दिल्ली

मंसा राम पार्क में भीषण आग, 80 झुग्गियां जलकर खाक, 28 दमकल गाड़ियों ने पाया काबू

  Delhi News: मंसा राम पार्क में भीषण आग, 80 झुग्गियां जलकर खाक, 28 दमकल गाड़ियों ने पाया काबू   Dwarka News In Hindi: बिंदापुर में मंसा राम पार्क झुग्गी बस्ती में भीषण आग लगने से 80 झुग्गियां जलकर राख हो गईं और सैकड़ों लोग बेघर हो गए. दमकल की 28 गाड़ियों ने तड़के 3 बजे आग पर काबू पाया.     मंसा राम पार्क में भीषण आग (फाइल फोटो)   दिल्ली के द्वारका जिले के बिंदापुर थाना क्षेत्र के मंसा राम पार्क स्थित झुग्गी बस्ती में बुधवार देर रात भीषण आग ने तबाही मचा दी. करीब 80 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं और सैकड़ों लोग बेघर हो गए. हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.    रात करीब 12 बजे लगी आग   पुलिस के मुताबिक 11 मार्च की रात करीब 11 बजकर 57 मिनट पर PCR कॉल के जरिए आग लगने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही बिंदापुर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और झुग्गियों में रह रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. देर रात अचानक लगी आग से बस्ती में अफरातफरी मच गई और लोग जान बचाकर भागने लगे. पुलिस की त्वरित कार्यवाही से बड़ा हादसा टल गया.    28 दमकल गाड़ियां मौके पर, तड़के 3 बजे पाया काबू   आग की भयावहता को देखते हुए दमकल विभाग की करीब 28 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत की और 12 मार्च तड़के करीब 3 बजे आग पर पूरी तरह काबू पाया गया. तब तक करीब 80 झुग्गियां जलकर पूरी तरह खाक हो चुकी थीं. झुग्गी में रहने वाले लोगों का सारा सामान और घर राख हो गया.    7 मार्च को भी लगी थी आग   यह पहली बार नहीं है जब मंसा राम पार्क की इन झुग्गियों में आग लगी हो. पुलिस के अनुसार 7 मार्च को भी इसी जगह आग लगने की घटना हुई थी जिसे 8 दमकल गाड़ियों की मदद से बुझाया गया था. उस मामले में बिंदापुर थाने में FIR नंबर 155/26 धारा 326(F) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया था.    विवादित जमीन पर पहले से थीं अवैध कूड़े और आग की शिकायतें   राजस्व विभाग के अनुसार यह जमीन निजी है हालांकि इसके मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है. यहां पहले भी कूड़ा अवैध रूप से डालने और उसे आग लगाने की कई शिकायतें मिल चुकी हैं. इसी वजह से 7 मार्च को DM कापसहेड़ा द्वारा यहां मलबा हटाने का अभियान चलाया जाना था लेकिन लॉजिस्टिक कारणों से इसे टाल दिया गया था. अब लगातार दो बार आग लगने की घटना के बाद इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.  

Metroheadlines मार्च 12, 2026 0
जनकपुरी बाइकर के गड्ढे में गिरने से मौत के मामले एक्शन, मुख्य ठेकेदार उदयपुर से गिरफ्तार

  Delhi News In Hindi: जनकपुरी में खुले सीवर गड्ढे में गिरकर युवक की मौत के मामले में मुख्य ठेकेदार हिमांशु गुप्ता को दिल्ली पुलिस ने उदयपुर से गिरफ्तार किया. आरोपी को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है.   दिल्ली के जनकपुरी में खुले सीवर गड्ढे में गिरकर युवक की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने मुख्य ठेकेदार हिमांशु गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसे लगातार तलाश के बाद राजस्थान के उदयपुर से 10 मार्च की सुबह हिरासत में लिया. आरोपी वहां छिपा हुआ था और अब उसे आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है.   यह मामला 6 फरवरी 2026 की रात का है, जब दिल्ली जल बोर्ड के एक खुले और गहरे सीवर गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी. हादसे के बाद से ही पुलिस ठेकेदार और उससे जुड़े लोगों की तलाश कर रही थी.   पुलिस के अनुसार इस मामले में गंभीर लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की भूमिका की जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी.   क्या हुआ था ?   जनकपुरी बाइकर मामला फरवरी 2026 की शुरुआत में दिल्ली के पश्चिमी इलाके जनकपुरी में हुआ एक दुखद हादसा था. इसमें 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी. कमल रोहिणी में एक निजी बैंक में टेलीकॉलर के रूप में काम करते थे और 5 फरवरी की देर रात अपनी अपाचे बाइक से घर लौट रहे थे.   वे पालम स्थित कैलाशपुरी में अपने घर जा रहे थे और माता-पिता की शादी की सालगिरह मनाने के लिए जल्दी पहुंचना चाहते थे. रास्ते में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा पाइपलाइन कार्य के लिए लगभग 14 से 20 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था. यह गड्ढा बिना बैरिकेड, चेतावनी बोर्ड या लाइट के खुला छोड़ दिया गया था, जिससे अंधेरे में उनकी बाइक सीधे उसमें गिर गई.   दम घुटने के कारण हुई मौत   हादसे के बाद कमल की बाइक उनके ऊपर गिर गई और वे गड्ढे में फंस गए. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत दम घुटने के कारण हुई. छाती पर भारी दबाव पड़ने से उनकी सांस रुक गई और उनकी मौत हो गई.   सुबह एक महिला की सूचना पर पुलिस को घटना का पता चला. बताया गया कि कमल का शव करीब आठ घंटे तक गड्ढे में पड़ा रहा. जांच के दौरान सामने आया कि हादसे के बाद कुछ लोगों ने बैरिकेड और पर्दे लगाकर सबूत छिपाने की कोशिश भी की थी.   अब तक सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति, कर्मचारी योगेश और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं और जांच जारी है.

Metroheadlines मार्च 10, 2026 0
Dehli Politics: 'तरीका एक, चेहरे अलग...' उमर खालिद और राहुल गांधी की फोटो लगाकर बीजेपी का बड़ा हमला

AI Summit 2026 में IYC के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद Delhi में BJP के ऑफिस के बाहर पोस्टर लगाया गया है. इसमें राहुल गांधी और उमर खालिद की फोटो लगाई गई है.   दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर के बाहर एक पोस्टर में जिन दो घटनाओं का उल्लेख किया गया है, वे अलग-अलग समय की हैं, लेकिन बीजेपी का दावा है कि दोनों की टाइमिंग और मंशा में समानता है। पहला संदर्भ वर्ष 2020 का है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump भारत दौरे पर आए थे। उसी दौरान दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन और बाद में हिंसा की घटनाएं हुई थीं। इन मामलों में उमर खालिद पर साजिश रचने के आरोप लगे थे, जिन्हें वे नकारते रहे हैं। दूसरा संदर्भ हालिया एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) शिखर सम्मेलन का बताया जा रहा है, जिसमें 20 देशों के प्रतिनिधि भारत आए थे। बीजेपी का आरोप है कि इस दौरान विपक्ष की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई।   आरपी सिंह ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि वर्ष 2020 में उमर खालिद ने उस समय विरोध का रास्ता चुना जब डोनाल्ड ट्रंप भारत में थे, ताकि वैश्विक ध्यान आकर्षित किया जा सके। उनके अनुसार, ठीक उसी तरह राहुल गांधी ने भी ऐसे समय में विरोध दर्ज कराया जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल भारत में मौजूद था। सिंह का कहना है कि दोनों घटनाओं में “टाइमिंग” एक समान रणनीति की ओर इशारा करती है—ऐसी रणनीति, जिसका उद्देश्य देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित करना है।   बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि एआई समिट के दौरान कुछ लोगों को कथित रूप से उग्र प्रदर्शन के लिए भेजा गया। उन्होंने यह भी कहा कि कपड़े उतारकर प्रदर्शन करने जैसी घटनाएं भारत की गरिमा के खिलाफ हैं और इससे देश की प्रतिष्ठा पर आंच आती है। हालांकि इन आरोपों पर कांग्रेस या संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिनमें इन दावों को राजनीतिक प्रोपेगेंडा बताया गया है।   राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पोस्टर के जरिए बीजेपी विपक्ष पर तीखा हमला करना चाहती है। राहुल गांधी, जो वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं, पहले भी केंद्र सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में पोस्टर के माध्यम से उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के साथ जोड़कर दिखाना, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं, निश्चित रूप से एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।   यह विवाद केवल पोस्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। भारतीय राजनीति में पोस्टर, होर्डिंग और सार्वजनिक संदेश लंबे समय से राजनीतिक रणनीति का हिस्सा रहे हैं। लेकिन जब इनमें प्रयुक्त भाषा “देशद्रोही” जैसे शब्दों तक पहुंच जाती है, तो यह बहस और भी तीखी हो जाती है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करती है और असहमति को देशविरोध से जोड़ना स्वस्थ परंपरा नहीं है।   कांग्रेस की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने न भी आया हो, लेकिन पार्टी नेताओं ने अनौपचारिक तौर पर इसे “ध्यान भटकाने की कोशिश” बताया है। उनका तर्क है कि विपक्ष का विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को बदनाम करने की साजिश बताना अनुचित है। वहीं बीजेपी का कहना है कि विरोध का अधिकार है, लेकिन उसकी टाइमिंग और तरीका राष्ट्रहित के खिलाफ नहीं होना चाहिए।   इस पूरे घटनाक्रम में एक और पहलू यह है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक अन्य मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि “सड़क को मौत का गड्ढा नहीं बनने दिया जा सकता।” यह टिप्पणी भले ही ठेकेदारों को अग्रिम जमानत से इनकार के संदर्भ में थी, लेकिन राजनीतिक बहस के बीच इसे भी कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक जिम्मेदारी के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। राजनीतिक दल अक्सर ऐसे न्यायिक बयानों को अपने-अपने तर्कों के समर्थन में उद्धृत करते हैं।   उमर खालिद का नाम 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में सामने आया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए थे। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। दूसरी ओर राहुल गांधी लंबे समय से केंद्र सरकार की आर्थिक, सामाजिक और विदेश नीति पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में दोनों को एक ही फ्रेम में रखकर तुलना करना राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील कदम माना जा रहा है।   पोस्टर की हेडलाइन—“एक अराजक तरीका, देशद्रोहियों के अलग-अलग चेहरे”—ने विवाद को और बढ़ा दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि किसी निर्वाचित सांसद और नेता प्रतिपक्ष को “देशद्रोही” कहना लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है। वहीं बीजेपी का पक्ष है कि यह राजनीतिक टिप्पणी है और पार्टी अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है।   राजनीतिक रणनीति के नजरिए से देखें तो ऐसे पोस्टर अक्सर समर्थकों को एकजुट करने और विरोधियों पर वैचारिक हमला करने के लिए लगाए जाते हैं। खासकर जब अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम या बड़े कूटनीतिक आयोजन हो रहे हों, तब सरकारें और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी राजनीतिक रेखाएं स्पष्ट करने की कोशिश करते हैं। इस मामले में भी एआई समिट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी को केंद्र में रखकर बहस को राष्ट्र की छवि बनाम विरोध की राजनीति के रूप में पेश किया गया है।   आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या कानूनी और संसदीय स्तर तक पहुंचता है। यदि कांग्रेस औपचारिक आपत्ति दर्ज कराती है या चुनाव आयोग अथवा अन्य मंचों पर शिकायत करती है, तो मामला और गहरा सकता है। फिलहाल इतना तय है कि दिल्ली में लगाया गया यह पोस्टर राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बन चुका है।   समग्र रूप से देखें तो यह प्रकरण भारतीय राजनीति में बढ़ती वैचारिक ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति को दर्शाता है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल विपक्ष की गतिविधियों को राष्ट्रहित के संदर्भ में परखने की बात करता है, वहीं विपक्ष इसे असहमति की आवाज दबाने का प्रयास बताता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और प्रतिरोध की अपनी जगह है, लेकिन उसकी भाषा, समय और स्वरूप को लेकर हमेशा बहस होती रही है।   दिल्ली के इस पोस्टर विवाद ने एक बार फिर यही प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या राजनीतिक असहमति को देशविरोध से जोड़ना उचित है, या यह लोकतांत्रिक विमर्श को और अधिक कठोर बना देता है? आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है, क्योंकि दोनों ही पक्ष इसे अपने-अपने समर्थकों के बीच बड़े नैरेटिव के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

Metroheadlines फ़रवरी 26, 2026 0
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सिनेमा शादी के बाद रश्मिका-विजय जीत रहे लोगों का दिल, अब तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलो को दिया ये बड़ा तोहफा

Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.                                         रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे   न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है.     तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट   दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है.   सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था     शादी की रस्में   रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था.     कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन   यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है.     विजय-रश्मिका फिल्म   प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.   

T20 World Cup Semifinal Streaming: सेमीफाइनल में होगी भारत और इंग्लैंड की टक्कर, जानें कब-कहां और कैसे देखें लाइव स्ट्रीमिंग

भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही.   IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.   भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे.   IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा?   भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं.   IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा?   यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है.   IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव?   भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे.   दोनों टीमों के स्क्वॉड   भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा.   इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड. 

इस हीरो का रिकॉर्ड तोड़ने में छूटे 'धुरंधर 2' के पसीने, पेड प्रीव्यू में मात देने से इतनी पीछे है रणवीर सिंह की फिल्म

  Dhurandhar 2 Advance Booking: रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉलीवुड की सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है. हालांकि ये एक साउथ हीरो की फिल्म को मात नहीं दे पा रही है.   रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अर्जुन रामपाल स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही गदर मचाया हुआ है. फिलहाल ये 18 मार्च, 2026 को होने वाले पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में गर्दा उड़ा रही है. वैसे ये फिल्म पहले ही 'स्त्री 2' के पेड प्रीव्यू शो को रिकॉर्ड को मिट्टी में मिलाकर बॉलीवुड के लिए इतिहास रच चुकी है. लेकिन आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म के साउथ के एक स्टार का रिकॉर्ड तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं.   धुरंधर 2 ने पेड प्रीव्यू के लिए एडवांस बुकिंग में कितनी कर ली है कमाई?   धुरंधर को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली थी. ऐसे में इसकी सीक्वल धुरंधर द रिवेंज या धुरंधर 2 को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की तो पूरी उम्मीद है ही लेकिन ये फिल्म तो रिलीज से पहले ही कमाल कर रही है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर रही है.  सैकनिल्क के मुताबिक, इसने पेड प्रीव्यू से अब तक 18.78 करोड़ (ब्लॉक्ड सीटों को छोड़कर) कमा लिएए हैं वहीं ब्लॉक सीटों के साथ इसका पेड प्रीव्यू के लिए प्री टिकट सेल का कलेक्शन 23.99 करोड़ पहुंच चुका है.  देश भर में 8 हजार 31 शोज के लिए इसके 3 लाख 51 हजार 4 सौ 13 टिकट बिक चुके हैं.    धुरंधर 2 ने स्त्री 2 को पछाड़ बनाया नया रिकॉर्ड   बता दें कि कि 2024 में, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 ने इंडिया में पेड प्रीव्यू में 9.40 करोड़ की नेट कमाई करके नया माइलस्टोन हासिल किया था. लेकिन धुरंधर: द रिवेंज ने एडवांस बुकिंग में इससे कई गुना ज़्यादा सेल्स के साथ इसे धूल चटा दी है. इसकी के साथ .े बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम भी कर चुकी है.    धुरंधर 2 के पवन कल्याण की OG को मात देने में छूटे पसीने   इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि धुरंधर 2 ने पेड पीव्यू के लिए प्री सेल्स में बेशक धमाकेदार कमाई कर ली हैं लेकिन इसका टारगेट इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी पेड प्रीव्यू कमाई का रिकॉर्ड अपने नाम करना है. दरअसल पवन कल्याण की दे कॉल हिम OG ने 21 करोड़ के बड़े नेट कलेक्शन के साथ किसी इंडियन फिल्म के लिए अब तक के सबसे ज़्यादा पेड प्रीव्यू अपने नाम किए हुए हैं. फिलहाल रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 के लिए इस रिकॉर्ड को तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. हालांकि अभी फिल्म के पेड प्रीव्यू शो में 6 दिन बचे हैं और इसे पवन कल्याण के रिकॉर्ड को मात देने से सिर्फ 3 करोड़ के करीब पीछे है. इसलिए पूरी उम्मीद है कि  धुरंधर 2 इस उपलब्धि को हासिल कर इतिहास रच सकती है.      

बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? बड़ा अपडेट

  Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे.   बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम   बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा।   नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है।     नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।   लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है।   नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी।     नई सरकार का गठन कब होगा?   राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।   दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है।   इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है।     क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा?   अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा।   विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा।     संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन?   नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।   1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।   2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं।   3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है।     एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा?   अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं।     विपक्ष की प्रतिक्रिया   इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं।     बिहार की राजनीति पर संभावित असर   नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है।   इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं:   बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है   क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है।     बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था।     आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।  

MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे.  Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है.   रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे   इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्‍यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे.   गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा   करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.  

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