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अब महीने में दो बार मिलेगी सैलरी, नया नियम लाया भारत का पड़ोसी देश, इससे क्या फायदा होगा?

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0

 

Nepal Salaries Twice a Month: नेपाल सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों के पास हर 15 दिन में पैसा आएगा, जिससे उन्हें महीने के अंत में होने वाली पैसों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.

 

नेपाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करते हुए पारंपरिक “महीने के अंत में सैलरी” देने की व्यवस्था को खत्म कर “पाक्षिक भुगतान प्रणाली” लागू करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब कर्मचारियों को हर 15 दिन में आधी-आधी सैलरी दी जाएगी, यानी महीने में दो बार वेतन मिलेगा। यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

दशकों से चली आ रही पुरानी प्रणाली में कर्मचारियों को महीने के अंत तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे अक्सर महीने के आखिरी दिनों में आर्थिक दबाव बढ़ जाता था। कई कर्मचारियों को जरूरी खर्च पूरे करने के लिए उधार लेना पड़ता था या अपनी बचत तोड़नी पड़ती थी। नई प्रणाली इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है क्योंकि अब हर दो सप्ताह में नियमित रूप से पैसे उपलब्ध रहेंगे।

 

नेपाल के वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) को बेहतर बनाना और बाजार में धन के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करना है। जब लोगों के पास नियमित अंतराल पर पैसा आता रहेगा, तो वे अपनी दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे। इससे उनकी जीवनशैली में स्थिरता आएगी और मानसिक तनाव भी कम होगा। खासकर मध्यम वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह कदम राहत भरा साबित हो सकता है, क्योंकि उनके खर्च अक्सर महीने के बीच या अंत में अधिक बढ़ जाते हैं। हर 15 दिन में सैलरी मिलने से वे अपने खर्चों को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएंगे और अनावश्यक कर्ज लेने की जरूरत भी कम होगी।

 

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आमतौर पर देखा जाता है कि महीने की शुरुआत में बाजार में ज्यादा भीड़ और खरीदारी होती है, जबकि महीने के अंत में बाजार में मंदी आ जाती है। इस नई व्यवस्था से यह असंतुलन खत्म हो सकता है, क्योंकि अब पूरे महीने बाजार में समान रूप से मांग बनी रहेगी। इससे छोटे व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और स्थानीय व्यवसायों को फायदा होगा। नियमित अंतराल पर उपभोक्ताओं के पास पैसा होने से बिक्री में निरंतरता बनी रहेगी, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।

 

कर्मचारियों के दृष्टिकोण से देखें तो यह प्रणाली उनके बजट प्रबंधन को काफी आसान बना सकती है। उदाहरण के लिए, स्कूल फीस, बिजली बिल, किराया, राशन और अन्य जरूरी खर्चों को अब दो हिस्सों में बांटकर आसानी से संभाला जा सकता है। पहले जहां एक साथ बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती थी, अब वह बोझ दो भागों में विभाजित हो जाएगा। इससे वित्तीय योजना अधिक व्यवस्थित होगी और बचत की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके अलावा, अचानक आने वाले खर्चों से निपटना भी आसान हो जाएगा क्योंकि हर 15 दिन में आय का स्रोत उपलब्ध रहेगा।

 

यह मॉडल पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों जैसे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही इस तरह की वेतन प्रणाली अपनाई जाती है। वहां इसे “बाय-वीकली पेमेंट सिस्टम” कहा जाता है, जो कर्मचारियों के लिए अधिक सुविधाजनक माना जाता है। नेपाल द्वारा इस मॉडल को अपनाना यह दर्शाता है कि वह अपने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में कदम उठा रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो दक्षिण एशिया के अन्य देश भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

 

हालांकि, इस नई प्रणाली के कुछ संभावित चुनौतियां भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, सरकारी विभागों को अपने अकाउंटिंग और भुगतान सिस्टम में बदलाव करना होगा, जिससे शुरुआती चरण में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों को भी अपने खर्च और बचत की आदतों में बदलाव लाना पड़ेगा, क्योंकि अब उन्हें महीने भर की योजना दो हिस्सों में बांटकर बनानी होगी। लेकिन अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो इसके फायदे चुनौतियों से कहीं ज्यादा हो सकते हैं।

 

सरकार इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असुविधा से बचा जा सके। शुरुआती दौर में कुछ विभागों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद धीरे-धीरे सभी सरकारी कर्मचारियों तक इसका विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों से फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके।

 

कुल मिलाकर, नेपाल सरकार का यह कदम एक दूरदर्शी और प्रगतिशील निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा। नियमित आय के प्रवाह से जहां एक ओर व्यक्तिगत वित्तीय स्थिरता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बेहतर होगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो यह अन्य देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है और वे भी अपने वेतन भुगतान सिस्टम में सुधार करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

 

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

  भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया।   कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   देखिए तस्वीरें…     NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया।     NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन।     विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो।     सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार   इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा।   उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है।     'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा'   सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए।   डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है।     'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों'   सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा।   आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया।     डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान   कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।   कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

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अब महीने में दो बार मिलेगी सैलरी, नया नियम लाया भारत का पड़ोसी देश, इससे क्या फायदा होगा?

  Nepal Salaries Twice a Month: नेपाल सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों के पास हर 15 दिन में पैसा आएगा, जिससे उन्हें महीने के अंत में होने वाली पैसों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.   नेपाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करते हुए पारंपरिक “महीने के अंत में सैलरी” देने की व्यवस्था को खत्म कर “पाक्षिक भुगतान प्रणाली” लागू करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब कर्मचारियों को हर 15 दिन में आधी-आधी सैलरी दी जाएगी, यानी महीने में दो बार वेतन मिलेगा। यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।   दशकों से चली आ रही पुरानी प्रणाली में कर्मचारियों को महीने के अंत तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे अक्सर महीने के आखिरी दिनों में आर्थिक दबाव बढ़ जाता था। कई कर्मचारियों को जरूरी खर्च पूरे करने के लिए उधार लेना पड़ता था या अपनी बचत तोड़नी पड़ती थी। नई प्रणाली इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है क्योंकि अब हर दो सप्ताह में नियमित रूप से पैसे उपलब्ध रहेंगे।   नेपाल के वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) को बेहतर बनाना और बाजार में धन के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करना है। जब लोगों के पास नियमित अंतराल पर पैसा आता रहेगा, तो वे अपनी दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे। इससे उनकी जीवनशैली में स्थिरता आएगी और मानसिक तनाव भी कम होगा। खासकर मध्यम वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह कदम राहत भरा साबित हो सकता है, क्योंकि उनके खर्च अक्सर महीने के बीच या अंत में अधिक बढ़ जाते हैं। हर 15 दिन में सैलरी मिलने से वे अपने खर्चों को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएंगे और अनावश्यक कर्ज लेने की जरूरत भी कम होगी।   आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आमतौर पर देखा जाता है कि महीने की शुरुआत में बाजार में ज्यादा भीड़ और खरीदारी होती है, जबकि महीने के अंत में बाजार में मंदी आ जाती है। इस नई व्यवस्था से यह असंतुलन खत्म हो सकता है, क्योंकि अब पूरे महीने बाजार में समान रूप से मांग बनी रहेगी। इससे छोटे व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और स्थानीय व्यवसायों को फायदा होगा। नियमित अंतराल पर उपभोक्ताओं के पास पैसा होने से बिक्री में निरंतरता बनी रहेगी, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।   कर्मचारियों के दृष्टिकोण से देखें तो यह प्रणाली उनके बजट प्रबंधन को काफी आसान बना सकती है। उदाहरण के लिए, स्कूल फीस, बिजली बिल, किराया, राशन और अन्य जरूरी खर्चों को अब दो हिस्सों में बांटकर आसानी से संभाला जा सकता है। पहले जहां एक साथ बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती थी, अब वह बोझ दो भागों में विभाजित हो जाएगा। इससे वित्तीय योजना अधिक व्यवस्थित होगी और बचत की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके अलावा, अचानक आने वाले खर्चों से निपटना भी आसान हो जाएगा क्योंकि हर 15 दिन में आय का स्रोत उपलब्ध रहेगा।   यह मॉडल पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों जैसे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही इस तरह की वेतन प्रणाली अपनाई जाती है। वहां इसे “बाय-वीकली पेमेंट सिस्टम” कहा जाता है, जो कर्मचारियों के लिए अधिक सुविधाजनक माना जाता है। नेपाल द्वारा इस मॉडल को अपनाना यह दर्शाता है कि वह अपने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में कदम उठा रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो दक्षिण एशिया के अन्य देश भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।   हालांकि, इस नई प्रणाली के कुछ संभावित चुनौतियां भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, सरकारी विभागों को अपने अकाउंटिंग और भुगतान सिस्टम में बदलाव करना होगा, जिससे शुरुआती चरण में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों को भी अपने खर्च और बचत की आदतों में बदलाव लाना पड़ेगा, क्योंकि अब उन्हें महीने भर की योजना दो हिस्सों में बांटकर बनानी होगी। लेकिन अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो इसके फायदे चुनौतियों से कहीं ज्यादा हो सकते हैं।   सरकार इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असुविधा से बचा जा सके। शुरुआती दौर में कुछ विभागों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद धीरे-धीरे सभी सरकारी कर्मचारियों तक इसका विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों से फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके।   कुल मिलाकर, नेपाल सरकार का यह कदम एक दूरदर्शी और प्रगतिशील निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा। नियमित आय के प्रवाह से जहां एक ओर व्यक्तिगत वित्तीय स्थिरता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बेहतर होगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो यह अन्य देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है और वे भी अपने वेतन भुगतान सिस्टम में सुधार करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।  

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0

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अमीर और अमीर, गरीब और गरीब! देश के 1688 रईसजादों के पास है 50% GDP के बराबर दौलत

  देश में संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के अनुसार, भारत में 1,688 अमीर लोगों के पास देश की 50% GDP के बराबर दौलत है.   भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता को लेकर जारी ‘Wealth Tracker India 2026’ रिपोर्ट ने एक बार फिर देश की आर्थिक संरचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Centre for Financial Accountability द्वारा 1 अप्रैल 2026 को ‘Tax the Top’ अभियान के तहत जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की संपत्ति का बड़ा हिस्सा बेहद कम लोगों के पास सिमटता जा रहा है।   रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सिर्फ 1,688 अमीर लोगों के पास करीब 166 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो देश के कुल GDP का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बनती है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है।   क्या कहती है रिपोर्ट?   रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि भारत में संपत्ति का वितरण लगातार असंतुलित होता जा रहा है। इस स्थिति की तुलना औपनिवेशिक काल की असमानताओं से की गई है, जब देश की आर्थिक संपत्ति सीमित वर्ग के हाथों में केंद्रित थी।   रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच देश के ऊपरी वर्ग की संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जबकि निचले तबके की आर्थिक स्थिति लगभग स्थिर बनी रही। यह ट्रेंड इस बात की ओर इशारा करता है कि आर्थिक विकास का फायदा समान रूप से वितरित नहीं हो रहा।   आंकड़ों से समझिए असमानता का स्तर रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं: देश के टॉप 1% लोगों के पास 40% से ज्यादा संपत्ति है। वहीं निचले 50% लोग सिर्फ 15% आय पर निर्भर हैं। 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति रखने वालों की संख्या में 77% की वृद्धि दर्ज की गई है। इन अमीरों की कुल संपत्ति 31 लाख करोड़ से बढ़कर 88 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो करीब 227% की बढ़ोतरी है।   ये आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक पिरामिड के शीर्ष पर मौजूद लोगों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है, जबकि निचले तबके के लिए हालात लगभग जस के तस बने हुए हैं। अमीर और अमीर हो रहे हैं   रिपोर्ट में देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया है।   मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, सावित्री जिंदल, सुनील मित्तल और शिव नादर जैसे बड़े नामों की संपत्ति में 2019 से 2025 के बीच भारी उछाल दर्ज किया गया।   इन पांच बड़े परिवारों की कुल संपत्ति 6.68 लाख करोड़ से बढ़कर 26.54 लाख करोड़ रुपये हो गई। मुकेश अंबानी की संपत्ति में करीब 153% वृद्धि हुई। गौतम अडानी की दौलत में 625% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।   यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में वेल्थ क्रिएशन तेजी से हो रहा है, लेकिन उसका वितरण असमान है।     समाधान क्या सुझाती है रिपोर्ट?   रिपोर्ट में इस असमानता को कम करने के लिए कुछ ठोस सुझाव भी दिए गए हैं। सबसे प्रमुख सुझाव है—अमीरों पर प्रोग्रेसिव वेल्थ टैक्स लागू करना। Centre for Financial Accountability के अनुसार: देश के 1,688 सबसे अमीर परिवारों पर 2% से 6% तक वेल्थ टैक्स लगाया जा सकता है। इसके साथ इनहेरिटेंस (विरासत) टैक्स भी लागू करने की सिफारिश की गई है।   अगर यह दोनों टैक्स लागू किए जाते हैं, तो सरकार को हर साल करीब 10.63 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।     इस पैसे का क्या होगा उपयोग?   रिपोर्ट के मुताबिक, इस अतिरिक्त राजस्व का इस्तेमाल सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है—जैसे: स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार शिक्षा प्रणाली में सुधार गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सब्सिडी रोजगार सृजन कार्यक्रम   इससे समाज के कमजोर वर्गों तक ज्यादा संसाधन पहुंचेंगे और अमीर-गरीब के बीच की खाई को कम करने में मदद मिलेगी।     क्यों बढ़ रही है असमानता?   रिपोर्ट अप्रत्यक्ष रूप से कुछ कारणों की ओर भी इशारा करती है: पूंजी बाजार में तेजी, जिससे बड़े निवेशकों को ज्यादा फायदा संपत्ति (रियल एस्टेट, शेयर) में बढ़ोतरी टैक्स स्ट्रक्चर में असमानता सामाजिक सुरक्षा तंत्र की सीमाएं   इन सभी कारकों ने मिलकर अमीरों को और ज्यादा अमीर बनने में मदद की है।     क्या है इसका सामाजिक असर?   आर्थिक असमानता सिर्फ पैसों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका समाज पर गहरा असर पड़ता है: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच सामाजिक असंतोष में वृद्धि आर्थिक अवसरों में कमी गरीबी का स्थायीकरण   अगर यह असमानता लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह देश के समग्र विकास को प्रभावित कर सकती है।

Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0

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LPG, CNG, PNG rates today: आज कितनी है 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत? CNG और PNG के क्या हैं रेट?

  LPG, CNG, PNG rates today: देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है.     LPG, CNG, PNG rates today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई पर पड़ा है. जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, देश में LPG, CNG और PNG की बढ़ती कीमतों और उनकी उपलब्धता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है.   भारत अपनी जरूरत का 40 परसेंट से ज्यादा क्रूड ऑयल और LPG का 90 परसेंट सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से आयात करता है. हालांकि, इस निर्भरता के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि LPG की सप्लाई स्थिर बनी हुई है और डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर किसी भी तरह की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं है.         31 मार्च को 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत   शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 913 रुपये कोलकाता  939 रुपये मुंबई 912.50 रुपये चेन्नई 928.50 रुपये बेगलुरु 915.50 रुपये हैदराबाद 965 रुपये   19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आज कीमत   शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 1,884.50 रुपये कोलकाता 1,988.50 मुंबई 1,836.50 चेन्नई 2,043.50 बेंगलुरु 1,958 हैदराबाद 2,105.50   आज 31 मार्च को CNG की कीमत    शहर कीमत (प्रति किलो) दिल्ली 77.09 रुपये  कोलकाता 93.50 रुपये  मुंबई 80.50 रुपये  चेन्नई 91.50 रुपये  बेंगलुरु 88.95 रुपये  हैदराबाद 97 रुपये     देश के प्रमुख शहरों में आज PNG की कीमत    शहर कीमत (प्रति SCM) दिल्ली 47.89 रुपये  कोलकाता 50 रुपये  मुंबई 50 रुपये  चेन्नई 50 रुपये  बेंगलुरु 52 रुपये  हैदराबाद  51 रुपये    सरकार की कोशिश   इस बीच, केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के दबाव के बीच घरों में खाना पकाने और रोशनी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन का एड-हॉक (तदर्थ) आवंटन करने की अनुमति दे दी है. इन क्षेत्रों में वे इलाके भी शामिल हैं जिन्हें पहले 'केरोसिन-मुक्त' घोषित किया गया था.   हालांकि, उपलब्ध LPG की आपूर्ति में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन सीमित स्टॉक के कारण वितरण केंद्रों पर लोग घबराकर ज़्यादा खरीदारी करने लगे हैं और लंबी कतारें लग गई हैं. LPG पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने पूरे देश में—उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित जिन्हें पहले केरोसिन-मुक्त घोषित किया गया था—खाना पकाने और रोशनी के लिए केरोसिन के अस्थायी उपयोग की अनुमति दे दी है।   पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 मार्च को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें 'पेट्रोलियम अधिनियम, 1934' और 'पेट्रोलियम नियम, 2002' के तहत अस्थायी छूट की अनुमति दी गई है. इससे निर्दिष्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PDS केरोसिन के वितरण में आसानी होगी. साथ ही, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और समय पर आपूर्ति के लिए भंडारण, सुरक्षा और लाइसेंसिंग से जुड़ी शर्तें भी लागू होंगी.                                                                      

Metroheadlines मार्च 31, 2026 0

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