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ट्रंप की धमकी नहीं आई काम, होर्मुज पर किसी ने नहीं दिया साथ, गुस्से में बोले- 'मुझे किसी की जरूरत नहीं'

  US Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के भरोसे ईरान से जंग शुरू की थी, लेकिन अब इजरायल के अलावा कोई देश उनकी मदद नहीं कर रहा. मानो जैसे वो भीड़ में अकेले पड़ गए हैं.     अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों पर भड़ास निकाली है. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चल रही जंग में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा सुरक्षित और खोलने के लिए वॉरशिप भेजने की अपील की, लेकिन ज्यादातर देशों ने मना कर दिया. ट्रंप ने कहा, 'हमें किसी की जरूरत नहीं. हम दुनिया का सबसे मजबूत राष्ट्र हैं. हमारी मिलिट्री सबसे ताकतवर है.'     सहयोगी देशों को चेतावनी देते हुए बिफरे ट्रंप ट्रंप ने बताया कि उन्होंने करीब 7 देशों से बात की और उनसे वॉरशिप भेजने को कहा, ताकि तेल के जहाज सुरक्षित गुजर सकें, लेकिन जर्मनी, स्पेन, इटली जैसे देशों ने साफ मना कर दिया. ब्रिटेन ने भी शुरू में दो एयरक्राफ्ट कैरियर देने से इनकार किया था, बाद में जंग खत्म होने के बाद ऑफर किया, जिसे ट्रंप ने ठुकरा दिया.   ट्रंप ने कहा, 'मैं कुछ मामलों में ये इसलिए कर रहा हूं कि देखूं वो कैसे रिएक्ट करते हैं. मैं सालों से कहता आ रहा हूं कि अगर हमें कभी उनकी जरूरत पड़ी तो वो नहीं आएंगे.' उन्होंने NATO पर भी निशाना साधा और कहा कि अगर सहयोगी मदद नहीं करेंगे तो NATO का भविष्य 'बहुत बुरा' होगा.   ट्रंप ने ब्रिटेन पर हैरानी जताई और कहा कि उन्होंने शुरू में मदद नहीं की, लेकिन जंग खत्म होने के बाद ऑफर किया, 'मैंने कहा, जंग खत्म होने के बाद मुझे कैरियर की जरूरत नहीं.'   हॉर्मुज की क्या स्थिति है? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्ता है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल गुजरता है. ईरान ने जंग शुरू होने के बाद इसे बंद कर दिया है. ईरान ने 15 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे तेल के जहाजों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है. ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने कहा है कि स्ट्रेट बंद रहेगा. ईरानी मिलिट्री ने चेतावनी दी कि तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.     आखिर यह जंग कितनी लंबी चलेगी? ट्रंप ने पहले कहा था कि जंग जल्द खत्म होगी, लेकिन इस हफ्ते नहीं. अब वो सहयोगियों पर दबाव डाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका अकेले ही अपनी नेवी से जहाजों को एस्कॉर्ट करेगा. कुछ देशों से बात चल रही है, लेकिन ज्यादातर 'कम उत्साही' हैं. ट्रंप ने कहा, 'मैं उन पर हार्ड सेल नहीं करता, क्योंकि मेरा एटीट्यूड है, हमें किसी की जरूरत नहीं.'   ये सब 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' किया. इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए. ईरान ने जवाब में इजरायल और अमेरिकी बेस पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए, जिससे जंग पूरे मिडिल ईस्ट में फैल गई.

LPG Crisis In MP: अब गांवों में 45 दिन बाद LPG सिलेंडर की बुकिंग, रसोई गैस पर नया नियम!

  LPG Crisis In Madhya Pradesh: मध्य पूर्व संकट के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है. सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग नियम बदले हैं, अब 45 दिन के अंतराल पर ही बुकिंग होगी.   मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति या तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका असर आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने के लिए बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव किया है।   सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम अंतराल को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया है। इससे पहले उपभोक्ता अपेक्षाकृत कम समय में भी सिलेंडर बुक कर सकते थे, लेकिन हाल के दिनों में अचानक बढ़ी मांग और संभावित आपूर्ति दबाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।   पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम आपूर्ति प्रबंधन को बेहतर बनाने और पैनिक बुकिंग पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।     क्यों बढ़ा LPG बुकिंग का अंतराल   भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ता देशों में से एक है। देश में करोड़ों परिवार खाना बनाने के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। पिछले कुछ वर्षों में उज्ज्वला योजना जैसी सरकारी योजनाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी एलपीजी का उपयोग तेजी से बढ़ा है।   हालांकि, हाल के दिनों में सरकार और तेल कंपनियों ने यह देखा कि कुछ उपभोक्ता बहुत कम अंतराल में सिलेंडर बुक करने लगे हैं। मंत्रालय के अनुसार पहले ग्रामीण उपभोक्ता औसतन लगभग 55 दिनों में एक सिलेंडर बुक करते थे। लेकिन हालिया दिनों में कई उपभोक्ता 10 से 15 दिन के भीतर ही नई बुकिंग करने लगे।   इस तरह की पैनिक बुकिंग से सप्लाई सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ने लगा। अगर ऐसा लगातार जारी रहता तो कई क्षेत्रों में वास्तविक कमी की स्थिति भी पैदा हो सकती थी। इसी संभावित संकट को रोकने के लिए सरकार ने यह नियम लागू किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगली बुकिंग कम से कम 45 दिन बाद ही की जा सकेगी।   सरकार का कहना है कि इससे आपूर्ति को संतुलित रखने और सभी उपभोक्ताओं तक गैस पहुंचाने में मदद मिलेगी।     मध्य पूर्व का संकट और ऊर्जा बाजार   मध्य पूर्व दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। अगर इस क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो इसका असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।   अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पहले ही कच्चे तेल और गैस के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।   भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर घरेलू कीमतों और सप्लाई पर पड़ना स्वाभाविक है।   एलपीजी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। इसलिए सरकार पहले से ही सप्लाई चेन को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रही है।     ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की वास्तविक खपत   सरकारी आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी का उपयोग बढ़ा जरूर है, लेकिन अभी भी कई परिवार पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी, गोबर के कंडे और सिगड़ी का इस्तेमाल करते हैं।   इंदौर जिले के खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक मोहन मारू का कहना है कि गांवों में गैस की खपत शहरों की तुलना में कम होती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई परिवार वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करते हैं।   उनके मुताबिक पहले 21 दिन के भीतर भी बुकिंग हो जाती थी, लेकिन तेल कंपनियों ने अब 45 दिन का अंतराल निर्धारित कर दिया है।   उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल किसी तरह की गैस की वास्तविक किल्लत नहीं है और अगर भविष्य में कोई शिकायत आती है तो जिला प्रशासन स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लेगा।     उपभोक्ताओं की चिंता   सरकार के इस फैसले को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सप्लाई संतुलित रखने के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कई उपभोक्ता इसे अपने लिए मुश्किल बता रहे हैं।   इंदौर जिले के देपालपुर गांव की रहने वाली रानू राव ने कहा कि 45 दिन का अंतराल बहुत लंबा है। उनके अनुसार उनके परिवार में सदस्य ज्यादा हैं और रोजमर्रा की जरूरतों के कारण गैस जल्दी खत्म हो जाती है।   उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि सिलेंडर बुकिंग का अंतराल 15 से 20 दिन के बीच रखा जाए। उनका कहना है कि अगर गैस समय पर नहीं मिली तो लोगों को फिर से पुराने दिनों की तरह जंगल जाकर लकड़ी लानी पड़ेगी।   इसी तरह गांव की एक अन्य महिला शांति बाई ने भी कहा कि पहले की तरह आसानी से सिलेंडर मिलना चाहिए। उनके अनुसार लंबे इंतजार से घर के कामकाज पर असर पड़ता है।     मध्य प्रदेश में तकनीकी समस्या ने बढ़ाई परेशानी   जहां एक ओर बुकिंग नियमों में बदलाव हुआ है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी समस्याओं ने भी कई शहरों में गैस उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मध्य प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में एलपीजी बुकिंग से जुड़े सर्वर ठप होने की खबरें सामने आई हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। सर्वर समस्या के कारण गैस एजेंसियों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लोग सुबह से ही एजेंसियों के बाहर लाइन में खड़े हो रहे हैं ताकि किसी तरह अपनी बुकिंग दर्ज कर सकें। इसके अलावा वेटिंग पीरियड भी बढ़ गया है। कई जगहों पर सिलेंडर मिलने में 7 से 8 दिन तक का समय लग रहा है।     गैस एजेंसियों पर बढ़ा दबाव   ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम प्रभावित होने के कारण गैस एजेंसियों पर अचानक दबाव बढ़ गया है। पहले जहां अधिकतर उपभोक्ता मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए गैस बुक कर लेते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग सीधे एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं। इससे एजेंसियों के कर्मचारियों पर भी काम का बोझ बढ़ गया है। कई जगहों पर बुकिंग और डिलीवरी प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। तेल कंपनियों और प्रशासन का कहना है कि तकनीकी समस्या को जल्द ठीक करने की कोशिश की जा रही है ताकि बुकिंग प्रक्रिया सामान्य हो सके।     सरकार का तर्क   सरकार का कहना है कि एलपीजी सप्लाई को लेकर किसी तरह की वास्तविक कमी नहीं है। बुकिंग नियमों में बदलाव केवल सप्लाई मैनेजमेंट के लिए किया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अगर लोग जरूरत से पहले ही बार-बार बुकिंग करने लगेंगे तो इससे सिस्टम पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा और कुछ क्षेत्रों में असमान वितरण की स्थिति पैदा हो सकती है। सरकार का दावा है कि 45 दिन का अंतराल औसत खपत के आधार पर तय किया गया है और इससे अधिकांश उपभोक्ताओं को कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी।     उज्ज्वला योजना के बाद बढ़ी एलपीजी पहुंच   भारत में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को धुएं से होने वाली बीमारियों से बचाना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना था। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी का नियमित उपयोग अभी भी चुनौती बना हुआ है। इसके पीछे सिलेंडर की कीमत, आय का स्तर और वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता जैसे कई कारण हैं।     विशेषज्ञ क्या कहते हैं   ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम अस्थायी हो सकता है और इसका उद्देश्य केवल संभावित संकट को रोकना है। उनके अनुसार अगर मध्य पूर्व में तनाव कम हो जाता है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार स्थिर रहता है तो भविष्य में ऐसे प्रतिबंधों की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि एलपीजी वितरण प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि तकनीकी समस्याओं या अचानक बढ़ी मांग से उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।     आगे क्या हो सकता है   मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। अगर सप्लाई सामान्य रहती है और मांग में स्थिरता आती है तो बुकिंग नियमों में फिर से बदलाव किया जा सकता है। दूसरी ओर अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता है तो सरकार को आपूर्ति प्रबंधन के लिए और भी कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां दोनों यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि देश के किसी भी हिस्से में एलपीजी की वास्तविक कमी न हो।  

ईरान पर जारी अमेरिकी-इजरायली हमलों के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मुज्तबा खामेनेई और नईम कासिम को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा मानना ​​है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाएं होंगी.

  US Israel Iran War: ईरान के नए सुप्रीम लीडर को भी नहीं बख्शेगा इजरायल! नेतन्याहू बोले-‘मुज्तबा खामेनेई की जान की कोई गारंटी नहीं’   मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। इस जंग ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसी बीच Benjamin Netanyahu ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी ऐसे नेता को बख्शने वाला नहीं है जो आतंकवाद या इजरायल विरोधी गतिविधियों में शामिल हो।   इजरायली प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के संभावित नए सुप्रीम लीडर माने जा रहे Mojtaba Khamenei की जान की भी कोई गारंटी नहीं है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है।   मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष   पिछले कुछ समय से मध्य-पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। Israel और Iran के बीच तनाव नया नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में यह संघर्ष खुली जंग की शक्ल लेता दिख रहा है। अमेरिका के समर्थन के साथ इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसकी बढ़ती सैन्य ताकत को रोकने की कोशिश कर रहा है।   विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ दो देशों के बीच नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शक्ति संतुलन की लड़ाई है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।   नेतन्याहू की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सख्त संदेश   इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि इजरायल अपने दुश्मनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सुन्नी और शिया दोनों तरह के चरमपंथी समूह दुनिया के लिए खतरा हैं और इनसे निपटना जरूरी है।   उन्होंने कहा कि यह समस्या अपने आप खत्म नहीं होने वाली है। अगर आतंकवादी संगठन और उनके समर्थक देशों को रोका नहीं गया तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।   नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायल अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और वह अपने दुश्मनों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।     मुज्तबा खामेनेई को लेकर चेतावनी   ईरान की राजनीति में Mojtaba Khamenei को एक बेहद प्रभावशाली शख्स माना जाता है। वह ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के बेटे हैं और लंबे समय से सत्ता के केंद्र में सक्रिय बताए जाते हैं।   नेतन्याहू ने जब पत्रकारों के सवाल का जवाब दिया तो उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी आतंकवादी संगठन के नेताओं के लिए “लाइफ इंश्योरेंस” नहीं लेगा। इसका मतलब साफ है कि अगर जरूरत पड़ी तो ऐसे नेताओं को भी निशाना बनाया जा सकता है।   उन्होंने कहा, “मैं किसी भी आतंकवादी संगठन के नेताओं के लिए जीवन बीमा पॉलिसी नहीं लूंगा। उनकी जान की कोई गारंटी नहीं है।” इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है।     हिजबुल्लाह को लेकर भी कड़ी चेतावनी   इजरायल और लेबनान के बीच तनाव का एक बड़ा कारण Hezbollah है। यह शिया मिलिशिया संगठन लंबे समय से इजरायल के खिलाफ सक्रिय रहा है और इसे ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है।   नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने लेबनान सरकार को पहले ही चेतावनी दे दी है कि अगर उसने हिजबुल्लाह को निहत्था नहीं किया तो परिणाम गंभीर होंगे।   उन्होंने कहा कि अगर लेबनान सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो इजरायल खुद कार्रवाई करेगा और हिजबुल्लाह को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।     नईम कासिम का नाम भी चर्चा में   प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने हिजबुल्लाह के नेता Naim Qassem के बारे में भी सवाल पूछा। इस पर नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि इजरायल अपने दुश्मनों के नेताओं को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।   हालांकि उन्होंने किसी विशेष ऑपरेशन की जानकारी देने से इनकार कर दिया लेकिन संकेत दिया कि आने वाले समय में कुछ अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं।     क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश?   एक सवाल के जवाब में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान में मौजूदा शासन को गिराने का काम ईरानी जनता ही कर सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल और उसके सहयोगी ईरान के लोगों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान का मौजूदा शासन खत्म हो जाता है तो क्षेत्र में स्थिरता आ सकती है। नेतन्याहू के अनुसार, “अगर यह शासन खत्म हो जाता है तो समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं भी होता है तो यह बेहद कमजोर जरूर हो जाएगा।”   पूरे मिडिल ईस्ट को बदलने का दावा   इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले भी वादा किया था कि वह मध्य-पूर्व की तस्वीर बदल देंगे। उनके अनुसार अब क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल रहा है और कई देश इजरायल के साथ सहयोग करने को तैयार हैं।   उन्होंने कहा कि अब इजरायल पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और उसके दुश्मन भी यह बात समझने लगे हैं।   नेतन्याहू के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।     अमेरिका की भूमिका   इस पूरे संघर्ष में United States की भूमिका भी बेहद अहम है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी वह लगातार दबाव बना रहा है।   विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है।     क्षेत्रीय देशों की चिंता   मिडिल ईस्ट के कई देश इस बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित हैं। तेल उत्पादन करने वाले देशों को डर है कि अगर युद्ध फैलता है तो इससे तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।   इसके अलावा क्षेत्र में पहले से मौजूद राजनीतिक और धार्मिक तनाव भी और बढ़ सकता है।

अमेरिका ने दिया भारत को झटका तो आई कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया, बोली- 'मोदी का ‘सरेंडर’ देश पर भारी'

Congress Attack BJP: अमेरिका ने दिया भारत को झटका तो आई कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया, बोली- 'मोदी का ‘सरेंडर’ देश पर भारी'   अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन और बांग्लादेश सहित 16 बड़े व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ नई व्यापार जांच शुरू की है. यह जांच Trade Act 1974 के Section 301 के तहत की जा रही है. इस कानून के तहत अमेरिका किसी भी देश पर टैरिफ यानी आयात शुल्क बढ़ाने का अधिकार रखता है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की तरफ से लगाए गए टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था. अमेरिकी प्रशासन के तरफ से नए जांच के फैसले को लेकर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है.   कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा कि ट्रंप के आगे मोदी का 'सरेंडर देश पर भारी पड़ रहा है. वहीं एक दूसरे ट्वीट में कांग्रेस ने लिखा कि नरेंद्र मोदी ने महंगाई का डबल डोज दे दिया है. पहले LPG के दाम बढ़े- अब खाने वाले तेल की कीमत भी आसमान छू रही है. कांग्रेस ने बताया कि सरसों और रिफाइंड तेल 30 रुपए लीटर महंगा हो गया है. उन्होंने आगे लिखा कि जनता पर महंगाई मैन मोदी का कहर बरस रहा है.   बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था. इसके अलावा रूस से तेल खरीदने की वजह से अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, जो कुल मिलाकर 50 फीसदी हो गया था. हालांकि, अमेरिका-भारत ट्रेड डील के बाद 50 फीसदी टैरिफ घटाकर 18 फीसदी तक कर दिया गया. हालांकि, इस बीच अमेरिका ने बयान जारी कर कहा कि हम भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लगाएंगे, लेकिन हम भारत को किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं देंगे. इस घटना के बाद से विपक्षी दल लगातार बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही है. वहीं मौजूदा वक्त में मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच तेल और गैस की भारी किल्लत हो गई है. इसको लेकर भी मोदी सरकार लगातार निशाने पर है.       डोनाल्ड ट्रंप का बयान   देश के विपक्षी दल का आरोप है कि भारत सरकार अमेरिका के सामने झुक गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसा पीएम मोदी को कह रहे हैं वैसा ही वह कर रहे हैं. हाल ही में अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिनों तक तेल खरीदने की छूट दी है. इसको लेकर खुद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए घोषणा की थी. वहीं इंडियन ओसिएन में ईरानी जहाज को अमेरिका ने निशाना बनाया था, जिसमें 100 से ज्यादा ईरानी नेवी के जवान मारे गए थे. हैरानी की बात ये रही कि ये वहीं IRIS डेना जहाज थी, जो भारत के निमंत्रण पर आया था और वापस अपने देश लौट रहा था. हालांकि, अमेरिकी सबमरीन ने श्रीलंका के पास उसपर हमला कर तबाह कर दिया था. इस मुद्दे पर भी भारत सरकार ने अमेरिका को सीधा जवाब नहीं दिया था.

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MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा वॉट्सएप:सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट होगा

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा।   समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?   1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।     2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।     3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है।     4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।     5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।     ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी…   1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग     सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है।     2. BSNL अफसर का मामला     हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है।     नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग?     सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

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चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग, जानें किस देवी को कौन सा भोग लगाना शुभ

  Chaitra Navratri Bhog: चैत्र नवरात्रि में माता रानी 9 रूपों की पूजा होती है. इन 9 दिनों में माता को उनका प्रिय भोग लगाया जाता है. जानें नवरात्रि के 9 दिनों में 9 देवियों को किस दिन कौन सा भोग लगाएं.     चैत्र नवरात्रि 2026 भोग   Chaitra Navratri 2026 Bhog: नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि. नवरात्रि के 9 दिनों में श्रद्धापूर्वक और विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं.   पूरे साल में वैसे तो कुल चार नवरात्रि पड़ती है, जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना है. इनमें दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती है. चैत्र महीने में पड़ने वाली चैत्र नवरात्रि प्रकट नवरात्रि है, जिसमें भक्त 9 दिनों तक व्रत नियमों का पालन करते हैं और 9 दिनों तक पूजा-अर्चना की जाती है.   चैत्र नवरात्रि कब है (Chaitra Navratri 2026 Date)   पंचांग के मुताबिक चैत्र महीने की नवरात्रि चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा से शुरू होकर चैत्र नवमी तिथि तक चलती है. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 को शुरू होगी. इसी दिन हिंदू नव वर्ष भी रहेगा. वहीं 27 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाएगा. इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाएगी. मां दुर्गा को समर्पित नौ दिवसीय नवरात्रि का पर्व माता रानी का आशीर्वाद पाने और जीवन में सकारात्मकता लाने के विशेष अवसर की तरह होता है, जब मां स्वयं 9 दिनों तक धरतीलोक पर वास करती हैं.   चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग (Chaitra Navratri 2026 Nine days Durga 9 Forms and 9 bhog List)     चैत्र नवरात्रि के अलग-अलग दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है और हर दिन विशेष भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि, देवी को प्रिय भोग अर्पित करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी को कौन सा भोग अर्पित करना शुभ होता है.       पहला दिन (Day 1)- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती. इन माता को खीर का भोग लगाना शुभ होता है. मान्यता है कि इससे सेहत स्वस्थ रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है.   दूसरा दिन (Day 2)- चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. पूजा में आप इन माता को मिश्री, चीनी या शक्कर से बनी चीजों का भोग लगा सकते हैं. इससे सुख-शांति और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है.   तीसरा दिन (Day 3) – चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग अर्पित करना चाहिए. इससे जीवन के समस्त दुख और कष्ट दूर होते हैं.   चौथा दिन (Day 4)- चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है. इन्हें पीला रंग प्रिय है और भोग स्वरूप आप मालपुआ का भोग लगा सकते हैं, जोकि मां कूष्मांडा को प्रिय है.   पांचवां दिन (Day 5)- नवरात्रि का दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है. मां को केला भोग प्रिय है. इसलिए आप माता को केला या कच्चे केले से बनी बर्फी आदि का भोग लगा सकते हैं.   छठा दिन (Day 6)- चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है. माता को शहद या शहद से बनी चीजों का भोग लगा सकते हैं. इससे व्यक्तित्व में आकर्षण और तेज बढ़ता है.   सातवां दिन (Day 7)- नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि की पूजा के लिए समर्पित है. इस दिन माता को गुड़ या गुड़ का नैवेद्य भोग अर्पित कर सकते हैं. इससे भय और संकटों से मुक्ति मिलती है.   आठवां दिन (Day 8)- नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है. इस दिन मां को नारियल और नारियल से बनी चीजों का भोग अर्पित करना शुभ होता है. इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं.   नौवां दिन (Day 9)- नवरात्रि के अंतिम और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती. इस दिन माता रानी हलवा-पूरी, नारियल और चने का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है.

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Chaitra Navratri 2026: खरमास में चैत्र नवरात्रि, क्या घर, वाहन खरीदी, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं ?

  Chaitra Navratri 2026 in Kharmas: इस साल खरमास और नवरात्रि एक साथ होंगे. नवरात्रि में कई मांगलिक कार्य होते हैं लेकिन इस साल क्या चैत्र नवरात्रि में खरमास की वजह से शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी जानें.         चैत्र नवरात्रि 2026   चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही है.चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के 9 दिन मांगलिक कार्य करने के लिए बेहद शुभफलदायी होते हैं लेकिन इस साल नवरात्रि का त्योहार खरमास में आ रहा है. ज्योतिष के अनुसार खरमास में सभी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं.हालांकि नवरात्रि के 9 दिन बहुत शक्तिशाली माने जाते हैं लेकिन क्या खरमास ( Kharmas) के बीच नवरात्रि हो तो वाहन, घर-मकान खरीदना, गृह प्रवेश आदि शुभ काम कर सकते हैं, आइए जानते हैं.   खरमास में मनेगी चैत्र नवरात्रि 2026 (Chaitra Navratri in Kharmas)   इस साल खरमास की शुरुआत नवरात्रि से पहले हो रही है. 15 मार्च 2026 को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद खरमास शुरू होंगे जो 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा. वहीं चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक रहेगी.   इस बार नवरात्रि में नहीं होंगे मांगलिक कार्य   मुहूर्त शास्त्र के अनुसार किसी भी शुभ कार्य के लिए ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति आवश्यक होती है. ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार जब सूर्य देव मीन राशि में रहते हैं, तो मीन राशि के स्वामी बृहस्पति की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो जाती है. बृहस्पति को विवाह, धर्म, ज्ञान और शुभ कार्यों का कारक ग्रह माना जाता है. ऐसे में मांगलिक कार्य का फल नहीं मिलता.   यही वजह है कि इस साल चैत्र नवरात्रि में विवाह संस्कार, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, नया बिजनेस शुरू करना, नई संपत्ति-वाहन खरीदना टालना ही बेहतर है.   खरमास और नवरात्रि के संयोग में क्या करें (Chaitra Navratri Kharmas Yog)   खरमास में भौतिक कार्यों की जगह आध्यात्मिक साधना को ज्यादा महत्व दिया गया है. खासकर चैत्र नवरात्रि के दौरान यह और भी फलदायी माना जाता है. क्योंकि नवरात्रि की 9 रातें बहुत शक्तिशाली होती हैं. इस दौरान की गई पूजा शीघ्र सिद्ध होती है.   मां दुर्गा की उपासना दान-पुण्य और सेवा मंत्र जप और साधना दुर्गा सप्तशती पाठ  

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यूपी बोर्ड में पहली बार स्टेप मार्किंग से मिलेंगे नंबर, 18 मार्च से चेक होंगी कॉपियां

  UP Board Result 2026 Date: यूपी बोर्ड की ओर से 18 मार्च 2026 से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. राज्यभर में बनाए गए 249 केंद्रों पर करीब करोड़ कॉपियों की जांच की जाएगी.   उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद  10वीं और 12वीं की परीक्षाएं खत्म होने के बाद अब लाखों छात्रों को अपने रिजल्ट का इंतजार है. इस बीच उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने मूल्यांकन  प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया है. इस बार बोर्ड ने कॉपियों की जांच में पारदर्शिता और छात्रों को राहत देने के लिए पहली बार स्टेप मार्किंग प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है. इसके साथ ही कॉपियों की चेकिंग भी डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिससे न सिर्फ गलतियों की गुंजाइश कम होगी बल्कि रिजल्ट भी पहले जारी किया जा सकेगा.   बोर्ड के इस फैसले को छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, खासकर उन छात्रों के लिए जिन्हें गणित और साइंस जैसे सब्जेक्ट में लंबे सवालों और जटिल फॉर्मूलों से डर लगता है. नई व्यवस्था के तहत अब छात्रों की मेहनत को ज्यादा महत्व दिया जाएगा और केवल अंतिम उत्तर के आधार पर पूरे अंक काटने की पुरानी व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है.      18 मार्च से शुरू होगा मूल्यांकन  यूपी बोर्ड की ओर से 18 मार्च 2026 से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. राज्यभर में बनाए गए 249 केंद्रों पर करीब करोड़ कॉपियों की जांच की जाएगी. इसके लिए लगभग 1.5 लाख शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है. बोर्ड का लक्ष्य है कि मार्च के अंत तक या अप्रैल के पहले सप्ताह तक मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी कर ली जाए.      क्या है स्टेप मार्किंग?  सिस्टम स्टेप मार्किंग एक ऐसी प्रणाली है जिसमें छात्र की ओर से हल किए गए हर सही स्टेप के लिए अंक दिए जाते हैं. यानी अगर कोई छात्र पूरा उत्तर सही नहीं कर पाता है लेकिन उसने शुरुआत या कुछ स्टेप सही लिखे हैं तो उसे उन स्टेप्स के अनुसार अंक मिलेंगे. उदाहरण के लिए अगर कोई सवाल 5 अंकों का है और उसमें तीन स्टेप सही किए है तो उसे 3 अंक दिए जाएंगे. इससे उन छात्रों को फायदा होगा, जो अंतिम चरण में छोटी सी गलती कर बैठते हैं.      अब डिजिटल तरीके से होगी कॉपियों की जांच  इस बार यूपी बोर्ड ने कॉपियों की जांच प्रक्रिया को भी हाईटेक बना दिया है. उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर सर्वर पर अपलोड किया जाएगा और शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर लॉगिन करके उनकी जांच करेंगे. इस डिजिटल सिस्टम से नंबरों को जोड़ने में गलती से किसी उत्तर का छूट जाना या गलत टोटल जैसी समस्याएं खत्म होगी. साथ ही टीचर की ओर से दिए गए अंक सीधे बोर्ड के डेटाबेस में सेव हो जाएंगे, जिससे रिजल्ट तैयार करने में कम समय लगेगा.   वहीं बोर्ड ने टीचरों को भी निर्देश दिए हैं कि वह मूल्यांकन के दौरान उदारवादी रवैया अपनाएं और छात्रों के हर सही प्रयास को अंक दें. गणित और विज्ञान विषयों में स्टेप मार्किंग लागू की गई है, जबकि भाषा विषयों में ही भाषा संबंधी गलतियों पर ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा की अंग्रेजी माध्यम की कॉपी केवल अंग्रेजी विषय के योग्य शिक्षक ही जांचें.

Metroheadlines मार्च 18, 2026 0

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यूपीएससी की फर्जी रैंक वाला मामला

पिता के संघर्ष का रंग लाया सपना, यूपी के ने CA परीक्षा में रच दी नई कहानी

  फतेहपुर के छात्र मानस अग्रहरि गुप्ता ने CA परीक्षा में ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल कर जिले और राज्य का नाम रोशन किया है. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया है.   कड़ी मेहनत और बड़े सपनों के साथ अगर कोई आगे बढ़े तो मंजिल दूर नहीं रहती. यूपी के फतेहपुर जिले के एक होनहार बेटे ने यही साबित कर दिखाया है. जिले के मानस अग्रहरि गुप्ता ने ऑल इंडिया चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) परीक्षा में 19वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है.     जैसे ही यह खबर शहर में फैली, मानस के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया. पड़ोसी, रिश्तेदार और समाज के लोग इस सफलता पर खुशी जाहिर करने के लिए उनके घर पहुंचने लगे. हर कोई इस होनहार छात्र की मेहनत और लगन की तारीफ कर रहा है.     पिता के संघर्ष से मिली प्रेरणा मानस की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान माना जा रहा है. उनके पिता महेंद्र गुप्ता भारतीय रेलवे में चीफ कमर्शियल इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया.   बताया जाता है कि बेहतर पढ़ाई के लिए उन्होंने मानस को दिल्ली में रखकर पढ़ाया ताकि उसे अच्छी तैयारी का मौका मिल सके. पिता की मेहनत और संघर्ष को देखकर ही मानस ने अपने जीवन में कुछ बड़ा करने का फैसला किया. मानस खुद भी मानते हैं कि उनकी इस सफलता में उनके माता-पिता और परिवार का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें पढ़ाई में मुश्किल आती थी, तब परिवार ने उन्हें हिम्मत दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

Metroheadlines मार्च 11, 2026 0

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