UP Assembly Election 2027: पूर्वी यूपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने कहा कि हमारी पार्टी का बीजेपी से गठबंधन केंद्र में है, राज्य में नहीं है. यूपी चुनाव 2027: लोजपा (रामविलास) का बड़ा ऐलान, सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव एनडीए गठबंधन का हिस्सा रही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। यह ऐलान पार्टी के पूर्वी यूपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र में पार्टी का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के साथ जारी रहेगा, लेकिन प्रदेश स्तर पर किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा। राजीव पासवान ने कहा कि पार्टी “यूपी फर्स्ट, यूपी वाले फर्स्ट” के मिशन के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी और प्रदेश की जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देगी। उनका दावा है कि 2027 के चुनाव में सत्ता की चाबी लोजपा (रामविलास) के हाथ में होगी। इस बयान के साथ ही उन्होंने अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘पीडीए’ के नाम पर वंचित समाज को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव को कांशीराम और भीमराव आंबेडकर की याद आ रही है। इसी तरह उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनकी सरकार थी, तब कांशीराम को भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया। राजीव पासवान ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक आरोप दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने ही बाबा साहब आंबेडकर को दो बार लोकसभा चुनाव हराने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी संस्थापक रामविलास पासवान के कार्यों को लेकर जनता के बीच जा रही है और उसे व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (रामविलास) का केंद्र और बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन है। चिराग पासवान वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं और बिहार की राजनीति में भी उनकी पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।
Azamgarh News In Hindi: पुलिस ने इंस्टाग्राम पर फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. गिरोह ने 13 बैंक खातों का इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर देशभर में लोगों को ठगने वाले संगठित साइबर गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है. साइबर क्राइम थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके कब्जे से मोबाइल, एटीएम कार्ड, सिम, बैंक पासबुक और डमी पार्सल समेत बड़ी मात्रा में सामान बरामद हुआ है. गुजरात के अहमदाबाद की एक युवती ने 9 मार्च 2026 को ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में जांच शुरू की गई. तकनीकी साक्ष्यों और प्रतिबिम्ब पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर 24 मार्च को कोतवाली क्षेत्र के कोल बाजबहादुर में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अवन राजभर उम्र 22 वर्ष निवासी ऊंचागांव थाना रानी की सराय और प्रियांशू यादव उम्र 19 वर्ष निवासी शिवरामपुर थाना तहबरपुर के रूप में हुई है. ऐसे देते थे ठगी को अंजाम पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम पर गंगा हिल्स, गंगा क्लॉथ और वेल्साइड क्लोथिंग जैसे नामों से फर्जी पेज बनाते थे. इन पेजों पर सस्ते दाम में आकर्षक प्रोडक्ट दिखाकर ग्राहकों को लुभाया जाता था. इसके बाद व्हाट्सएप बिजनेस के जरिए संपर्क कर ग्राहकों से क्यूआर कोड के माध्यम से एडवांस भुगतान कराया जाता था. भुगतान मिलने के बाद या तो सामान भेजा ही नहीं जाता था या फिर बेहद घटिया क्वालिटी का पार्सल भेजकर ग्राहकों को ब्लॉक कर दिया जाता था. जांच में सामने आया कि गिरोह ने ठगी के लिए 13 बैंक खातों का इस्तेमाल किया और असम, बंगाल, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से कुल 27 शिकायतें इन खातों के खिलाफ दर्ज हैं. बरामदगी में मिले अहम डिजिटल साक्ष्य पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 550 रुपये नगद, 13 बैंक पासबुक, 1 चेकबुक, 5 एटीएम कार्ड, 9 सिम कार्ड, 30 डमी पार्सल पैकेट और पैकेजिंग सामग्री बरामद की है. मोबाइल फोन की जांच में फर्जी आईडी, चैट और लेन-देन से जुड़े अहम डिजिटलसाक्ष्य भी मिले हैं. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66डी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. एसपी ट्रैफिक विवेक त्रिपाठी ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान शॉपिंग पेज या ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें. बिना पुष्टि के किसी भी क्यूआर कोड पर भुगतान न करें और ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.
UP Politics: सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पेंशन को फिर से लाकर हम महिलाओं की ताकत बढ़ाएंगे और साथ ही यूपी की संपूर्ण उन्नति के अपने संकल्प को निभाएंगे. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को ‘पीडीए’ में ‘ए’ का मतलब ‘आधी आबादी’ बताया और कहा कि इनको समृद्ध करने के लिए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएंगे. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान ‘पीडीए’ शब्द पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों को संबोधित करने के लिए गढ़ा था. अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ अग्रणी महिलाओं के साथ अपनी पत्नी सांसद डिंपल यादव समेत खुद की तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ‘‘आधी आबादी की पूरी आजादी व उनकी हिफाजत के साथ-साथ उनके हक-अधिकार, सशक्तीकरण व सबलीकरण के लिए हम सब सदैव कटिबद्ध-प्रतिबद्ध रहे हैं और रहेंगे.” उन्होंने कहा, “जब परिवार-समाज और देश को मजबूत करने वालों को सम्मान मिलता है तो उनका मान और मनोबल दोनों बढ़ता है. हम पीडीए में शामिल ‘ए’ मतलब ‘आधी आबादी’ अर्थात हर बच्ची, युवती, नारी, महिला को सामाजिक-आर्थिक रूप से समान सम्मान देने और अपने पैरों पर खड़े होने व उन्हें समृद्ध करने के लिए ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘समाजवादी पेंशन’’ को फिर से लाकर हम महिलाओं की ताकत बढ़ाएंगे और साथ ही ‘यूपी की संपूर्ण उन्नति’ के अपने संकल्प को निभाएंगे. इससे पहले सपा चीफ ने कहा कि अगर 2027 में उनकी सरकार बनती है तो नारी समृद्धि सम्मान योजना शुरू की जाएगी. इस योजना के तहत गरीब परिवार की महिलाओं को हर साल 40000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी. वहीं पूर्व सीएम ने कहा कि फसल बदलनी है तो बीज बदलने होंगे, स्त्री के प्रति जब मूलभूत मानसिक बीज बदलेंगे तभी उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा. इसी संदर्भ में ‘मालती देवी-मूर्ति देवी महिला सम्मान समारोह’ के माध्यम से हमने उन महिलाओं को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करने का प्रयास करा है जिनकी प्रतिभा, हिम्मत और सद्प्रयासों से नारी का सशक्त रूप उभर कर आया है.
Uttarakhand Cabinet Expansion: उत्तराखंड की धामी सरकार में पांच नए मंत्री शामिल हो गए हैं. राम सिंह कैड़ा, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी, मदन कौशिक और खजान दास ने मंत्री पद की शपथ ली. Pushkar Singh Dhami की सरकार का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार आखिरकार Navratri के शुभ अवसर पर संपन्न हो गया, जो उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक घटना के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पांच विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। यह विस्तार लंबे समय से चर्चा में था और राजनीतिक हलकों में इसके संकेत लगातार मिल रहे थे। राज्यपाल Gurmit Singh (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया, उनमें Khajan Das, Bharat Singh Chaudhary, Madan Kaushik, Pradeep Batra और Ram Singh Kaida शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले खजान दास के शपथ ग्रहण से हुई, जिसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ लेकर समारोह को एक विशेष सांस्कृतिक रंग दिया। इसके बाद मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। यह कैबिनेट विस्तार कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि धामी मंत्रिमंडल में लंबे समय से पांच पद खाली थे, जिससे सरकार के कामकाज और प्रशासनिक संतुलन पर असर पड़ रहा था। इन रिक्त पदों को भरने के साथ ही सरकार ने न केवल प्रशासनिक मजबूती हासिल की है, बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और विधायकों के पिछले प्रदर्शन को प्रमुख आधार बनाया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक फैसले ले रही है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह विस्तार भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को संतुलित करने का भी प्रयास है। पिछले कुछ समय से संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर चर्चा चल रही थी। ऐसे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों और विचार-विमर्श के बाद इस सूची को अंतिम रूप दिया गया। यह भी स्पष्ट है कि इस निर्णय में केवल राज्य स्तर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीति भी शामिल रही है। Navratri के दौरान इस विस्तार का होना भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है। भारतीय राजनीति में अक्सर धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों को शुभ समय के रूप में देखा जाता है, और इसी परंपरा के तहत इस विस्तार को भी एक नई शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकार अब एक नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगी। इस विस्तार के बाद सरकार की कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। नए मंत्री अपने-अपने विभागों में नई योजनाएं और नीतियां ला सकते हैं, जिससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि ये मंत्री अपने क्षेत्रों में जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं। आने वाले समय में इनकी भूमिका सरकार की छवि और प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी। इसके अलावा, यह विस्तार आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में क्षेत्रीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है, और इस बात का ध्यान रखते हुए ही मंत्रियों का चयन किया गया है। इससे पार्टी को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है। अगर व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो यह कैबिनेट विस्तार केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक रणनीतिक कदम है। इसके जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सक्रिय है, निर्णय लेने में सक्षम है और राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम विपक्ष के लिए भी एक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि इससे सत्तारूढ़ दल ने अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश की है। हालांकि, किसी भी कैबिनेट विस्तार की असली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नए मंत्री अपने दायित्वों को किस तरह निभाते हैं। केवल पद देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन पदों पर बैठकर प्रभावी काम करना ही असली कसौटी होती है। इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विस्तार कितना सफल साबित होता है। अंततः, Pushkar Singh Dhami सरकार का यह कदम उत्तराखंड की राजनीति में एक नई दिशा और गति देने वाला साबित हो सकता है। यह न केवल प्रशासनिक मजबूती का संकेत है बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा।
प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. उत्तराखंड कैडर के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को लेकर दायर याचिकाओं पर नैनीताल स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में विस्तृत बहस के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. न्यायालय ने दोनों पक्षों को 18 मार्च तक अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान प्रतिनियुक्ति से जुड़े नियमों और पदों की स्थिति पर भी चर्चा हुई. अदालत ने यह जानना चाहा कि राज्य कैडर से इस स्तर के कितने अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में भेजा जा सकता है और कितने पद स्थायी रूप से राज्य सरकार के अधीन रहते हैं. आईटीबीपी-बीएसएफ में है आदेश दरअसल, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) पद पर भेजने का आदेश जारी किया गया है. वहीं वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है. यह आदेश गृह मंत्रालय की ओर से 5 मार्च 2026 को जारी किए गए थे. 6 मार्च को जारी हुए थे आदेश केंद्र सरकार के आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने 6 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए थे. हालांकि, इन आदेशों को चुनौती देते हुए दोनों अधिकारियों ने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की. सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार में ऐसे कुल 16 पद हैं, जिन पर राज्य कैडर के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भेजा जा सकता है. बाकी पद राज्य सरकार के नियंत्रण में ही रहते हैं. अदालत ने इस जानकारी के बाद केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब देने को कहा है कि प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया किन नियमों और प्रावधानों के तहत की गई है. मामले में लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि तय की है. साथ ही दोनों सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तब तक अपने-अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें. अगली सुनवाई 18 मार्च को अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी, जिसमें अदालत सरकारों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय करेगी. यह मामला प्रशासनिक और सेवा नियमों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.
Haridwar News: उत्तराखंड सरकार के 4 वर्ष पूरे होने पर हरिद्वार में अमित शाह ने 1129 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया. धामी सरकार ने UCC लागू कर, SDG रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त किया. देवभूमि उत्तराखंड में विकास और सुशासन के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज हरिद्वार में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं. कार्यक्रम के दौरान वे राज्य में 1129.91 करोड़ की लागत से तैयार 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद हैं. हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम को धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि पिछले चार वर्षों में उत्तराखंड ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं और विकास की दिशा में नई मिसाल कायम की है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कई अहम नीतिगत फैसले लिए हैं. उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए. इसके साथ ही धर्मांतरण विरोधी और दंगारोधी कानून लागू कर कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने का प्रयास किया गया. सरकार का कहना है कि राज्य में सेवा, सुशासन और जनहित को केंद्र में रखकर विकास कार्यों को गति दी गई है. सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की रैंकिंग में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, जो राज्य के विकास मॉडल को दर्शाता है. वहीं व्यवसाय करने में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस) में भी राज्य को ‘अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान मिला है. धामी सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ भी बड़ा अभियान चलाया पर्यटन और फिल्म शूटिंग के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नई पहचान बनाई है. राज्य को लगातार चार वर्षों तक ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. वहीं चारधाम यात्रा में हर वर्ष नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिला है. धामी सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ भी बड़ा अभियान चलाया. राज्य के इतिहास में पहली बार 12 हजार एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया. इसके साथ ही खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी कई योजनाएं शुरू की गईं. सरकार ने नकल विरोधी कानून लागू किया युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने नकल विरोधी कानून लागू किया, जिसके बाद पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई. हरिद्वार में आयोजित यह कार्यक्रम राज्य सरकार के चार वर्षों की उपलब्धियों को समर्पित है, जिसमें विकास कार्यों, सुशासन और भविष्य की योजनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को विकास के नए आयाम तक पहुंचाना है.
LPG Price Hike: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में दाम 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये की बढ़ोत्तरी की है. इस पर यूपी की महिलाओं की प्रतिक्रिया सामने आई है. मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की आम जनता की जेब पर दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है और इसका सीधा असर भारत में एलपीजी गैस की कीमतों पर देखने को मिला है। भारत में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर यानी 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। नई दरें आज से लागू हो गई हैं, जिससे देशभर में करोड़ों परिवारों को महंगाई का एक और झटका लगा है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों के मासिक बजट पर पड़ने वाला है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है क्योंकि पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में एलपीजी गैस का उपयोग करोड़ों परिवारों की रसोई का आधार बन चुका है। ऐसे में इसकी कीमत में छोटी सी बढ़ोतरी भी बड़े आर्थिक प्रभाव पैदा करती है। अब 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कई शहरों में और ज्यादा हो गई है। इंडियन ऑयल ने बढ़ाई कीमतें घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान Indian Oil Corporation द्वारा किया गया है। कंपनी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण एलपीजी की लागत बढ़ी है, जिसके चलते कीमतों में बदलाव करना पड़ा है। तेल कंपनियों के अनुसार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने का असर सीधे एलपीजी के दामों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है। घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा नए फैसले के बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी देश के अलग-अलग शहरों में लागू हो गई है। घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग भारत के अधिकांश परिवारों की रसोई में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का मतलब है कि हर महीने घर का बजट प्रभावित होगा। कई परिवार पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं। खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ना लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है। कमर्शियल सिलेंडर भी महंगा घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए हैं। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल और रेस्टोरेंट अपने खाने के दाम बढ़ा सकते हैं। इसका मतलब है कि बाहर खाना भी अब पहले से ज्यादा महंगा हो सकता है। ईरान-इजरायल तनाव का असर मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। मध्य पूर्व दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष वैश्विक बाजार को प्रभावित करता है। जब तेल और गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती हैं, तो इसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव सीधे घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं। जनता की जेब पर असर एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ता है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से हर महीने घर का बजट प्रभावित होता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी समस्या बन सकती है। पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच अब रसोई का खर्च और बढ़ जाएगा। मुरादाबाद की महिलाओं की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कई महिलाओं ने गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। Moradabad एक महिला ने कहा कि सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और पहले से ही कई तरह की आर्थिक समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि आमदनी कम है और खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। एक अन्य गृहिणी ने भी कहा कि जब वे सिलेंडर लेने गईं तो पता चला कि कीमत बढ़ गई है। उनका कहना है कि महंगाई बढ़ने से परिवार का खर्च आमदनी से ज्यादा हो जाता है। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महंगाई पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। जब कमर्शियल सिलेंडर महंगा होता है तो होटल और रेस्टोरेंट अपने खाने के दाम बढ़ा देते हैं। इसके अलावा छोटे व्यवसायों की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे बाजार में कई वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है। सरकार के सामने चुनौती एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी सरकार के लिए भी चुनौती बन सकती है क्योंकि महंगाई हमेशा एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा होती है। सरकार को एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ जनता को राहत देने की जिम्मेदारी भी होती है। भविष्य में क्या हो सकता है ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जारी रहता है तो तेल और गैस की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
Dhurandhar 2 Advance Booking: रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉलीवुड की सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है. हालांकि ये एक साउथ हीरो की फिल्म को मात नहीं दे पा रही है. रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अर्जुन रामपाल स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही गदर मचाया हुआ है. फिलहाल ये 18 मार्च, 2026 को होने वाले पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में गर्दा उड़ा रही है. वैसे ये फिल्म पहले ही 'स्त्री 2' के पेड प्रीव्यू शो को रिकॉर्ड को मिट्टी में मिलाकर बॉलीवुड के लिए इतिहास रच चुकी है. लेकिन आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म के साउथ के एक स्टार का रिकॉर्ड तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. धुरंधर 2 ने पेड प्रीव्यू के लिए एडवांस बुकिंग में कितनी कर ली है कमाई? धुरंधर को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली थी. ऐसे में इसकी सीक्वल धुरंधर द रिवेंज या धुरंधर 2 को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की तो पूरी उम्मीद है ही लेकिन ये फिल्म तो रिलीज से पहले ही कमाल कर रही है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर रही है. सैकनिल्क के मुताबिक, इसने पेड प्रीव्यू से अब तक 18.78 करोड़ (ब्लॉक्ड सीटों को छोड़कर) कमा लिएए हैं वहीं ब्लॉक सीटों के साथ इसका पेड प्रीव्यू के लिए प्री टिकट सेल का कलेक्शन 23.99 करोड़ पहुंच चुका है. देश भर में 8 हजार 31 शोज के लिए इसके 3 लाख 51 हजार 4 सौ 13 टिकट बिक चुके हैं. धुरंधर 2 ने स्त्री 2 को पछाड़ बनाया नया रिकॉर्ड बता दें कि कि 2024 में, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 ने इंडिया में पेड प्रीव्यू में 9.40 करोड़ की नेट कमाई करके नया माइलस्टोन हासिल किया था. लेकिन धुरंधर: द रिवेंज ने एडवांस बुकिंग में इससे कई गुना ज़्यादा सेल्स के साथ इसे धूल चटा दी है. इसकी के साथ .े बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम भी कर चुकी है. धुरंधर 2 के पवन कल्याण की OG को मात देने में छूटे पसीने इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि धुरंधर 2 ने पेड पीव्यू के लिए प्री सेल्स में बेशक धमाकेदार कमाई कर ली हैं लेकिन इसका टारगेट इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी पेड प्रीव्यू कमाई का रिकॉर्ड अपने नाम करना है. दरअसल पवन कल्याण की दे कॉल हिम OG ने 21 करोड़ के बड़े नेट कलेक्शन के साथ किसी इंडियन फिल्म के लिए अब तक के सबसे ज़्यादा पेड प्रीव्यू अपने नाम किए हुए हैं. फिलहाल रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 के लिए इस रिकॉर्ड को तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. हालांकि अभी फिल्म के पेड प्रीव्यू शो में 6 दिन बचे हैं और इसे पवन कल्याण के रिकॉर्ड को मात देने से सिर्फ 3 करोड़ के करीब पीछे है. इसलिए पूरी उम्मीद है कि धुरंधर 2 इस उपलब्धि को हासिल कर इतिहास रच सकती है.
Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे. बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है। नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी। नई सरकार का गठन कब होगा? राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है। इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है। क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा? अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा। संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन? नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। 2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। 3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा? अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं। विपक्ष की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। बिहार की राजनीति पर संभावित असर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं: बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था। आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.