Russian Oil: मिडिल ईस्ट में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के बीच भारत ने रूसी तेल सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए बीमा कंपनियों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी के कारण दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. ऐसे समय में भारत ने एक बड़ा और समझदारी भरा कदम उठाया है, ताकि उसे तेल की कमी का सामना न करना पड़े. भारत सरकार ने फैसला लिया है कि अब रूसी तेल लाने वाले जहाजों के लिए बीमा देने वाली रूसी कंपनियों की संख्या बढ़ाई जाएगी. पहले 8 कंपनियों को अनुमति थी, अब इसे बढ़ाकर 11 कर दिया गया है. यह फैसला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने लिया है. ये कंपनियां जहाजों को खास तरह का बीमा देती हैं, जिसे P&I कवर कहा जाता है. यह बीमा बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इसके बिना कोई भी जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्र में काम नहीं कर सकता. असल में, रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण यूरोप की बड़ी बीमा कंपनियों ने रूसी तेल ढोने वाले जहाजों को बीमा देना कम कर दिया था. इससे भारत के सामने समस्या खड़ी हो गई थी, क्योंकि वह बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीद रहा है. अब भारत ने रूसी कंपनियों को मंजूरी देकर इस परेशानी का हल निकाल लिया है कौन सी बड़ी कंपनियों को दी गई अनुमति? दुनिया की कुछ बड़ी रूसी कंपनियों जैसे गज़प्रोम इंश्योरेंस और रोसगोस्त्राख को फरवरी 2027 तक काम करने की अनुमति दी गई है. वहीं VSK, सोगाज़ और अल्फास्ट्राखोवानी कंपनियों को 2030 तक की मंजूरी दी गई है. इससे साफ है कि भारत ने सिर्फ अभी की नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों की तैयारी कर ली है. इसके अलावा कुछ और कंपनियों को भी शामिल किया गया है और दुबई स्थित इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब कंपनी को फरवरी 2027 तक सेवाएं देने की अनुमति दी गई है, ताकि विकल्प ज्यादा हों और किसी एक पर निर्भरता कम हो. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ा हुआ है. यह रास्ता दुनिया के लिए बहुत अहम है, क्योंकि बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से आता-जाता है. अगर यहां रुकावट आती है तो इसका असर भारत जैसे देशों पर सीधे पड़ता है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है और हाल के समय में उसने रूस से सस्ता तेल खरीदना बढ़ाया है. ऐसे में यह जरूरी था कि तेल लाने में कोई रुकावट न आए. भारत का यह कदम एक तरह से सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा. इससे तेल की सप्लाई बनी रहेगी और देश की ऊर्जा जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकेंगी.
Trump on Iran: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड पूरी तरह लागू रहेगा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि मौजूदा सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता. उन्होंने कहा कि अगर बुधवार तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर सकता है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल दबाव जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो बमबारी भी फिर से शुरू की जा सकती है. होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर राजी हुआ ईरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक अहम वैश्विक शिपिंग रूट, यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है. एरिजोना में Turning Point USA के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह स्ट्रेट अब पूरी तरह खुला है और व्यापार के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा कॉरिडोर में से एक बना हुआ है. “डील नहीं तो जारी रहेगा सैन्य दबाव” ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड पूरी तरह लागू रहेगा. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “शायद मैं इसे आगे न बढ़ाऊं, लेकिन ईरान पर ब्लॉकेड जारी रहेगा. और दुर्भाग्य से हमें फिर से बम गिराने शुरू करने पड़ सकते हैं.” ‘न्यूक्लियर डस्ट’ वापस लाने की योजना अपने भाषण में ट्रंप ने एक विवादित योजना का भी जिक्र किया, जिसमें ईरान में पुराने अमेरिकी हमलों के बाद बचे मलबे, जिसे उन्होंने “न्यूक्लियर डस्ट” कहा, को वापस अमेरिका लाने की बात कही. इसके लिए उन्होंने संयुक्त खुदाई अभियान (जॉइंट ऑपरेशन) का प्रस्ताव दिया. क्षेत्रीय कूटनीति का दावा, सीजफायर का श्रेय ट्रंप ने इन घटनाओं को व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि अमेरिका की कोशिशों से क्षेत्र में तनाव कम हुआ है. उन्होंने इजरायल और लेबनान के बीच हुए सीजफायर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि ऐसा समझौता पिछले 78 वर्षों में नहीं हुआ. पाकिस्तान समेत कई देशों का जताया आभार ट्रंप ने इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि इन देशों ने क्षेत्र में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई है. यूरोपीय सहयोगियों पर तीखा हमला ट्रंप ने अपने भाषण में यूरोप के सहयोगियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को पारंपरिक साझेदारियों पर कम निर्भर रहना चाहिए. NATO का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जरूरत के समय यह संगठन बेकार साबित हुआ. हमने दुनिया की सबसे बड़ी सेना बनाई ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बनाई है और भविष्य की रणनीति में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा. उन्होंने खुद को एक ग्लोबल डीलमेकर बताते हुए कहा कि वह अब तक कई युद्ध खत्म करवा चुके हैं और आगे यह संख्या और बढ़ सकती है.
नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से भारतीय सीमा के साथ ही नेपाल में भी बवाल मचना शुरू हो गया है. नेपाली पार्टियों ने भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध किया है. नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से पड़ोसी देश में नया तूफान खड़ा हो गया है. नेपाल पुलिस ने भारत से लगने वाली सीमा शुल्क चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी है. बालेन सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि भारत से आने वाले 100 रुपये से ज्यादा की कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य रूप से वसूली जाए. दरअसल, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग खाने-पीने की चीजें, कपड़े और घर का अन्य सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों में जाते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय व्यापारियों के साथ ही राजस्व का भी नुकसान होता है. नेपाल के इस कदम से बॉर्डर के पास मौजूद भारतीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है. भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर सख्ती इसके अलावा भारतीय सीमा से लगे मधेश प्रांत में भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों की आवाजाही पर भी सख्ती हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों का बिना इजाजत इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है. नेपाल में राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि सख्त नियमों के चलते भारत संग लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और आर्थिक रिश्ते बिगड़ने का खतरा है. क्या कह रहीं नेपाली पार्टियां नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी, CPN-UML, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी समेत बड़े राजनीतिक दलों ने 12 अप्रैल को भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें मांग की गई कि ऐसी गाड़ियों को पहले की तरह बॉर्डर के 30 किलोमीटर के दायरे में आजादी से चलने दिया जाए. अधिकारी ने क्या बताया नेपाली अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद कानूनों को लागू करना है. काठमांडू टाइम्स ने सरलाही के मुख्य जिला अधिकारी रामूराज कदरिया के हवाले से बताया कि बिना कस्टम ड्यूटी दिए गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और हम बस कानून लागू कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि नियमों के बावजूद इनका पालन नहीं हो रहा है. एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर काठमांडू टाइम्स से बताया कि पहले लोग एक दिन का टैक्स देते थे और महीनों तक गाड़ी का इस्तेमाल करते थे. अब ऐसा नहीं होगा. हालांकि इन गाड़ियों का कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का अंदाजा है कि मधेश प्रांत के 8 जिलों में 10,000 से ज्यादा भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियां चल रही होंगी. बॉर्डर इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर ज्यादा कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियां खरीदते हैं.
दिल्ली और उत्तराखंड के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का आज उद्घाटन किया गया। यह विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा परियोजना न केवल दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ती है, बल्कि पूरे उत्तरी भारत की आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और औद्योगिक विकास को नई गति देने वाली साबित होगी। इस कॉरिडोर के शुरू होने से राजधानी दिल्ली से देहरादून की दूरी को तय करने में लगने वाला समय अब काफी कम हो जाएगा, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह कॉरिडोर अत्याधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें मल्टी-लेन एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, स्मार्ट टोलिंग और पर्यावरण-संवेदनशील डिजाइन शामिल हैं। पहले जहां दिल्ली से देहरादून पहुंचने में 6 से 7 घंटे तक का समय लग जाता था, वहीं अब यह यात्रा लगभग 2.5 से 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ पर्यटन क्षेत्र को मिलने वाला है। देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल अब दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से अधिक सुलभ हो जाएंगे। इससे देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। पर्यटन के बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय व्यवसायों को सीधा फायदा होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आर्थिक दृष्टि से भी यह कॉरिडोर अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी से माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज और सस्ती होगी, जिससे उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के बीच व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और नए निवेश के रास्ते खुलेंगे। इस कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक क्लस्टर, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होने की संभावना है, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष अंडरपास और ओवरपास बनाए गए हैं, ताकि जानवरों की आवाजाही बाधित न हो। साथ ही, हरित क्षेत्र को संरक्षित रखने और प्रदूषण को कम करने के लिए कई पर्यावरणीय उपाय किए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से भी यह कॉरिडोर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग यूनिट्स की व्यवस्था की गई है। इससे यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए भी कई स्मार्ट उपाय अपनाए गए हैं। सरकार का मानना है कि यह परियोजना ‘नए भारत’ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की समग्र आर्थिक प्रगति में भी योगदान मिलेगा। यह कॉरिडोर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में हो रहे तेज विकास का प्रतीक है और भविष्य में इसी तरह की और परियोजनाओं के लिए प्रेरणा बनेगा। स्थानीय लोगों के लिए भी यह कॉरिडोर कई अवसर लेकर आया है। बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी। छोटे व्यवसायों और कुटीर उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके अलावा, रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आने की संभावना है। कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर एक गेम-चेंजर परियोजना के रूप में उभरकर सामने आया है। यह न केवल यात्रा को आसान और तेज बनाएगा, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खोलेगा। आने वाले समय में यह कॉरिडोर उत्तर भारत की विकास गाथा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और देश की प्रगति को नई दिशा देगा। The Delhi-Dehradun Economic Corridor, being inaugurated today, is a world-class infrastructure project that will deepen connectivity, boost the economy and tourism. https://t.co/5TayGK4QLZ— Narendra Modi (@narendramodi) April 14, 2026
📰 आसनसोल में जोश का सैलाब: पीएम नरेंद्र मोदी के विकास एजेंडे को मिला समर्थन, टीएमसी पर निशाना पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में आसनसोल में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम में भारी भीड़ और उत्साह देखने को मिला। इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दावा किया है कि यह जनसमर्थन राज्य में बदलाव की लहर का संकेत है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिनके विकास एजेंडे को लेकर जनता में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। 🔥 आसनसोल में दिखा जबरदस्त जनउत्साह आसनसोल में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सिर्फ एक राजनीतिक सभा नहीं बल्कि “परिवर्तन की उम्मीद” का प्रतीक बन गया है। सभा में मौजूद लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में नारे लगाए और राज्य में विकास की मांग को दोहराया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह उत्साह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल की जनता अब विकास और सुशासन चाहती है। 🏗️ विकास एजेंडा बना मुख्य मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को इस कार्यक्रम में प्रमुखता से रखा गया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन और डिजिटल इंडिया—का लाभ पश्चिम बंगाल के लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर राज्य में बीजेपी की सरकार बनती है, तो विकास की रफ्तार और तेज होगी। ⚔️ टीएमसी पर सीधा हमला इस कार्यक्रम में तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर भी जमकर निशाना साधा गया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार विकास कार्यों में बाधा डाल रही है और राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। सभा में मौजूद लोगों ने भी टीएमसी के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि वे अब बदलाव चाहते हैं। 🗳️ चुनावी संकेत और राजनीतिक संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आसनसोल में दिखा यह जनसमर्थन आने वाले चुनावों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। पश्चिम बंगाल में पहले से ही बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। इस तरह के बड़े कार्यक्रम बीजेपी के लिए मनोबल बढ़ाने वाले साबित हो सकते हैं। 🌍 बीजेपी की रणनीति: जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना भारतीय जनता पार्टी लगातार पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके तहत पार्टी छोटे शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में ज्यादा ध्यान दे रही है, जहां विकास और रोजगार बड़े मुद्दे हैं। आसनसोल, जो एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। 📊 विश्लेषण: क्या बदल रही है बंगाल की राजनीति? विकास बनाम पहचान की राजनीति बीजेपी विकास के मुद्दे को आगे बढ़ा रही है, जबकि टीएमसी अपनी पारंपरिक राजनीति पर कायम है। औद्योगिक क्षेत्रों में असंतोष रोजगार और उद्योगों की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। केंद्र बनाम राज्य सरकार दोनों के बीच टकराव का असर आम जनता पर भी पड़ रहा है। গতকাল আসানসোলে উদ্দীপনার এক ঝলক। পশ্চিমবঙ্গ বিজেপির উন্নয়নের রূপরেখাকে সমর্থন করছে এবং তৃণমূলকে কখনোই সমর্থন করবে না! pic.twitter.com/IYQyJxzJge— Narendra Modi (@narendramodi) April 10, 2026
कृषि में नए युग की शुरुआत: ‘पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026’ जयपुर में आयोजित राजस्थान की राजधानी जयपुर में 7 अप्रैल 2026, मंगलवार को आयोजित ‘पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026’ ने देश के कृषि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा और दिशा देने का काम किया। यह सम्मेलन किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और एग्री-टेक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने मिलकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर मंथन किया। सम्मेलन में विशेष रूप से स्मार्ट फार्मिंग, ड्रोन तकनीक, जैविक खेती, और डिजिटल कृषि जैसे विषयों पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे नई तकनीकों के माध्यम से फसल उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है और लागत को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और नई कृषि नीतियों की जानकारी भी दी गई, जिससे वे अपने व्यवसाय को और मजबूत बना सकें। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ना था। सम्मेलन में कई सफल किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे उन्होंने नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की। इससे अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिली कि वे बदलाव को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं। ‘पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026’ न केवल एक कार्यक्रम रहा, बल्कि यह किसानों के लिए एक ऐसा मंच साबित हुआ, जहां उन्हें सीखने, समझने और आगे बढ़ने का अवसर मिला। इस तरह के आयोजनों से निश्चित रूप से भारतीय कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी और किसानों की समृद्धि का रास्ता और मजबूत होगा। कृषि में नए युग की शुरुआत...'पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026'किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक तकनीक और नवाचार को समर्पित एक महत्वपूर्ण पहल। 🗓️ 7 अप्रैल 2026, मंगलवार 📍 जयपुर, राजस्थानआइए, साथ मिलकर खेती को और अधिक उन्नत, समृद्ध एवं लाभकारी बनाएं।@BhajanlalBjp @RajCMO… pic.twitter.com/jTVIxL4NoK— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) April 7, 2026
असम के डिब्रूगढ़ में आयोजित हालिया राजनीतिक रैली ने एक बार फिर राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर को साफ कर दिया है। “The energy at the rally in Dibrugarh is unmatched. Assam stands firmly with the BJP-NDA.” जैसे संदेशों ने इस बात को और मजबूत किया कि पूर्वोत्तर भारत में Bharatiya Janata Party और National Democratic Alliance की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। इस रैली में उमड़ी भीड़, कार्यकर्ताओं का जोश और नेतृत्व के प्रति समर्थन यह संकेत देता है कि असम में आगामी चुनावों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। 📍 डिब्रूगढ़: राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र Dibrugarh, जिसे असम की सांस्कृतिक और आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है, इस समय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। चाय बागानों और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे इस शहर में आयोजित रैली में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, हर वर्ग के लोगों की भागीदारी ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया। रैली स्थल पर सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—हर वर्ग के लोग पार्टी के झंडे और बैनर लेकर पहुंचे। इससे साफ दिखा कि BJP-NDA के प्रति लोगों का विश्वास और समर्थन लगातार बढ़ रहा है। 🔥 रैली की ऊर्जा और जनसमर्थन इस रैली की सबसे बड़ी खासियत रही इसकी “ऊर्जा”। मंच से दिए गए भाषणों के दौरान हर नारे पर भीड़ का उत्साह चरम पर था। “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “BJP जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रैलियां सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि यह जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ और संगठन की मजबूती को भी दर्शाती हैं। डिब्रूगढ़ की यह रैली इसी का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई। 🏛️ असम में BJP-NDA की मजबूत स्थिति पिछले कुछ वर्षों में असम में BJP-NDA ने अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया है। राज्य में विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सामाजिक योजनाओं ने जनता के बीच पार्टी की छवि को सकारात्मक बनाया है। प्रमुख कारण: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: सड़कों, पुलों और कनेक्टिविटी में सुधार सामाजिक योजनाएं: गरीब और मध्यम वर्ग के लिए योजनाओं का विस्तार सुरक्षा और स्थिरता: कानून-व्यवस्था में सुधार इन सभी कारणों ने मिलकर BJP-NDA को असम में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बना दिया है। 👥 नेतृत्व और संगठन की भूमिका किसी भी रैली की सफलता उसके नेतृत्व और संगठन पर निर्भर करती है। इस रैली में भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही। नेताओं ने अपने भाषणों में केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और आने वाले समय के लिए अपनी योजनाओं को जनता के सामने रखा। उन्होंने यह भी कहा कि असम के विकास के लिए BJP-NDA ही सबसे बेहतर विकल्प है। 🗳️ चुनावी रणनीति का हिस्सा डिब्रूगढ़ की यह रैली सिर्फ एक जनसभा नहीं थी, बल्कि यह आगामी चुनावों की रणनीति का अहम हिस्सा भी थी। इस तरह की रैलियों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों को एकजुट करती है और नए मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रैली का मुख्य उद्देश्य था: संगठन को मजबूत करना कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना विपक्ष को संदेश देना ⚔️ विपक्ष के लिए चुनौती BJP-NDA की इस मजबूत उपस्थिति ने विपक्षी दलों के लिए चुनौती बढ़ा दी है। जहां एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी उपलब्धियों के दम पर चुनावी मैदान में उतर रहा है, वहीं विपक्ष को अभी भी एकजुटता और स्पष्ट रणनीति की जरूरत है। डिब्रूगढ़ की रैली ने यह साफ कर दिया है कि मुकाबला आसान नहीं होने वाला है। 🌏 पूर्वोत्तर में बदलती राजनीति पूर्वोत्तर भारत में पिछले कुछ वर्षों में राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। जहां पहले क्षेत्रीय दलों का दबदबा था, वहीं अब राष्ट्रीय पार्टियां भी मजबूत होती जा रही हैं। असम इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां BJP-NDA ने न सिर्फ अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाई है। 📊 जनता का मूड क्या कहता है? रैली में शामिल लोगों से बातचीत करने पर यह साफ हुआ कि वे विकास, रोजगार और स्थिरता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि वे सरकार के काम से संतुष्ट हैं और चाहते हैं कि विकास की यह गति जारी रहे। हालांकि कुछ लोगों ने स्थानीय समस्याओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चिंता भी जताई। The energy at the rally in Dibrugarh is unmatched. Assam stands firmly with the BJP-NDA. https://t.co/PssFXuyXrJ— Narendra Modi (@narendramodi) April 6, 2026
Raghav Chadha ने 4 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Twitter (एक्स) पर एक पोस्ट साझा करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि वह पहले चुप रहना चाहते थे, लेकिन बार-बार दोहराए जा रहे “झूठ” को सच बनने से रोकने के लिए उन्हें सामने आना पड़ा। “Three Allegations. Zero Truth.” शीर्षक के साथ उन्होंने एक विस्तृत जवाब जारी किया, जिसमें कथित तीन आरोपों का क्रमवार खंडन किया गया। इस बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार, भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गलत जानकारी फैलाने का उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राजनीतिक माहौल पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है और सोशल मीडिया पर नेताओं के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है। उनके इस जवाब के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस और भी तेज हो गई है, जिससे यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता। Three Allegations. Zero Truth. My Response: pic.twitter.com/tPdjp04TLt — Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 4, 2026
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता Raghav Chadha का एक नया ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 3 अप्रैल 2026 को किए गए इस ट्वीट में उन्होंने केवल 🇮🇳 (भारतीय तिरंगा) का प्रतीक साझा किया, जिसके साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की गई है। हालांकि ट्वीट में कोई विस्तृत संदेश नहीं लिखा गया, लेकिन तिरंगे के इस्तेमाल ने इसे खास बना दिया है। सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्ट को देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक ट्वीट अक्सर बड़े संदेश देने के लिए किए जाते हैं, खासकर ऐसे समय में जब देश में चुनावी माहौल या राजनीतिक गतिविधियां तेज होती हैं। यह ट्वीट भी ऐसे ही समय में सामने आया है, जब देश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। ऐसे में Raghav Chadha का यह पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। 🇮🇳 pic.twitter.com/NfITxUKLVE— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 3, 2026
चुनावी प्रचार के व्यस्त कार्यक्रम के बीच Chennai में एक खास मुलाकात ने सांस्कृतिक चर्चा को नया आयाम दे दिया। इस दौरान Ramesh Vinayakam और उनके परिवार से भेंट हुई। रमेश विनायकम एक प्रसिद्ध संगीतकार हैं, जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने अभिनव प्रोजेक्ट Gamaka Box Notation System की झलक भी दिखाई। यह प्रणाली भारतीय संगीत की जटिलताओं—खासतौर पर गमकों (स्वरों के सूक्ष्म उतार-चढ़ाव)—को सरल और वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास है। इससे न केवल भारतीय संगीत को सीखना आसान होगा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझने और सिखाने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। चुनावी माहौल के बीच इस तरह की सांस्कृतिक पहल यह दर्शाती है कि देश में कला और परंपरा को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार जारी हैं। In the midst of election campaigning, had the opportunity to meet Thiru Ramesh Vinayakam Ji and his family in Chennai. Ramesh Ji is a music composer and has devoted his life to popularising Indian music. He gave me a glimpse of his work in making the Gamaka Box Notation System.… pic.twitter.com/H2vGlCqUtH — Narendra Modi (@narendramodi) April 4, 2026
Kerala की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘Mera Booth, Sabse Mazboot Samvaad’ कार्यक्रम के दौरान Narendra Modi ने राज्य में वर्षों से सत्ता में रही Left Democratic Front (LDF) और United Democratic Front (UDF) पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने कहा कि LDF और UDF के लंबे समय के कुप्रबंधन (misgovernance) के कारण केरल का विकास प्रभावित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और उनका भरोसा Bharatiya Janata Party (BJP) और NDA पर बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं (कऱ्यकर्ताओं) से सीधे संवाद किया और उन्हें बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि “मेरा बूथ, सबसे मजबूत” का लक्ष्य ही पार्टी की जीत की नींव है और हर कार्यकर्ता की भूमिका इसमें बेहद महत्वपूर्ण है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, जहां BJP केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, LDF और UDF दोनों ही गठबंधनों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी नीतियों और विकास कार्यों का बचाव किया है। केरल की राजनीति लंबे समय से LDF और UDF के बीच केंद्रित रही है, लेकिन BJP लगातार राज्य में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के प्रयास में लगी हुई है। ऐसे में आने वाले चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। Years of LDF and UDF misgovernance held Keralam back. The people are placing their trust in the BJP-NDA. Interacting with the Karyakartas during ‘Mera Booth, Sabse Mazboot Samvaad.’ https://t.co/OSTQ84bh4i— Narendra Modi (@narendramodi) April 2, 2026
“Karmayogi Sadhana Saptah” के दौरान दिए गए अपने संबोधन में Narendra Modi ने कर्मयोग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के महत्व को विस्तार से समझाया। इस विशेष सप्ताह का उद्देश्य प्रशासनिक और सामाजिक जीवन में कार्य के प्रति समर्पण, पारदर्शिता और सेवा भावना को मजबूत करना है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एक सच्चा कर्मयोगी वही होता है, जो बिना किसी स्वार्थ के अपने कर्तव्यों का पालन करता है और समाज के हित को सर्वोपरि रखता है। उन्होंने यह भी बताया कि आज के समय में केवल नीतियां बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू करना भी उतना ही जरूरी है। इस दौरान उन्होंने सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और नागरिकों से अपील की कि वे अपने कार्य को केवल नौकरी न समझें, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानें। उन्होंने कहा कि “कर्मयोग” की भावना अपनाकर ही हम एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं। “Karmayogi Sadhana Saptah” के जरिए प्रशासनिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और जवाबदेही को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। इस पहल से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि हर व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करे और समाज के विकास में सक्रिय योगदान दे। अंत में उन्होंने यह भी कहा कि जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार होगा, तभी देश तेजी से प्रगति करेगा और वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएगा। Sharing my remarks during the Karmayogi Sadhana Saptah. https://t.co/8nkQJE1QZQ— Narendra Modi (@narendramodi) April 2, 2026
Raghav Chadha ने संसद में एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा उठाते हुए भारत में पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को कानूनी अधिकार बनाने की मांग की है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि जब एक बच्चे का जन्म होता है, तो समाज दोनों माता-पिता को बधाई देता है, लेकिन देखभाल की जिम्मेदारी अक्सर केवल मां पर ही आ जाती है। यह असमानता न केवल महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि परिवार के संतुलन को भी प्रभावित करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक पिता को अपने नवजात शिशु की देखभाल और अपनी नौकरी के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। वहीं, एक मां को प्रसव और उसके बाद के कठिन समय में अपने पति के सहयोग के बिना नहीं रहना चाहिए। चड्ढा के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद का समय ऐसा होता है जब महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत होती है, और ऐसे में पिता की उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है। संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि केयरगिविंग (देखभाल) केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दोनों माता-पिता की साझा जिम्मेदारी है। इसलिए देश के कानूनों में भी इस समानता को दर्शाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि पितृत्व अवकाश को कानूनी रूप से लागू करने से न केवल महिलाओं को राहत मिलेगी, बल्कि परिवार में संतुलन और बच्चों के बेहतर पालन-पोषण में भी मदद मिलेगी। यह मुद्दा भारत में वर्क-लाइफ बैलेंस, जेंडर इक्वालिटी और परिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे सकता है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह कामकाजी परिवारों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। I demanded in Parliament that PATERNITY LEAVE should be a legal right in India.When a child is born, both parents are congratulated. But caregiving responsibility falls on one. The mother.A father should not have to choose between caregiving for his newborn and keeping his… pic.twitter.com/sbvC0xfrGO— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 31, 2026
Chandrikapersad Santokhi के आकस्मिक निधन से पूरे विश्व में शोक की लहर है। यह दुखद घटना न केवल Suriname के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए भी एक गहरी पीड़ा का क्षण है। संतोक्खी जी अपने समर्पित नेतृत्व, सरल स्वभाव और भारत के प्रति विशेष लगाव के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनके साथ हुई मुलाकातों की स्मृतियाँ आज भी मन में ताजा हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सुरिनाम के विकास और भारत-सुरिनाम संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने राष्ट्रपति पद की शपथ संस्कृत में ली, जो दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी और लोगों के दिलों को छू गई। उनका जीवन सेवा, समर्पण और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक था। उनके निधन से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना संभव नहीं है। इस कठिन समय में उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए, उनके परिवार और सुरिनाम की जनता के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की जाती हैं। ओम् शांति। Deeply shocked and saddened by the sudden demise of my friend and the former President of Suriname, Mr. Chandrikapersad Santokhi Ji. This is not only an irreparable loss to Suriname but also to the global Indian diaspora. I fondly recall my many meetings with him. His tireless… pic.twitter.com/2Yy7sppwDy — Narendra Modi (@narendramodi) March 31, 2026
Amit Shah ने आज लोकसभा में देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई पर विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और विश्वास—इन तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति अपनाई है। अमित शाह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में नक्सल हिंसा की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है, कई जिलों को नक्सल मुक्त घोषित किया गया है और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सलियों का नेटवर्क कमजोर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार केवल सुरक्षा अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं को तेजी से पहुंचाया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा है और वे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। गृह मंत्री ने बताया कि आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया तंत्र और राज्यों के साथ समन्वय से नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई और प्रभावी हुई है। अमित शाह ने लोकसभा में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है और इसके लिए एक समयसीमा के तहत काम किया जा रहा है। उन्होंने सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि देश उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता।
Earthquake: दक्षिण प्रशांत द्वीप समूह के वानुअतु तट पर 7.2 तीव्रता का तेज भूंकप आया है. सुनामी चेतावनी केंद्र ने इसकी जानकारी दी है. करीब डेढ लाख लोग इस भूकंप से प्रभावित हुए हैं. दक्षिण प्रशांत द्वीप समूह के वानुअतु तट पर 7.2 तीव्रता का तेज भूंकप आया है. सुनामी चेतावनी केंद्र ने इसकी जानकारी दी है. भूकंप के झटके काफी तेज थे. हालांकि, अब तक किसी प्रकार की जनहानि या नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. स्थानीय प्रशासन एहतियाती कदम उठा रहा है और क्षेत्र की निगरानी की जा रही है. यूनाइटेड स्ट्टेस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, यह भूकंप सोमवार 30 मार्च 2026 की शाम को 7:44 बजे (स्थानीय समय के अनुसार) आया. इसका केंद्र जमीन से 87.50 किलोमीटर की मध्यम गहराई पर था. इसके अलावा कहा गया है कि सटीक तीव्रता, केंद्र और गहराई के आंकड़े कुछ घंटो या मिनटों में बदले जा सकते हैं. भूकंप की साइंटिफिक डेटा की समीक्षा की जा रही है. इसके अलावा कहा गया है कि हमारी मॉनिटरिंग सर्विस को इनकॉर्पोरेटेड रिसर्च इंस्टीट्यूशन्स फॉर सीस्मोलॉजी' (IRIS) से एक दूसरी रिपोर्ट भी मिली है. इसमें इस भूकंप की तीव्रता 7.2 ही बताई गई है. वहीं फ्रांस की रेजो नेशनल डी सर्विलां सिस्मिक ने इसकी तीव्रता 6.3 बताई है. जर्मनी की रिसर्च फॉर जिसोसाइंसेज ने इसकी तीव्रता 7.0 बताई है. जानकारी के मुताबिक, भूकंप के झटके आसपास के इलाके में लगभग हर किसी ने महसूस किए हैं. इसका हल्का नुकसान हो सकता है. भूकंप के केंद्र से 28 किलोमीटर दूर स्थित लुगनविले, 41 किलोमीटर दूर स्थित हॉग हार्बर, 51 किलोमीटर दूर स्थित पोर्ट-ओली, 75 किलोमीटर दूर स्थित नोरसप, और 169 किलोमीटर दूर स्थित सोला में मध्यम स्तर का कंपन महसूस हुआ होगा. यूएसजीएस के आंकड़ों के अनुसार, लुगनविले सहित लगभग 140,000 लोगों ने तेज से बहुत तेज भूकंप के झटके महसूस किए होंगे, जबकि वानुअतु की राजधानी पोर्ट विला में हल्के झटके महसूस किए गए होंगे. वानुआतू दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक में स्थित है, जहां ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर की प्लेटें तेजी से एक-दूसरे से टकराती हैं. इस सबडक्शन जोन में बड़े भूकंप आना आम बात है. यूएसजीएस के अनुसार, 1900 से अब तक वहां 7.5 या उससे अधिक तीव्रता के 34 भूकंप दर्ज किए गए हैं.
मध्य प्रदेश में एक बार फिर मेहनत और संकल्प की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक साधारण किसान परिवार की बेटी प्राची ने अपने कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय के दम पर UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा को पास कर देशभर में अपनी पहचान बनाई है। इस उपलब्धि पर Shivraj Singh Chouhan ने प्राची को सम्मानित करते हुए उसकी सफलता को पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया। शिवराज सिंह चौहान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने प्राची और उसके परिवार से मुलाकात की, जो Vidisha जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और सुविधाओं के बावजूद प्राची ने अपने लक्ष्य को हासिल किया, जो यह साबित करता है कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोड़ा नहीं बन सकता। उन्होंने प्राची की सराहना करते हुए कहा कि उसने न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि विदिशा जिले और पूरे मध्य प्रदेश का सम्मान भी बढ़ाया है। शिवराज सिंह चौहान ने भावुक शब्दों में कहा कि प्राची की सफलता उन्हें “मामा” के रूप में भी गर्व और खुशी देती है। प्राची की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। किसान परिवार से आने वाली प्राची के पास आधुनिक सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन उसके पास अपने माता-पिता का आशीर्वाद और खुद पर विश्वास था। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी। शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे पहले लक्ष्य तय करना जरूरी है। इसके बाद उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप बनाना चाहिए और लगातार मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” और हर व्यक्ति के भीतर अनंत शक्तियां छिपी होती हैं, जिन्हें पहचानने की जरूरत है। उन्होंने प्राची को आशीर्वाद देते हुए कहा कि अब उसका कर्तव्य है कि वह देश की सेवा ईमानदारी और समर्पण के साथ करे। UPSC जैसी परीक्षा पास करना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, जिसमें समाज और देश के लिए काम करने का अवसर मिलता है। यह कहानी यह भी दर्शाती है कि आज के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी अपनी मेहनत और लगन से बड़े से बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं। शिक्षा और सही मार्गदर्शन के जरिए वे अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। प्राची की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक स्थिति या संसाधनों की कमी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास ही असली कुंजी है। आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, ऐसे में प्राची जैसी कहानियां युवाओं को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास देती हैं। यह उन्हें यह विश्वास दिलाती हैं कि अगर वे सही दिशा में मेहनत करें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। अंत में, Shivraj Singh Chouhan का यह संदेश केवल प्राची के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए है—लक्ष्य तय करें, योजना बनाएं और पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़ें, सफलता जरूर मिलेगी। अभी मैं प्राची के साथ हूँ और प्राची को मैंने सम्मानित किया है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाली हमारी बेटी... बहुत सुविधाएँ नहीं थीं, लेकिन माता-पिता का आशीर्वाद था और मन में दृढ़ संकल्प। और उसी संकल्प के भरोसे यूपीएससी की परीक्षा में उत्तीर्ण हुई और अब पूरे देश की सेवा करेगी।… pic.twitter.com/I2YehRknyD — Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 30, 2026
उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-I का उद्घाटन कर दिया गया है। यह परियोजना न केवल राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाएगी, बल्कि भारत के एविएशन सेक्टर को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह एयरपोर्ट, जिसे आमतौर पर जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है, देश का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक हवाई अड्डा बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके पहले चरण के शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है। ✈️ एयरपोर्ट की खासियतें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। फेज-I के तहत एक रनवे और आधुनिक टर्मिनल का निर्माण किया गया है, जो सालाना लाखों यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। इस एयरपोर्ट को पर्यावरण के अनुकूल (eco-friendly) डिजाइन के साथ बनाया गया है, जिसमें सोलर एनर्जी, जल संरक्षण और ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। यह इसे भारत के सबसे टिकाऊ (sustainable) एयरपोर्ट्स में से एक बनाता है। 🌆 उत्तर प्रदेश के विकास को मिलेगी रफ्तार इस एयरपोर्ट का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश पहले से ही देश का एक प्रमुख औद्योगिक और कृषि केंद्र है, और इस एयरपोर्ट के शुरू होने से यहां निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। 🚧 कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार एयरपोर्ट के निर्माण के साथ ही क्षेत्र में सड़क और रेल कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाया गया है। यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख मार्गों से यह एयरपोर्ट आसानी से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, मेट्रो और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के जरिए भी इसे जोड़ने की योजना है, जिससे यात्रियों को बेहतर और तेज यात्रा सुविधा मिलेगी। 🇮🇳 भारत के एविएशन सेक्टर को मिलेगा नया आयाम भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह दुनिया के सबसे बड़े एविएशन मार्केट्स में शामिल हो सकता है। ऐसे में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर बढ़ते दबाव को भी कम करेगा और यात्रियों को एक बेहतर विकल्प प्रदान करेगा। 🌍 अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा इस एयरपोर्ट के शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन को भी बड़ा फायदा मिलेगा। विदेशी निवेशकों और पर्यटकों के लिए यह एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में काम करेगा। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों जैसे आगरा, मथुरा और वाराणसी तक पहुंचना अब और भी आसान हो जाएगा, जिससे पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। 💼 रोजगार और आर्थिक विकास एयरपोर्ट परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, संचालन, लॉजिस्टिक्स, होटल इंडस्ट्री और अन्य क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या बढ़ेगी। यह परियोजना राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी और जीडीपी में योगदान बढ़ाएगी। 🌱 पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें कार्बन उत्सर्जन को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कई उपाय किए गए हैं। यह पहल भारत के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) के अनुरूप है और भविष्य के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। The inauguration of Phase-I of Noida International Airport marks a major step in Uttar Pradesh’s growth story and India’s aviation future. https://t.co/8OLduHTZU8 — Narendra Modi (@narendramodi) March 28, 2026
देश के प्रमुख महानगरों में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या अब एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बनती जा रही है। इसी को लेकर राघव चड्ढा ने राज्यसभा में जोरदार तरीके से अपनी बात रखी और सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। आम आदमी पार्टी के सांसद चड्ढा ने कहा कि भारत के बड़े शहरों में लोग हर साल 100 से 168 घंटे तक ट्रैफिक जाम में फंसे रहते हैं, जो किसी भी विकसित देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। 🚗 शहरी भारत में बढ़ती ट्रैफिक समस्या दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में ट्रैफिक जाम अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस जाने वाले लोग, स्कूल के छात्र, और व्यापारियों को हर दिन घंटों सड़कों पर बिताने पड़ते हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि उत्पादकता में भी भारी गिरावट आती है। राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में कहा कि यह समस्या केवल समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर डाल रही है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक जाम के कारण ईंधन की खपत बढ़ती है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। ⏱️ सालाना 100-168 घंटे जाम में बर्बाद सांसद ने जो आंकड़े पेश किए, वे चौंकाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भारत के बड़े शहरों में रहने वाला एक आम नागरिक हर साल औसतन 100 से 168 घंटे ट्रैफिक जाम में बिताता है। यह समय किसी व्यक्ति के जीवन का एक बड़ा हिस्सा है, जिसे वह अपने परिवार, काम या व्यक्तिगत विकास में लगा सकता था। यह आंकड़ा यह भी दर्शाता है कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। 🏛️ राज्यसभा में उठी राष्ट्रीय नीति की मांग राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग शहरों में अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन एक समग्र और एकीकृत रणनीति की कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को राज्यों के साथ मिलकर एक ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिसमें शहरी परिवहन, ट्रैफिक मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को एक साथ जोड़ा जाए। 🚇 पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने पर जोर चड्ढा ने यह भी कहा कि ट्रैफिक जाम की समस्या का सबसे बड़ा समाधान मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। यदि लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो, बस और लोकल ट्रेनों का अधिक उपयोग करें, तो सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करना चाहिए और बस सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और सुलभ बनाना चाहिए। 🌱 पर्यावरण पर पड़ता असर ट्रैफिक जाम केवल समय और पैसे की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा है। लंबे समय तक जाम में फंसे रहने से वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है। इससे न केवल हवा की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सांस संबंधी बीमारियां, हृदय रोग और तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। 💡 तकनीक आधारित समाधान की जरूरत राघव चड्ढा ने अपने भाषण में यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करके ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम इस दिशा में कारगर साबित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इन तकनीकों को तेजी से लागू किया जाए, ताकि ट्रैफिक मैनेजमेंट को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। 🏙️ शहरी योजना में सुधार जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में ट्रैफिक समस्या का एक बड़ा कारण खराब शहरी योजना (Urban Planning) भी है। बिना उचित योजना के शहरों का विस्तार होने से सड़कों पर दबाव बढ़ता है। इसलिए, नए शहरों और कॉलोनियों की योजना बनाते समय ट्रैफिक और परिवहन को प्राथमिकता देनी चाहिए। 👥 आम जनता को भी निभानी होगी जिम्मेदारी इस समस्या के समाधान के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। लोगों को कारपूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और साइकिल जैसे विकल्पों को अपनाना चाहिए। साथ ही, ट्रैफिक नियमों का पालन करना भी बेहद जरूरी है, ताकि सड़कों पर अनुशासन बना रहे।
Do tune in at 11 AM tomorrow, 29th March for this month’s #MannKiBaat programme. pic.twitter.com/VEyKwM4PaH— Narendra Modi (@narendramodi) March 28, 2026
PM Modi Meeting: पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में विश्वास जताते हुए कहा कि टीम इंडिया के रूप में मिलकर काम करते हुए देश इस स्थिति का सफलतापूर्वक सामना करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लॉकडाउन को लेकर चल रही अफवाहों पर जवाब दिया है. उन्होंने क्लीयर कर दिया है कि देश में किसी तरह का लॉकडाउन नहीं लगेगा. इसके साथ ही पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा है कि हमें टीम इंडिया की तरह काम करना होगा. उन्होंने विश्वास जताया कि टीम इंडिया के रूप में मिलकर काम करते हुए देश इस स्थिति का सफलतापूर्वक सामना करेगा. उन्होंने जोर दिया सरकार की प्राथमिकताएं आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता को बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग के साथ सप्लाई चेन को मजबूत करना है. उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे सप्लाई चेन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करें और जमाखोरी के साथ मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाएं. पीएम मोदी ने एडवांस प्लानिंग पर दिया जोर पीएम मोदी ने कृषि क्षेत्र में एडवांस प्लानिंग की जरूरत पर जोर दिया. इसमें उन्होंने खासकर उर्वरकों के स्टोरेज और वितरण की निगरानी को लेकर बात कही है. उन्होंने तेजी से बदलती परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी स्तरों पर मजबूत समन्वय बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने सीमावर्ती और तटीय राज्यों में विशेष ध्यान देने की बात कही, ताकि शिपिंग, जरूरी सप्लाई और समुद्री ऑपरेशन्स से जुड़ी किसी भी मुद्दे को तुरंत और आसानी से हल किया जा सके. गलत सूचनाओं और अफवाहों को लेकर पीएम ने दी चेतावनी इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों को गलत सूचनाओं और अफवाहों के फैलने की चेतावनी देते हुए सही, सटीक और भरोसेमंद जानकारियों के प्रसार पर जोर देने की बात कही. मुख्यमंत्रियों ने स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना की. इसके साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कमी और राज्य को कमर्शियल LPG आवंटन बढ़ाने के फैसलों का भी स्वागत किया. मुख्यमंत्रियों ने विश्वास जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और LPG गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और स्थिति स्थिर बनी हुई है. सभी ने केंद्र के साथ समन्वय में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, ताकि स्थिति को प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सके.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
Dhurandhar 2 Advance Booking: रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉलीवुड की सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है. हालांकि ये एक साउथ हीरो की फिल्म को मात नहीं दे पा रही है. रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अर्जुन रामपाल स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही गदर मचाया हुआ है. फिलहाल ये 18 मार्च, 2026 को होने वाले पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में गर्दा उड़ा रही है. वैसे ये फिल्म पहले ही 'स्त्री 2' के पेड प्रीव्यू शो को रिकॉर्ड को मिट्टी में मिलाकर बॉलीवुड के लिए इतिहास रच चुकी है. लेकिन आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म के साउथ के एक स्टार का रिकॉर्ड तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. धुरंधर 2 ने पेड प्रीव्यू के लिए एडवांस बुकिंग में कितनी कर ली है कमाई? धुरंधर को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली थी. ऐसे में इसकी सीक्वल धुरंधर द रिवेंज या धुरंधर 2 को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की तो पूरी उम्मीद है ही लेकिन ये फिल्म तो रिलीज से पहले ही कमाल कर रही है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर रही है. सैकनिल्क के मुताबिक, इसने पेड प्रीव्यू से अब तक 18.78 करोड़ (ब्लॉक्ड सीटों को छोड़कर) कमा लिएए हैं वहीं ब्लॉक सीटों के साथ इसका पेड प्रीव्यू के लिए प्री टिकट सेल का कलेक्शन 23.99 करोड़ पहुंच चुका है. देश भर में 8 हजार 31 शोज के लिए इसके 3 लाख 51 हजार 4 सौ 13 टिकट बिक चुके हैं. धुरंधर 2 ने स्त्री 2 को पछाड़ बनाया नया रिकॉर्ड बता दें कि कि 2024 में, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 ने इंडिया में पेड प्रीव्यू में 9.40 करोड़ की नेट कमाई करके नया माइलस्टोन हासिल किया था. लेकिन धुरंधर: द रिवेंज ने एडवांस बुकिंग में इससे कई गुना ज़्यादा सेल्स के साथ इसे धूल चटा दी है. इसकी के साथ .े बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम भी कर चुकी है. धुरंधर 2 के पवन कल्याण की OG को मात देने में छूटे पसीने इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि धुरंधर 2 ने पेड पीव्यू के लिए प्री सेल्स में बेशक धमाकेदार कमाई कर ली हैं लेकिन इसका टारगेट इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी पेड प्रीव्यू कमाई का रिकॉर्ड अपने नाम करना है. दरअसल पवन कल्याण की दे कॉल हिम OG ने 21 करोड़ के बड़े नेट कलेक्शन के साथ किसी इंडियन फिल्म के लिए अब तक के सबसे ज़्यादा पेड प्रीव्यू अपने नाम किए हुए हैं. फिलहाल रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 के लिए इस रिकॉर्ड को तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. हालांकि अभी फिल्म के पेड प्रीव्यू शो में 6 दिन बचे हैं और इसे पवन कल्याण के रिकॉर्ड को मात देने से सिर्फ 3 करोड़ के करीब पीछे है. इसलिए पूरी उम्मीद है कि धुरंधर 2 इस उपलब्धि को हासिल कर इतिहास रच सकती है.
Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे. बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है। नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी। नई सरकार का गठन कब होगा? राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है। इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है। क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा? अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा। संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन? नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। 2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। 3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा? अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं। विपक्ष की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। बिहार की राजनीति पर संभावित असर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं: बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था। आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.