LPG Booking: गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच सरकार ने खुलासा किया है कि इसकी ऑनलाइन बुकिंग्स बढ़ गई हैं. हालांकि ग्लोबली हालातों में फिलहाल खास सुधार नहीं है लेकिन फिर भी कहीं- कहीं सुधार की स्थिति है. हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग में अचानक वृद्धि देखी गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव। इन दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार न होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर दिखाई दे रहा है। भारत सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी को लगभग 99 प्रतिशत तक सुनिश्चित कर दिया गया है, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। इसके लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखें। इस दौरान डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) आधारित डिलीवरी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। DAC एक सुरक्षा प्रणाली है जिसमें ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक कोड भेजा जाता है, जिसे डिलीवरी के समय सत्यापित किया जाता है। इससे फर्जी डिलीवरी या गलत वितरण की संभावना कम हो जाती है। सरकार के मुताबिक, DAC आधारित डिलीवरी अब लगभग 92 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो पारदर्शिता और दक्षता दोनों को दर्शाता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी बताया है कि कई एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स अब रविवार को भी काम कर रहे हैं, ताकि बढ़ती मांग को समय पर पूरा किया जा सके। यह कदम खासतौर पर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रभावी साबित हो रहा है, जहां मांग में तेजी से वृद्धि देखी गई है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की स्थिति पर बात करें तो सरकार ने इसे भी संतुलित बनाए रखने का प्रयास किया है। मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी का आवंटन अब प्री-क्राइसिस स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसमें 10 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन सुधारात्मक कदम के रूप में शामिल किया गया है। इससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो एलपीजी पर निर्भर हैं। 23 मार्च 2026 से अब तक 5 किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री 18.45 लाख यूनिट से अधिक हो चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि छोटे और अस्थायी उपभोक्ताओं के बीच भी गैस की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा, पिछले पांच दिनों में औसतन 7,000 मीट्रिक टन से अधिक कमर्शियल एलपीजी की दैनिक बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। इस पूरी स्थिति की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह समिति विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल एलपीजी वितरण की योजना बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों की मांग में भी वृद्धि देखी गई है। मार्च 2026 से अब तक 4.93 लाख से अधिक PNG कनेक्शनों का गैसीकरण किया जा चुका है। वहीं, 5.51 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने नए PNG कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। यह दर्शाता है कि लोग वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, MYPNGD.in वेबसाइट के माध्यम से 19 अप्रैल तक लगभग 39,200 उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। यह बदलाव शहरी क्षेत्रों में अधिक देखने को मिल रहा है, जहां पाइप्ड गैस की सुविधा आसानी से उपलब्ध है और इसे अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है। कुल मिलाकर, यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक घटनाओं का सीधा प्रभाव भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश पर पड़ता है। हालांकि, सरकार द्वारा उठाए गए त्वरित और रणनीतिक कदमों ने स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित रखा है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना, डिलीवरी सिस्टम को मजबूत करना और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना—ये सभी कदम आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव जारी रहता है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों और सप्लाई पर और प्रभाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में सरकार और उपभोक्ताओं दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
Nepal Salaries Twice a Month: नेपाल सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों के पास हर 15 दिन में पैसा आएगा, जिससे उन्हें महीने के अंत में होने वाली पैसों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा. नेपाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करते हुए पारंपरिक “महीने के अंत में सैलरी” देने की व्यवस्था को खत्म कर “पाक्षिक भुगतान प्रणाली” लागू करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब कर्मचारियों को हर 15 दिन में आधी-आधी सैलरी दी जाएगी, यानी महीने में दो बार वेतन मिलेगा। यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। दशकों से चली आ रही पुरानी प्रणाली में कर्मचारियों को महीने के अंत तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे अक्सर महीने के आखिरी दिनों में आर्थिक दबाव बढ़ जाता था। कई कर्मचारियों को जरूरी खर्च पूरे करने के लिए उधार लेना पड़ता था या अपनी बचत तोड़नी पड़ती थी। नई प्रणाली इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है क्योंकि अब हर दो सप्ताह में नियमित रूप से पैसे उपलब्ध रहेंगे। नेपाल के वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) को बेहतर बनाना और बाजार में धन के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करना है। जब लोगों के पास नियमित अंतराल पर पैसा आता रहेगा, तो वे अपनी दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे। इससे उनकी जीवनशैली में स्थिरता आएगी और मानसिक तनाव भी कम होगा। खासकर मध्यम वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह कदम राहत भरा साबित हो सकता है, क्योंकि उनके खर्च अक्सर महीने के बीच या अंत में अधिक बढ़ जाते हैं। हर 15 दिन में सैलरी मिलने से वे अपने खर्चों को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएंगे और अनावश्यक कर्ज लेने की जरूरत भी कम होगी। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आमतौर पर देखा जाता है कि महीने की शुरुआत में बाजार में ज्यादा भीड़ और खरीदारी होती है, जबकि महीने के अंत में बाजार में मंदी आ जाती है। इस नई व्यवस्था से यह असंतुलन खत्म हो सकता है, क्योंकि अब पूरे महीने बाजार में समान रूप से मांग बनी रहेगी। इससे छोटे व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और स्थानीय व्यवसायों को फायदा होगा। नियमित अंतराल पर उपभोक्ताओं के पास पैसा होने से बिक्री में निरंतरता बनी रहेगी, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी। कर्मचारियों के दृष्टिकोण से देखें तो यह प्रणाली उनके बजट प्रबंधन को काफी आसान बना सकती है। उदाहरण के लिए, स्कूल फीस, बिजली बिल, किराया, राशन और अन्य जरूरी खर्चों को अब दो हिस्सों में बांटकर आसानी से संभाला जा सकता है। पहले जहां एक साथ बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती थी, अब वह बोझ दो भागों में विभाजित हो जाएगा। इससे वित्तीय योजना अधिक व्यवस्थित होगी और बचत की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके अलावा, अचानक आने वाले खर्चों से निपटना भी आसान हो जाएगा क्योंकि हर 15 दिन में आय का स्रोत उपलब्ध रहेगा। यह मॉडल पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों जैसे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही इस तरह की वेतन प्रणाली अपनाई जाती है। वहां इसे “बाय-वीकली पेमेंट सिस्टम” कहा जाता है, जो कर्मचारियों के लिए अधिक सुविधाजनक माना जाता है। नेपाल द्वारा इस मॉडल को अपनाना यह दर्शाता है कि वह अपने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में कदम उठा रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो दक्षिण एशिया के अन्य देश भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस नई प्रणाली के कुछ संभावित चुनौतियां भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, सरकारी विभागों को अपने अकाउंटिंग और भुगतान सिस्टम में बदलाव करना होगा, जिससे शुरुआती चरण में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों को भी अपने खर्च और बचत की आदतों में बदलाव लाना पड़ेगा, क्योंकि अब उन्हें महीने भर की योजना दो हिस्सों में बांटकर बनानी होगी। लेकिन अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो इसके फायदे चुनौतियों से कहीं ज्यादा हो सकते हैं। सरकार इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असुविधा से बचा जा सके। शुरुआती दौर में कुछ विभागों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद धीरे-धीरे सभी सरकारी कर्मचारियों तक इसका विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों से फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके। कुल मिलाकर, नेपाल सरकार का यह कदम एक दूरदर्शी और प्रगतिशील निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा। नियमित आय के प्रवाह से जहां एक ओर व्यक्तिगत वित्तीय स्थिरता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बेहतर होगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो यह अन्य देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है और वे भी अपने वेतन भुगतान सिस्टम में सुधार करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
Inflation in India: पश्चिमी एशिया तनाव और ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी से वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ी, जिससे ऊर्जा संकट और भारत समेत दुनिया में महंगाई का खतरा गहराया Iran War Impact on India: ईरान संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर खतरा, पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है और इसका असर अब भारत तक साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने वैश्विक बाजारों में बेचैनी पैदा कर दी है। खास तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिए गए संकेतों ने ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट गहराता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक सब कुछ महंगा हो सकता है। ऐसे में आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर किसी भी कारण से यह मार्ग बंद होता है या यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की वैश्विक सप्लाई बाधित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, उन पर इसका असर ज्यादा होगा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। देश में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। अगर सप्लाई बाधित होती है तो भारत को महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और एविएशन फ्यूल की कीमतों पर पड़ेगा। तेल महंगा होने का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से हर सामान की कीमत प्रभावित होगी। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी इस संभावित संकट पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो यह 1970 के दशक के तेल संकट जैसा बड़ा झटका साबित हो सकता है। उस दौर में तेल संकट के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं हिल गई थीं। अब अगर वैसा हालात बनते हैं तो भारत, चीन और रूस जैसे बड़े आयातक देशों को सबसे ज्यादा मुश्किल झेलनी पड़ सकती है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। ट्रक, बस, टैक्सी और मालवाहक वाहनों की लागत बढ़ती है। इससे फल-सब्जी, दूध, अनाज, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरत के सामान की ढुलाई महंगी हो जाती है। जब ढुलाई महंगी होती है तो दुकानों तक पहुंचने वाले सामान की कीमतें बढ़ जाती हैं। इसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है। अगर तेल संकट गहराता है तो सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा। पहले से महंगाई झेल रहे परिवारों के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल हो सकता है। स्कूल फीस, बिजली बिल, किराया, परिवहन खर्च और खाने-पीने का खर्च एक साथ बढ़ सकता है। यही वजह है कि वैश्विक तनाव की खबरें सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ जाती हैं। सीटीआई के महासचिव रमेश आहूजा और गुरमीत अरोड़ा के अनुसार भारत में मार्च के दौरान खुदरा महंगाई दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। हालांकि यह आंकड़ा नियंत्रण में माना गया, लेकिन तेल संकट की स्थिति में इसमें तेजी से उछाल आ सकता है। पान और तंबाकू, फूड और बेवरेजेज, कपड़े, हाउसिंग, बिजली-पानी और रेस्टोरेंट सेवाओं जैसी श्रेणियों में पहले से कीमतें बढ़ रही हैं। अगर ईंधन महंगा होता है तो इन सभी क्षेत्रों में और तेजी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज मार्ग बंद होता है तो भारत में महंगाई दर 4 प्रतिशत के पार जा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक के लिए भी ऐसी स्थिति चुनौतीपूर्ण होगी क्योंकि महंगाई बढ़ने पर ब्याज दरों को लेकर फैसले मुश्किल हो जाते हैं। दूसरी ओर सरकार पर टैक्स घटाने या सब्सिडी देने का दबाव बढ़ सकता है ताकि जनता को राहत दी जा सके। भारत सरकार के पास रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल आपातकालीन हालात में किया जा सकता है। इसके अलावा भारत रूस, अमेरिका और अन्य देशों से भी तेल खरीद बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन अगर वैश्विक संकट लंबा चलता है तो वैकल्पिक सप्लाई भी महंगी पड़ सकती है। इसलिए संकट का असर पूरी तरह टालना आसान नहीं होगा। इस तनाव का असर शेयर बाजार और रुपये पर भी पड़ सकता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है तो भारत का आयात बिल बढ़ता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव बन सकता है। रुपया कमजोर होने से आयातित सामान और महंगा हो जाता है। यानी असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में महसूस होता है। आने वाले दिनों में भारत की नजर पश्चिम एशिया के हालात, अमेरिकी नीति और समुद्री व्यापार मार्गों की स्थिति पर रहेगी। अगर तनाव कम होता है तो राहत मिल सकती है, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो आम आदमी को महंगाई के नए दौर के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। फिलहाल यही कहा जा सकता है कि ईरान संकट सिर्फ युद्ध की खबर नहीं है, बल्कि यह भारत की जेब, बाजार और अर्थव्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
Gold Silver Rate Today, 10 April 2026: सोने-चांदी की कीमतों में शुक्रवार को गिरावट देखने को मिल रही है. MCX पर गोल्ड और सिल्वर दोनों कमजोर रहे और बाजार में हल्की नरमी का रुख बना हुआ है. Gold Silver Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में शुक्रवार, 10 अप्रैल को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. कारोबार के शुरूआत में सोने-चांदी लुढ़क गए थे. खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 650 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था. एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,52,685 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,53,434 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था. सुबह करीब 9:55 बजे, गोल्ड वायदा 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,52,783 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,52,985 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपके शहर में इन बहुमूल्य धातुओं को कीमत क्या चल रही है. चांदी की कीमत (Silver Price Today) एमसीएक्स पर 5 मई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 0.53 प्रतिशत या 1,300 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,42,515 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,42,954 रुपये था. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,600 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 26,000 रुपये देने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,650 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) (Gold Price in Delhi) 24 कैरेट - 1,51,620 रुपए 22 कैरेट - 1,38,990 रुपए 18 कैरेट - 1,13,750 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) (Gold Price in Mumbai) 24 कैरेट - 1,53,000 रुपए 22 कैरेट - 1,40,250 रुपए 18 कैरेट - 1,14,750 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,52,720 रुपए 22 कैरेट - 1,39,990 रुपए 18 कैरेट - 1,16,490 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,000 रुपए 22 कैरेट - 1,40,250 रुपए 18 कैरेट - 1,14,750 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,050 रुपए 22 कैरेट - 1,40,300 रुपए 18 कैरेट - 1,14,800 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,150 रुपए 22 कैरेट - 1,40,400 रुपए 18 कैरेट - 1,14,900 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,050 रुपए 22 कैरेट - 1,40,300 रुपए 18 कैरेट - 1,14,800 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,000 रुपए 22 कैरेट - 1,40,250 रुपए 18 कैरेट - 1,14,750 रुपए
Air India Fuel Surcharge: Air India Group ने 8 अप्रैल 2026 से Fuel Surcharge में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत, पुराने Flat Surcharge को हटाकर Distance के हिसाब से नया Slab System लागू किया है. Air India Fuel Surcharge: ग्लोबल लेवल पर जेट फ्यूल की कीमतें करीब 100 परसेंट तक उछलने के बाद एयर इंडिया ने भी अब Fuel Surcharge में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत, कंपनी 8 अप्रैल 2026 से पुराने Flat Surcharge को हटाकर Distance के हिसाब से नया Slab System लागू करने जा रही है. घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह के रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज में बदलाव करने की कंपनी की इस घोषणा से आने वाले समय में एयर इंडिया की उड़ानों का किराया अब और महंगा होने जा रहा है. यह बदलाव अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण ग्लोबल जेट फ्यूल की कीमतों में आई भारी तेज़ी की वजह से किया गया है. टाटा ग्रुप के मालिकाना हक वाली इस एयरलाइन ने बताया कि फ्यूल सरचार्ज का यह नया ढांचा 8 अप्रैल से घरेलू रूट्स पर और 10 अप्रैल से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर लागू होगा. यह कदम एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है, जिससे दुनिया भर की एयरलाइंस के लिए ऑपरेशनल लागत काफी बढ़ गई है. घरेलू उड़ानों पर असर (8 अप्रैल से) घरेलू यात्रा के लिए एयर इंडिया ने एक समान फ्यूल सरचार्ज से हटकर दूरी-आधारित मॉडल अपना लिया है. छोटी दूरी के रूट (0–500 km) पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अब प्रति सेक्टर 299 रुपये अतिरिक्त देने होंगे, जबकि 2,000 km से ज्यादा लंबी दूरी के रूट पर यात्रियों से 899 रुपये तक लिए जाएंगे. यह बदलाव सरकार के उस फैसले के अनुरूप है, जिसमें घरेलू ATF की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 परसेंट तक सीमित किया गया है, जिससे एयरलाइंस और यात्रियों को कुछ हद तक राहत मिली है. हालांकि, इस सीमित बढ़ोतरी से भी ज्यादातर सेक्टरों में टिकट की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है. अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर असर (10 अप्रैल से) उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया- इन सबसे लंबे रूट्स पर प्रति सेक्टर (एक तरफा) किराया 280 डॉलर (लगभग 23400 रुपये) का सरचार्ज लगेगा. यानी कि आने-जाने की टिकट पर करीब 47000 रुपये का एक्स्ट्रा खर्च आएगा. यूरोप और यूके- प्रति सेक्टर 205 डॉलर यानी कि लगभग 17000 रुपये का सरचार्ज. अफ्रीका और मध्य एशिया- प्रति सेक्टर 130 डॉलर यानी कि लगभग 10800 रुपये का सरचार्ज. मिडिल ईस्ट- प्रति सेक्टर 50 डॉलर यानी कि लगभग 4200 रुपये का सरचार्ज. दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन- प्रति सेक्टर 100 डॉलर यानी कि लगभग 8300 रुपये का सरचार्ज. हालांकि, सिंगापुर के लिए यह 60 डॉलर प्रति सेक्टर है. SAARC देश (नेपाल, श्रीलंका)- इन देशों के लिए प्रति सेक्टर 24 डॉलर का सरचार्ज. यानी कि लगभग 2000 रुपये का अतिरिक्त खर्च. पहले से बुक Tickets पर क्या होगा? Air India ने साफ कह दिया है कि जो Tickets इन तारीखों से पहले Issue हो चुके हैं उन पर नया Surcharge नहीं लगेगा जब तक यात्री Date या Itinerary में कोई बदलाव न करे. एयरलाइन ने यह भी कहा है कि हालात के मुताबिक Surcharge की समीक्षा होती रहेगी.
देश में संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के अनुसार, भारत में 1,688 अमीर लोगों के पास देश की 50% GDP के बराबर दौलत है. भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता को लेकर जारी ‘Wealth Tracker India 2026’ रिपोर्ट ने एक बार फिर देश की आर्थिक संरचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Centre for Financial Accountability द्वारा 1 अप्रैल 2026 को ‘Tax the Top’ अभियान के तहत जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की संपत्ति का बड़ा हिस्सा बेहद कम लोगों के पास सिमटता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सिर्फ 1,688 अमीर लोगों के पास करीब 166 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो देश के कुल GDP का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बनती है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। क्या कहती है रिपोर्ट? रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि भारत में संपत्ति का वितरण लगातार असंतुलित होता जा रहा है। इस स्थिति की तुलना औपनिवेशिक काल की असमानताओं से की गई है, जब देश की आर्थिक संपत्ति सीमित वर्ग के हाथों में केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच देश के ऊपरी वर्ग की संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जबकि निचले तबके की आर्थिक स्थिति लगभग स्थिर बनी रही। यह ट्रेंड इस बात की ओर इशारा करता है कि आर्थिक विकास का फायदा समान रूप से वितरित नहीं हो रहा। आंकड़ों से समझिए असमानता का स्तर रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं: देश के टॉप 1% लोगों के पास 40% से ज्यादा संपत्ति है। वहीं निचले 50% लोग सिर्फ 15% आय पर निर्भर हैं। 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति रखने वालों की संख्या में 77% की वृद्धि दर्ज की गई है। इन अमीरों की कुल संपत्ति 31 लाख करोड़ से बढ़कर 88 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो करीब 227% की बढ़ोतरी है। ये आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक पिरामिड के शीर्ष पर मौजूद लोगों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है, जबकि निचले तबके के लिए हालात लगभग जस के तस बने हुए हैं। अमीर और अमीर हो रहे हैं रिपोर्ट में देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया है। मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, सावित्री जिंदल, सुनील मित्तल और शिव नादर जैसे बड़े नामों की संपत्ति में 2019 से 2025 के बीच भारी उछाल दर्ज किया गया। इन पांच बड़े परिवारों की कुल संपत्ति 6.68 लाख करोड़ से बढ़कर 26.54 लाख करोड़ रुपये हो गई। मुकेश अंबानी की संपत्ति में करीब 153% वृद्धि हुई। गौतम अडानी की दौलत में 625% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में वेल्थ क्रिएशन तेजी से हो रहा है, लेकिन उसका वितरण असमान है। समाधान क्या सुझाती है रिपोर्ट? रिपोर्ट में इस असमानता को कम करने के लिए कुछ ठोस सुझाव भी दिए गए हैं। सबसे प्रमुख सुझाव है—अमीरों पर प्रोग्रेसिव वेल्थ टैक्स लागू करना। Centre for Financial Accountability के अनुसार: देश के 1,688 सबसे अमीर परिवारों पर 2% से 6% तक वेल्थ टैक्स लगाया जा सकता है। इसके साथ इनहेरिटेंस (विरासत) टैक्स भी लागू करने की सिफारिश की गई है। अगर यह दोनों टैक्स लागू किए जाते हैं, तो सरकार को हर साल करीब 10.63 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है। इस पैसे का क्या होगा उपयोग? रिपोर्ट के मुताबिक, इस अतिरिक्त राजस्व का इस्तेमाल सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है—जैसे: स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार शिक्षा प्रणाली में सुधार गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सब्सिडी रोजगार सृजन कार्यक्रम इससे समाज के कमजोर वर्गों तक ज्यादा संसाधन पहुंचेंगे और अमीर-गरीब के बीच की खाई को कम करने में मदद मिलेगी। क्यों बढ़ रही है असमानता? रिपोर्ट अप्रत्यक्ष रूप से कुछ कारणों की ओर भी इशारा करती है: पूंजी बाजार में तेजी, जिससे बड़े निवेशकों को ज्यादा फायदा संपत्ति (रियल एस्टेट, शेयर) में बढ़ोतरी टैक्स स्ट्रक्चर में असमानता सामाजिक सुरक्षा तंत्र की सीमाएं इन सभी कारकों ने मिलकर अमीरों को और ज्यादा अमीर बनने में मदद की है। क्या है इसका सामाजिक असर? आर्थिक असमानता सिर्फ पैसों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका समाज पर गहरा असर पड़ता है: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच सामाजिक असंतोष में वृद्धि आर्थिक अवसरों में कमी गरीबी का स्थायीकरण अगर यह असमानता लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह देश के समग्र विकास को प्रभावित कर सकती है।
अक्सर मध्यम वर्ग के लोग सोचते हैं कि आर्थिक संकट अचानक आता है, लेकिन ऐसा नहीं है. दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे के अनुसार, यह धीरे-धीरे बनने वाली स्थिति होती है. जो छोटी-छोटी गलतियों से शुरू होती है. 📰 वॉरेन बफे की सलाह: इन 5 वित्तीय गलतियों से बचें, वरना बन सकता है आर्थिक बोझ दुनिया के दिग्गज निवेशक Warren Buffett हमेशा सादगी और समझदारी से पैसे संभालने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि अमीर बनने के लिए ज्यादा कमाना ही जरूरी नहीं, बल्कि सही वित्तीय फैसले लेना ज्यादा अहम होता है। आइए जानते हैं वे कौन-सी आम गलतियां हैं, जिनसे बचकर आप अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। 💳 क्रेडिट कार्ड का बढ़ता ब्याज आजकल लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका भारी ब्याज आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है। Warren Buffett के अनुसार, 18% या उससे अधिक ब्याज देना मतलब अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खोना है। वे सलाह देते हैं कि सबसे पहले महंगे कर्ज को खत्म करना चाहिए। जितनी जल्दी हो सके क्रेडिट कार्ड के कर्ज से बाहर निकलना आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद होता है। ⏳ जल्दी अमीर बनने की जल्दबाजी कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह कई बार लोगों को गलत फैसले लेने पर मजबूर कर देती है। बफे कहते हैं कि निवेश एक लंबी प्रक्रिया है—जैसे पेड़ को बड़ा होने में समय लगता है। उनका मानना है कि पहले निवेश करें और फिर खर्च करें, न कि उल्टा। यही आदत भविष्य में बड़ा धन बनाने में मदद करती है। 🏠 जरूरत से बड़ा घर लेना कई लोग अपनी क्षमता से ज्यादा बड़ा घर खरीदने के लिए भारी लोन ले लेते हैं। इससे उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा EMI चुकाने में चला जाता है। Warren Buffett के अनुसार, घर जरूरत के हिसाब से होना चाहिए, न कि दिखावे के लिए। ज्यादा लोन लेने से बचत और निवेश के मौके कम हो जाते हैं। 🎰 किस्मत पर पैसा लगाना लॉटरी और जुए जैसे विकल्प लोगों को जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाते हैं, लेकिन असल में ये आर्थिक नुकसान का कारण बनते हैं। बफे हमेशा सलाह देते हैं कि इन चीजों से दूरी बनाकर रखें और अपने पैसे को समझदारी से निवेश करें। 🚗 स्टेटस के लिए नई कार खरीदना मिडिल क्लास में अक्सर लोग स्टेटस के लिए नई कार खरीद लेते हैं, वो भी लोन लेकर। इससे लंबे समय तक EMI का बोझ बना रहता है, जबकि कार की कीमत समय के साथ घटती जाती है। दिलचस्प बात यह है कि Warren Buffett खुद कई सालों तक पुरानी कार चलाते रहे हैं। उनका मानना है कि दिखावे के लिए खर्च करना समझदारी नहीं है।
UPI Record: मार्च 2026 में UPI ने 22.64 अरब लेन-देन के साथ 29.53 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बनाया. त्योहारों और वित्तीय वर्ष के समापन के कारण दैनिक औसत लेन-देन 73 करोड़ रहा. UPI Record: त्योहारों और फाइनेंशियल ईयर के समापन के चलते, लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के ज़रिए होने वाले लेन-देन ने मार्च 2026 में एक नया रिकॉर्ड बनाया. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने लेन-देन का कुल मूल्य 29.53 लाख करोड़ रुपये और संख्या (वॉल्यूम) 22.64 अरब तक पहुंच गई. मार्च 2026 का यह रिकॉर्ड इसलिए खास है क्योंकि UPI नेटवर्क पर औसतन 73 करोड़ दैनिक लेन-देन हुए, जो फरवरी 2026 में दर्ज 72.8 करोड़ के दैनिक औसत से ज्यादा हैं. इसी महीने में होली और ईद जैसे बड़े त्योहार भी मनाए गए थे. NPCI ने बताया कि मार्च में लेन-देन का कुल मूल्य 29.53 लाख करोड़ रुपये था, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 24.77 लाख करोड़ रुपये था. इस तरह, सालाना आधार पर लेन-देन में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. महीने-दर-महीने तुलना में फरवरी 2026 में यह आंकड़ा 26.84 लाख करोड़ रुपये था, जिससे मार्च में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. UPI का मार्च रिकॉर्ड: 22.64 अरब लेन-देन वॉल्यूम के आधार पर भी मार्च ने नया रिकॉर्ड बनाया. इस महीने कुल 22.64 अरब लेन-देन हुए, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 18.3 अरब था. फरवरी में लेन-देन की संख्या 20.39 अरब दर्ज की गई थी. PayNearby के MD और CEO आनंद कुमार बजाज ने कहा, "भारत में डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में लगातार हो रही वृद्धि यह दर्शाती है कि रियल-टाइम भुगतान प्रणालियां लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं. मार्च 2026 में 22.64 अरब लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.53 लाख करोड़ रुपये रहा. यह साबित करता है कि UPI देश की सबसे भरोसेमंद और सुविधाजनक भुगतान प्रणालियों में से एक है." डिजिटल भुगतान का है भरोसेमंद माध्यम आज भारत में होने वाले कुल डिजिटल लेन-देन में UPI की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है. इसका प्रभाव देश की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दे रहा है. वैश्विक स्तर पर लगभग 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान UPI के माध्यम से होते हैं. UPI पहले से ही सात देशों में सक्रिय है. UAE, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस. फ्रांस में इसका प्रवेश यूरोप में UPI का पहला कदम माना जा रहा है, जिससे वहां रहने या यात्रा करने वाले भारतीय आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं. UPI का संचालन NPCI, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की पहल से होता है. यह प्रणाली लोगों और व्यापारियों के बीच रियल-टाइम भुगतान की सुविधा प्रदान करती है, जिससे दैनिक लेन-देन और खरीदारी बहुत आसान हो गई है.
वैश्विक उथल-पुथल के बीच मार्च 2026 में भारतीय रुपया ऐतिहासिक रूप से कमजोर हुआ है, जबकि अफगानी अफगानी ने मजबूती दिखाई है. जानें रुपए में गिरावट के क्या कारण हैं. पढ़ें ये रिपोर्ट. India and Afghanistan Currency News: वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और ईरान-अमेरिका वॉर के बीच इस साल मार्च का महीना करेंसी के मामने में काफी हलचल भरा रहा है. भारतीय करेंसी यानी रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को पार कर 95.22 पर आ गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि मार्च महीने में अफगान अफगानी (AFN) ने भारतीय रुपए (INR) के मुकाबले अधिक मजबूती दिखाई है. एक मार्च से 31 मार्च 2026 के बीच दोनों करेंसी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चौंकाने वाली बात देखने को मिलती है. पहले बात भारतीय रुपया की ईरान युद्ध के चलते मार्च के महीने में रुपया भारी दबाव में रहा. 30 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में रुपये में 9.88% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 14 सालों में इसकी सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है. मार्च के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को भी पार कर गया है. अब बात अफगानी मुद्रा की ध्यान देने वाली बात है कि रुपए के तुलना में अफगानिस्तान की मुद्रा ने मजबूती दर्ज की है. अफगान सेंट्रल बैंक के अनुसार, 20 मार्च 2026 को समाप्त हुए उनके कैलेंडर वर्ष में अफगानी डॉलर के मुकाबले 9.93% मजबूत हुई है, हालांकि मार्च के पहले हफ्ते में इसमें मामूली 4.2% की गिरावट देखी गई थी, लेकिन महीने के अंत तक यह रुपए की तुलना में अफगानी करेंसी स्थिर रही. ताजा स्थिति क्या है? मार्च 2026 के आखिर में एक्सचेंज रेट लगभग इस तरह है- 1 भारतीय रुपया (INR) ≈ 0.67 अफगान अफगानी (AFN). इसका मतलब है कि मूल्य के मामले में 1 रुपया 1 अफगानी से छोटा है. हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अफगानिस्तान से कहीं बड़ी है, लेकिन करेंसी की 'यूनिट वैल्यू' और हालिया 'मजबूती की दर' के मामले में अफगानी फिलहाल बेहतर प्रदर्शन कर रही है. भारतीय रुपया कमजोर होने के कारण क्या है? विदेशी फंड की निकासी- विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है. कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण मार्च में कच्चे तेल की कीमतें $105 - $115 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है. अमेरिकी टैरिफ: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों यानी टैरिफ ने भी रुपए पर दबाव बनाया है. व्यापार घाटा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ऊर्जा व्यापार प्रभावित हुआ, जिससे भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर असर पड़ा है. अफगानी करेंसी मजबूत होने के कारण क्या हैं? सख्त मौद्रिक नीतियां: अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक ने बाजार में डॉलर की निरंतर आपूर्ति की और मुद्रा के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया है. डिजिटल बैंकिंग और नए नोट: पुराने नोटों को चलन से बाहर करने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से मुद्रा की मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहा है. सीमित वैश्विक व्यापार जुड़ाव: वैश्विक वित्तीय बाजारों से कम जुड़ाव होने के कारण, अफगानिस्तान वैश्विक मंदी या डॉलर की मजबूती से उस तरह प्रभावित नहीं हुआ जैसे भारत हुआ. आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 में भारतीय रुपया कमजोर हुआ है, जबकि अफगान अफगानी ने अपनी मजबूती बरकरार रखी है. जहां भारत को बाहरी झटकों (तेल और भू-राजनीति) का सामना करना पड़ा, वहीं अफगानिस्तान ने आंतरिक नियंत्रण और सीमित बाजार जोखिमों के कारण अपनी करेंसी को गिरने से बचाए रखा.
LPG, CNG, PNG rates today: देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. LPG, CNG, PNG rates today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई पर पड़ा है. जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, देश में LPG, CNG और PNG की बढ़ती कीमतों और उनकी उपलब्धता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. भारत अपनी जरूरत का 40 परसेंट से ज्यादा क्रूड ऑयल और LPG का 90 परसेंट सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से आयात करता है. हालांकि, इस निर्भरता के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि LPG की सप्लाई स्थिर बनी हुई है और डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर किसी भी तरह की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं है. 31 मार्च को 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 913 रुपये कोलकाता 939 रुपये मुंबई 912.50 रुपये चेन्नई 928.50 रुपये बेगलुरु 915.50 रुपये हैदराबाद 965 रुपये 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आज कीमत शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 1,884.50 रुपये कोलकाता 1,988.50 मुंबई 1,836.50 चेन्नई 2,043.50 बेंगलुरु 1,958 हैदराबाद 2,105.50 आज 31 मार्च को CNG की कीमत शहर कीमत (प्रति किलो) दिल्ली 77.09 रुपये कोलकाता 93.50 रुपये मुंबई 80.50 रुपये चेन्नई 91.50 रुपये बेंगलुरु 88.95 रुपये हैदराबाद 97 रुपये देश के प्रमुख शहरों में आज PNG की कीमत शहर कीमत (प्रति SCM) दिल्ली 47.89 रुपये कोलकाता 50 रुपये मुंबई 50 रुपये चेन्नई 50 रुपये बेंगलुरु 52 रुपये हैदराबाद 51 रुपये सरकार की कोशिश इस बीच, केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के दबाव के बीच घरों में खाना पकाने और रोशनी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन का एड-हॉक (तदर्थ) आवंटन करने की अनुमति दे दी है. इन क्षेत्रों में वे इलाके भी शामिल हैं जिन्हें पहले 'केरोसिन-मुक्त' घोषित किया गया था. हालांकि, उपलब्ध LPG की आपूर्ति में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन सीमित स्टॉक के कारण वितरण केंद्रों पर लोग घबराकर ज़्यादा खरीदारी करने लगे हैं और लंबी कतारें लग गई हैं. LPG पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने पूरे देश में—उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित जिन्हें पहले केरोसिन-मुक्त घोषित किया गया था—खाना पकाने और रोशनी के लिए केरोसिन के अस्थायी उपयोग की अनुमति दे दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 मार्च को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें 'पेट्रोलियम अधिनियम, 1934' और 'पेट्रोलियम नियम, 2002' के तहत अस्थायी छूट की अनुमति दी गई है. इससे निर्दिष्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PDS केरोसिन के वितरण में आसानी होगी. साथ ही, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और समय पर आपूर्ति के लिए भंडारण, सुरक्षा और लाइसेंसिंग से जुड़ी शर्तें भी लागू होंगी.
Gold-Silver Rate Today: देश में आज सोने की कीमत में मामूली गिरावट देखी जा रही है. आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,48, 080 रुपये है. इसमें कल के मुकाबले 10 रुपये की मामूली गिरावट आई है. Gold-Silver Rate Today: भारत में आज सोने की कीमत में मामूली गिरावट देखी जा रही है. 24 कैरेट से लेकर 18 कैरेट तक सभी सेगमेंट्स में कीमतों में कुछ कमी आई है. कल यानी कि रविवार, 29 मार्च के 1,48, 090 रुपये के मुकाबले आज सोने की कीमत 1,48, 080 रुपये प्रति 10 ग्राम है. यानी कि इसमें 10 रुपये की मामूली गिरावट आई है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत भी प्रति 10 ग्राम है कल के 1,35,750 रुपये के मुकाबले आज 1,35,740 रुपये है. आज सोने का ताजा भाव शहर 24 कैरेट गोल्ड (प्रति 10 ग्राम) 22 कैरेट गोल्ड (प्रति 10 ग्राम) मुंबई 1,48, 080 1,35,740 दिल्ली 1,48, 210 1,35,890 चेन्नई 1,49, 010 1,36,590 कोलकाता 1,48, 080 1,35,740 बेंगलुरु 1,48, 080 1,35,740 हैदराबाद 1,48, 080 1,35,740 अहमदाबाद 1,48, 110 1,35,790 जयपुर 1,48, 210 1,35,890 पुणे 1,48, 080 1,35,740 इससे साफ है कि चेन्नई में सोने के दाम दूसरे महानगरों के मुकाबले कुछ ज्यादा है. वहीं, दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों में कीमतें एक ही लेवल पर बनी हुई हैं. सोने की कीमतें स्थानीय कर और ट्रांसपोर्टेशन शुल्क की वजह से अलग-अलग शहरों में अलग-अलग होती हैं. कीमतों में 10-100 रुपये का अंतर देखा जा सकता है. ऐसी भी खबरें हैं कि कुछ केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार (Gold Reserve) को बेचने पर विचार कर रहे हैं. इससे सप्लाई बढ़ने की आशंका है, जिससे कीमतें दबाव में हैं. क्यों गिरी सोने की कीमत? बता दें कि वैश्विक बाजारों में कीमतों में आई नरमी और डॉलर की मजबूती के चलते सोने की कीमतों में आज गिरावट आई है. इसके अलावा, MCX पर भी भाव गिरा है. MCX पर आज सुबह सोने की कीमतें 0.66 परसेंट तक लुढ़ककर 1,43,331 के स्तर पर देखी गई. यह बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत दे रहा है. चांदी की कीमत भारत में आज की कीमत में कल के मुकाबले प्रति किलोग्राम 2,210 रुपये की गिरावट दर्ज की गई. कल चांदी की कीमत 2,51,090 रुपये थी. वहीं, आज कीमत 2,48,880 रुपये है. इस तरह से आज 1 और 10 ग्राम चांदी की कीमत क्रमश: 248.88 रुपये और 2,488.80 रुपये है. 100 ग्राम चांदी की कीमत 24,888 रुपये है.
Passive Income Ideas India: कमाई सिर्फ मेहनत से ही नहीं, सही तरीके से प्लान करने से भी बढ़ सकती है. जब आपकी बनाई हुई प्लानिंग से समय के साथ बिना रोज मेहनत किए पैसे आते रहें, तो उसे पैसिव इनकम कहा जाता है. भारत में अब धीरे-धीरे लोग इसे अपनाने लगे हैं, क्योंकि यह न सिर्फ अतिरिक्त कमाई का जरिया बनता है. साथ ही लंबे समय में आर्थिक तौर से आपको मजबूती देने का काम करता है. आइए जानते हैं, इसकी शुरूआत और कुछ जरूरी बातों के विषय में विस्तार से... अपनी स्किल को पैसिव इनकम का जरिया बनाए कई बार जो चीजें आप पहले से जानते हैं, वही आपके लिए कमाई का अच्छा मौका बन सकती हैं. जैसे कोडिंग, योग, गिटार, कुकिंग या अकाउंटिंग जैसी स्किल्स को आप पैसिव इनकम में बदल सकते हैं. इसके लिए एक बार ऑनलाइन कोर्स रिकॉर्ड करना या अपनी जानकारी को ई-बुक के रूप में तैयार करके बेचने से अपनी शुरुआत कर सकते हैं. जिसके बाद समय के साथ बिना ज्यादा मेहनत के लगातार कमाई होने की संभावना बन सकती है. इसके अलावा आप पार्ट टाइम में अपनी इच्छा अनुसार, कोई छोटा-मोटा बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं. जिससे आपको कुछ एकस्ट्रा पैसों का इनकम होता रहे. शुरुआत अपने बजट को समझने से करें पैसिव इनकम की तरफ कदम बढ़ाने से पहले जरूरी है कि आप अपनी कमाई और खर्च को बेहतर तरीके से समझे. हर महीने कितनी आय हो रही है और किन-किन चीजों पर खर्च जा रहा है, इसे लिखकर देखना चाहिए. जैसे किराया, बिल, राशन और बाकी रोजमर्रा की चीजों पर कितना खर्च हो रहा है. इससे यह साफ हो जाता है कि आप कितने पैसों की बचत कर सकते हैं. इन बचे हुए पैसों को निवेश के लिए रखना शुरुआती तौर पर बेहतर कदम माना जाता है. छोटी शुरुआत से बनता है बड़ा फंडा पैसिव इनकम का जरिया बनाना कोई एक दिन का काम नहीं है. इसके लिए धैर्य और निवेश की आदत को बनाए रखना सबसे जरूरी कदमों में से एक है. साथ ही शुरूआत से ही बड़े लक्ष्य नहीं बनाने चाहिए, इसकी जगह छोटे-छोटे कदम से आगे बढ़ना चाहिए. जैसे हर महीने सैलरी आने पर एक तय रकम अलग रखना या बोनस का कुछ हिस्सा निवेश में लगाना. ये आदतें धीरे-धीरे मजबूत होती हैं और समय के साथ एक स्थिर आय का प्लेटफॉर्म तैयार करती हैं.
भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 26 मार्च 2026 को किसी तरह का कारोबार नहीं होगा. रामनवमी को लेकर बाजार में छुट्टी की घोषणा की गई है.... Stock Market Holidays March: भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 26 मार्च 2026 को किसी तरह का कारोबार नहीं होगा. रामनवमी को लेकर बाजार में छुट्टी की घोषणा की गई है. इस वजह से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) दोनों पूरी तरह बंद रहेंगे. इस दौरान बाजार के सभी सेगमेंट प्रभावित होंगे. यानी इक्विटी, डेरिवेटिव्स, करेंसी और अन्य ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर कोई लेनदेन नहीं होगा. पूरे दिन निवेशकों के लिए ट्रेडिंग गतिविधियां रुकी रहेंगी. इसके बाद 27 मार्च (शुक्रवार) को बाजार फिर खुलेगा, लेकिन 28 और 29 मार्च शनिवार और रविवार के वीकेंड होने की वजह से लगातार दो दिन छुट्टी रहेगी. ऐसे में निवेशकों को इस हफ्ते कम ट्रेडिंग सेशन में ही अपने फैसले लेने होंगे... मार्च के आखिरी दिनों में बाजार की छुट्टियां मार्च के आखिरी दिनों में शेयर बाजार में लगातार छुट्टियों का असर दिखेगा. 30 मार्च (सोमवार) को बाजार खुलेगा, लेकिन अगले ही दिन 31 मार्च को महावीर जयंती के कारण फिर बंद रहेगा. इससे पहले 26 मार्च को रामनवमी और 28-29 मार्च को वीकेंड की छुट्टियां भी शामिल हैं. यानी कुल मिलाकर इस दौरान चार दिन बाजार में कारोबार नहीं होगा. जिससे ट्रेडिंग के मौके सीमित रह जाएंगे आगे कब-कब रहेगी छुट्टी आने वाले महीनों में भी छुट्टियों का सिलसिला जारी रहेगा. 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के चलते बाजार में छुट्टी रहेगी. इसके बाद 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के कारण मार्केट बंद रहेगा. 1 मई को महाराष्ट्र दिवस, 28 मई को बकरीद और 26 जून को मोहर्रम के कारण शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा. जिससे ट्रेडिंग के दिनों पर असर पड़ सकता है. सीमित कारोबारी दिन मिलने से निवेशकों को अपने सौदे पूरे करने के लिए कम समय मिलता हैं. डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. metroheadlines.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
पश्चिम एशिया में तनाव का असर पड़ोसी देशों पर भी साफ दिख रहा है. बांग्लादेश में जेट ईंधन की कीमतों में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है India's Workforce Grow: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से पैदा हुए ऊर्जा संकट ने दुनियाभर में हड़कंप मचा दिया है. वैश्विक स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अगर ईरान से जुड़ा यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो यह एक बड़े संकट का रूप ले सकता है. पश्चिम एशिया में तनाव का असर पड़ोसी देशों पर भी साफ दिख रहा है. बांग्लादेश में जेट ईंधन की कीमतों में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है. इसके साथ ही, सरकार ने औद्योगिक ईंधन (डीजल) और पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है. भारत के लिए खुशखबरी हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में देश में रोजगार के अवसरों में करीब 4.7% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी स्टार्टअप, हेल्थ सर्विसेज, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वृद्धि के चलते रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. टीमलीज सर्विसेज की एम्प्लॉयमेंट आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती में सुधार का रुझान बड़ी कंपनियों में सबसे अधिक देखने को मिल रहा है, जहां 74% कंपनियों ने विस्तार के संकेत दिए हैं. वहीं, मीडियम साइज कंपनियों में यह आंकड़ा 57% और छोटे व्यवसायों में 38 प्रतिशत है, जो यह दिखाता है कि रोजगार वृद्धि में बड़ी कंपनियों की भूमिका अहम बनी हुई है. बढ़ेंगे रोजगार के मौके रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच रोजगार की मांग डिजिटल और पारंपरिक दोनों क्षेत्रों में बढ़ेगी. E-Commerce और टेक स्टार्टअप सेक्टर में नेट एम्प्लॉयमेंट चेंज (एनईसी) 8.9% रहने का अनुमान है. इसके बाद स्वास्थ्य सेवा और दवा क्षेत्र 7% और विनिर्माण, इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर 6.6% के साथ आगे रहेंगे. कुल मिलाकर इस अवधि में एनईसी 4.7% रहने का अनुमान है. यह रिपोर्ट 23 उद्योगों और 20 शहरों में 1,268 नियोक्ताओं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है, जिसका सर्वेक्षण नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच किया गया था. टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस चीफ बालासुब्रमण्यम का कहना है कि भारत में वर्कफोर्स की प्रकृति अब चक्रीय मांग के बजाय संरचनात्मक और नीतिगत बदलावों से अधिक प्रभावित हो रही है. लेबर कोड के लागू होने के बाद 64% संगठनों ने रोजगार लागत बढ़ने की बात कही है, जबकि 80% कंपनियां सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं और नए कानूनी ढांचे के अनुरूप अपने वर्कफोर्स को पुनर्गठित कर रही हैं.
पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में जल्द ही कुछ अहम बदलाव लागू होने वाले हैं. जिसका सीधा असर नए पैन कार्ड बनवाने वाले आवेदकों पर पड़ने वाला है. ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे... Pan Card New Rules 2026: पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में जल्द ही कुछ अहम बदलाव लागू होने वाले हैं. जिसका सीधा असर नए पैन कार्ड बनवाने वाले आवेदकों पर पड़ने वाला है. ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. इसलिए अगर आप आने वाले समय में पैन कार्ड के लिए आवेदन करने की सोच रहे हैं, तो पहले इन बदलावों की जानकारी लेना जरूरी है. ताकि आगे आपको किसी तरह की परेशानी न हो. आइए जानते हैं, इन बदलावों के बारे में नियमों में ये होने वाले है बदलाव अभी तक 31 मार्च 2026 तक पैन कार्ड के लिए आवेदन करना काफी आसान है, जहां केवल आधार कार्ड के जरिए भी काम हो जाता है. ज्यादा डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह प्रक्रिया थोड़ी सख्त होने जा रही है. नए नियम लागू होने के बाद सिर्फ आधार के बेसिस पर पैन कार्ड बनवाना संभव नहीं होगा. बल्कि आवेदकों को अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होंगे और पूरी प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्याद लंबी हो सकती है. जिससे पैन कार्ड बनवाना पहले से ज्यादा कठिन हो जाएगा. आधार के साथ इन दस्तावेजों की होगी जरूरत नए नियम लागू होने के बाद पैन कार्ड के लिए आवेदन करते समय केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं रहने वाला है. आवेदकों को पहचान व जन्म से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ सकते हैं. इसमें जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं का सर्टिफिकेट या अन्य सरकारी दस्तावेज शामिल हो सकते हैं. जिससे पैन कार्ड पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी. आधार से मेल खानी चाहिए सारी जानकारी नए नियमों के तहत पैन कार्ड में दर्ज जानकारी आधार से पूरी तरह मेल खानी चाहिए. इसलिए आवेदन करने से पहले आधार में नाम, जन्म तिथि और अन्य डिटेल्स सही और अपडेट होना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही सरकार नए आवेदन फॉर्म भी लागू करने जा रही है, जो 1 अप्रैल 2026 के बाद अनिवार्य होंगे. पुराने फॉर्म मान्य नहीं रहेंगे, इसलिए पैन से जुड़ा कोई भी काम अब नए फॉर्म के माध्यम से ही किया जा सकेगा.
घरेलू फ्यूचर मार्केट में मंगलवार, 24 मार्च को सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिल रही है. MCX पर गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 1,950 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था... Gold Silver Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में मंगलवार, 24 मार्च को सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिल रही है. खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 2 अप्रैल, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 1,950 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था. एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,38,411 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,39,260 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था. सुबह करीब 11:15 बजे, गोल्ड वायदा 1.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,37,292 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,38,450 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपके शहर में सोना-चांदी का ताजा भाव क्या है.... चांदी की कीमत एमसीएक्स पर 5 मई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 3.78 फीसदी या लगभग 8,500 रुपये की गिरावट के साथ 2,16,652 रुपये (प्रति किलो) पर ट्रेड कर रहा था. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,18,628 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,19,658 रुपये था. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,350 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 23,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,400 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,40,500 रुपए 22 कैरेट - 1,28,800 रुपए 18 कैरेट - 1,05,410 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,40,350 रुपए 22 कैरेट - 1,28,650 रुपए 18 कैरेट - 1,05,260 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,41,820 रुपए 22 कैरेट - 1,30,000 रुपए 18 कैरेट - 1,08,200 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,40,350 रुपए 22 कैरेट - 1,28,650 रुपए 18 कैरेट - 1,05,260 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,40,400 रुपए 22 कैरेट - 1,28,700 रुपए 18 कैरेट - 1,05,310 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,40,500 रुपए 22 कैरेट - 1,28,800 रुपए 18 कैरेट - 1,05,410 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,40,400 रुपए 22 कैरेट - 1,28,700 रुपए 18 कैरेट - 1,05,310 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,40,350 रुपए 22 कैरेट - 1,28,650 रुपए 18 कैरेट - 1,05,260 रुपए
ईरान-इजरायल के बीच चल रहे विवाद का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. आज, 23 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट जारी है. वहीं, विदेशी निवेशक भी लगातार शेयर मार्केट से दूरी बना रहे हैं. FII Selling India: ईरान-इजरायल के बीच चल रहे विवाद का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. आज, 23 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट जारी है. वहीं, विदेशी निवेशक भी लगातार शेयर मार्केट से दूरी बना रहे हैं. आंकड़ों की बात करें तो, आखिरी 16 दिनों में विदेशी निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है. साथ ही कच्चे तेल की कीमत भी 112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है. आइए जानते हैं, आखिर विदेशी निवेशक क्यों बाजार से दूरी बना रहे है? विदेशी निवेशकों ने हर घंटे 1000 करोड़ रुपये निकाले हाल ही में घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली तेज रही है. 26 फरवरी से 20 मार्च के बीच एफआईआई ने कुल 1,00,040 करोड़ रुपये निकाले हैं. यानी 16 कारोबारी दिनों में औसतन हर घंटे लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निकासी हुई. मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक हुए 50 सत्रों में से 33 सत्रों में एफआईआई लगातार बाजार से पैसे निकाल रहे हैं. जो भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाने का संकेत है. एफआईआई की लंबी बिकवाली, भारतीय बाजारों पर असर पिछले कुछ सालों से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है. 2025 में ही एफआईआई ने भारतीय मार्केट्स से कुल 2.4 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी. जो बाजार की स्थिरता और निवेशकों के मनोबल पर असर डालती रही है. DII की खरीदारी से बाजार को राहत जहां विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है. वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) की खरीदारी से कुछ संतुलन बना हुआ है. इसी दौरान डीआईआई ने कुल 1,16,586 करोड़ रुपये की खरीदारी की है. जो बाजार को सपोर्ट देने और निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में मदद कर रही है. मिडिल ईस्ट में चल रहे विवाद से पैदा हुई अनिश्चितता विदेशी निवेशकों की घरेलू बाजार से दूरी बनाने की मुख्य वजह बताई जा रही है. डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. metroHeadlines की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
अगर आपकी कंपनी आपके प्रोविडेंट फंड (PF), NPS या सुपरएनुएशन फंड में एक साल में 7.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा करती है तो इस सीमा से ऊपर की रकम को आपकी सैलरी का हिस्सा माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा. Income Tax Rules 2026: वित्त मंत्रालय ने 'इनकम टैक्स नियम 2026' का आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. 2500 से भी ज्यादा पन्नों के इस नए ड्राफ्ट में लिखे नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे. ये नियम पुराने 1961 के इनकम टैक्स कानून की जगह लेंगे यानी अब सारी धाराओं के नंबर भी बदल जाएंगे. आम आदमी, नौकरीपेशा, किराएदार, मकान मालिक और बिज़नेसमैन सब पर इसका सीधा असर पड़ेगा. PF और NPS में कंपनी ज्यादा जमा करे तो देना होगा टैक्स अगर आपकी कंपनी आपके प्रोविडेंट फंड (PF), NPS या सुपरएनुएशन फंड में एक साल में 7.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा करती है तो इस सीमा से ऊपर की रकम को आपकी सैलरी का हिस्सा माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा. साथ ही उस अतिरिक्त रकम पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स निकालने का भी नया फॉर्मूला तय किया गया है. HRA चाहिए तो मकान मालिक का PAN देना जरूरी किराए की रसीद लगाकर HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस का फायदा उठाते हैं तो ध्यान रखें अगर साल भर का कुल किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा है तो कंपनी को मकान मालिक का नाम, पता और PAN नंबर देना अनिवार्य होगा. बिना इसके HRA छूट नहीं मिलेगी. कंपनी का घर मिला है तो टैक्स शहर की आबादी के हिसाब से अगर कंपनी आपको रहने के लिए मुफ्त में मकान देती है तो अब उस पर टैक्स शहर की आबादी के हिसाब से लगेगा. 40 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में यह सुविधा आपकी सैलरी का 10 फीसदी मानी जाएगी और उसी पर टैक्स देना होगा. कंपनी की कार, खाना और गिफ्ट नए नियम कंपनी की कार के निजी इस्तेमाल पर इंजन की क्षमता के हिसाब से टैक्स लगेगा. ऑफिस में काम के दौरान 200 रुपये प्रति मील तक के खाने पर टैक्स छूट मिलेगी. साल में 15,000 रुपये तक के गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. रुकी हुई सैलरी (Arrears) एक साथ मिले तो घबराएं नहीं Form 39 भरें कई बार बकाया सैलरी, एडवांस या पुरानी पेंशन एक साथ आने पर इनकम बढ़ जाती है और टैक्स स्लैब ऊपर चला जाता है. नए नियमों में 'फॉर्म 39' भरकर इस पर विशेष राहत क्लेम की जा सकती है. 5 से 15 साल की नौकरी के बाद मिली ग्रेच्युटी और नौकरी जाने पर मिले मुआवजे पर भी यही छूट लागू होगी. VRS लेने वालों को राहत पर शर्त है अगर आप स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS लेते हैं तो उस पर मिलने वाली रकम पर टैक्स छूट मिलेगी. लेकिन इसके लिए या तो कम से कम 10 साल की नौकरी पूरी होनी चाहिए या उम्र 40 साल से ज्यादा होनी चाहिए. किराएदार ने किराया नहीं दिया तो मकान मालिक को राहत अगर किराएदार ने किराया नहीं दिया और मकान खाली कर दिया तो उस बकाया किराए को मकान मालिक की इनकम नहीं माना जाएगा और उस पर टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन शर्त यह है कि मकान मालिक को यह साबित करना होगा कि उन्होंने किराया वसूलने के लिए कानूनी कदम उठाए. गंभीर बीमारियों के इलाज पर कंपनी खर्च उठाए तो पूरी टैक्स छूट कैंसर, टीबी, एड्स जैसी गंभीर बीमारियों का खर्च या फिर कोई सर्जरी या कम से कम 3 दिन अस्पताल में भर्ती रहने वाले इलाज का खर्च अगर कंपनी उठाती है तो उस पर पूरी तरह टैक्स छूट मिलेगी. नशे की लत और मानसिक बीमारियों का इलाज भी इसमें शामिल है. दिव्यांगता के मामले में ऑटिज्म या सेरेब्रल पाल्सी जैसी बीमारियों पर छूट के लिए सरकारी अस्पताल के सिविल सर्जन या न्यूरोलॉजिस्ट का सर्टिफिकेट जरूरी होगा. किडनी फेलियर, हीमोफीलिया या थैलेसीमिया जैसी बीमारियों में संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर की पर्ची लगाना अनिवार्य होगा. 10,000 रुपये से ज्यादा का कैश पेमेंट नहीं मिलेगी छूट बिज़नेसमैन और प्रोफेशनल ध्यान दें. अगर किसी को एक दिन में 10,000 रुपये से ज्यादा का नकद पेमेंट किया तो वह बिज़नेस खर्च नहीं माना जाएगा और टैक्स में छूट नहीं मिलेगी. 10,000 से ऊपर के सभी पेमेंट चेक, यूपीआई, कार्ड या नेट बैंकिंग से ही करने होंगे. किसानों, गांवों और सरकार को किए गए भुगतान इससे बाहर रहेंगे. डिजिटल पेमेंट और डिजिटल रुपये को आधिकारिक मान्यता UPI (BHIM), क्रेडिट-डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, NEFT और RTGS को इनकम टैक्स के तहत आधिकारिक रूप से वैध माना गया है. और इस बार पहली बार RBI का डिजिटल रुपया (e-₹ यानी Central Bank Digital Currency) को भी टैक्स और बिज़नेस लेन-देन के लिए वैध तरीका मान लिया गया है. विदेशी डिजिटल कंपनियों पर अब भारत में लगेगा टैक्स यह बिल्कुल नया नियम है. अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में बिना ऑफिस खोले सॉफ्टवेयर, डिजिटल सर्विस या डेटा दे रही है और उसकी भारत से सालाना कमाई 2 करोड़ रुपये से ज्यादा है या भारत में 3 लाख से ज्यादा यूज़र्स हैं तो उस पर भारत में टैक्स लगेगा. शेयर और प्रॉपर्टी बेचने पर कैपिटल गेन का नया फॉर्मूला जो शेयर शेयर बाज़ार में लिस्टेड नहीं हैं उनकी सही बाज़ार कीमत निकालने के लिए नए गणितीय फॉर्मूले तय किए गए हैं. प्रॉपर्टी और ऐसे अनलिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री में टैक्स चोरी रोकना इसका मकसद है. विदेश से कमाई है तो डबल टैक्स से बचाएगा Form 44 TDS और TCS काटने, जमा करने और सर्टिफिकेट देने के लिए नए फॉर्म और डेडलाइन तय की गई हैं. विदेश से होने वाली कमाई पर दोहरे टैक्स से बचाने के लिए 'फॉर्म 44' के नए नियम लागू होंगे. कुल मिलाकर यह नया इनकम टैक्स नियम 2026 सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं है. यह पूरे टैक्स सिस्टम की भाषा, हिसाब और तरीके को नए सिरे से लिखने की कोशिश है. 1 अप्रैल 2026 से पहले इन नियमों को एक बार ध्यान से पढ़ लेना हर नौकरीपेशा, बिज़नेसमैन और निवेशक के लिए जरूरी है.
शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखने को मिली है. साथ ही ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने एक कंपनी शेयरों पर बॉय की रेटिंग दी है. आइए जानते हैं, इस विषय में... Bharat Electronics Share Price Target Goldman Sachs: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखने को मिली है. बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 पॉजिटिव नोट पर बंद हुए है. कारोबारी दिन के दौरान डिफेंस सेक्टर की पीएसयू कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में तेजी देखने को मिली. साथ ही ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भी कंपनी शेयरों पर बॉय की रेटिंग दी है. आइए जानते हैं, कंपनी शेयरों को लेकर गोल्डमैन सैक्स का क्या है कहना? ब्रोकरेज की राय और टारगेट प्राइस ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर पर भरोसा जताते हुए इसे खरीदने की सलाह दी है. फर्म ने इस स्टॉक के लिए 470 रुपये का लक्ष्य तय किया है, जो मौजूदा कीमत से करीब 7 प्रतिशत की संभावित तेजी को दिखाता है. फर्म के अनुसार, कंपनी को लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं. इस मजबूत ऑर्डर बुक के चलते ब्रोकरेज इस शेयर को लेकर पॉजिटिव रूख दिखा रहे है. नए ऑर्डर से मजबूत हुई ऑर्डर बुक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स को हाल ही में 1,011 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला हैं. जिससे कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत हुई है. ये ऑर्डर डिफेंस और एडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़े कई प्रोडक्ट्स के लिए हैं. कंपनी के वित्तीय हालात आंकड़ों के अनुसार, कंपनी की वित्तीय स्थिति अच्छी बनी हुई है. चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी को 1,579 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है. पिछले साल से इस मुनाफे की तुलना करें तो यह 1,311 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत की तेजी दिखाता है. वहीं, कंपनी की आय भी मजबूत रही और 24 फीसदी की बढ़त के साथ 7,154 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 5,771 करोड़ रुपये थी. शेयर बाजार में कंपनी का प्रदर्शन बीएसई पर बुधवार के कारोबारी दिन की समाप्ति पर शेयरों में तेजी देखने को मिली थी. कंपनी शेयर 0.65 प्रतिशत या 2.85 रुपये की उछाल के साथ 442.50 रुपये पर बंद हुए थे. दिन का इंट्रा डे हाई 447.70 रुपये था. कंपनी का मार्केट कैप 3,23,457.71 करोड़ रुपये का है. डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. metroheadlines.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
Cement stock: सागर सीमेंट्स लिमिटेड अपनी सब्सिडियरी कंपनी आंध्र सीमेंट्स लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है. यह पूरा प्रॉसेस ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के जरिए होगा. Cement stock: हैदराबाद बेस्ड सीमेंट बनाने वाली कंपनी सागर सीमेंट्स लिमिटेड (Sagar Cement Limited) ने बीते सोमवार (16 मार्च) को अपनी सब्सिडियरी कंपनी आंध्र सीमेंट्स लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बेचने का ऐलान कर दिया. कंपनी ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के जरिए अपनी कुल 7.24 परसेंट (लगभग 66.76 लाख इक्विटी शेयर) की हिस्सेदारी बेच रही है. यह सौदा 52 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर किया जाएगा. क्यों बेची जा रही हिस्सेदारी? कंपनी के बोर्ड ने मार्केट रेगुलेटर सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग (MPS) की गाइडलाइन का पालन करने के लिए यह फैसला लिया. शेयर बाजार के नियमों के मुताबिक, किसी कंपनी में मालिक या प्रोमोटर्स की हिस्सेदारी 75 परसेंट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए ताकि बाकी के 25 परसेंट शेयर जनता के पास रहे. चूंकि सागर सीमेंट्स (प्रोमोटर) के पास आंध्र सीमेंट्स के 90 परसेंट शेयर हैं. यानी कि यह तय लिमिट 75 परसेंट से ज्यादा है. इसी 15 परसेंट अंतर को पाटने के लिए सागर सीमेंट्स कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है ताकि नियमों के मुताबिक, उसकी भी हिस्सेदारी कंपनी में घटकर 75 परसेंट के दायरे में आ जाए और बाकी आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 25 परसेंट हो जाए. इससे बाजार में शेयरों की खरीद-बिक्री सही ढंग से हो पाती है. इस ऑफर-फॉर-सेल के तहत नॉन-रिटेल निवेशकों को 17 मार्च को बोली लगाने का मौका मिलेगा, जबकि रिटेल निवेशक 18 मार्च को बोली लगा सकेंगे. शेयरों में तेजी इस खबर के बाद आंध्र सीमेंट लिमिटेड के शेयरों में आज गजब की तेजी देखने को मिल रही है. कंपनी के शेयर लगभग 10 परसेंट उछलकर 56 रुपये के इंट्रा-डे हाई लेवल पर पहुंच गए. कंपनी में 7.24 हिस्सेदारी बेचने के लिए OFS विंडो आज से खुला है. इसके लिए फ्लोर प्राइस 52 रुपये तय किया गया है. चूंकि शेयर की ओपेनिंग इससे ऊपर हुई इसलिए खरीदारी और बढ़ गई. आज का दिन गैर-खुदरा निवेशकों (म्यूचुअल फंड और बैंक) के लिए सुरक्षित है और उनकी ओर से भारी डिमांड के कारण शेयरों में तेजी देखी जा रही है. डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. metroheadlines.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
भारत में बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होने का रास्ता अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरकार ने आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) से जुड़े नियमों में बदलाव करने का फैसला लिया हैं..... IPO Rules Change: भारत में बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होने का रास्ता अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरकार ने आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए यह अनुमति दी है कि जिन कंपनियों का लिस्टिंग के बाद बाजार मूल्य 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा, उन्हें पब्लिक को अपनी चुकता पूंजी का केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सा ही बेचना होगा. इससे पहले कई बड़ी कंपनियों को अपना पब्लिक इश्यू लाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था. आइए जानते हैं, नए नियमों के तहत कौन-कौन से बदलाव किए गए हैं? ये हुए अहम बदलाव 1. नए नियमों के तहत कंपनियों को अपने हर इक्विटी शेयर वर्ग का कम से कम 2.5 प्रतिशत हिस्सा आम निवेशकों के लिए रखना होगा. इसके साथ ही सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग को धीरे-धीरे बढ़ाने के लिए एक तय समयसीमा भी निर्धारित की है, ताकि बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ सके. 2. नए नियमों के मुताबिक अगर किसी कंपनी की लिस्टिंग के समय सार्वजनिक हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से कम है, तो उसे 5 साल के भीतर इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत और 10 साल के अंदर 25 प्रतिशत तक करना होगा. वहीं जिन कंपनियों के आईपीओ के समय ही पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 प्रतिशत से ज्यादा है, उन्हें अगले 5 साल के भीतर इसे 25 प्रतिशत तक पहुंचाना अनिवार्य होगा. 3. सरकार ने कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर पब्लिक शेयरहोल्डिंग के अलग-अलग नियम तय किए हैं. जिन कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 लाख करोड़ रुपये से 5 लाख करोड़ रुपये के बीच होगा, उन्हें आईपीओ के दौरान कम से कम 2.75 प्रतिशत शेयर आम निवेशकों को देने होंगे. 4. जिन कंपनियों का आकार इससे छोटा है, उनके लिए पब्लिक हिस्सेदारी का प्रतिशत ज्यादा रखा गया है. उदाहरण के तौर पर 50,000 करोड़ रुपये से 1 लाख करोड़ रुपये के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों को कम से कम 8 प्रतिशत शेयर जनता के लिए जारी करने होंगे. ताकि बाजार में निवेशकों की भागीदारी बनी रहे. 5. नए नियमों में यह भी कहा गया है कि अगर किसी कंपनी के पास सुपीरियर वोटिंग राइट्स (SVR) वाले इक्विटी शेयर हैं और वह अपने सामान्य शेयरों को शेयर बाजार में लिस्ट करना चाहती है, तो ऐसे SVR शेयरों को भी साथ में लिस्ट करना जरूरी होगा. एनएसई और रिलायंस जियो को रास्ता हुआ आसान सरकार ने इन नए नियमों को आधिकारिक तौर पर लागू भी कर दिया है. विषय की समझ रखने वाले जानकारों का मानना है कि इस फैसले के बाद कई बड़ी कंपनियों के आईपीओ आने की संभावना बढ़ सकती है. खास तौर पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और रिलायंस जियो जैसी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग का रास्ता ज्यादा आसान माना जा रहा है.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.