Uttarakhand Cabinet Expansion: उत्तराखंड की धामी सरकार में पांच नए मंत्री शामिल हो गए हैं. राम सिंह कैड़ा, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी, मदन कौशिक और खजान दास ने मंत्री पद की शपथ ली.
Pushkar Singh Dhami की सरकार का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार आखिरकार Navratri के शुभ अवसर पर संपन्न हो गया, जो उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक घटना के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पांच विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। यह विस्तार लंबे समय से चर्चा में था और राजनीतिक हलकों में इसके संकेत लगातार मिल रहे थे। राज्यपाल Gurmit Singh (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया, उनमें Khajan Das, Bharat Singh Chaudhary, Madan Kaushik, Pradeep Batra और Ram Singh Kaida शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले खजान दास के शपथ ग्रहण से हुई, जिसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ लेकर समारोह को एक विशेष सांस्कृतिक रंग दिया। इसके बाद मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
यह कैबिनेट विस्तार कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि धामी मंत्रिमंडल में लंबे समय से पांच पद खाली थे, जिससे सरकार के कामकाज और प्रशासनिक संतुलन पर असर पड़ रहा था। इन रिक्त पदों को भरने के साथ ही सरकार ने न केवल प्रशासनिक मजबूती हासिल की है, बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और विधायकों के पिछले प्रदर्शन को प्रमुख आधार बनाया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक फैसले ले रही है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह विस्तार भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को संतुलित करने का भी प्रयास है। पिछले कुछ समय से संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर चर्चा चल रही थी। ऐसे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों और विचार-विमर्श के बाद इस सूची को अंतिम रूप दिया गया। यह भी स्पष्ट है कि इस निर्णय में केवल राज्य स्तर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीति भी शामिल रही है।
Navratri के दौरान इस विस्तार का होना भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है। भारतीय राजनीति में अक्सर धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों को शुभ समय के रूप में देखा जाता है, और इसी परंपरा के तहत इस विस्तार को भी एक नई शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकार अब एक नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगी।
इस विस्तार के बाद सरकार की कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। नए मंत्री अपने-अपने विभागों में नई योजनाएं और नीतियां ला सकते हैं, जिससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि ये मंत्री अपने क्षेत्रों में जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं। आने वाले समय में इनकी भूमिका सरकार की छवि और प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी।
इसके अलावा, यह विस्तार आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में क्षेत्रीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है, और इस बात का ध्यान रखते हुए ही मंत्रियों का चयन किया गया है। इससे पार्टी को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
अगर व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो यह कैबिनेट विस्तार केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक रणनीतिक कदम है। इसके जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सक्रिय है, निर्णय लेने में सक्षम है और राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम विपक्ष के लिए भी एक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि इससे सत्तारूढ़ दल ने अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश की है।
हालांकि, किसी भी कैबिनेट विस्तार की असली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नए मंत्री अपने दायित्वों को किस तरह निभाते हैं। केवल पद देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन पदों पर बैठकर प्रभावी काम करना ही असली कसौटी होती है। इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विस्तार कितना सफल साबित होता है।
अंततः, Pushkar Singh Dhami सरकार का यह कदम उत्तराखंड की राजनीति में एक नई दिशा और गति देने वाला साबित हो सकता है। यह न केवल प्रशासनिक मजबूती का संकेत है बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा। समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर? 1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा। 2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। 3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है। 4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं। 5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनियों को 120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी… 1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है। 2. BSNL अफसर का मामला हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है। नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग? सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।
Causes Of Bloating And Gas: हम क्या खाते हैं, इसका हमारी सेहत पर काफी असर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन फूड कॉम्बिनेशन से आपको बचना चाहिए और आयुर्वेद इसको लेकर क्या कहता है Which Foods Should Not Be Eaten Together: खाना खाते समय हमें कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है. हम क्या खाते हैं और किन चीजों को साथ में मिलाकर खाते हैं, इसका सीधा असर हमारे डाइजेशन शक्ति पर पड़ता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन पाचन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक तत्व जमा कर सकते हैं. इसका नतीजा गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. चलिए आपको आयुर्वेद के हिसाब से बताते हैं कि किन कॉम्बिनेशन से हमें बचना चाहिए. क्या कहता है आयुर्वेद? आयुर्वेद के बारे में जानकारी देने वाली संस्था kevaayurveda के अनुसार, आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की वात, पित्त, कफ और पाचन क्षमता अलग होती है कुछ खानें की चीजें एक-दूसरे के विपरीत गुण रखते हैं. यदि इन्हें बार-बार साथ में खाया जाए तो डाइजेशन सिस्टम पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है. इससे गैस, कब्ज, सीने में जलन, मुंहासे, कमजोर इम्यूनिटी और डाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. किन फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए? kevaayurveda के अनुसार, कुछ प्रमुख गलत फूड कॉम्बिनेशन जिनसे बचने की सलाह दी जाती है, उनमें सबसे पहले आता है दूध और मछली. आयुर्वेद के अनुसार दूध ठंडा और भारी होता है, जबकि मछली गर्म तासीर वाली मानी जाती है. दोनों को साथ लेने से पाचन गड़बड़ा सकता है और स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी तरह दूध के साथ खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू या अनानास भी ठीक नहीं माने जाते, क्योंकि ये पेट में दूध को फाड़ सकते हैं और गैस या एसिडिटी बढ़ा सकते हैं. गरम भोजन के साथ शहद मिलाना भी आयुर्वेद में हानिकारक बताया गया है. शहद को गर्म करने से उसके गुण बदल सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक प्रभाव पैदा हो सकता है. भारी भोजन के तुरंत बाद फल खाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि फल जल्दी पचते हैं और भारी भोजन के साथ पेट में फर्मेंटेशन शुरू कर सकते हैं. दही और चीनी का मेल भी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. दही पहले से ही खट्टा और ठंडा होता है, जबकि रिफाइंड चीनी शरीर में असंतुलन बढ़ा सकती है. रात में दही को फल या ठंडी चीजों के साथ लेना कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या हो सकती है. बासी भोजन के साथ दूध लेना भी पाचन के लिए सही नहीं माना गया. किन चीजों का सेवन करना चाहिए? आयुर्वेद सलाह देता है कि मौसमी आहार लें, जरूरत से ज्यादा न खाएं और अदरक, जीरा, सौंफ जैसे मसालों का उपयोग करें, जो डाइजेशन को मजबूत बनाते हैं. सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाने से डाइजेशन मजबूत रहती है, न्यूट्रिशन तत्वों का ऑब्जर्वेशन बेहतर होता है और शरीर संतुलित रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह नियम और भी लाभकारी माने जाते हैं.
Uttarakhand Cabinet Expansion: उत्तराखंड की धामी सरकार में पांच नए मंत्री शामिल हो गए हैं. राम सिंह कैड़ा, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी, मदन कौशिक और खजान दास ने मंत्री पद की शपथ ली. Pushkar Singh Dhami की सरकार का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार आखिरकार Navratri के शुभ अवसर पर संपन्न हो गया, जो उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक घटना के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पांच विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। यह विस्तार लंबे समय से चर्चा में था और राजनीतिक हलकों में इसके संकेत लगातार मिल रहे थे। राज्यपाल Gurmit Singh (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया, उनमें Khajan Das, Bharat Singh Chaudhary, Madan Kaushik, Pradeep Batra और Ram Singh Kaida शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले खजान दास के शपथ ग्रहण से हुई, जिसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ लेकर समारोह को एक विशेष सांस्कृतिक रंग दिया। इसके बाद मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। यह कैबिनेट विस्तार कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि धामी मंत्रिमंडल में लंबे समय से पांच पद खाली थे, जिससे सरकार के कामकाज और प्रशासनिक संतुलन पर असर पड़ रहा था। इन रिक्त पदों को भरने के साथ ही सरकार ने न केवल प्रशासनिक मजबूती हासिल की है, बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और विधायकों के पिछले प्रदर्शन को प्रमुख आधार बनाया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक फैसले ले रही है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह विस्तार भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को संतुलित करने का भी प्रयास है। पिछले कुछ समय से संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर चर्चा चल रही थी। ऐसे में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों और विचार-विमर्श के बाद इस सूची को अंतिम रूप दिया गया। यह भी स्पष्ट है कि इस निर्णय में केवल राज्य स्तर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीति भी शामिल रही है। Navratri के दौरान इस विस्तार का होना भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है। भारतीय राजनीति में अक्सर धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों को शुभ समय के रूप में देखा जाता है, और इसी परंपरा के तहत इस विस्तार को भी एक नई शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकार अब एक नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगी। इस विस्तार के बाद सरकार की कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। नए मंत्री अपने-अपने विभागों में नई योजनाएं और नीतियां ला सकते हैं, जिससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि ये मंत्री अपने क्षेत्रों में जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं। आने वाले समय में इनकी भूमिका सरकार की छवि और प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी। इसके अलावा, यह विस्तार आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में क्षेत्रीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है, और इस बात का ध्यान रखते हुए ही मंत्रियों का चयन किया गया है। इससे पार्टी को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है। अगर व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो यह कैबिनेट विस्तार केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक रणनीतिक कदम है। इसके जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह सक्रिय है, निर्णय लेने में सक्षम है और राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम विपक्ष के लिए भी एक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि इससे सत्तारूढ़ दल ने अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश की है। हालांकि, किसी भी कैबिनेट विस्तार की असली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नए मंत्री अपने दायित्वों को किस तरह निभाते हैं। केवल पद देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन पदों पर बैठकर प्रभावी काम करना ही असली कसौटी होती है। इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विस्तार कितना सफल साबित होता है। अंततः, Pushkar Singh Dhami सरकार का यह कदम उत्तराखंड की राजनीति में एक नई दिशा और गति देने वाला साबित हो सकता है। यह न केवल प्रशासनिक मजबूती का संकेत है बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा।
Bihar Governor Oath News In Hindi: बिहार के नए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने आज लोकभवन में राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की. चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने उन्हें यह शपथ दिलाई. लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने आज (14 मार्च) बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की. पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने उन्हें लोकभवन ने इस पद की शपथ दिलाई. इससे पहले आरिफ मोहम्मद खान इस पद पर थे. शपथ ग्रहण के दौरान मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, मंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत उनके कई मंत्रिमंडल वहां मौजूद रहे. सैयद अता हसनैन ने हिंदी में शपथ ली. इसके बाद मु्ख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्यपाल की नियुक्ति संबंधि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पत्र पढ़कर सुनाया. जनरल सैयद अता हसनैन की अंतिम तैनाती सैन्य सचिव के रूप में थी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने शनिवार (14 मार्च) को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ली. पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने लोक भवन में आयोजित एक समारोह में हसनैन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. हसनैन ने आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लिया है. समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे. सेना में हसनैन की अंतिम तैनाती सैन्य सचिव के रूप में थी, जो वरिष्ठ स्तर के कार्मिक प्रबंधन के लिए जिम्मेदार एक महत्वपूर्ण पद है. इससे पहले, उन्होंने जम्मू कश्मीर में सेना की 15 कोर की कमान संभाली थी. सेवानिवृत्ति के बाद भी हसनैन राष्ट्रीय और शैक्षणिक भूमिकाओं में सक्रिय रहे. उन्हें 2018 में केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था. वह 2020 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य के रूप में शामिल हुए थे.
Delhi News In Hindi: जनकपुरी में खुले सीवर गड्ढे में गिरकर युवक की मौत के मामले में मुख्य ठेकेदार हिमांशु गुप्ता को दिल्ली पुलिस ने उदयपुर से गिरफ्तार किया. आरोपी को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है. दिल्ली के जनकपुरी में खुले सीवर गड्ढे में गिरकर युवक की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने मुख्य ठेकेदार हिमांशु गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसे लगातार तलाश के बाद राजस्थान के उदयपुर से 10 मार्च की सुबह हिरासत में लिया. आरोपी वहां छिपा हुआ था और अब उसे आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है. यह मामला 6 फरवरी 2026 की रात का है, जब दिल्ली जल बोर्ड के एक खुले और गहरे सीवर गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी. हादसे के बाद से ही पुलिस ठेकेदार और उससे जुड़े लोगों की तलाश कर रही थी. पुलिस के अनुसार इस मामले में गंभीर लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की भूमिका की जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी. क्या हुआ था ? जनकपुरी बाइकर मामला फरवरी 2026 की शुरुआत में दिल्ली के पश्चिमी इलाके जनकपुरी में हुआ एक दुखद हादसा था. इसमें 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी. कमल रोहिणी में एक निजी बैंक में टेलीकॉलर के रूप में काम करते थे और 5 फरवरी की देर रात अपनी अपाचे बाइक से घर लौट रहे थे. वे पालम स्थित कैलाशपुरी में अपने घर जा रहे थे और माता-पिता की शादी की सालगिरह मनाने के लिए जल्दी पहुंचना चाहते थे. रास्ते में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा पाइपलाइन कार्य के लिए लगभग 14 से 20 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था. यह गड्ढा बिना बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड या लाइट के खुला छोड़ दिया गया था, जिससे अंधेरे में उनकी बाइक सीधे उसमें गिर गई. दम घुटने के कारण हुई मौत हादसे के बाद कमल की बाइक उनके ऊपर गिर गई और वे गड्ढे में फंस गए. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत दम घुटने के कारण हुई. छाती पर भारी दबाव पड़ने से उनकी सांस रुक गई और उनकी मौत हो गई. सुबह एक महिला की सूचना पर पुलिस को घटना का पता चला. बताया गया कि कमल का शव करीब आठ घंटे तक गड्ढे में पड़ा रहा. जांच के दौरान सामने आया कि हादसे के बाद कुछ लोगों ने बैरिकेड और पर्दे लगाकर सबूत छिपाने की कोशिश भी की थी. अब तक सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति, कर्मचारी योगेश और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं और जांच जारी है.