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गर्मी, युद्ध और अब बार‍िश-ओलावृष्ट‍ि से खतरे में खेती, ट्र‍िपल अटैक से बेहाल क‍िसान

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0

 

देश के किसानों को इस साल फरवरी-मार्च में तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं की पैदावार में कमी, पश्चिम एशिया में जारी  युद्ध के कारण कृषि उत्पादों के निर्यात में बाधा, और बेमौसम बारिश से तैयार फसलों को भारी नुकसान. 

 

देश के किसानों पर एक ही महीने में तिहरी मार पड़ी है. मौसम में अचानक आए उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर और बेमौसम बारिश—इन तीनों ने मिलकर लगभग हर प्रमुख फसल को प्रभावित कर दिया है. स्थिति ऐसी है कि अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी...सभी फसलें किसी न किसी मोर्चे पर गंभीर दबाव में  हैं. पूरे हालात से स‍िर्फ क‍िसान ही परेशान नहीं हैं बल्क‍ि केंद्र सरकार की भी टेंशन बढ़ गई है. पूरे हालात की समीक्षा के ल‍िए सरकार बैठक पर बैठक कर रही है. लेक‍िन सवाल यह है क‍ि इतने बड़े संकट को झेल रहे क‍िसानों के जख्म पर मरहम कौन लगाएगा? 

 

सबसे बड़ी चिंता गेहूं को लेकर है. फरवरी-मार्च का समय गेहूं की भरपूर पैदावार के लिए बेहद अहम माना जाता है, लेकिन इस बार तापमान में अचानक वृद्धि ने हीट  स्ट्रेस की स्थिति बना दी. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उपज में कमी आने की आशंका है. 

 

दूसरा बड़ा झटका पश्चिम एशिया की जंग से लगा है. इस संघर्ष के चलते समुद्री रूट डिस्टर्ब हो गए हैं और भारत के कई प्रमुख कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग ठप  हो गया है. बासमती चावल, प्याज, केला और अंगूर जैसे उत्पाद, जिनकी रमजान के दौरान पश्चिम एशिया में भारी मांग रहती है, इस बार उस बाजार तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. शिपिंग बंद होने से किसानों और निर्यातकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

 

तीसरी और सबसे ताजा मार बेमौसम बारिश की है. देश के कई हिस्सों में अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया है आलू, सरसों, प्याज और दालें—जो कटाई के बिल्कुल करीब थीं—अब खराब होने के खतरे में हैं. इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ सकता है. 

कुल मिलाकर, इस साल की शुरुआत किसानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है. मौसम, अंतरराष्ट्रीय हालात और प्राकृतिक मार के मिलेजुले प्रभाव ने देश की कृषि व्यवस्था को झकझोर दिया है.

 

 

फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी का गेहूं पर असर


फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी को लेकर करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान  संस्थान (IIWBR) के पूर्व डायरेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह ने 'किसान तक' से कहा, पूरे हरियाणा में कोई नुकसान नहीं है और आगे भी किसी नुकसान की आशंका नहीं है. देश के अन्य राज्यों की बात करें तो अक्तूबर अंत से दिसंबर अंत तक गेहूं की बुआई होती है. इस अलग-अलग स्टेज में मौसम के मुताबिक गेहूं की खेती होती है. अभी तक रात का तापमान अच्छा रहा है जो गेहूं की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसलिए, गेहूं के उत्पादन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. सबकुछ ठीक रहेगा. 

 

बिहार में गेहूं की खेती पर क्या असर होगा? इसके जवाब में पूसा, बिहार के गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डीके सिंह ने कहा, जिस गेहूं की बुआई 15 दिसंबर  के बाद हुई है, उस पर बुरा असर पड़ेगा. 10 से 20 दिसंबर के बीच बोई गई फसल पर आंशिक असर और नवंबर की खेती पर कोई असर नहीं होगा. डीके सिंह ने कहा, बिहार के अधिकांश जिलों में 10 से 20 दिसंबर के बीच गेहूं की बुआई है, इसलिए उत्पादन पर आंशिक असर हो सकता है. हालांकि जिन खेतों में अभी नमी है, उसका उत्पादन प्रभावित नहीं होगा. 

 

उत्तर प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हाल रहेगा. बुंदेलखंड का इलाका गेहूं के लिए प्रमुख है, वहां गर्मी का असर देखा गया है. केवीके जालौन के अध्यक्ष और हेड डॉ. मोहम्मद मुस्तफा ने बताया कि बुंदेलखंड में इन दिनों तापमान में बढ़ोतरी हुई है. जालौन में तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया है जबकि झांसी में 40 डिग्री तक. ऐसे में बढ़ते तापमान का गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा. लगातार 1 हफ्ते तक तापमान में बढ़ोतरी का असर गेहूं के बालियों के  के दानों पर पड़ता है. इससे दाने पतले हो जाते हैं. ऐसे में प्रति एकड़ उत्पादन में 5 से 7% गिरावट देखने को मिलेगी. जिन किसानों ने मार्च की शुरुआत में हल्की सिंचाई कर दी थी, उन पर असर कम दिखाई देगा

 

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पाएं तप, ज्ञान और मनोवांछित फल! जानें विधि, मंत्र और आरती

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

ये हैं सबसे गलत और खतरनाक फूड कॉम्बिनेशन, आयुर्वेद में भी है इनका जिक्र

  Causes Of Bloating And Gas: हम क्या खाते हैं, इसका हमारी सेहत पर काफी असर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन फूड कॉम्बिनेशन से आपको बचना चाहिए और आयुर्वेद इसको लेकर क्या कहता है   Which Foods Should Not Be Eaten Together: खाना खाते समय हमें कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है. हम क्या खाते हैं और किन चीजों को साथ में मिलाकर खाते हैं, इसका सीधा असर हमारे डाइजेशन शक्ति पर पड़ता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन पाचन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक तत्व जमा कर सकते हैं. इसका नतीजा गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. चलिए आपको आयुर्वेद के हिसाब से बताते हैं कि किन कॉम्बिनेशन से हमें बचना चाहिए.      क्या कहता है आयुर्वेद?     आयुर्वेद के बारे में जानकारी देने वाली संस्था kevaayurveda के अनुसार, आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की वात, पित्त, कफ और पाचन क्षमता अलग होती है कुछ खानें की चीजें एक-दूसरे के विपरीत गुण रखते हैं. यदि इन्हें बार-बार साथ में खाया जाए तो डाइजेशन सिस्टम पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है. इससे गैस, कब्ज, सीने में जलन, मुंहासे, कमजोर इम्यूनिटी और डाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.     किन फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए?     kevaayurveda के अनुसार, कुछ प्रमुख गलत फूड कॉम्बिनेशन जिनसे बचने की सलाह दी जाती है, उनमें सबसे पहले आता है दूध और मछली. आयुर्वेद के अनुसार दूध ठंडा और भारी होता है, जबकि मछली गर्म तासीर वाली मानी जाती है. दोनों को साथ लेने से पाचन गड़बड़ा सकता है और स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी तरह दूध के साथ खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू या अनानास भी ठीक नहीं माने जाते, क्योंकि ये पेट में दूध को फाड़ सकते हैं और गैस या एसिडिटी बढ़ा सकते हैं.   गरम भोजन के साथ शहद मिलाना भी आयुर्वेद में हानिकारक बताया गया है. शहद को गर्म करने से उसके गुण बदल सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक प्रभाव पैदा हो सकता है. भारी भोजन के तुरंत बाद फल खाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि फल जल्दी पचते हैं और भारी भोजन के साथ पेट में फर्मेंटेशन शुरू कर सकते हैं. दही और चीनी का मेल भी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. दही पहले से ही खट्टा और ठंडा होता है, जबकि रिफाइंड चीनी शरीर में असंतुलन बढ़ा सकती है. रात में दही को फल या ठंडी चीजों के साथ लेना कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या हो सकती है. बासी भोजन के साथ दूध लेना भी पाचन के लिए सही नहीं माना गया.     किन चीजों का सेवन करना चाहिए?     आयुर्वेद सलाह देता है कि मौसमी आहार लें, जरूरत से ज्यादा न खाएं और अदरक, जीरा, सौंफ जैसे मसालों का उपयोग करें, जो डाइजेशन को मजबूत बनाते हैं. सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाने से डाइजेशन मजबूत रहती है, न्यूट्रिशन तत्वों का ऑब्जर्वेशन बेहतर होता है और शरीर संतुलित रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह नियम और भी लाभकारी माने जाते हैं.  

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गर्मी, युद्ध और अब बार‍िश-ओलावृष्ट‍ि से खतरे में खेती, ट्र‍िपल अटैक से बेहाल क‍िसान

  देश के किसानों को इस साल फरवरी-मार्च में तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं की पैदावार में कमी, पश्चिम एशिया में जारी  युद्ध के कारण कृषि उत्पादों के निर्यात में बाधा, और बेमौसम बारिश से तैयार फसलों को भारी नुकसान.    देश के किसानों पर एक ही महीने में तिहरी मार पड़ी है. मौसम में अचानक आए उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर और बेमौसम बारिश—इन तीनों ने मिलकर लगभग हर प्रमुख फसल को प्रभावित कर दिया है. स्थिति ऐसी है कि अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी...सभी फसलें किसी न किसी मोर्चे पर गंभीर दबाव में  हैं. पूरे हालात से स‍िर्फ क‍िसान ही परेशान नहीं हैं बल्क‍ि केंद्र सरकार की भी टेंशन बढ़ गई है. पूरे हालात की समीक्षा के ल‍िए सरकार बैठक पर बैठक कर रही है. लेक‍िन सवाल यह है क‍ि इतने बड़े संकट को झेल रहे क‍िसानों के जख्म पर मरहम कौन लगाएगा?    सबसे बड़ी चिंता गेहूं को लेकर है. फरवरी-मार्च का समय गेहूं की भरपूर पैदावार के लिए बेहद अहम माना जाता है, लेकिन इस बार तापमान में अचानक वृद्धि ने हीट  स्ट्रेस की स्थिति बना दी. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उपज में कमी आने की आशंका है.    दूसरा बड़ा झटका पश्चिम एशिया की जंग से लगा है. इस संघर्ष के चलते समुद्री रूट डिस्टर्ब हो गए हैं और भारत के कई प्रमुख कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग ठप  हो गया है. बासमती चावल, प्याज, केला और अंगूर जैसे उत्पाद, जिनकी रमजान के दौरान पश्चिम एशिया में भारी मांग रहती है, इस बार उस बाजार तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. शिपिंग बंद होने से किसानों और निर्यातकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.   तीसरी और सबसे ताजा मार बेमौसम बारिश की है. देश के कई हिस्सों में अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया है आलू, सरसों, प्याज और दालें—जो कटाई के बिल्कुल करीब थीं—अब खराब होने के खतरे में हैं. इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ सकता है.  कुल मिलाकर, इस साल की शुरुआत किसानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है. मौसम, अंतरराष्ट्रीय हालात और प्राकृतिक मार के मिलेजुले प्रभाव ने देश की कृषि व्यवस्था को झकझोर दिया है.     फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी का गेहूं पर असर फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी को लेकर करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान  संस्थान (IIWBR) के पूर्व डायरेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह ने 'किसान तक' से कहा, पूरे हरियाणा में कोई नुकसान नहीं है और आगे भी किसी नुकसान की आशंका नहीं है. देश के अन्य राज्यों की बात करें तो अक्तूबर अंत से दिसंबर अंत तक गेहूं की बुआई होती है. इस अलग-अलग स्टेज में मौसम के मुताबिक गेहूं की खेती होती है. अभी तक रात का तापमान अच्छा रहा है जो गेहूं की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसलिए, गेहूं के उत्पादन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. सबकुछ ठीक रहेगा.    बिहार में गेहूं की खेती पर क्या असर होगा? इसके जवाब में पूसा, बिहार के गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डीके सिंह ने कहा, जिस गेहूं की बुआई 15 दिसंबर  के बाद हुई है, उस पर बुरा असर पड़ेगा. 10 से 20 दिसंबर के बीच बोई गई फसल पर आंशिक असर और नवंबर की खेती पर कोई असर नहीं होगा. डीके सिंह ने कहा, बिहार के अधिकांश जिलों में 10 से 20 दिसंबर के बीच गेहूं की बुआई है, इसलिए उत्पादन पर आंशिक असर हो सकता है. हालांकि जिन खेतों में अभी नमी है, उसका उत्पादन प्रभावित नहीं होगा.    उत्तर प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हाल रहेगा. बुंदेलखंड का इलाका गेहूं के लिए प्रमुख है, वहां गर्मी का असर देखा गया है. केवीके जालौन के अध्यक्ष और हेड डॉ. मोहम्मद मुस्तफा ने बताया कि बुंदेलखंड में इन दिनों तापमान में बढ़ोतरी हुई है. जालौन में तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया है जबकि झांसी में 40 डिग्री तक. ऐसे में बढ़ते तापमान का गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा. लगातार 1 हफ्ते तक तापमान में बढ़ोतरी का असर गेहूं के बालियों के  के दानों पर पड़ता है. इससे दाने पतले हो जाते हैं. ऐसे में प्रति एकड़ उत्पादन में 5 से 7% गिरावट देखने को मिलेगी. जिन किसानों ने मार्च की शुरुआत में हल्की सिंचाई कर दी थी, उन पर असर कम दिखाई देगा  

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0

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