारों के लिए विशेष कार्य किए। इसी दिशा में केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, जो देश की आधी आबादी को सशक्त बनाएगा। बाबा साहेब ने संविधान के रूप में हमें लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथ दिया है...भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर आज उनकी जन्मभूमि डॉ. अंबेडकर नगर (महू) में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।इस अवसर पर आयोजित समारोह में विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले… pic.twitter.com/lzDyUoBwCb— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 14, 2026
इंदौर में एक बच्चे के ऊपर कार चढ़ने की घटना हुई, जिसमें कार मालिक ने मानवतादिखाई.उन्होंने बच्चे के इलाज का खर्च उठाया और ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. इंदौर में दर्दनाक हादसा: कार के नीचे आया मासूम, मालिक की ईमानदारी बनी मिसाल मध्य प्रदेश के Indore शहर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने लोगों को अंदर तक हिला दिया। शहर के Bombay Hospital के पास स्थित शांति निकेतन कॉलोनी में सड़क पर खेल रहे एक छोटे बच्चे को तेज रफ्तार कार ने कुचल दिया। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। हादसे का खौफनाक मंजर जानकारी के मुताबिक, यह घटना मंगलवार दोपहर की है। कॉलोनी की सड़क पर दो मासूम बच्चे खेल रहे थे, तभी अचानक एक तेज रफ्तार कार वहां पहुंची। ड्राइवर की लापरवाही इतनी गंभीर थी कि वह बच्चों को समय रहते देख नहीं पाया और एक बच्चा कार की चपेट में आ गया। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि कार के दोनों पहिए बच्चे के ऊपर से गुजर जाते हैं। यह दृश्य इतना भयावह है कि इसे देखकर किसी का भी दिल दहल सकता है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग तुरंत बच्चे की मदद के लिए दौड़ पड़े। बाल-बाल बची मासूम की जान हादसे के तुरंत बाद घायल बच्चे को नजदीकी Bombay Hospital में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है, लेकिन राहत की बात यह है कि उसकी जान खतरे से बाहर है। फिलहाल उसका इलाज जारी है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। कार मालिक ने पेश की ईमानदारी की मिसाल जहां अक्सर ऐसे मामलों में आरोपी ड्राइवर या वाहन मालिक मौके से फरार हो जाते हैं या मामले को दबाने की कोशिश करते हैं, वहीं इस घटना में कार मालिक संजय अग्रवाल ने एक अलग उदाहरण पेश किया। जैसे ही उन्हें इस हादसे की जानकारी मिली, उन्होंने बिना किसी देरी के घायल बच्चे के इलाज का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद अपने ड्राइवर को पुलिस स्टेशन भेजा और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में सहयोग किया। इस कदम की पूरे शहर में जमकर सराहना हो रही है। पुलिस ने शुरू की कार्रवाई इस मामले में पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, कार मालिक की पहल पर ही ड्राइवर को थाने लाया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस आगे की जांच कर रही है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ड्राइविंग में सतर्कता की जरूरत को उजागर कर दिया है। समाज के लिए सीख यह हादसा जहां एक तरफ लापरवाही के गंभीर परिणामों को दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ कार मालिक की जिम्मेदारी और ईमानदारी समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी देती है। अगर हर नागरिक इसी तरह कानून का सम्मान करे और अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो कई समस्याओं को आसानी से रोका जा सकता है।
Bhopal LPG Crisis: खाड़ी देशों में अशांति से LPG संकट गहराया है, जिससे कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े हैं. भोपाल में रेस्टोरेंट और भोजनालयों ने खाने के दाम 10-30 रुपये तक बढ़ा दिए हैं. खाड़ी देशों में जारी युद्ध और अशांति के कारण देश में एलपीजी (LPG) का संकट गहराने लगा है. पिछले एक महीने के भीतर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में दो बार भारी बढ़ोतरी हो चुकी है. इसका सीधा असर अब आम आदमी की जेब और खाने-पीने की चीजों पर पड़ रहा है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में फास्ट फूड से लेकर सामान्य भोजनालयों की थाली तक सब कुछ महंगा हो गया है. भोपाल के मशहूर 'सागर गैरे' रेस्टोरेंट सहित कई फूड आउटलेट्स पर खाने-पीने के दाम बढ़ा दिए गए हैं. सैंडविच, पास्ता से लेकर सूप तक, मेन्यू में शामिल लगभग हर आइटम पर 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. रेस्टोरेंट संचालकों का स्पष्ट कहना है कि एक ही महीने में कमर्शियल सिलेंडर के दामों में दो बार हुए इजाफे के कारण उनके पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था. आम आदमी की 'थाली' भी हुई 30 रुपये तक महंगी महंगाई की यह आंच सिर्फ फास्ट फूड तक सीमित नहीं है. दोपहर का सस्ता और भरपेट भोजन परोसने वाले भोजनालयों में भी खाना अब महंगा हो गया है. भोपाल के 'शंकर भोजनालय' में खाने की थाली के दामों में 20 से 30 रुपये तक का सीधा इजाफा किया गया है. जो साधारण थाली पहले 160 रुपये में मिलती थी, वह अब 180 रुपये की हो गई है. जो स्पेशल थाली पहले 180 रुपये की थी, उसके दाम बढ़ाकर 210 रुपये कर दिए गए हैं. इसके अलावा दाल, सब्जी सहित मेन्यू के अन्य सभी आइटम्स के रेट भी बढ़ गए हैं. ब्लैक में मिल रहे सिलेंडर, आगे और बढ़ सकते हैं दाम भोजनालय और रेस्टोरेंट संचालकों की परेशानी सिर्फ बढ़ी हुई कीमतें नहीं हैं, बल्कि सिलेंडरों की किल्लत भी एक बड़ा मुद्दा है. संचालकों के मुताबिक, बाजार में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति सुचारू नहीं है. इस कारण कई बार उन्हें मजबूरी में ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं. उनका कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले दिनों में खाने के दाम और भी बढ़ाए जा सकते हैं. जनता ने समझी संचालकों की मजबूरी महंगाई की इस मार से आम उपभोक्ता परेशान जरूर हैं, लेकिन वे रेस्टोरेंट और भोजनालय संचालकों की मजबूरी को भी भली-भांति समझ रहे हैं. उपभोक्ताओं का कहना है कि जब सरकार की तरफ से ही कमर्शियल गैस महंगी मिल रही है, तो दुकानदार भी अपनी जेब से नुकसान सहकर कब तक सस्ता खाना खिलाएंगे.