धर्म और अध्यात्म

वैशाख अमावस्या 16 या 17 अप्रैल कब ? स्नान-दान का मुहूर्त, पितृ पूजा किस दिन करें

  Vaishakh Amavasya 2026: आत्मशुद्धि, पितृ तृप्ति और पुण्य संचय का महापर्व   हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या को अत्यंत पवित्र और फलदायी तिथि माना जाता है। वर्ष 2026 में यह अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी, जबकि पंचांग के अनुसार इसकी तिथि 16 अप्रैल की रात 08:11 बजे शुरू होकर 17 अप्रैल की शाम 05:21 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 17 अप्रैल को इसका पालन करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।   पुराणों, विशेष रूप से स्कंद पुराण में वर्णित है कि जो व्यक्ति वैशाख मास की अमावस्या पर श्रद्धा और नियमपूर्वक स्नान व दान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से पापों का नाश होता है और आत्मा की शुद्धि होती है। इसके साथ ही पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।   धार्मिक दृष्टि से इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। व्रत रखकर विष्णु पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसके अलावा पीपल के पेड़ की पूजा भी अत्यंत शुभ मानी जाती है, क्योंकि उसमें त्रिदेवों का वास माना जाता है। शाम के समय पीपल के नीचे या नदी किनारे दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।   वैशाख अमावस्या पर दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र, फल, छाता और दक्षिणा देना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाना और सात्विक जीवन अपनाना व्यक्ति के जीवन में शुभ फल लेकर आता है। यह दिन आत्मशुद्धि, सेवा और भक्ति के माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का उत्तम अवसर प्रदान करता है।  

Metroheadlines अप्रैल 7, 2026 0
हनुमान जयंती पर पढ़ें ये पावन कथा, जानें कैसे शिव के अंशावतार में जन्मे बजरंगबली

  Hanuman Jayanti Vrat Katha In Hindi: चैत्र पूर्णिमा पर आज 2 अप्रैल को धूमधाम से हनुमान जयंती मनाई जा रही है. इस पावन दिन पर जानिए कैसे शिव 11वें रुद्रावतार के रूप में पवनपुत्र बजरंगबली ने लिया जन्म.     Hanuman Jayanti Vrat Katha In Hindi: हनुमान जयंती का दिन बहुत ही विशेष होता है. हर साल चैत्र महीने की पूर्णिमा को हनुमान जयंती का हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस साल हनुमान जयंती आज गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को मनाई जा रही है.   हनुमान जयंती पर भक्त पूजा-पाठ करते हैं और व्रत रखते हैं. साथ ही इस पवित्र दिन पर हनुमान जी के जीवन से जुड़ी कथा का पाठ करना भी अत्यंत ही फलदायी माना जाता है. इसलिए आज हनुमान जी की पूजा, मंत्र जाप, हनुमान चालीसा का पाठ आदि के साथ ही हनुमान जी के जन्म से जुड़ी ये पौराणिक कथा जरूर पढ़ें.     हनुमान जन्म कथा (Hanuman Birth Story in Hindi)   हनुमान जी के जन्म को लेकर रामायण, शिव पुराण, सकंद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है. इन सभी को हनुमान को शिव का 11वां रुद्रावतार बताया गया है.   पौराणिक कथाओं के अनुसार, अंजना एक अप्सरा थी. ऋषि के श्राप के कारण उसे पृथ्वी पर वानर रूप में जन्म लेना पड़ा. श्राप से मुक्ति के लिए अंजना ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की. अंजना की तपस्या से और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया.   अंजना जब शिवजीकी तपस्या कर रही थीं, उसी समय अयोध्या के राजा दशरथ भी अपनी पत्नियों के साथ पुत्रेष्टि के लिए यज्ञ करा रहे थे. यज्ञ से अग्निदेव प्रसन्न हुए और प्रकट होकर राजा दशरथ को दिव्य खीर का प्रसाद दिया. राजा ने अपनी तीनों रानियों में इस खीर को बांट दिया. लेकिन इस दिव्य खीर प्रसाद के साथ एक अद्भुत घटना भी घटी.   दोनों रानियों ने खीर ग्रहण कर लिया. लेकिन रानी कैकयी का खीर एक चील झपट्टा मारकर ले उड़ा. उड़ते हुए चील अंजना के आश्रम से होकर गुजरा. अंजना शिव तपस्या में लीन थी. तभी वायु देव की प्रेरणा से उड़ते हुए चील से खीर का प्रसाद अंजना के हाथों में गिरा, जिसे उसने भगवान का प्रसाद समझकर ग्रहण कर लिया. इस दिव्य संयोग और भगवान शिव के आशीर्वाद से अंजना के गर्भ से एक अत्यंत बलशाली बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम मारुति रखा गया.   मारुति हनुमान, बजरंगबली और पवनपुत्र के नाम से प्रसिद्ध हुए. बाद वे रामभक्त भी कहलाए. इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के कारण हनुमान को पवनपुत्र और भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार भी कहा जाता है.   Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि metroheadlines.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Metroheadlines अप्रैल 2, 2026 0
अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय

  Vikat Sankashti Chaturthi 2026 Date: वैशाख की विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को है. ये बड़ी चतुर्थी होगी ऐसे में गणपति की पूजा का मुहूर्त, चंद्रोदय समय और समस्त जानकारी यहां देखें.     Vaishakh Sankashti Chaturthi 2026: साल में 4 बड़ी चतुर्थी होती है माघ, वैशाख, कार्तिक और भाद्रपद माह में आने वाली चतुर्थी का बहुत महत्व है. वैशाख माह की विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को है. गणेश पुराण और स्कंद पुराण में वैशाख की संकष्टी चतुर्थी का महत्व कई गुना बताया गया है.   गणेश पुराण के अनुसार “संकष्टचतुर्थ्यां तु यः कुर्यात् श्रद्धयान्वितः। तस्य सर्वाणि विघ्नानि नश्यन्ति गणनायकात्॥” अर्थात जो व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी का व्रत श्रद्धा से करता है, उसके सभी विघ्न भगवान गणेश की कृपा से नष्ट हो जाते हैं. ये व्रत सालभर की चतुर्थी व्रत करने का समान फल देता है.     वैशाख संकष्टी चतुर्थी 2026 मुहूर्त   लैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल 2026 को सुबह 11.59 पर शुरू होगी और अगले दिन 6 अप्रैल 2026 को दोपहर 2.10 पर समाप्त होगी.   पूजा मुहूर्त - सुबह 7.41 - दोपहर 12.24 शाम का मुहूर्त - शाम 6.41 - रात 10.58     वैशाख संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय समय   वैशाख माह के विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन 5 अप्रैल 2026 को चंद्रमा रात 9.58 पर निकलेगा. पुराणों के अनुसार “चन्द्रदर्शनमात्रेण पूर्णं भवति तत् व्रतम्।” अर्थात - चंद्रमा के दर्शन से ही ये व्रत पूर्ण ाना जाता है.     वैशाख संकष्टी चतुर्थी को क्यों कहते बड़ी चतुर्थी   न वैशाखसमो मासो न दानं सममुदाहृतम्। न तीर्थं गङ्गया तुल्यं न देवः केशवात्परः॥”   पद्म पुराण के अनुसार वैशाख के समान कोई मास नहीं, दान के समान कोई पुण्य नहीं, गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं और केशव (विष्णु) से बड़ा कोई देव नहीं. यही वजह है कि वैशाख माह में किया गया हर व्रत, दान, स्नान अक्षय फल (जिसका कभी क्षय यानी जो कभी खत्म नहीं होता)  इसलिए वैशाख की संकष्टी चतुर्थी को बड़ी चतुर्थी कहा जाता है.     वैशाख संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि   सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें भगवान गणेश का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें घर के मंदिर या साफ स्थान पर चौकी रखें लाल या पीला कपड़ा बिछाएं गणेश जी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें दूर्वा (घास), मोदक या लड्डू, रोली, अक्षत, फूल धूप, दीप, नारियल चढ़ाएं धूप-दीप जलाएं, “ॐ गणेशाय नमः” का जाप करें विकट संकष्टी चतुर्थी की कथा सुनें और आरती करें. दिनभर उपवास रखें (फलाहार कर सकते हैं) मन, वाणी और कर्म से शुद्ध रहें रात में चंद्रमा के दर्शन करें, अर्घ्य दें. चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें, प्रसाद ग्रहण करें     वैशाख संकष्टी चतुर्थी कथा   मुद्गल पुराण के अनुसार कामासुर नामक दैत्य का दमन करने हेतु भगवान गणेश, विकट रूप में अवतरित हुये थे. भगवान विकट का स्वरूप अत्यन्त विशाल है. वे विभिन्न शस्त्रों को धारण किये हुये मयूर पर आरूढ़ रहते हैं. भगवान विकट की गदा के मात्र एक प्रहार से ही कामासुर परास्त हो गया था. अपने प्राणों की रक्षा हेतु उसने भगवान विकट की शरण में जाने का निश्चय किया जिसके कारण समस्त लोकों को उसके त्रास से मुक्ति प्राप्त हुई. समस्त प्रकार के ज्ञात-अज्ञात भय, रोग, शोक एवं दुर्घटनाओं से मुक्ति हेतु भगवान विकट की पूजा की जाती है.

Metroheadlines मार्च 31, 2026 0
आज सोम प्रदोष व्रत और अनंग त्रयोदशी का संयोग, पूजा का मुहूर्त, पूरा पंचांग देखें ?

  Aaj Ka Panchang 30 March 2026: 30 मार्च 2026 सोम प्रदोष व्रत और अनंग त्रयोदशी है.   जानें आज का अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल, चंद्रमा का गोचर, शुभ-अशुभ समय और इस दिन का उपाय.     Hindi Panchang 30 मार्च 2026: 30 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल पक्ष का सोम प्रदोष व्रत और अनंग त्रयोदशी का संयोग बना है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कामदेव (जिन्हें 'अनंग' कहा जाता है) और रति की पूजा की जाती है, मान्यता है इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है. इस दिन कामदेव के मंत्र क्लीं कामदेवाय नमः का 21 बार जप करना चाहिए.   30 मार्च का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 30 March 2026)   तिथि द्वादशी (29 मार्च 2026, सुबह 7.46 - 30 मार्च 2026, सुबह 7.09, इसके बाद त्रयोदशी शुरू) वार सोमवार नक्षत्र मघा योग शूल, रवि योग सूर्योदय सुबह 7.15 सूर्यास्त सुबह 5.38 चंद्रोदय  दोपहर 4.16 चंद्रोस्त सुबह 5.00, 31 मार्च चंद्र राशि सिंह चौघड़िया मुहूर्त सुबह का चौघड़िया शुभ सुबह 6.14 - सुबह 7.47 शाम का चौघड़िया लाभ शाम 5.05 - रात 8.05     राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal) राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें) सुबह 7.49 - सुबह 9.20 यमगण्ड काल सुबह 10.53 - दोपहर 12.26  गुलिक काल दोपहर 1.59 - दोपहर 3.32 विडाल योग दोपहर 2.48 - सुबह 6.13, 31 मार्च     ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 30 March 2026) सूर्य मीन चंद्रमा सिंह मंगल कुंभ बुध कुंभ गुरु मिथुन शुक्र मेष शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह   30 मार्च 2026 का राशिफल   ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है. मेष: आज भाग्य साथ देगा, कार्यों में सफलता और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ेगा. वृषभ: खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन सहयोग मिलेगा—आत्मविश्वास संतुलित रखें. मिथुन: आय में वृद्धि और प्रेम जीवन में खुशियां, दिन उत्साह से भरा रहेगा. कर्क: करियर में सफलता और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी. सिंह: यात्रा और निवेश के योग, लेकिन सेहत और विरोधियों से सावधान रहें. कन्या: आत्मविश्वास से काम करें, तनाव से बचें और परिवार का सहयोग मिलेगा. तुला: प्रमोशन और धन लाभ के योग, रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी. वृश्चिक: खर्च बढ़ेंगे, लेकिन कार्यक्षेत्र में सराहना और मानसिक मजबूती रहेगी. धनु: आय में वृद्धि और प्रेम संबंधों में गहराई, नए अवसर मिलेंगे. मकर: प्रॉपर्टी से लाभ और परिवार में अच्छा तालमेल रहेगा. कुंभ: आत्मविश्वास बढ़ेगा, लेकिन निवेश और रिश्तों में सावधानी जरूरी है. मीन: आर्थिक लाभ और सुख-समृद्धि, परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा.   FAQs: 30 मार्च 2026   Q.कौन सा उपाय करें ? शादी हो चुकी है तो उसमें प्यार को बरकरार रखना चाहते हैं तो सोमवार के दिन दूध में थोड़ा सा केसर और कुछ फूल डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं.   Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ? इस दिन शूल और रवि योग बन रहा है.

Metroheadlines मार्च 30, 2026 0
अप्रैल-मई में शादी के शुभ दिन! जानें सही समय और तिथियां, कहीं चूक न जाएं!

  muhurat for marriage in april and may 2026:  14 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास रहने वाला है.   ऐसे में खरमास खत्म होने के बाद एक बार फिर से शादियों का सिलसिला शुरू हो जाएगा.   जानिए अप्रैल और मई के मुहूर्त?     Shubh muhurat for marriage in april and may 2026: हिंदू धर्म में खरमास के दौरान किसी भी तरह के नए या शुभ कार्य करने की मनाही होती है. 14 मार्च से खरमास शुरू होकर 14 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा. यह वह महीना होता है, जब शुभ कार्यों से बचना चाहिए. खरमास के दौरान लोग शादी, सगाई, रोका समारोह और इसी तरह के अन्य खास आयोजन नहीं करते हैं.   इन दिनों को ऐसे बड़े आयोजनों की योजना बनाने के लिए अशुभ माना जाता है, क्योंकि सूर्य वर्तमान में मीन राशि में गोचर कर रहा है.    नवजोड़ों के लिए शादी का शुभ मुहूर्त   शादी, सगाई, विशेषकर शादी करने वाले सबसे महत्वपूर्ण अवसर होते हैं, और वे इन आयोजनों की योजना पहले से ही बना लेते हैं. हम उन नए जोड़ों की भी मदद कर रहे हैं, जिन्होंने अभी-अभी रोका, सगाई और शादी की योजना बनाई है और अगले महीने सगाई करना चाहते हैं, या यूं कहें कि यह आखिरी समय का आयोजन है.   उनके लिए आखिरी समय में सब कुछ संभालना मुश्किल हो सकता है, इसलिए हम उन्हें उनके खास दिन के लिए शुभ मुहूर्त के साथ सही समय चुनने में मदद कर रहे हैं.   अप्रैल 2026 माह में विवाह शुभ मुहूर्त   तारीख  मुहूर्त नक्षत्र  तिथि 15 अप्रैल 2026, बुधवार दोपहर 3.22 से रात 10.31 तक  उत्तरा भाद्रपद त्रयोदाशी 20 अप्रैल 2026, सोमवार सुबह 5:51 बजे से शाम 5:49 बजे तक रोहिणी तृतीया, चतुर्थी 21 अप्रैल 2026, मंगलवार सुबह 5:50 से दोपहर 12:31 तक मृगशिरा पंचमी 25 अप्रैल 2026, शनिवार 26 अप्रैल, सुबह 2:10 से 5:45 बजे तक माघ दशमी 27 अप्रैल 2026, सोमवार रात 9:18 से रात 9:36 तक उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वा फाल्गुनी द्वादशी 28 अप्रैल 2026, मंगलवार 29 अप्रैल, रात 9:04 से सुबह 5:42 तक उत्तरा फाल्गुनी, हस्त त्रयोदाशी 29 अप्रैल 2026, बुधवार सुबह 5:42 बजे से रात 8:52 बजे तक हस्त त्रयोदशी, चतुर्दशी     मई 2026 में विवाह शुभ मुहूर्त     तारीख मुहुर्त नक्षत्र तिथि 1 मई 2026, शुक्रवार सुबह 10:00 बजे से रात 9:13 बजे तक स्वाति पूर्णिमा 3 मई 2026, रविवार सुबह 7:10 से रात 10:28 तक अनुराधा द्वितीय 5 मई 2026, मंगलवार शाम 7:39 से सुबह 5:36 तक, 6 मई मुला चतुर्थी 6 मई, 2026, बुधवार सुबह 5:36 से दोपहर 3:54 तक मुला चतुर्थी, पंचमी 7 मई, 2026, गुरुवार शाम 6:46 से सुबह 5:35 तक, 8 मई उत्तरा आषाढ़ा षष्ठी 8 मई 2026, शुक्रवार सुबह 5:35 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक उत्तरा आषाढ़ा षष्ठी 13 मई 2026, बुधवार 14 मई, रात 8:55 से सुबह 5:31 बजे तक उत्तरा भाद्रपद, रेवती द्वादशी 14 मई 2026, गुरुवार सुबह 5:31 बजे से शाम 4:59 बजे तक रेवती द्वादशी, त्रयोदशी       Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि metroheadlines.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Metroheadlines मार्च 28, 2026 0
महाअष्टमी पर PM Modi समेत कई राजनेताओं ने X पर दिया संदेश, महागौरी से की शक्ति-समृद्धि की प्रार्थना ?

  Navrari Maha Ashtami 2026: चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जा रही है. इस पावन दिन पर पीएम मोदी, योगी आदित्यनाथ, रेखा गुप्ता समेत कई राजनेताओं ने X पर संदेश साझा किया है.   Navrari Maha Ashtami 2026: गुरुवार 26 मार्च को देशभर में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि मनाई जही रही है. नवरात्रि का आठवां दिन देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महागौरी को नमन कर संदेश दिया है.   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा है-  “मां महागौरी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। उनकी दिव्य आभा हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और आरोग्य लेकर आए।”   इसके साथ ही पीएम मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, “श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”   यह श्लोक देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की स्तुति में गाया जाता है, जिसका अर्थ है- जो देवी श्वेत बैल (वृषभ) पर सवार हैं, जिन्होंने श्वेत वस्त्र धारण किए हैं, जो पवित्र हैं, और जो महादेव को प्रसन्न करने वाली हैं, वे महागौरी मुझे शुभता और कल्याण प्रदान करें.   प्रधानमंत्री के साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘X’ पर लिखा- "श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ जगज्जननी आदिशक्ति माँ दुर्गा के अष्टम स्वरूप माँ महागौरी की आराधना से साधक का जीवन पवित्रता, आत्मसंयम और शक्ति से आलोकित होता है। माँ की कृपा से श्रद्धालुओं की अभिलाषाएं पूर्ण हों, जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नव ऊर्जा का संचार हो, यही प्रार्थना है। जय माँ महागौरी!"   दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता  ने लिखा है- "महाअष्टमी के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ. शक्ति की उपासना के इस विशेष अवसर पर ममतामयी माँ महागौरी के चरणों में कोटि-कोटि नमन. कठोर तप से दिव्य गौर वर्ण प्राप्त करने वाली माँ का यह स्वरूप हमारे अंतर्मन के अंधकार को दूर कर जीवन में सात्त्विकता और सरलता का संचार करता है. माँ की असीम आभा हमें द्वेष से मुक्त होकर निष्काम भाव से मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देती है. माँ महागौरी की दिव्य कृपा से दिल्ली के हर परिवार में सुख, अटूट समृद्धि और मंगलकारी ऊर्जा का वास हो."   राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महाअष्टमी की शुभकामना देते हुए लिखा है- "आप सभी को दुर्गा अष्टमी पर हार्दिक शुभकामनाएं! माँ महागौरी का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे। देवी माँ हमें शक्ति और समृद्धि प्रदान करें."   इसके साथ ही उत्तराखंड के मुख्यंमंत्री पुष्कर सिंह धामी, शिवराज सिंह चौहान ने भी नवरात्रि के महाअष्टमी की शुभकामनाएं दी हैं.

Metroheadlines मार्च 26, 2026 0
अष्टमी-नवमी कब है कन्या पूजन? जानें महत्व, पूजा विधि और हर उम्र की कन्या का फल!

  Kanya Pujan 2026: इस साल 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई थी, जिसका समापन 27 मार्च का होगा. इस दौरान भक्त नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि के मौके पर कन्या भोजन का आयोजन करते हैं.   Kanya Pujan 2026: चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है. इस साल इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो रहे हैं, जिसका समापन 27 मार्च होगा. चैत्र नवरात्रि की धूम पूरे देश में है. माता की भक्ति में लीन भक्तों को अब अष्टमी और नवमी का इंतजार है. चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी.   श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो गई है. वहीं इसका समापन 27 मार्च  को होगा. चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी और चैत्र नवरात्रि की नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी.   नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर कन्या भोजन का आध्यात्मिक लाभ   अष्टमी और नवमी पर कन्याओं को भोजन कराया जाता है. नवरात्र के दौरान अलग-अलग दिनों में देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. व्रत रखने वाले भक्त कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं.   कन्याओं को देवी मां का स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख, शांति एवं सम्पन्नता आती है. कन्या भोज के दौरान नौ कन्याओं का होना आवश्यक होता है. इस बीच यदि कन्याएं 10 वर्ष से कम आयु की हो तो जातक को कभी धन की कमी नही होती और उसका जीवन उन्नतशील रहता है.   ज्योतिषाचार्य से जानिए कन्या पूजन का महत्व   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि नवरात्रि में कन्या पूजन का बहुत महत्व है. आमतौर पर नवमी को कन्याओं का पूजन करके उन्हें भोजन कराया जाता है. लेकिन कुछ श्रद्धालु अष्टमी को भी कन्या पूजन करते हैं. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या भोजन का विधान ग्रंथों में बताया गया है.   इसके पीछे भी शास्त्रों में वर्णित तथ्य यही हैं कि 2 से 10 साल तक उम्र की नौ कन्याओं को भोजन कराने से हर तरह के दोष खत्म होते हैं. कन्याओं को भोजन करवाने से पहले देवी को नैवेद्य लगाएं और भेंट करने वाली चीजें भी पहले देवी को चढ़ाएं. इसके बाद कन्या भोज और पूजन करें. कन्या भोजन न करवा पाएं तो भोजन बनाने का कच्चा सामान जैसे चावल, आटा, सब्जी और फल कन्या के घर जाकर उन्हें भेंट कर सकते हैं.   कन्या पूजन महाष्टमी और रामनवमी   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि नवरात्रि में कन्या पूजन या कुमारी पूजा, महाष्टमी और रामनवमी दोनों ही तिथियों को किया जाएगा. महाष्टमी को मां महागौरी और रामनवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. जिन घरों में महाष्टमी और महानवमी की पूजा होती है, वहां इस दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है और उन्हें गिप्ट बांटे जाते हैं.   पुराणों में है कन्या भोज का महत्व   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि पौराणिक धर्म ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार नवरात्री के अंतिम दिन कौमारी पूजन आवश्यक होता है. क्योंकि कन्या पूजन के बिना भक्त के नवरात्र व्रत अधूरे माने जाते हैं. कन्या पूजन के लिए अष्टमी और नवमी तिथि को उपयुक्त माना जाता है. कन्या भोज के लिए दस वर्ष तक की कन्याएं उपयुक्त होती हैं.   कन्या और देवी के शस्त्रों की पूजा   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि अष्टमी को विविध प्रकार से मां शक्ति की पूजा करें. इस दिन देवी के शस्त्रों की पूजा करनी चाहिए. इस तिथि पर विविध प्रकार से पूजा करनी चाहिए और विशेष आहुतियों के साथ देवी की प्रसन्नता के लिए हवन करवाना चाहिए.   इसके साथ ही 9 कन्याओं को देवी का स्वरूप मानते हुए भोजन करवाना चाहिए. दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा को विशेष प्रसाद चढ़ाना चाहिए. पूजा के बाद रात्रि को जागरण करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए.   हर आयु की कन्या का होता है अलग महत्व   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि 2 साल की कन्या को कौमारी कहा जाता है. इनकी पूजा से दुख और दरिद्रता खत्म होती है. 3 साल की कन्या त्रिमूर्ति मानी जाती है. त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और परिवार का कल्याण होता है.   4 साल की कन्या कल्याणी मानी जाती है. इनकी पूजा से सुख-समृद्धि मिलती है. 5 साल की कन्या रोहिणी माना गया है. इनकी पूजन से रोग-मुक्ति मिलती है. 6 साल की कन्या कालिका होती है. इनकी पूजा से विद्या और राजयोग की प्राप्ति होती है.   7 साल की कन्या को चंडिका माना जाता है. इनकी पूजा से ऐश्वर्य मिलता है. 8 साल की कन्या शांभवी होती है. इनकी पूजा से लोकप्रियता प्राप्त होती है.   9 साल की कन्या दुर्गा को दुर्गा कहा गया है. इनकी पूजा से शत्रु विजय और असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं. 10 साल की कन्या सुभद्रा होती है. सुभद्रा के पूजन से मनोरथ पूर्ण होते हैं और सुख मिलता है.   अष्टमी तिथि 26 मार्च   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च 2026 को सुबह 11:48 बजे तक रहेगी. ऐसे में नवरात्र की अष्टमी तिथि का व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा.    नवमी तिथि 27 मार्च   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11:46 मिनट पर होगा. वहीं इस तिथि का अंत 27 मार्च 2026 को सुबह 10:07 मिनट पर होगा. ऐसे में नवरात्र की नवमी तिथि का व्रत 27 मार्च को रखा जाएगा.    इस तरह करें पूजन   ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि कन्या पूजन के दिन घर आईं कन्याओं का सच्चे मन से स्वागत करना चाहिए. इससे देवी मां प्रसन्न होती हैं. इसके बाद स्वच्छ जल से उनके पैरों को धोना चाहिए. इससे भक्त के पापों का नाश होता है.   इसके बाद सभी नौ कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए. इससे भक्त की तरक्की होती है. पैर धोने के बाद कन्याओं को साफ आसन पर बैठाना चाहिए. अब सारी कन्याओं के माथे पर कुमकुम का टीका लगाना चाहिए और कलावा बांधना चाहिए.   कन्याओं को भोजन कराने से पहले अन्य का पहला हिस्सा देवी मां को भेंट करें, फिर सारी कन्याओं को भोजन परोसे. वैसे तो मां दुर्गा को हलवा, चना और पूरी का भोग लगाया जाता है. लेकिन अगर आपका सामाथ्र्य नहीं है तो आप अपनी इच्छानुसार कन्याओं को भोजन कराएं.   भोजन समाप्त होने पर कन्याओं को अपने सामथ्र्य अनुसार दक्षिणा अवश्य दें. क्योंकि दक्षिणा के बिना दान अधूरा रहता है.   विवाह में देरी यदि शादी में देरी हो रही है तो पांच साल की कन्या को खाना खिलाकर. श्रृंगार का सामान भेंट करें.   धन संबंधी समस्या पैसों की कमी से परेशान हैं तो चार साल की कन्या को खीर खिलाएं. इसके बाद पीले कपड़े और दक्षिणा दें.   शत्रु बाधा और काम में रुकावटें नौ साल की तीन कन्याओं को भोजन सामग्री और कपड़ें दें.   पारिवारिक क्लेश ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि तीन और दस साल की कन्याओं को मिठाई दें.   बेरोजगारी छह साल की कन्या को छाता और कपड़ें भेंट करें.   सभी समस्याओं का निवारण ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि पांच से 10 साल की कन्याओं को भोजन सामग्री देकर दूध, पानी या फलों का रस भेंट करें. सौन्दर्य सामग्री भी दें.

Metroheadlines मार्च 25, 2026 0
नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता की पूजा से बच्चों में बढ़ती है एकाग्रता! जानें विधि, मंत्र, भोग

  Chaitra Navratri 2026 Day 5 Puja: 23 मार्च को चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने से ऐश्वर्य और एकाग्रता मिलती है. ऐसे में माता की साधना के लिए इस दिन क्या करें जान लें.   Chaitra Navratri 2026 Day 5 Puja: नवरात्रि के 5वें दिन 23 मार्च 2026 को मां स्कंदमाता की पूजा होगी. ये माता दुर्गा की पांचवीं शक्ति हैं. स्कंदमाता” का अर्थ है- भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता.इनकी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, इसलिए इन्हें मातृत्व और करुणा का प्रतीक माना जाता है.   स्कंदमाता का स्वरूप   स्कंदमाता मां दुर्गा का अत्यंत करुणामयी और कल्याणकारी रूप हैं. चार भुजाएं होती हैं दो हाथों में कमल पुष्प एक हाथ में बाल स्कंद (कार्तिकेय) एक हाथ वरमुद्रा में वाहन - सिंह कमल के आसन पर विराजमान (इसी कारण “पद्मासना” भी कहा जाता है)   स्कंदमाता की पूजा करने के लाभ   यह स्वरूप ममता, दया और शक्ति का संगम है. मान्यता है कि जो लोग संतान प्राप्ति में बाधाएं झेल रहे, माता की कृपा से उनके घर जल्द ही किलकारियां गूंजती हैं. जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं. भक्त को भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है. स्कंदमाता भक्तों को एकाग्र रहना सिखाती हैं. वह बताती हैं कि जीवन अच्छे-बुरे के बीच एक देवासुर संग्राम है और हम खुद अपने सेनापति हैं. स्कंदमाता की पूजा करते रहने से हमें सैन्य संचालन की शक्ति मिलती रहती है. उनकी पूजा-आराधना से साधक को परम शांति और सुख का अनुभव होता है.   मां स्कंदमाता की पूजा विधि   सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सिल्वर रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि इस दिन सोमवार है. माता को कुमकुम, रोली, और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं. पूजा के दौरान "ॐ देवी स्कंदमातायै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें. कपूर या घी के दीपक से मां स्कंदमाता की आरती उतारें और स्तुति करें, जैसे: "या देवी सर्वभूतेषु मा स्कंद माता रूपेण संस्थिता". आरती उतारें और गोधुलि बेला में पुन माता की पूजा करें.   मां स्कंदमाता का भोग   मां स्कंदमाता की आराधना होती है. इस दिन केला या केले से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है.   मां स्कंदमाता मंत्र   पूजा मंत्र - ॐ देवी स्कंदमातायै नम: ध्यान मंत्र - सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।   स्कंदमाता की आरती   जय तेरी हो स्कंदमाता, पांचवां नाम तुम्हारा आता। सब के मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी। जय तेरी हो स्कंदमाता तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हर दम तुम्हें ध्याता रहूं मैं। कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा। जय तेरी हो स्कंदमाता कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरो में तेरा बसेरा। हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाए तेरे भक्त प्यारे। जय तेरी हो स्कंदमाता भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो। इंद्र आदि देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे। जय तेरी हो स्कंदमाता दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए, तुम ही खंडा हाथ उठाएं। दास को सदा बचाने आईं, चमन की आस पुराने आई। जय तेरी हो स्कंदमाता   स्कंदमाता देती हैं ये सीख   स्कंदमाता का यह रूप बताता है कि मोह माया में रहते हुए भी किस तरह बुद्धि और विवेक से असुरों का नाश करना चाहिए. माता को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है इसलिए इन्हें अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है.

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0
Happy Cheti Chand 2026 Wishes: चेटी चंड 20 मार्च 2026 आज झूलेलाल जयंती मनाई जा रही है.

    भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव पर सिंधी प्रियजनों को ये मैसेज भेजकर शुभकामनाएं दें.   Happy Cheti Chand 2026 Wishes: आज चेटीचंड है, इसे झूलेलाल जयंती भी कहते हैं. इस मौके पर आप भी अपनों को चेटी चंड की शुभकामनाएं भेज सकते हैं. आर्टिकल में झूलेलाल जंयती की अनेक शुभकामनाएं हम आपके लिए लेकर आए हैं. उससे पहले इस दिन का महत्व जान लें. चेटी चंड का दिन भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि उन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जन्म लिया और अपने भक्तों को अत्याचारों से मुक्ति दिलाई. भगवान झूलेलाल को जल का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन जल की पूजा की जाती है. यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी पर्व है.   सिंधी समाज का नया साल इसी दिन से शुरू होता है. इसलिए इसे नए आरंभ और नई उम्मीदों का प्रतीक माना जाता है. भक्तजन भगवान झूलेलाल की प्रतिमा की पूजा करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इस दिन “बहराना साहिब” निकाला जाता है, जिसमें दीप, फल, नारियल और कलश सजाकर जल के पास ले जाया जाता है.   जल के देव भगवान झूलेलाल आपकी हर मनोकामना पूरी करें, आपके जीवन में खुशियों की लहरें लाएं. चेटीचंड की शुभकामनाएं   आओ मिलकर मनाएं खुशियों का त्योहार, झूलेलाल जी करें सबका उद्धार. आपके जीवन में खुशियां हों अपार झूलेलाल जयंती की शुभकामनाएं   नए साल की नई शुरुआत, खुशियों की बरसात हो, हर दिन आपका खास हो. चेटी चंड की शुभकामनाएं   जय झूलेलाल” की गूंज से हर दिल में उमंग छाए, भगवान झूलेलाल की कृपा से आपका जीवन सुखमय बन जाए   झूलेलाल जी का आशीर्वाद हमेशा आपके साथ बना रहे, हर दिन खुशियों से भरा रहे. चेटीचंड की शुभकामनाएं   आपका जीवन दीप की तरह हमेशा उज्जवल और खुशहाल रहे। चेटी चंड मंगलमय हो.   भगवान झूलेलाल से प्रार्थना है कि आपके जीवन में उनके  आशीष से सदैव सुख, शांति और भाईचारा स्थापित रहे. झूलेलाल जयंती की शुभकामनाएं   झूलेलाल जी का आशीर्वाद हमेशा आपके साथ बना रहे. आपका हर दिन मंगलमय हो. चेटी चंड की शुभकामनाएं.   झूलेलाल जी की कृपा से आपके सभी सपने पूरे हों, और जीवन में खुशियां ही खुशियां हों. चेटी चंड की ढेरों शुभकामनाएं.   Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.  

Metroheadlines मार्च 20, 2026 0
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पाएं तप, ज्ञान और मनोवांछित फल! जानें विधि, मंत्र और आरती

  Navratri Second Day Brahmacharini: नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जो तप और संयम की देवी हैं. जानिए दूसरे दिन माता की पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती, और शुभ योग के बारे में?   Chaitra Navratri Second Day of Goddess Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. जहां पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है, वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दे रहे हैं.    मां दुर्गा का दूसरा अवतार देवी ब्रह्मचारिणी तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी हैं. माता को सफेद रंग के वस्त्र, चंदन, फूल और श्वेत मिठाई चढ़ाया जाता है. इस दिन का काफी खास महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है. आइए जानते हैं उनके मंत्र, पूजा विधि, कथा और आरती से जुड़ी सटीक जानकारी के बारे में.   मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ?   मां ब्रह्मचारिणी तप शक्ति का प्रतीक हैं. ब्रह्मचारिणी माता की आराधना से भक्तों में तप की शक्ति बढ़ती है. इसके अलावा उन्हें मनोवांछित फल की भी प्राप्ति होती है. देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से दूसरे स्वरूप का नाम देवी ब्रह्मचारिणी है. नवरात्रि के दूसरे दिन के दौरान मां के इस अवतार की पूजा संपूर्ण विधि-विधान से करनी चाहिए.    'ब्रह्मचारिणी' नाम का मतलब ब्रह्म और चारिणी से मिलकर बना हुआ है. ब्रह्म का अर्थ है तप या तपस्या, वही चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. ऐसे में ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ है, तप का आचरण करने वाली देवी.   पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए मां ने इस रूप में कठोर तपस्या की थी.    नवरात्र के दूसरे दिन खास योग!   चैत्र नवरात्रि के दूसरे सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही शनिवार दोपहर2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक विजय मुहूर्त का संयोग बन रहा है.   धार्मिक मान्यता है कि, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए काम सफल होते हैं और राहुकाल में कोई नया काम या पूजा करने से वह निष्फल होता है.    मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja Vidhi)   नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद आसन पर बैठकर मां का ध्यान करते हुए पूजा करें. उन्हें फूल, चंदन, अक्षत, रोली, धूप, भोग आदि अर्पित करें.   मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं. उसके बाद मां को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करें. उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करना शुभ माना जाता है.    मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ा ध्यान मंत्र (Maa Brahmacharini Mantra)   या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू। देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥   इस मंत्र का अर्थ है कि, देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप दिव्यता से भरा है. माता के दाहिने हाथ में जप की माला तो बाएं हाथ में कमंडल है.  माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करने के लिए ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए.    मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग (Maa Brahmacharini Bhog) नवरात्र के दूसरे मां ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग शर्करा या गुड़ अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से आयुष्मान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.    ब्रह्मचारिणी माता जी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti)   जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी।   रखना लाज मेरी महतारी।आरती करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान दें कि, देवी-देवताओं की 14 बार आरती उतारना है. 4 बार उनके चरणों पर से, 2 बार नाभि पर से, 1 बार मुख पर से और 7 बार पूरे शरीर पर से. आरती की बत्तियां 1, 5, 7 यानी विषम संख्या में ही बनाकर आरती करनी चाहिए.

Metroheadlines मार्च 20, 2026 0
चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग, जानें किस देवी को कौन सा भोग लगाना शुभ

  Chaitra Navratri Bhog: चैत्र नवरात्रि में माता रानी 9 रूपों की पूजा होती है. इन 9 दिनों में माता को उनका प्रिय भोग लगाया जाता है. जानें नवरात्रि के 9 दिनों में 9 देवियों को किस दिन कौन सा भोग लगाएं.     चैत्र नवरात्रि 2026 भोग   Chaitra Navratri 2026 Bhog: नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि. नवरात्रि के 9 दिनों में श्रद्धापूर्वक और विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं.   पूरे साल में वैसे तो कुल चार नवरात्रि पड़ती है, जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना है. इनमें दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती है. चैत्र महीने में पड़ने वाली चैत्र नवरात्रि प्रकट नवरात्रि है, जिसमें भक्त 9 दिनों तक व्रत नियमों का पालन करते हैं और 9 दिनों तक पूजा-अर्चना की जाती है.   चैत्र नवरात्रि कब है (Chaitra Navratri 2026 Date)   पंचांग के मुताबिक चैत्र महीने की नवरात्रि चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा से शुरू होकर चैत्र नवमी तिथि तक चलती है. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 को शुरू होगी. इसी दिन हिंदू नव वर्ष भी रहेगा. वहीं 27 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाएगा. इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाएगी. मां दुर्गा को समर्पित नौ दिवसीय नवरात्रि का पर्व माता रानी का आशीर्वाद पाने और जीवन में सकारात्मकता लाने के विशेष अवसर की तरह होता है, जब मां स्वयं 9 दिनों तक धरतीलोक पर वास करती हैं.   चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग (Chaitra Navratri 2026 Nine days Durga 9 Forms and 9 bhog List)     चैत्र नवरात्रि के अलग-अलग दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है और हर दिन विशेष भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि, देवी को प्रिय भोग अर्पित करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी को कौन सा भोग अर्पित करना शुभ होता है.       पहला दिन (Day 1)- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती. इन माता को खीर का भोग लगाना शुभ होता है. मान्यता है कि इससे सेहत स्वस्थ रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है.   दूसरा दिन (Day 2)- चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. पूजा में आप इन माता को मिश्री, चीनी या शक्कर से बनी चीजों का भोग लगा सकते हैं. इससे सुख-शांति और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है.   तीसरा दिन (Day 3) – चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग अर्पित करना चाहिए. इससे जीवन के समस्त दुख और कष्ट दूर होते हैं.   चौथा दिन (Day 4)- चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है. इन्हें पीला रंग प्रिय है और भोग स्वरूप आप मालपुआ का भोग लगा सकते हैं, जोकि मां कूष्मांडा को प्रिय है.   पांचवां दिन (Day 5)- नवरात्रि का दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है. मां को केला भोग प्रिय है. इसलिए आप माता को केला या कच्चे केले से बनी बर्फी आदि का भोग लगा सकते हैं.   छठा दिन (Day 6)- चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है. माता को शहद या शहद से बनी चीजों का भोग लगा सकते हैं. इससे व्यक्तित्व में आकर्षण और तेज बढ़ता है.   सातवां दिन (Day 7)- नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि की पूजा के लिए समर्पित है. इस दिन माता को गुड़ या गुड़ का नैवेद्य भोग अर्पित कर सकते हैं. इससे भय और संकटों से मुक्ति मिलती है.   आठवां दिन (Day 8)- नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है. इस दिन मां को नारियल और नारियल से बनी चीजों का भोग अर्पित करना शुभ होता है. इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं.   नौवां दिन (Day 9)- नवरात्रि के अंतिम और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती. इस दिन माता रानी हलवा-पूरी, नारियल और चने का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है.

Metroheadlines मार्च 18, 2026 0
चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 या 18 मार्च कब ? शिव पूजा का मुहूर्त देखें

  Chaitra Masik Shivratri 2026: चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 मार्च को है. ये व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, शादी के लिए सुयोग्य जीवनसाथी, आर्थिक लाभ के लिए रखा जाता है.   Chaitra Masik Shivratri 2026: महाशिवरात्रि के बाद साल 2026 की पहली चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 मार्च 2026 को है. यह नियमित रूप से भगवान शिव की कृपा पाने के लिए किया जाने वाला व्रत है, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है. मासिक शिवरात्रि, महाशिवरात्रि से थोड़ी अलग होती है, इसकी पूजा विधि में अंतर है. ऐसे में चैत्र मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें व्रत, पूजन और क्या है इसके नियम.   चैत्र मासिक शिवरात्रि 2026 मुहूर्त   चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 17 मार्च 2026 को सुबह 9.23 पर शुरू होगी और अगले दिन 18 मार्च 2026 को सुबह 8.25 पर समाप्त होगी. पूजा मुहूर्त - देर रात 12.07 - देर रात 12.55, 18 मार्च   मासिक शिवरात्रि व्रत कैसे करें व्रत का संकल्प - व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें. इसके बाद घर के मंदिर या शिवालय में जाकर पूजा करें. शिवलिंग का अभिषेक करें. महाशिवरात्रि पर पूजा बड़े स्तर पर की जाती है लेकिन मासिक शिवरात्रि पर सामान्य रूप से पूजन कर सकते हैं. इन चीजों से करें पूजा - जल या गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग, सफेद फूल का इस्तेमाल करें. पूजा करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.   दिनभर व्रत रखें निर्जला व्रत (बिना जल के) फलाहार व्रत या केवल एक समय भोजन कर सकते हैं.   रात्रि में विशेष पूजा - मान्यता है कि इस दिन रात्रि काल में महादेव शिवलिंग में प्रकट रहते हैं.   अगले दिन व्रत का पारण - अगले दिन सुबह भगवान शिव की पूजा करके व्रत का पारण किया जाता है और जरूरतमंद लोगों को दान दिया जाता है.   मासिक शिवरात्रि व्रत के नियम व्रत के दिन सात्विक भोजन करें और लहसुन-प्याज से परहेज करें. मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें. क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहें. ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है. भगवान शिव के मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करें. संभव हो तो मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक अवश्य करें.  

Metroheadlines मार्च 17, 2026 0
Premanand Maharaj ने बताया भूत कैसे बदलते हैं रूप? जानें डर के पीछे का चौकानें वाला सच?

  Premanand Maharaj: भूत प्रेत का नाम सुनते ही अक्सर लोग डरने लगते हैं. कई लोग जानना चाहते हैं कि, भूत आखिर कैसे दिखते हैं और क्या वो सच में इंसानों के पास आ सकते हैं? संत प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?   Premanand Maharaj: भूत-प्रेत का विषय सालों से लोगों के मन में भय और जिज्ञासा दोनों पैदा करता रहा है. कई लोग यह जानना चाहते हैं कि, भूत आखिर दिखते कैसे हैं और क्या सच में वे इंसानों के सामने आ सकते हैं.   संत महात्माओं के मुताबिक भूतों का स्वरूप स्थिर नहीं होता, बल्कि वे पल-पल में अपना रूप बदलते रहते हैं. यही वजह है कि, उन्हें पहचानना आसान नहीं होता.    Premanand Maharaj मुझे भूतों का राजा बनना है प्रेमानंद महाराज से पूछा अजीब सवाल तो मिला ये जवाब   भूतों का रूप लगातार बदलता रहता है!   संतों के मुताबिक भूत किसी एक निश्चित आकृति में नहीं रहते. वे हर पल अपना रूप बदल सकते हैं. कभी वे स्त्री या पुरुष के रूप में दिखाई देते हैं, तो अगले ही क्षण उनका रूप अत्यंत भयावह और वीभत्स हो सकता है.  कभी वे सामान्य और परिचित स्वरूप में दिखाई देते हैं, तो कभी अचानक अत्यंत सुंदर या फिर डरावना रूप धारण कर लेते हैं.    यही कारण है कि भूतों का पहचानना आसान नहीं होता, क्योंकि उनकी आकृति हमेशा बदलती रहती है.    अधोहकि को प्राप्त जीवन बन जाते हैं भूतधार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जब किसी जीवन को अपने कर्मों के कारण अधोगति प्राप्त होती है, तो वह भूत योनि में चला जाता है. ऐसे जीवन अत्यंत कष्टदायक अवस्था में रहते हैं. कहा जाता है कि, भूत योनि में रहने वाले जीवों की स्थिति बहुत कठिन होती है. उनके सामने नदियां बहती रहती हैं, लेकिन वे एक बूंद पानी भी नहीं पी सकते हैं. भोजन उनके सामने होता है, लेकिन वे उसे खा नहीं सकते. वे केवल वायु के सहारे रहते हैं.    भूत इंसानों के पास क्यों आते हैं?   मान्यताओं के मुताबिक भूत हर व्यक्ति के पास नहीं जाते. वे सिर्फ वहां जाते हैं, जहां उन्हें लगता है कि, उनके दुख का समाधान हो सकता है.  यदि किसी संत या साधु के पास जाने से उन्हें मुक्ति या कल्याण की आशा होती है, तो वे उनके पास प्रकट होते हैं. संतों की कृपा या संकल्प से उन्हें मुक्ति मिलने की उम्मीद मानी जाती है.    भूतों का प्रभाव किन लोगों पर होता है?   धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भूतों का प्रभाव मुख्यत: उन लोगों पर अधिक पड़ता है, जो तमोगुण से प्रभावित होते हैं.  जो लोग गलत आचरण करते हैं, अपवित्र कर्मों में लगे रहते हैं या तंत्र-मंत्र जैसी चीजों का गलत इस्तेमाल करते हैं, उनके ऊपर भूत-प्रेत का प्रभाव होने की संभावना ज्यादा मानी जाती है. ऐसे लोगों के शरीर पर भूत होकर अपने कष्टों को कम करने की कोशिस करता है.   भगवान का नाम लेने से दूर रहते हैं भूत!   संतों के मुताबिक भूत-प्रेत उन लोगों के पास नहीं आते हैं, जो भगवान का नाम जपते हैं और ईश्वर की भक्ति में लगे रहते हैं.  मान्यता है कि, जहां भगवान का नाम, मंत्र जप या भक्ति होती है, वहां भूत-प्रेत का प्रभाव नहीं होता है. ईश्वर के नाम में इतनी शक्ति मानी जाती है कि, नकारात्मक शक्तियां उसके पास टिक नहीं पातीं.    भूतों से क्यों डरना नहीं चाहिए?   धार्मिक शिक्षाओं के मुताबिक, भूत-प्रेत से डरने की जरूरत नहीं है. यदि व्यक्ति ईश्वर का स्मरण करता है, भगवान का नाम का जाप करते हैं और अच्छे कर्म करता है, तो उसे किसी तरह की नकारात्मक शक्ति से भय नहीं रहता.    इसलिए संत हमेशा यही सलाह देते हैं कि, भय से बचने का सबसे सरल उपाय है, भगवान का नाम लेना और सकारात्मक जीवन को जीना है.   Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि metroheadlines.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.  

Metroheadlines मार्च 14, 2026 0
भूतड़ी अमावस्या कब है ? बुरी बलाओं से बचने के लिए इस दिन करें ये खास काम

  Bhutadi Amavasya 2026: अमावस्या का दिन बहुत शक्तिशाली होता है. क्योंकि इस दिन अदृश्य शक्तियों का प्रभाव तेज होता है. 19 मार्च को भूतड़ी अमावस्या है. इस दिन बुरी बलाओं से बचने के लिए क्या करें.   चैत्र अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या कहते हैं “भूतड़ी” शब्द का संबंध लोकभाषा में अदृश्य या सूक्ष्म शक्तियों से जोड़ा जाता है. भूतड़ी अमावस्या पर क्या भूतों, पिशाच से कनेक्शन है, इस दिन कौन से काम करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए.   भूतड़ी अमावस्या 19 मार्च 2026 को है. शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार भूतड़ी अमावस्या के दिन विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, पितृ तर्पण और शांति के उपाय किए जाते हैं.   भूतड़ी अमावस्या के दिन नहाने के पानी में काले तिल डालकर स्नान करें या किसी तीर्थ जल से स्नान करें और पितरों का तर्पण करें, मान्यता है इससे अतृप्त पूर्वज प्रसन्न होते हैं. जीवन में परेशानियां दूर होती है.   भूतड़ी अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियां जरा ज्यादा ही ​सक्रिय हो जाती हैं, ऐसे में उनके प्रभाव से बचने के लिए हनुमान चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए.   भूतड़ी अमावस्या के दिन पितृ लोक के द्वार खुलते हैं और पितरों को धरती पर आने का अवसर प्राप्त होता है. इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए दान (अनाज, कपड़े, आदि का दान करना चाहिए) ये उपाय ग्रह बाधा से मुक्ति दिलाता है, पूर्वज हर कष्ट से बचाते हैं.   ज्योतिष में अमावस्या तब बनती है जब सूर्य देव और चंद्र देव एक ही राशि में होते हैं. इस समय चंद्रमा की शक्ति कमजोर मानी जाती है. मानसिक और सूक्ष्म ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है. इसलिए साधक और तांत्रिक इस तिथि को विशेष साधना के लिए उपयुक्त मानते हैं.

Metroheadlines मार्च 11, 2026 0
Chaitra Navratri 2026: खरमास में चैत्र नवरात्रि, क्या घर, वाहन खरीदी, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं ?

  Chaitra Navratri 2026 in Kharmas: इस साल खरमास और नवरात्रि एक साथ होंगे. नवरात्रि में कई मांगलिक कार्य होते हैं लेकिन इस साल क्या चैत्र नवरात्रि में खरमास की वजह से शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी जानें.         चैत्र नवरात्रि 2026   चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही है.चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के 9 दिन मांगलिक कार्य करने के लिए बेहद शुभफलदायी होते हैं लेकिन इस साल नवरात्रि का त्योहार खरमास में आ रहा है. ज्योतिष के अनुसार खरमास में सभी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं.हालांकि नवरात्रि के 9 दिन बहुत शक्तिशाली माने जाते हैं लेकिन क्या खरमास ( Kharmas) के बीच नवरात्रि हो तो वाहन, घर-मकान खरीदना, गृह प्रवेश आदि शुभ काम कर सकते हैं, आइए जानते हैं.   खरमास में मनेगी चैत्र नवरात्रि 2026 (Chaitra Navratri in Kharmas)   इस साल खरमास की शुरुआत नवरात्रि से पहले हो रही है. 15 मार्च 2026 को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद खरमास शुरू होंगे जो 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा. वहीं चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक रहेगी.   इस बार नवरात्रि में नहीं होंगे मांगलिक कार्य   मुहूर्त शास्त्र के अनुसार किसी भी शुभ कार्य के लिए ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति आवश्यक होती है. ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार जब सूर्य देव मीन राशि में रहते हैं, तो मीन राशि के स्वामी बृहस्पति की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो जाती है. बृहस्पति को विवाह, धर्म, ज्ञान और शुभ कार्यों का कारक ग्रह माना जाता है. ऐसे में मांगलिक कार्य का फल नहीं मिलता.   यही वजह है कि इस साल चैत्र नवरात्रि में विवाह संस्कार, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, नया बिजनेस शुरू करना, नई संपत्ति-वाहन खरीदना टालना ही बेहतर है.   खरमास और नवरात्रि के संयोग में क्या करें (Chaitra Navratri Kharmas Yog)   खरमास में भौतिक कार्यों की जगह आध्यात्मिक साधना को ज्यादा महत्व दिया गया है. खासकर चैत्र नवरात्रि के दौरान यह और भी फलदायी माना जाता है. क्योंकि नवरात्रि की 9 रातें बहुत शक्तिशाली होती हैं. इस दौरान की गई पूजा शीघ्र सिद्ध होती है.   मां दुर्गा की उपासना दान-पुण्य और सेवा मंत्र जप और साधना दुर्गा सप्तशती पाठ  

Metroheadlines मार्च 10, 2026 0
T20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद नरेंद्र मोदी का मोटिवेशनल कोट चर्चा में, दिया जीत का मंत्र

T20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद नरेंद्र मोदी का मोटिवेशनल कोट चर्चा में, दिया जीत का मंत्र   T20 World Cup 2026: भारत ने तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया है. इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने संस्कृत में एक श्लोक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जो वायरल हो रहा है.   पीएम ने वर्ल्ड कप जीतने पर किया पोस्ट अभीप्सां स्वात्मनो रक्षाऽविरतं सुस्थिरं तया। यत्नमातिष्ठ धैर्येण ततः सिद्धिर्भवेद् ध्रुवम् ।।   इसका अर्थ है - मनुष्य को अपने जीवन और आत्मा की रक्षा की इच्छा रखते हुए लगातार और दृढ़ता से प्रयास करना चाहिए. यदि वह धैर्य के साथ निरंतर प्रयास करता है, तो उसे निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होती है. पीएम ने लिखा कि यह जीत हमें यह भी बताती है कि सही दिशा में कठिन परिश्रम से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.   कठिन परिश्रम सफलता ही का स्वाद चखाता है   ये श्लोक यही प्रेरणा देता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, हार मानना नहीं चाहिए. कई बार मैच में शुरुआती ओवर खराब हो जाते हैं, विकेट जल्दी गिर जाते हैं या विरोधी टीम मजबूत स्थिति में आ जाती है लेकिन जो खिलाड़ी धैर्य रखकर लगातार प्रयास करते हैं, वही मैच का रुख बदल देते हैं.   जीवन में कोई भी बड़ी उपलब्धि अचानक नहीं मिलती; उसके पीछे निरंतर मेहनत, धैर्य और संकल्प की शक्ति होती है. कठिनाइयां हर रास्ते में आती हैं, लेकिन जो व्यक्ति धैर्य के साथ आगे बढ़ता है, वही अंततः सफलता की ऊंचाइयों को छूता है. सफलता का रास्ता धैर्य, अनुशासन और निरंतर प्रयास से ही बनता है. यदि मनुष्य अपने मन को स्थिर रखे और हार मानने की बजाय लगातार प्रयास करता रहे, तो असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी संभव हो जाते हैं जीवन में लक्ष्य तय करें, धैर्य बनाए रखें और निरंतर प्रयास करते रहें - क्योंकि सच्ची सफलता उसी के कदम चूमती है जो कभी हार नहीं मानता.

Metroheadlines मार्च 9, 2026 0
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MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे.  Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है.   रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे   इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्‍यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे.   गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा   करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.  

UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

  भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया।   कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   देखिए तस्वीरें…     NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया।     NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन।     विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो।     सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार   इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा।   उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है।     'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा'   सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए।   डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है।     'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों'   सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा।   आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया।     डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान   कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।   कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।  

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पाएं तप, ज्ञान और मनोवांछित फल! जानें विधि, मंत्र और आरती

  Navratri Second Day Brahmacharini: नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जो तप और संयम की देवी हैं. जानिए दूसरे दिन माता की पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती, और शुभ योग के बारे में?   Chaitra Navratri Second Day of Goddess Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. जहां पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है, वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दे रहे हैं.    मां दुर्गा का दूसरा अवतार देवी ब्रह्मचारिणी तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी हैं. माता को सफेद रंग के वस्त्र, चंदन, फूल और श्वेत मिठाई चढ़ाया जाता है. इस दिन का काफी खास महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है. आइए जानते हैं उनके मंत्र, पूजा विधि, कथा और आरती से जुड़ी सटीक जानकारी के बारे में.   मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ?   मां ब्रह्मचारिणी तप शक्ति का प्रतीक हैं. ब्रह्मचारिणी माता की आराधना से भक्तों में तप की शक्ति बढ़ती है. इसके अलावा उन्हें मनोवांछित फल की भी प्राप्ति होती है. देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से दूसरे स्वरूप का नाम देवी ब्रह्मचारिणी है. नवरात्रि के दूसरे दिन के दौरान मां के इस अवतार की पूजा संपूर्ण विधि-विधान से करनी चाहिए.    'ब्रह्मचारिणी' नाम का मतलब ब्रह्म और चारिणी से मिलकर बना हुआ है. ब्रह्म का अर्थ है तप या तपस्या, वही चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. ऐसे में ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ है, तप का आचरण करने वाली देवी.   पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए मां ने इस रूप में कठोर तपस्या की थी.    नवरात्र के दूसरे दिन खास योग!   चैत्र नवरात्रि के दूसरे सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही शनिवार दोपहर2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक विजय मुहूर्त का संयोग बन रहा है.   धार्मिक मान्यता है कि, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए काम सफल होते हैं और राहुकाल में कोई नया काम या पूजा करने से वह निष्फल होता है.    मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja Vidhi)   नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद आसन पर बैठकर मां का ध्यान करते हुए पूजा करें. उन्हें फूल, चंदन, अक्षत, रोली, धूप, भोग आदि अर्पित करें.   मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं. उसके बाद मां को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करें. उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करना शुभ माना जाता है.    मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ा ध्यान मंत्र (Maa Brahmacharini Mantra)   या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू। देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥   इस मंत्र का अर्थ है कि, देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप दिव्यता से भरा है. माता के दाहिने हाथ में जप की माला तो बाएं हाथ में कमंडल है.  माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करने के लिए ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए.    मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग (Maa Brahmacharini Bhog) नवरात्र के दूसरे मां ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग शर्करा या गुड़ अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से आयुष्मान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.    ब्रह्मचारिणी माता जी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti)   जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी।   रखना लाज मेरी महतारी।आरती करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान दें कि, देवी-देवताओं की 14 बार आरती उतारना है. 4 बार उनके चरणों पर से, 2 बार नाभि पर से, 1 बार मुख पर से और 7 बार पूरे शरीर पर से. आरती की बत्तियां 1, 5, 7 यानी विषम संख्या में ही बनाकर आरती करनी चाहिए.

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