पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाषा, पहचान और इतिहास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूचबिहार में दिए गए बयान के बाद TMC ने तीखा पलटवार किया है. मुद्दा है-‘इश्तेहार’, लेकिन इसके बहाने अब बंगाल की अस्मिता पर सीधी राजनीतिक लड़ाई छिड़ गई है. पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में इस बार मुद्दा विकास या रोजगार नहीं, बल्कि एक शब्द बन गया है-‘इश्तेहार’. यह शब्द अब सिर्फ घोषणापत्र का पर्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है. भाजपा ने इसे सीधे 1905 के बंगाल के विवादित इतिहास से जोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) को घेरना शुरू कर दिया है.
“PM मातृभाषा का सम्मान नहीं जानते”—कुणाल घोष का हमला
बेलेघाटा सीट से TMC उम्मीदवार कुणाल घोष ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री को मातृभाषा में बोलना नहीं आता. अगर उन्हें हिंदी में भाषण देना नहीं आता, तो उनकी बात का कोई महत्व नहीं है. वह बंगाल का अपमान कर रहे हैं. वह पूरी तरह बंगाली भाषा का अपमान कर रहे हैं. यह सही नहीं है. वह हद पार कर रहे हैं.”
PM मोदी का आरोप-“तुष्टिकरण के खेल में मिट रही बंगाल की पहचान”
कूचबिहार की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने TMC के घोषणापत्र पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा- “तुष्टिकरण के इस खेल में बंगाल की महान पहचान को धूमिल किया जा रहा है. आपने देखा होगा कि TMC ने अभी अपना घोषणापत्र जारी किया है, लेकिन उसे बंगाली भाषा में नाम नहीं दिया गया, बल्कि ‘इश्तेहार’ कहा जा रहा है. जरा सोचिए, कैसे बंगाल की पहचान बदली जा रही है.”
प्रधानमंत्री ने ‘इश्तेहार’ शब्द को इतिहास से जोड़ते हुए और भी गंभीर आरोप लगाए-“1905 में बंगाल में धार्मिक ताकतों ने ‘रेड इश्तेहार’ जारी किया था, जिसके बाद हिंदुओं का नरसंहार हुआ. TMC हमें उसी की याद दिलाना चाहती है… ऐसा घिनौना तुष्टिकरण का खेल, बंगाल के सम्मान और संस्कृति को मिटाने की साजिश है.” उन्होंने जनता से अपील की कि अब “बहुत हो चुका” और बंगाल को अपनी पहचान बचाने के लिए फैसला लेना होगा.
‘इश्तेहार’ पर सियासी संग्राम-विपक्ष का पलटवार
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने इसे “भ्रामक और गैर-जरूरी” बताया. TMC सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा- “यह पीएम मोदी का पूरी तरह बेतुका बयान है. ‘इश्तेहार’ सिर्फ ‘मेनिफेस्टो’ का बंगाली शब्द है. एक सामान्य शब्द जो कई भाषाओं में इस्तेमाल होता है. यह राजनीति नहीं है-यह बौद्धिक दिवालियापन और अज्ञानता का प्रदर्शन है. यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और भ्रमित करने वाला है.”
वहीं, कीर्ति आजाद ने भी इसी मुद्दे पर पीएम को घेरा और कहा- “मैं आपको ‘सपना सपना’ पेश करता हूं. पीएम मोदी का एक अशिक्षित और बेतुका बयान है. यह राजनीति नहीं है.यह बौद्धिक दिवालियापन और अज्ञानता का प्रदर्शन है. यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और भ्रमित करने वाला है.”
BJP का वार-“शब्द नहीं, संकेत है”
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि ‘इश्तेहार’ का इस्तेमाल यूं ही नहीं किया गया. उनके मुताबिक यह शब्द इतिहास की एक संवेदनशील घटना की याद दिलाता है. उन्होंने सवाल किया, “टीएमसी को साफ करना चाहिए कि उसने अपने घोषणा पत्र के लिए ‘इश्तेहार’ शब्द क्यों चुना? क्या यह बांग्ला का मूल शब्द है? यह तो फारसी से आया हुआ शब्द है, जिसका इस्तेमाल उर्दू में ज्यादा होता है.” BJP ने दावा किया कि 1905 में ढाका के नवाब के दौर में इसी शब्द का इस्तेमाल ऐसे पर्चों के लिए हुआ था, जिनका मकसद समाज को बांटना और एक समुदाय के खिलाफ माहौल बनाना था.
1905 का संदर्भ—इतिहास से वर्तमान तक
अगर इतिहास पर नजर डालें तो 1905 से 1907 के बीच का दौर बंगाल के लिए बेहद उथल-पुथल भरा था. लॉर्ड कर्जन के बंगाल विभाजन के बाद ‘स्वदेशी आंदोलन’ और ‘वंदे मातरम’ की लहर तेज हो चुकी थी. इसी समय ‘लाल इश्तेहार’ नाम का एक पर्चा सामने आया, जिसे इब्राहिम खान ने लिखा था. यह दस्तावेज ढाका के नवाब के प्रभाव वाले इलाकों में बांटा गया था. इतिहासकारों के मुताबिक, इस पर्चे का मकसद मुस्लिम समाज को स्वदेशी आंदोलन और हिंदुओं के खिलाफ लामबंद करना था. भाजपा अब इसी ऐतिहासिक संदर्भ को आज की राजनीति से जोड़ रही है.
भाषा बनाम राजनीति, चुनाव से पहले बढ़ी गर्मी
बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद महज शब्दों का नहीं रह गया है. ‘इश्तेहार’ को लेकर छिड़ी बहस अब भाषा, इतिहास और पहचान की राजनीति में बदल चुकी है. एक तरफ भाजपा इसे “तुष्टिकरण और सांस्कृतिक बदलाव” का मुद्दा बना रही है, तो दूसरी तरफ TMC इसे “बंगाली अस्मिता और भाषा के सम्मान” से जोड़कर पेश कर रही है.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.
Mallikarjun Kharge on PM Modi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर दिए बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिया गया विवादित बयान भारतीय राजनीति में एक नए टकराव का कारण बन गया है, खासकर जब देश Assembly Elections 2026 की तैयारी के दौर से गुजर रहा है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को दिए गए अपने बयान में खरगे ने पीएम मोदी को “आतंकवादी” तक कह दिया, जिससे सियासी माहौल अचानक गरमा गया। इस बयान के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद आपत्तिजनक, गैर-जिम्मेदाराना और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया हो, बल्कि उनके अनुसार, अब तक कांग्रेस द्वारा मोदी के खिलाफ 175 से अधिक अपमानजनक टिप्पणियां की जा चुकी हैं। यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में इस तरह के व्यक्तिगत हमले राजनीतिक विमर्श के स्तर को गिराने वाले माने जा रहे हैं। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस मुद्दों पर बहस करने के बजाय व्यक्तिगत आरोपों और अपशब्दों का सहारा ले रही है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पार्टी ने यह भी मांग की कि खरगे को अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस की तरफ से इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने इसे खरगे की व्यक्तिगत राय बताया, जबकि कुछ ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। कांग्रेस का तर्क है कि वह सरकार की नीतियों और फैसलों की आलोचना करती रही है और आगे भी करती रहेगी, लेकिन भाजपा इस आलोचना को व्यक्तिगत हमले के रूप में पेश कर रही है ताकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। पार्टी के प्रवक्ताओं ने यह भी कहा कि भाजपा बार-बार पुराने बयानों को गिनाकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं, जहां नेताओं द्वारा तीखी भाषा का इस्तेमाल कर अपने समर्थकों को सक्रिय करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है, क्योंकि आम मतदाता अब विकास, रोजगार, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। ऐसे में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप कई बार उल्टा असर भी डाल सकते हैं और जनता में राजनीतिक दलों के प्रति निराशा बढ़ा सकते हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में राजनीतिक संवाद का स्तर हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। समय-समय पर नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर तीखे हमले किए जाते रहे हैं, लेकिन जब यह भाषा मर्यादा की सीमा पार करती है, तो व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ता है। इस मामले में भी कई गैर-राजनीतिक हस्तियों और सामाजिक संगठनों ने संयमित भाषा के इस्तेमाल की अपील की है। उनका कहना है कि नेताओं को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि उनके बयान समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय राजनीति में स्वस्थ और मुद्दा-आधारित बहस की जगह कम होती जा रही है? जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल विपक्ष पर आरोप लगाता है कि वह केवल नकारात्मक राजनीति कर रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पा रही और हर असहमति को देशविरोध या व्यक्तिगत हमले के रूप में पेश करती है। इस टकराव के बीच असली मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मल्लिकार्जुन खरगे अपने बयान पर कायम रहते हैं या किसी तरह की सफाई या माफी सामने आती है। साथ ही, भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को चुनावी प्रचार में किस तरह इस्तेमाल करती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल इतना तय है कि इस बयान ने राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है और चुनावी माहौल को और अधिक तीखा बना दिया है।
केरल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Thrissur में एक भव्य रोड शो कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस रोड शो की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी साफ तौर पर देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने खुद इस रोड शो की झलकियां साझा करते हुए लोगों का आभार व्यक्त किया और इसे “अविस्मरणीय” बताया। उनके इस संदेश ने साफ कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। 🔸 रोड शो में उमड़ा जनसैलाब Thrissur की सड़कों पर प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए हजारों लोग जुटे। हर तरफ पार्टी के झंडे, पोस्टर और नारों की गूंज सुनाई दे रही थी। लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के बीच। रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री का काफिला धीरे-धीरे आगे बढ़ा, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों का अभिवादन कर सकें। लोग सड़क के दोनों ओर खड़े होकर उनका स्वागत कर रहे थे, वहीं कई जगहों पर फूलों की वर्षा भी की गई। यह रोड शो केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि BJP अब केरल जैसे राज्य में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। 🔸 सोशल मीडिया पर छाया रोड शो प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस रोड शो के वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास और यादगार रहा। इस पोस्ट के सामने आते ही लाखों लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया। ट्विटर (अब X) पर यह पोस्ट तेजी से ट्रेंड करने लगी। इससे साफ जाहिर होता है कि यह रोड शो सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काफी सफल रहा। 🔸 केरल में BJP की रणनीति केरल पारंपरिक रूप से Bharatiya Janata Party के लिए चुनौतीपूर्ण राज्य रहा है, जहां मुख्य मुकाबला वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच होता रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में BJP ने यहां अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री का यह रोड शो भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। Thrissur को खास तौर पर इसलिए चुना गया क्योंकि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। BJP का लक्ष्य इस बार केरल में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाना और राज्य की राजनीति में एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में उभरना है। 🔸 चुनावी संकेत और राजनीतिक संदेश इस रोड शो के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया कि BJP अब केवल उत्तर और पश्चिम भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत में भी अपनी जड़ें मजबूत कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बड़े रोड शो मतदाताओं पर सीधा प्रभाव डालते हैं और पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरते हैं। इसके अलावा, यह रोड शो विपक्षी दलों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि BJP अब केरल में भी गंभीरता से चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। 🔸 जनता की प्रतिक्रिया रोड शो के दौरान लोगों की भारी भीड़ यह संकेत देती है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है। खासकर युवा वर्ग में उनका क्रेज साफ नजर आया। कई लोगों ने इसे “ऐतिहासिक” बताया, वहीं कुछ ने इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा माना। हालांकि, इसमें कोई शक नहीं कि इस आयोजन ने केरल की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है। തൃശ്ശൂർ, നന്ദി! ഇന്നലെ നടന്ന റോഡ് ഷോ മറക്കാനാവാത്തതായിരുന്നു. ഇതാ പ്രധാന ഹൈലൈറ്റുകൾ… pic.twitter.com/DAiMyO1JLT — Narendra Modi (@narendramodi) March 30, 2026
चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (MCC) के सख्त निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के सख्त क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने बताया कि 5,173 से अधिक उड़न दस्ते और 5,200 से अधिक स्थिर निगरानी टीमों (एसएसटी) को राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि शिकायतों का समाधान 100 मिनट के भीतर किया जा सके। एक दिन पहले आयोग ने इन राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्र में विधानसभा चुनावों के लिए कार्यक्रम की घोषणा की थी। आयोग ने छह अन्य राज्यों में भी आचार संहिता लागू करने के निर्देश दिए हैं, जहां इसी अवधि के दौरान आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। एमसीसी चुनावी राज्यों में केंद्र सरकार पर भी लागू होगा होगा यानी वह इनसे संबंधित घोषणाएं या नीतिगत फैसले नहीं ले पाएगी। चुनाव एलान के साथ ही विधायक-सांसदों के निधि जारी करने पर रोक लग गई है। चुनाव आयोग ने केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिव और मुख्य सचिवों को लिखे पत्रों में चुनाव आचार संहिता के प्रविधानों को तुरंत प्रभाव से लागू करने को कहा है, जिसमें निजी और सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित होने से रोकना, सार्वजनिक स्थानों का दुरुपयोग रोकना, सरकारी वाहनों का दुरुपयोग रोकना, सरकारी खर्चे पर विज्ञापन देना रोकना और सरकारी वेबसाइटों से राजनीतिक पदाधिकारियों की तस्वीरें हटाने के निर्देश शामिल हैं। चुनाव एलान के साथ ही विधायक-सांसदों के निधि जारी करने पर रोक चुनावी राज्यों में 5,200 से अधिक स्थिर निगरानी टीमें तैनात की गई आयोग ने कहा कि जिला स्तर पर 24 घंटे नियंत्रण कक्ष को तुरंत सक्रिय किया जाए जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित किया जाए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि मंत्रीगण अपनी आधिकारिक यात्राओं को चुनाव प्रचार से न जोड़ें और सरकारी मशीनरी का उपयोग चुनाव संबंधी गतिविधियों के लिए न करें। आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाई। पार्टियों को सार्वजनिक बैठकों और जुलूसों के संबंध में पुलिस अधिकारियों को पूर्व में सूचित करना चाहिए ताकि यातायात प्रबंधन के लिए उचित व्यवस्था की जा सके। क्या है आदर्श आचार संहिता? आदर्श आचार संहिता के तहत वह नियम आते हैं जिसे चुनाव आयोग चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए गाइडलाइन के तौर पर जारी करता है। इसका उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के लिए बनाई गई एक नियमावली है जिसका पालन चुनाव के समय आवश्यक रूप से करना होता है। आचार संहिता चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद से लागू हो जाती है और चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने तक लागू रहती है। एमसीसी लागू होने के बाद क्या होता है? धर्म, जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जा सकती। विरोधी की आलोचना केवल नीतियों, प्रदर्शन और कार्यक्रमों पर केंद्रित होनी चाहिए न कि उसके निजी जीवन पर। सरकारी जनसंचार माध्यमों का उपयोग सत्ताधारी दल के पक्ष में पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए नहीं किया जा सकता। मतदान केंद्रों के पास प्रलोभन देना, डराना-धमकाना, प्रचार करना जैसी अवैध गतिविधियां प्रतिबंधित होती हैं। निजी भवनों के बाहर प्रदर्शन करना या प्रचार के लिए किसी और की संपत्ति का उपयोग करना प्रतिबंधित है। दलों को बैठकों और जुलूसों के बारे में अधिकारियों को सूचित करना होगा। पहले से तय मार्गों, समय और शुरू/समाप्ति बिंदुओं का पालन करना होगा। दलों को अन्य जुलूसों के साथ टकराव से बचना होगा। लाउडस्पीकर या सभाओं के लिए अनुमति प्राप्त करनी होगी। शांति बनाए रखने और यातायात प्रबंधन के लिए पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा। दलों और उम्मीदवारों को मतदान के दौरान चुनाव अधिकारियों के साथ सहयोग करना होगा। मतदान केंद्रों के पास कोई शराब या भीड़भाड़ नहीं होनी चाहिए। सरकारें प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी, धन या पदों का उपयोग नहीं कर सकतीं। किसी भी तरह के वित्तीय अनुदान, नई परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे से जुड़े वादों या तदर्थ नियुक्तियों की कोई घोषणा नहीं की जाएगी, जोकि मतदाताओं को प्रभावित करती हो।