घर में कीड़े-मकोड़ों की समस्या से परेशान लोग अक्सर घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। इन्हीं में से एक लोकप्रिय उपाय है प्याज और बेकिंग सोडा का मिश्रण। यह तरीका सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे कुछ हद तक विज्ञान और कीड़ों के व्यवहार की समझ छिपी हुई है। हालांकि, यह जानना जरूरी है कि यह उपाय कितना असरदार है और किन परिस्थितियों में काम करता है।
वैज्ञानिक शोध “Repellent activity of green detergents and raw vegetable extracts against Drosophila melanogaster” के अनुसार, कीड़े अपनी सूंघने की क्षमता (olfactory sense) के जरिए भोजन ढूंढते हैं। जब प्याज काटा जाता है, तो उसमें मौजूद सल्फर यौगिक (sulfur compounds) हवा में फैल जाते हैं। ये यौगिक तेज गंध पैदा करते हैं, जो कई कीड़ों को भोजन का संकेत देती है।
खासतौर पर मक्खियां, चींटियां और कॉकरोच जैसे कीड़े सड़े-गले या जैविक पदार्थों की ओर आकर्षित होते हैं। इसलिए कटा हुआ प्याज उन्हें अपनी ओर खींच सकता है। यही कारण है कि प्याज इस घरेलू उपाय में “बेट” यानी चारा की भूमिका निभाता है।
बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) अपने आप में कीड़ों को आकर्षित नहीं करता। लेकिन जब इसे प्याज या किसी मीठी चीज (जैसे चीनी) के साथ मिलाया जाता है, तो कीड़े इस मिश्रण को खा लेते हैं।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब कीड़े इस मिश्रण को खाते हैं, तो बेकिंग सोडा उनके शरीर में मौजूद एसिड के साथ प्रतिक्रिया कर गैस बनाता है। इससे उनके पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है और वे मर भी सकते हैं।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दावे के समर्थन में मजबूत और व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। यानी यह तरीका कुछ मामलों में काम कर सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह भरोसेमंद समाधान नहीं माना जा सकता।
यह उपाय तैयार करना बेहद आसान है:
ध्यान रखने वाली बातें:
यह तरीका पूरी तरह “behavior-based bait” यानी कीड़ों के व्यवहार पर आधारित है। कुछ कीड़े प्याज की गंध से आकर्षित होकर इस मिश्रण को खा सकते हैं।
लेकिन:
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.
Retinal Detachment Treatment: पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी की आंख की गंभीर समस्या के चलते सर्जरी करानी पड़ी. जेल प्रशासन के अनुसार, उनकी दाईं आंख की रोशनी प्रभावित हो रही थी. पाकिस्तान से जुड़ी एक अहम स्वास्थ्य खबर इन दिनों सुर्खियों में है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan की पत्नी Bushra Bibi की आंखों की सर्जरी को लेकर चर्चा हो रही है। यह मामला Adiala Jail से जुड़ा है, जहां बुशरा बीबी बंद हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, उन्हें दाईं आंख में गंभीर समस्या की शिकायत हुई थी, जिसके बाद तुरंत मेडिकल जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि उनकी आंख में रेटिनल डिटैचमेंट (रेटिना का अपनी जगह से हट जाना) हो गया है, जो आंखों की एक गंभीर और संवेदनशील स्थिति मानी जाती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को बुलाया गया, जिसमें प्रोफेसर Dr. Nadeem Qureshi भी शामिल थे। डॉक्टरों ने जांच के बाद तुरंत सर्जरी की सलाह दी। इसके बाद 16 अप्रैल को बुशरा बीबी को Rawalpindi के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जरूरी मेडिकल परीक्षणों के बाद उनकी आंख का ऑपरेशन किया गया। सर्जरी सफल बताई जा रही है। ऑपरेशन के बाद उन्हें एक रात अस्पताल में निगरानी में रखा गया और फिर वापस जेल भेज दिया गया। फिलहाल डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर बताया है, लेकिन आगे भी नियमित जांच और इलाज जारी रखने की सलाह दी गई है। रेटिनल डिटैचमेंट क्या होता है? रेटिनल डिटैचमेंट आंख की एक गंभीर बीमारी है, जिसमें आंख के पीछे की पतली परत (रेटिना) अपनी जगह से अलग हो जाती है। रेटिना का काम आंख में आने वाली रोशनी को पहचानकर उसे दिमाग तक पहुंचाना होता है। जब यह परत अपनी जगह से हट जाती है, तो देखने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और अगर समय पर इलाज न किया जाए तो स्थायी रूप से दृष्टि खोने का खतरा भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अक्सर उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि आंख के अंदर मौजूद जेल जैसा पदार्थ (विट्रियस) समय के साथ बदलने लगता है। इसके अलावा चोट, डायबिटीज या पहले से मौजूद आंखों की बीमारी भी इसके कारण बन सकते हैं। इसके लक्षणों में अचानक धुंधला दिखाई देना, आंखों के सामने चमक (फ्लैश) दिखना, काले धब्बे या परछाइयां नजर आना और दृष्टि के किसी हिस्से में अंधेरा महसूस होना शामिल हैं। ऐसे संकेत मिलते ही तुरंत आंख के डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है, क्योंकि शुरुआती इलाज से ही दृष्टि को बचाया जा सकता है। सर्जरी के बाद देखभाल क्यों जरूरी है? रेटिनल डिटैचमेंट की सर्जरी के बाद मरीज की देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है। डॉक्टर आमतौर पर मरीज को कुछ दिनों तक आंखों पर दबाव न डालने, भारी काम से बचने और निर्धारित दवाइयों का नियमित सेवन करने की सलाह देते हैं। कई मामलों में मरीज को खास पोजिशन में सिर रखने की भी सलाह दी जाती है, ताकि रेटिना सही तरीके से अपनी जगह पर जुड़ सके। शुरुआती कुछ दिन रिकवरी के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान किसी भी तरह की लापरवाही सर्जरी के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए नियमित फॉलो-अप जांच कराना जरूरी होता है। बुशरा बीबी के मामले में भी डॉक्टरों ने यही सलाह दी है कि उनकी लगातार निगरानी की जाए और समय-समय पर आंखों की जांच होती रहे। राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया इस मामले के सामने आने के बाद Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) की ओर से बुशरा बीबी की सेहत को लेकर चिंता जताई गई है। पार्टी नेताओं ने उनके लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। इससे पहले भी डॉक्टर नदीम कुरैशी की टीम Imran Khan की आंखों की जांच कर चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि इस टीम को हाई-प्रोफाइल मरीजों के इलाज का अनुभव है। जेल प्रशासन का कहना है कि बुशरा बीबी को आवश्यक चिकित्सा सुविधा दी जा रही है और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार आगे का इलाज जारी रहेगा।
Yawning And Stroke Link: जम्हाई का संबंध दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने से हो सकता है. जब ब्रेन अपने तापमान को संतुलित रखने में संघर्ष करता है, तो जम्हाई के जरिए ठंडी हवा अंदर जाती है. Is Excessive Yawning A Sign Of Disease: बार-बार जम्हाई आना अक्सर लोग थकान या नींद की कमी से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन नई रिसर्च यह इशारा कर रही है कि हर बार जम्हाई लेना इतना सामान्य नहीं होता. कई मामलों में यह शरीर के अंदर चल रही गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कब यह आपके सेहत के बारे में बताती है और किन इशारों को इग्नोर नहीं करना चाहिए. क्या कब होती है दिक्कत? लगातार और बिना किसी क्लियर कारण के आने वाली जम्हाई को हल्के में नहीं लेना चाहिए. क्लीनिकल रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई लेने का संबंध कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी हो सकता है, जैसे मिर्गी , स्ट्रोक या ब्रेन में घाव. कुछ मामलों में तो जांच में यह भी सामने आया कि बार-बार जम्हाई लेना फ्रंटल लोब सीज़र का हिस्सा हो सकता है, ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम इसके अलावा, जम्हाई हमारे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से भी जुड़ी होती है, जो शरीर की कई अनैच्छिक कामों, जैसे दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और पाचन को कंट्रोल करता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई आना इस सिस्टम में असंतुलन का संकेत हो सकता है. माइक्रोन्यूरोग्राफी जैसी तकनीक के जरिए यह देखा गया कि जम्हाई के दौरान मांसपेशियों से जुड़े नर्व सिग्नल्स कुछ समय के लिए दब जाते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि शरीर में पैरासिम्पेथेटिक एक्टिविटी बढ़ जाती है. साइंटिस्ट यह भी मानते हैं कि जम्हाई का संबंध दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने से हो सकता है. जब ब्रेन अपने तापमान को संतुलित रखने में संघर्ष करता है, तो जम्हाई के जरिए ठंडी हवा अंदर जाती है और ब्लड फ्लो बढ़ता है. स्ट्रोक के कुछ मरीजों में यह पाया गया कि जहां दिमाग के तापमान को कंट्रोल करने वाले हिस्से प्रभावित होते हैं, वहां ज्यादा जम्हाई देखी जाती है. इससे संकेत मिलता है कि यह शरीर की एक तरह की कूलिंग मैकेनिज्म हो सकती है. डोपामिन के असंतुलन का प्रभाव इतना ही नहीं, जम्हाई का संबंध शरीर के मेटाबोलिज्म और ब्रेन के केमिकल्स से भी जुड़ा हुआ है। JAMA Network में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, जम्हाई का सीधा संबंध डोपामिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर से है, जो मूड, मोटिवेशन और मूवमेंट को नियंत्रित करता है। डोपामिन के असंतुलन की स्थिति में भी ज्यादा जम्हाई आ सकती है. दूसरे भी होते हैं कारण हालांकि, हर बार जम्हाई आना खतरे की घंटी नहीं है. नींद की कमी, ज्यादा काम या थकान भी इसका सामान्य कारण हो सकते हैं. लेकिन अगर जम्हाई लगातार आ रही हो, बिना वजह हो, या इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी या सोचने-समझने में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
Best Time To Take Vitamin D: कुछ रिसर्च यह संकेत देती हैं कि अगर विटामिन D रात में लिया जाए, तो यह शरीर में मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं. Should You Take Vitamin D At Night: विटामिन D हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि सूजन को कंट्रोल करने और नींद के पैटर्न को संतुलित रखने में भी मदद करता है. हालांकि, कई लोग यह नहीं जानते कि इसे किस समय लेना ज्यादा फायदेमंद होता है और क्या इसका असर नींद पर पड़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से. विटामिन डी रात में लेने का असर हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट health की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ रिसर्च यह संकेत देती हैं कि अगर विटामिन D रात में लिया जाए, तो यह शरीर में मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. मेलाटोनिन वही हार्मोन है जो हमारे शरीर को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय है और यह नींद-जागने के साइकिल सर्कैडियन रिदम को नियंत्रित करता है. चूंकि विटामिन D का मुख्य सोर्स सूर्य की रोशनी है, इसलिए माना जाता है कि दिन के समय इसका स्तर ज्यादा और रात में कम होना चाहिए. इसी वजह से कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसे दिन के समय लेना ज्यादा बेहतर हो सकता है, ताकि शरीर का नेचुरल स्लीप साइकिल प्रभावित न हो. क्या होता है इसका असर? विटामिन D का असर सेरोटोनिन नाम के हार्मोन पर भी पड़ता है, जो मूड और मेलाटोनिन दोनों से जुड़ा होता है. सामान्य मात्रा में विटामिन D सेरोटोनिन के निर्माण में मदद करता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा बहुत ज्यादा हो जाए तो यह उल्टा असर भी डाल सकता है और सेरोटोनिन का स्तर कम कर सकता है. हालांकि, दूसरी तरफ कुछ स्टडीज यह भी बताती हैं कि विटामिन D की कमी से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है. जिन लोगों के शरीर में इसका स्तर कम होता है, उनमें स्लीप डिसऑर्डर और कम नींद की समस्या ज्यादा देखी गई है. इस बात का रखें ध्यान इसका एक और पहलू यह है कि विटामिन D एक फैट-सोल्युबल विटामिन है, यानी यह शरीर में बेहतर तरीके से तब एब्जॉर्ब होता है जब इसे फैट वाली चीजों के साथ लिया जाए. इसलिए इसे नाश्ते या ऐसे भोजन के साथ लेना बेहतर माना जाता है, जिसमें हेल्दी फैट मौजूद हो. इसे दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है, लेकिन अगर रात में लेने से नींद पर असर महसूस हो, तो इसे दिन में लेना बेहतर रहेगा. सबसे जरूरी बात यह है कि इसे नियमित रूप से लिया जाए, क्योंकि सही स्तर बनाए रखना ही इसके असली फायदे देता है. Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.