लाइफस्टाइल और हेल्थ

इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को हुआ 'रेटिनल डिटैचमेंट', जानें क्या है आंखों की यह गंभीर बीमारी?

  Retinal Detachment Treatment: पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी की आंख की गंभीर समस्या के चलते सर्जरी करानी पड़ी. जेल प्रशासन के अनुसार, उनकी दाईं आंख की रोशनी प्रभावित हो रही थी.   पाकिस्तान से जुड़ी एक अहम स्वास्थ्य खबर इन दिनों सुर्खियों में है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan की पत्नी Bushra Bibi की आंखों की सर्जरी को लेकर चर्चा हो रही है। यह मामला Adiala Jail से जुड़ा है, जहां बुशरा बीबी बंद हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, उन्हें दाईं आंख में गंभीर समस्या की शिकायत हुई थी, जिसके बाद तुरंत मेडिकल जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि उनकी आंख में रेटिनल डिटैचमेंट (रेटिना का अपनी जगह से हट जाना) हो गया है, जो आंखों की एक गंभीर और संवेदनशील स्थिति मानी जाती है।   स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को बुलाया गया, जिसमें प्रोफेसर Dr. Nadeem Qureshi भी शामिल थे। डॉक्टरों ने जांच के बाद तुरंत सर्जरी की सलाह दी। इसके बाद 16 अप्रैल को बुशरा बीबी को Rawalpindi के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जरूरी मेडिकल परीक्षणों के बाद उनकी आंख का ऑपरेशन किया गया। सर्जरी सफल बताई जा रही है। ऑपरेशन के बाद उन्हें एक रात अस्पताल में निगरानी में रखा गया और फिर वापस जेल भेज दिया गया। फिलहाल डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर बताया है, लेकिन आगे भी नियमित जांच और इलाज जारी रखने की सलाह दी गई है।   रेटिनल डिटैचमेंट क्या होता है?   रेटिनल डिटैचमेंट आंख की एक गंभीर बीमारी है, जिसमें आंख के पीछे की पतली परत (रेटिना) अपनी जगह से अलग हो जाती है। रेटिना का काम आंख में आने वाली रोशनी को पहचानकर उसे दिमाग तक पहुंचाना होता है। जब यह परत अपनी जगह से हट जाती है, तो देखने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और अगर समय पर इलाज न किया जाए तो स्थायी रूप से दृष्टि खोने का खतरा भी हो सकता है।   विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अक्सर उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि आंख के अंदर मौजूद जेल जैसा पदार्थ (विट्रियस) समय के साथ बदलने लगता है। इसके अलावा चोट, डायबिटीज या पहले से मौजूद आंखों की बीमारी भी इसके कारण बन सकते हैं। इसके लक्षणों में अचानक धुंधला दिखाई देना, आंखों के सामने चमक (फ्लैश) दिखना, काले धब्बे या परछाइयां नजर आना और दृष्टि के किसी हिस्से में अंधेरा महसूस होना शामिल हैं। ऐसे संकेत मिलते ही तुरंत आंख के डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है, क्योंकि शुरुआती इलाज से ही दृष्टि को बचाया जा सकता है।   सर्जरी के बाद देखभाल क्यों जरूरी है?   रेटिनल डिटैचमेंट की सर्जरी के बाद मरीज की देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है। डॉक्टर आमतौर पर मरीज को कुछ दिनों तक आंखों पर दबाव न डालने, भारी काम से बचने और निर्धारित दवाइयों का नियमित सेवन करने की सलाह देते हैं। कई मामलों में मरीज को खास पोजिशन में सिर रखने की भी सलाह दी जाती है, ताकि रेटिना सही तरीके से अपनी जगह पर जुड़ सके।   शुरुआती कुछ दिन रिकवरी के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान किसी भी तरह की लापरवाही सर्जरी के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए नियमित फॉलो-अप जांच कराना जरूरी होता है। बुशरा बीबी के मामले में भी डॉक्टरों ने यही सलाह दी है कि उनकी लगातार निगरानी की जाए और समय-समय पर आंखों की जांच होती रहे।   राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया   इस मामले के सामने आने के बाद Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) की ओर से बुशरा बीबी की सेहत को लेकर चिंता जताई गई है। पार्टी नेताओं ने उनके लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। इससे पहले भी डॉक्टर नदीम कुरैशी की टीम Imran Khan की आंखों की जांच कर चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि इस टीम को हाई-प्रोफाइल मरीजों के इलाज का अनुभव है।   जेल प्रशासन का कहना है कि बुशरा बीबी को आवश्यक चिकित्सा सुविधा दी जा रही है और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार आगे का इलाज जारी रहेगा।

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0
Screen Time Effects: क्या फोन दूर होते ही हो जाते हैं बेचैन, जानें स्क्रीन कैसे बना रही समय से पहले बूढ़ा?

  Smartphone Health Impact: हाल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोग 2024 में कुल   1.1 ट्रिलियन घंटे स्मार्टफोन पर बिताते रहे यानी औसतन हर व्यक्ति करीब 5 घंटे रोज स्क्रीन पर रहता है.     Why You Feel Anxious Without Your Phone: अगर फोन आपसे थोड़ी देर के लिए भी दूर हो जाए और आपको बेचैनी होने लगे, तो यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक संकेत है कि स्क्रीन आपकी बॉडी और दिमाग पर असर डाल रही है. हाल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोग 2024 में कुल 1.1 ट्रिलियन घंटे स्मार्टफोन पर बिताते रहे यानी औसतन हर व्यक्ति करीब 5 घंटे रोज स्क्रीन पर रहता है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे कैसे आपको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.      समय से पहले बना रही आपको बूढ़ा   यही बढ़ता स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे शरीर के अंदर एक ऐसी प्रक्रिया शुरू कर देता है, जो समय से पहले बूढ़ा होने की वजह बन सकती है. सबसे पहला असर पड़ता है नींद पर. रात में फोन चलाने से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है, जो नींद के लिए बेहद जरूरी है. एनपीजे डिजिटल हेल्थ में पब्लिश रिसर्च भी बताती है कि जितना ज्यादा रात में स्क्रीन का इस्तेमाल होगा, नींद उतनी ही खराब होगी.     सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित    नींद की कमी सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहती. इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. रिसर्च में पाया गया है कि इससे दिमाग की मेमोरी से जुड़ी स्ट्रक्चर कमजोर होने लगती हैं और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है.  द लैंसेट कमीशन (2024) की रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि नींद की समस्या डिमेंशिया के बड़े कारणों में शामिल हो रही है.   यह असर सिर्फ दिमाग तक नहीं रुकता. फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी (2023) में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब नींद का सीधा असर हमारे गट माइक्रोबायोम पर पड़ता है. यानी पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने लगता है. यही कारण है कि स्क्रीन एडिक्शन से एंग्जायटी, लो मूड और स्ट्रेस बढ़ने लगता है.     क्या कहते हैं एक्सपर्ट?     Dr. Aaron Hartman बताते हैं कि नींद, स्ट्रेस और गट हेल्थ, ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं, इनमें से एक भी खराब हुआ तो बाकी भी प्रभावित हो जाते हैं. इसके अलावा, जेरोसाइंस (2024) की स्टडी बताती है कि रात में आर्टिफिशियल लाइट के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन बढ़ती है, जो दिमाग तक पहुंचकर न्यूरोइन्फ्लेमेशन पैदा कर सकती है. यही प्रक्रिया तेजी से बढ़ती उम्र का कारण बनती है. Dr. John La Puma ने इसे "डिजिटल ओबेसिटी" नाम दिया है, जहां स्क्रीन की लत शरीर और दिमाग दोनों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है. हर नोटिफिकेशन के साथ मिलने वाला डोपामिन दिमाग को उसी तरह प्रभावित करता है, जैसे किसी लत में होता है.

Metroheadlines अप्रैल 17, 2026 0
क्या वाकई कीड़ों को खत्म करता है बेकिंग सोडा? जानें प्याज के साथ इसके इस्तेमाल का सही तरीका

  Ants Cockroaches Home Remedies: कीड़े अपनी सूंघने की क्षमता के जरिए भोजन ढूंढते हैं. जब प्याज काटा जाता है, तो उसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड्स के कारण तेज गंध निकलती है. चलिए बताते हैं कैसे.     क्या प्याज और बेकिंग सोडा से कीड़े मरते हैं? जानिए सच और विज्ञान    घर में कीड़े-मकोड़ों की समस्या से परेशान लोग अक्सर घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। इन्हीं में से एक लोकप्रिय उपाय है प्याज और बेकिंग सोडा का मिश्रण। यह तरीका सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे कुछ हद तक विज्ञान और कीड़ों के व्यवहार की समझ छिपी हुई है। हालांकि, यह जानना जरूरी है कि यह उपाय कितना असरदार है और किन परिस्थितियों में काम करता है।   प्याज की गंध क्यों आकर्षित करती है कीड़ों को?   वैज्ञानिक शोध “Repellent activity of green detergents and raw vegetable extracts against Drosophila melanogaster” के अनुसार, कीड़े अपनी सूंघने की क्षमता (olfactory sense) के जरिए भोजन ढूंढते हैं। जब प्याज काटा जाता है, तो उसमें मौजूद सल्फर यौगिक (sulfur compounds) हवा में फैल जाते हैं। ये यौगिक तेज गंध पैदा करते हैं, जो कई कीड़ों को भोजन का संकेत देती है।   खासतौर पर मक्खियां, चींटियां और कॉकरोच जैसे कीड़े सड़े-गले या जैविक पदार्थों की ओर आकर्षित होते हैं। इसलिए कटा हुआ प्याज उन्हें अपनी ओर खींच सकता है। यही कारण है कि प्याज इस घरेलू उपाय में “बेट” यानी चारा की भूमिका निभाता है।   बेकिंग सोडा कैसे काम करता है?   बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) अपने आप में कीड़ों को आकर्षित नहीं करता। लेकिन जब इसे प्याज या किसी मीठी चीज (जैसे चीनी) के साथ मिलाया जाता है, तो कीड़े इस मिश्रण को खा लेते हैं।   कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब कीड़े इस मिश्रण को खाते हैं, तो बेकिंग सोडा उनके शरीर में मौजूद एसिड के साथ प्रतिक्रिया कर गैस बनाता है। इससे उनके पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है और वे मर भी सकते हैं।   हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दावे के समर्थन में मजबूत और व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। यानी यह तरीका कुछ मामलों में काम कर सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह भरोसेमंद समाधान नहीं माना जा सकता।   घर पर कैसे बनाएं यह मिश्रण?   यह उपाय तैयार करना बेहद आसान है: एक छोटा प्याज काट लें उसे एक उथले बर्तन में रखें उसमें 1–2 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं चाहें तो थोड़ा सा चीनी भी डाल सकते हैं इस बर्तन को किचन के उन हिस्सों में रखें जहां कीड़े ज्यादा आते हैं (जैसे सिंक, डस्टबिन, कोने)   ध्यान रखने वाली बातें: हर 1–2 दिन में मिश्रण बदलें, क्योंकि प्याज की गंध समय के साथ कम हो जाती है इसे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें   क्या यह तरीका सच में काम करता है?   यह तरीका पूरी तरह “behavior-based bait” यानी कीड़ों के व्यवहार पर आधारित है। कुछ कीड़े प्याज की गंध से आकर्षित होकर इस मिश्रण को खा सकते हैं। लेकिन: हर कीड़े पर इसका असर समान नहीं होता यह तरीका बड़े संक्रमण (infestation) के लिए पर्याप्त नहीं है प्रोफेशनल पेस्ट कंट्रोल की जगह नहीं ले सकता  

Metroheadlines अप्रैल 7, 2026 0
सब्जी में गलती से पड़ गए ज्यादा मिर्च और नमक? ऐसे लौटा सकते हैं स्वाद

  Kitchen Tips To Fix Food Taste: मिर्च ज्यादा पड़ जाए या फिर एक चुटकी नमक जहां खाने का स्वाद बढ़ा देता है, वहीं इसकी ज्यादा मात्रा पूरी डिश को खराब कर सकती है. जानिए कैसे इसको सुधार सकते हैं.     ज्यादा नमकीन या तीखा खाना हो गया खराब? इन आसान किचन ट्रिक्स से मिनटों में करें ठीक     किचन में खाना बनाते समय छोटी-सी गलती भी पूरे स्वाद को बिगाड़ सकती है, खासकर जब नमक या मिर्च ज्यादा हो जाए। एक चुटकी नमक जहां खाने का स्वाद बढ़ा देता है, वहीं इसकी अधिक मात्रा पूरी डिश को असंतुलित कर देती है। इसी तरह मिर्च का ज्यादा इस्तेमाल खाने को इतना तीखा बना देता है कि उसे खाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कुछ आसान और असरदार किचन ट्रिक्स अपनाकर आप खराब हुए स्वाद को फिर से संतुलित कर सकते हैं।   सबसे आसान और कारगर तरीका है खट्टे तत्वों का इस्तेमाल। जब किसी डिश में नमक या मिर्च ज्यादा हो जाती है, तो उसमें हल्का खट्टापन जोड़ने से स्वाद संतुलित हो जाता है। जैसे नींबू का रस, टमाटर की प्यूरी या थोड़ा सा सिरका मिलाने से नमक और तीखेपन का असर कम हो जाता है। खट्टे तत्व स्वाद को संतुलित करने के साथ-साथ डिश में एक नया फ्लेवर भी जोड़ते हैं, जिससे खाना पहले से ज्यादा स्वादिष्ट लगने लगता है। यह तरीका खासकर दाल, सब्जी और ग्रेवी वाली डिश में बहुत अच्छा काम करता है।   अगर आपके पास थोड़ा समय है और डिश की मात्रा बढ़ाना संभव है, तो आप उसमें और सामग्री जोड़ सकते हैं। स्टार्च वाली सब्जियां जैसे आलू और गाजर नमक को सोखने की क्षमता रखती हैं। जब इन्हें ज्यादा नमकीन या तीखी सब्जी में मिलाया जाता है, तो ये अतिरिक्त नमक और मसाले को अपने अंदर खींच लेती हैं, जिससे स्वाद संतुलित हो जाता है। साथ ही इससे डिश की मात्रा भी बढ़ जाती है और टेक्सचर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। यह तरीका सूखी और ग्रेवी दोनों तरह की सब्जियों के लिए फायदेमंद है।   कई बार सबसे सरल उपाय ही सबसे प्रभावी होता है—और वह है पानी मिलाना। अगर आपकी सब्जी या करी बहुत ज्यादा नमकीन या तीखी हो गई है, तो उसमें थोड़ा पानी डालकर दोबारा पकाने से स्वाद हल्का हो जाता है। यह तरीका खासकर सूप, दाल और ग्रेवी वाली डिश के लिए बहुत उपयोगी है। पानी मिलाने से मसालों की तीव्रता कम हो जाती है और डिश का संतुलन वापस आ जाता है। हालांकि ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा पानी न डालें, वरना डिश का स्वाद फीका भी हो सकता है।   अगर आपके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं और स्वाद काफी बिगड़ चुका है, तो आप हल्की मात्रा में चीनी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। चीनी नमक और मिर्च दोनों के असर को संतुलित करने में मदद करती है। थोड़ी सी चीनी डालने से तीखापन कम हो जाता है और स्वाद में हल्की मिठास आ जाती है, जिससे डिश खाने योग्य बन जाती है। लेकिन इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा चीनी डालने से खाना मीठा हो सकता है और उसका मूल स्वाद बदल सकता है।   इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट्स भी इस समस्या का बेहतरीन समाधान हैं। दूध, क्रीम या दही जैसे तत्व नमक और मिर्च के असर को कम करने में मदद करते हैं। ये डिश को क्रीमी और स्मूद बनाते हैं, जिससे तीखापन कम महसूस होता है। खासकर पनीर की सब्जी, शाही ग्रेवी या मसालेदार करी में यह तरीका बहुत अच्छा काम करता है। डेयरी प्रोडक्ट्स न सिर्फ स्वाद को संतुलित करते हैं बल्कि खाने की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं।   अगर आपकी डिश सूखी है, तो उसमें आटा या बेसन का हल्का सा घोल मिलाकर भी स्वाद को संतुलित किया जा सकता है। यह अतिरिक्त नमक और मसाले को बांध लेता है और खाने को ज्यादा संतुलित बना देता है। हालांकि इस तरीके का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए, ताकि डिश का टेक्सचर खराब न हो।   कुछ लोग ब्रेड या आटे की लोई का भी इस्तेमाल करते हैं। ज्यादा नमकीन सब्जी में थोड़ी देर के लिए आटे की लोई डाल दी जाती है, जो अतिरिक्त नमक को सोख लेती है। बाद में इसे निकाल दिया जाता है। यह एक पारंपरिक और कारगर तरीका है, खासकर जब तुरंत कोई और उपाय उपलब्ध न हो।   मिर्च ज्यादा होने पर एक और आसान तरीका है फैट बढ़ाना। जैसे घी या मक्खन डालने से तीखापन कम हो जाता है। यह तरीका भारतीय किचन में काफी लोकप्रिय है और खासकर मसालेदार सब्जियों में बहुत असरदार होता है।   ध्यान देने वाली बात यह है कि हर डिश के लिए हर तरीका सही नहीं होता। आपको यह समझना जरूरी है कि आपकी डिश किस प्रकार की है—सूखी, ग्रेवी वाली, सूप या स्नैक—और उसी के अनुसार उपाय अपनाना चाहिए। सही तकनीक अपनाने से न सिर्फ खाना बचाया जा सकता है, बल्कि उसका स्वाद भी पहले से बेहतर किया जा सकता है।   अंत में यही कहा जा सकता है कि किचन में गलतियां होना सामान्य बात है, लेकिन उन्हें सुधारना ही असली कला है। थोड़ी समझदारी, सही जानकारी और कुछ आसान ट्रिक्स की मदद से आप किसी भी खराब डिश को फिर से स्वादिष्ट बना सकते हैं। इसलिए अगली बार अगर आपकी सब्जी ज्यादा नमकीन या तीखी हो जाए, तो घबराने की बजाय इन आसान उपायों को अपनाएं और अपने खाने का स्वाद फिर से शानदार बना लें।  

Metroheadlines अप्रैल 7, 2026 0
बार-बार आ रही है जम्हाई तो हल्के में न लें, जानें किन-किन बीमारियों का खतरा?

  Yawning And Stroke Link: जम्हाई का संबंध दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने से हो सकता है.   जब ब्रेन अपने तापमान को संतुलित रखने में संघर्ष करता है, तो जम्हाई के जरिए ठंडी हवा अंदर जाती है.     Is Excessive Yawning A Sign Of Disease: बार-बार जम्हाई आना अक्सर लोग थकान या नींद की कमी से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन नई रिसर्च यह इशारा कर रही है कि हर बार जम्हाई लेना इतना सामान्य नहीं होता. कई मामलों में यह शरीर के अंदर चल रही गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कब यह आपके सेहत के बारे में बताती है और किन इशारों को इग्नोर नहीं करना चाहिए.    क्या कब होती है दिक्कत?    लगातार और बिना किसी क्लियर कारण के आने वाली जम्हाई को हल्के में नहीं लेना चाहिए. क्लीनिकल रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई लेने का संबंध कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी हो सकता है, जैसे मिर्गी , स्ट्रोक या ब्रेन में घाव. कुछ मामलों में तो  जांच में यह भी सामने आया कि बार-बार जम्हाई लेना फ्रंटल लोब सीज़र का हिस्सा हो सकता है,    ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम    इसके अलावा, जम्हाई हमारे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से भी जुड़ी होती है, जो शरीर की कई अनैच्छिक कामों, जैसे दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और पाचन को कंट्रोल करता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई आना इस सिस्टम में असंतुलन का संकेत हो सकता है. माइक्रोन्यूरोग्राफी जैसी तकनीक के जरिए यह देखा गया कि जम्हाई के दौरान मांसपेशियों से जुड़े नर्व सिग्नल्स कुछ समय के लिए दब जाते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि शरीर में पैरासिम्पेथेटिक एक्टिविटी बढ़ जाती है.   साइंटिस्ट यह भी मानते हैं कि जम्हाई का संबंध दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने से हो सकता है. जब ब्रेन अपने तापमान को संतुलित रखने में संघर्ष करता है, तो जम्हाई के जरिए ठंडी हवा अंदर जाती है और ब्लड फ्लो बढ़ता है. स्ट्रोक के कुछ मरीजों में यह पाया गया कि जहां दिमाग के तापमान को कंट्रोल करने वाले हिस्से प्रभावित होते हैं, वहां ज्यादा जम्हाई देखी जाती है. इससे संकेत मिलता है कि यह शरीर की एक तरह की कूलिंग मैकेनिज्म हो सकती है.   डोपामिन के असंतुलन का प्रभाव   इतना ही नहीं, जम्हाई का संबंध शरीर के मेटाबोलिज्म और ब्रेन के केमिकल्स से भी जुड़ा हुआ है। JAMA Network में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, जम्हाई का सीधा संबंध डोपामिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर से है, जो मूड, मोटिवेशन और मूवमेंट को नियंत्रित करता है। डोपामिन के असंतुलन की स्थिति में भी ज्यादा जम्हाई आ सकती है.   दूसरे भी होते हैं कारण   हालांकि, हर बार जम्हाई आना खतरे की घंटी नहीं है. नींद की कमी, ज्यादा काम या थकान भी इसका सामान्य कारण हो सकते हैं. लेकिन अगर जम्हाई लगातार आ रही हो, बिना वजह हो, या इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी या सोचने-समझने में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.

Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0
तवे से उतारकर तुरंत कैसरोल में रख देते हैं रोटी, ऐसे करेंगे स्टोर तो 6 से 8 घंटे तक रहेगी ताजी

  Kitchen Hacks For Rotis: 6–8 घंटे तक मुलायम रहेंगी रोटियां, बस अपनाएं ये आसान टिप्स   भारतीय रसोई में Roti सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। लेकिन अक्सर एक समस्या हर घर में देखने को मिलती है—रोटियां थोड़ी देर बाद सख्त हो जाती हैं। खासकर जब उन्हें पहले से बनाकर रखना हो, तो उनकी सॉफ्टनेस बनाए रखना चुनौती बन जाता है।   अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी रोटियां 6 से 8 घंटे तक मुलायम और ताजी बनी रहें, तो सिर्फ आटा गूंथना ही नहीं, बल्कि उसे स्टोर करने का सही तरीका भी जानना बेहद जरूरी है। आइए आसान किचन हैक्स के जरिए समझते हैं पूरा प्रोसेस।     🔍 क्यों सख्त हो जाती हैं रोटियां?   जब रोटी को तवे से उतारते ही सीधे बंद डिब्बे या कैसरोल में रख दिया जाता है, तो उसमें मौजूद भाप (steam) बाहर नहीं निकल पाती। इससे दो समस्याएं होती हैं: रोटी ज्यादा गीली हो जाती है कुछ देर बाद नमी खत्म होने पर रोटी सख्त हो जाती है   यानी सॉफ्टनेस बनाए रखने के लिए “नमी का संतुलन” सबसे जरूरी है।     ✅ रोटी को मुलायम रखने का सही तरीका   1. तवे से उतारकर तुरंत न रखें बंद डिब्बे में रोटी को तवे से उतारने के बाद 5–10 सेकंड खुली हवा में रखें। इससे अतिरिक्त भाप निकल जाती है और टेक्सचर बेहतर बना रहता है।   2. कपड़े या किचन टॉवल का इस्तेमाल करें हल्की ठंडी होने के बाद रोटियों को साफ सूती कपड़े या किचन टॉवल में लपेटें। इससे नमी संतुलित रहती है।   3. फिर रखें कैसरोल में अब इन रोटियों को कैसरोल में रखें। यह तरीका उन्हें 6–8 घंटे तक मुलायम बनाए रखने में मदद करता है।     🥣 आटा गूंथने का सही तरीका   रोटी की सॉफ्टनेस की शुरुआत आटा गूंथने से ही होती है।   ✔ गुनगुने पानी का करें इस्तेमाल गुनगुने पानी से आटा गूंथने पर ग्लूटेन बेहतर बनता है, जिससे रोटियां ज्यादा सॉफ्ट बनती हैं।   ✔ आटे का टेक्सचर सही रखें बहुत सख्त आटा → रोटियां सख्त बहुत ढीला आटा → रोटियां चिपचिपी मीडियम सॉफ्ट आटा सबसे अच्छा होता है।   ✔ अच्छी तरह गूंथें (5–10 मिनट) अच्छी तरह गूंथा गया आटा रोटियों को लंबे समय तक मुलायम बनाए रखता है।     🧊 आटा स्टोर करने का सही तरीका   अगर आप पहले से आटा गूंथकर रखते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: आटे पर हल्का सा तेल या घी लगाएं उसे एयरटाइट कंटेनर में रखें फ्रिज में स्टोर करें 👉 इस तरह रखा गया आटा 24–36 घंटे तक इस्तेमाल के लिए सही रहता है।     💡 एक्स्ट्रा किचन टिप्स   रोटी बेलते समय सूखा आटा कम इस्तेमाल करें रोटी को ज्यादा देर तक तवे पर न रखें पकने के बाद हल्का घी लगाने से भी सॉफ्टनेस बढ़ती है स्टील के बजाय इंसुलेटेड कैसरोल का इस्तेमाल करें

Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0
घर पर ऐसे करें पेडिक्योर, एक भी रुपया नहीं होगा खर्च

  Skin Hydration For Feet: अगर आप अपने पैरों को खूबसूरत बिना पार्लर जाए रखना चाहती हैं, तो चलिए आपको बताते हैं कि आप इसके लिए क्या कर सकती हैं. इसमें आपके पैसे भी खर्च नहीं होंगे.   घर पर बिना पैसे खर्च किए पेडिक्योर करना आज के समय में न सिर्फ आसान है बल्कि बेहद असरदार भी है। भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण, धूल-मिट्टी और मौसम के बदलते असर से हमारे पैर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, लेकिन अक्सर उनकी देखभाल सबसे कम होती है। ऐसे में पार्लर जाने के बजाय घर पर ही थोड़ा समय निकालकर अगर सही तरीके से पेडिक्योर किया जाए, तो आपके पैर न सिर्फ साफ और सुंदर दिखेंगे बल्कि हेल्दी और रिलैक्स भी महसूस करेंगे।   इस पूरी प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसमें महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद बेसिक चीजों की मदद से आप प्रोफेशनल जैसा रिजल्ट पा सकती हैं। यह न सिर्फ पैसे बचाता है, बल्कि आपको खुद की केयर करने का समय भी देता है, जो मानसिक रूप से भी सुकून देता है।   सबसे पहले बात आती है नाखूनों की सफाई और शेप की। यह पेडिक्योर का बेस होता है। अगर नाखून ठीक से कटे और शेप में हों, तो पूरा लुक बेहतर दिखता है। पुराने नेल पॉलिश को हटाना जरूरी है क्योंकि उसके ऊपर नया कोट लगाने से नाखून पीले भी दिख सकते हैं और फिनिशिंग भी अच्छी नहीं आती। नाखून काटते समय उन्हें सीधा काटना चाहिए, क्योंकि बहुत ज्यादा गोल काटने से इनग्रोन नेल्स की समस्या हो सकती है। इसके बाद नेल फाइल से हल्के हाथों से शेप देना चाहिए ताकि किनारे स्मूद हो जाएं।   अब बारी आती है पैरों को आराम देने की, जिसे पेडिक्योर का सबसे रिलैक्सिंग स्टेप माना जाता है। गुनगुने पानी में पैर डालना सिर्फ सफाई के लिए नहीं, बल्कि मसल्स को रिलैक्स करने और थकान दूर करने के लिए भी जरूरी होता है। अगर आप इसमें थोड़ा सा नमक या बाथ सॉल्ट डालती हैं, तो यह एंटीसेप्टिक का काम करता है और पैरों की सूजन भी कम करता है। वहीं एसेंशियल ऑयल डालने से न सिर्फ खुशबू आती है बल्कि माइंड भी रिलैक्स होता है। अगर आपके पास छोटे कंकड़ हैं, तो उन्हें पानी में डालकर पैरों को हल्का-हल्का मूव करने से नैचुरल मसाज मिलती है, जो ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है।   15-20 मिनट तक पैरों को भिगोने के बाद जब आप उन्हें बाहर निकालती हैं, तो स्किन काफी सॉफ्ट हो चुकी होती है। यही सही समय होता है डेड स्किन हटाने का। तौलिए से हल्के हाथों से पैरों को सुखाने के बाद एक्सफोलिएशन शुरू करना चाहिए। एड़ी और तलवों पर जमा सख्त और रूखी त्वचा को हटाने के लिए फुट स्क्रब या घर पर बना स्क्रब (जैसे चीनी और तेल का मिश्रण) इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें कि ज्यादा जोर से रगड़ने से स्किन डैमेज हो सकती है, इसलिए हमेशा हल्के हाथों से स्क्रब करें।   इसके बाद क्यूटिकल केयर बेहद जरूरी स्टेप है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। क्यूटिकल नाखूनों की सुरक्षा करते हैं, इसलिए उन्हें काटना नहीं बल्कि सॉफ्ट करके पीछे करना चाहिए। क्यूटिकल क्रीम लगाने से यह हिस्सा मुलायम हो जाता है और आसानी से पुश किया जा सकता है। इससे नाखून साफ और लंबे दिखाई देते हैं।   जब एक्सफोलिएशन और क्यूटिकल केयर पूरी हो जाए, तो पैरों को एक बार साफ पानी से धो लें और अच्छी तरह सुखा लें। अब सबसे जरूरी स्टेप आता है—मॉइश्चराइजिंग। यह आपके पूरे पेडिक्योर का रिजल्ट तय करता है। अगर आप सही तरीके से मॉइश्चराइजर लगाकर मसाज करती हैं, तो आपके पैर लंबे समय तक मुलायम बने रहते हैं। मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे स्किन हेल्दी और ग्लोइंग दिखती है। एड़ी, तलवे और उंगलियों के बीच के हिस्से पर खास ध्यान देना चाहिए।   मसाज के दौरान अगर आप थोड़ा समय निकालकर प्रेशर पॉइंट्स पर हल्का दबाव देती हैं, तो यह आपके पूरे शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है। यही वजह है कि पेडिक्योर को सिर्फ ब्यूटी ट्रीटमेंट नहीं, बल्कि थेरेपी भी कहा जाता है।   अब आता है सबसे फाइनल और खूबसूरत स्टेप—नेल पॉलिश लगाना। इसके लिए सबसे पहले बेस कोट लगाना जरूरी होता है, क्योंकि यह नाखूनों को दाग से बचाता है और नेल पॉलिश को लंबे समय तक टिकाए रखता है। इसके बाद अपनी पसंद का रंग चुनकर पतली लेयर में लगाएं। एक बार सूखने के बाद दूसरी लेयर लगाएं ताकि रंग गहरा और परफेक्ट दिखे।   अंत में टॉप कोट लगाना न भूलें। यह नेल पॉलिश को सील करता है और उसमें शाइन लाता है। साथ ही यह पॉलिश को जल्दी खराब होने से बचाता है। अगर आप चाहें तो पायल या टो-रिंग पहनकर अपने पैरों की खूबसूरती को और भी बढ़ा सकती हैं।   घर पर पेडिक्योर करने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि आप इसे अपनी जरूरत और समय के अनुसार कर सकती हैं। अगर आपके पैर ज्यादा ड्राई हैं, तो आप एक्स्ट्रा मॉइश्चराइजिंग कर सकती हैं। अगर टैनिंग है, तो नींबू या दही जैसे घरेलू उपाय भी शामिल कर सकती हैं।   नियमित रूप से हफ्ते में एक बार या कम से कम 15 दिन में एक बार पेडिक्योर करने से आपके पैर हमेशा साफ, मुलायम और खूबसूरत बने रहते हैं। इसके अलावा रोजाना सोने से पहले पैरों पर क्रीम लगाना और उन्हें साफ रखना भी जरूरी है।   इस तरह घर पर किया गया पेडिक्योर न सिर्फ आपकी खूबसूरती बढ़ाता है, बल्कि आपको खुद के लिए समय निकालने का मौका भी देता है। यह एक छोटी-सी आदत आपके पूरे व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव ला सकती है।  

Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0
पोहा या परांठा, दोनों में से कौन-सा ब्रेकफास्ट ज्यादा हेल्दी? एक्सपर्ट्स से जान लें सच

  Health Benefits Of Paratha: ब्रेकफास्ट टेबल पर नजर आते हैं. दोनों ही स्वादिष्ट, जल्दी बनने वाले और पसंद के अनुसार बदले जा सकने वाले हैं. चलिए बताते हैं कि इनमें कौन बेहतर है.   Which Is Healthier Poha Or Paratha: सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा और सेहत की नींव माना जाता है. भारतीय घरों में पोहा और परांठा दो ऐसे ऑप्शन हैं जो अक्सर ब्रेकफास्ट टेबल पर नजर आते हैं. दोनों ही स्वादिष्ट, जल्दी बनने वाले और पसंद के अनुसार बदले जा सकने वाले हैं. लेकिन सवाल यही है कि अगर हेल्थ को ध्यान में रखा जाए तो पोहा बेहतर है या परांठा?. चलिए आपको इन दोनों के बारे में बताते हैं.      परांठा कितना फायदेमंद?   सबसे पहले बात परांठे की करें तो यह आमतौर पर गेहूं के आटे से बनता है, जो कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा सोर्स है. इसका मतलब है कि यह धीरे-धीरे ऊर्जा देता है और आपको लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखता है. यही वजह है कि परांठा खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती. परांठे में फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, खासकर जब यह साबुत आटे से बनाया गया हो. यह पाचन को बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है. अगर इसमें पनीर, दाल या पालक जैसी स्टफिंग जोड़ दी जाए तो यह प्रोटीन से भरपूर हो जाता है, जो मसल्स के लिए फायदेमंद है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है.     कब होता है हेल्दी?   हालांकि, परांठा हेल्दी तभी माना जाएगा जब इसे कम तेल या घी में बनाया जाए. आप इसमें रागी या ओट्स का आटा मिलाकर इसे और ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं. इसके साथ ही, मक्खन या अचार की जगह दही या सलाद के साथ खाना इसे और बैलेंस्ड बना देता है.     पोहा कितना बेहतर?   अब बात पोहा की करें तो यह हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता है. चपटा चावल यानी पोहा जल्दी बन जाता है और पेट पर ज्यादा भारी नहीं पड़ता, इसलिए खासतौर पर गर्मी या उमस वाले मौसम में यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है. पोहा कैलोरी और फैट में कम होता है, जो वजन कंट्रोल करने वालों के लिए फायदेमंद है. यह शरीर को जरूरी कार्बोहाइड्रेट देता है, जिससे दिन की शुरुआत के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती है, लेकिन भारीपन महसूस नहीं होता.     इसके अलावा, पोहा आयरन का भी अच्छा सोर्स है, खासकर अगर इसे लोहे की कढ़ाही में बनाया जाए. इसमें मटर, गाजर और प्याज जैसी सब्जियां डालने से फाइबर और विटामिन्स की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे पाचन बेहतर होता है और पेट लंबे समय तक भरा रहता है.      कौन होता है फायदेमंद?   तो आखिर कौन ज्यादा हेल्दी है पोहा या परांठा? दिल्ली के पीतमपुरा स्थित प्राकृतिक डाइट क्लिनिक की डॉ. शिवानी सीकड़ी बताती हैं कि अगर आप हल्का, लो-फैट और आसानी से पचने वाला नाश्ता चाहते हैं, तो पोहा बेहतर विकल्प है. वहीं, अगर आपको ज्यादा देर तक पेट भरा रखना है और ज्यादा ऊर्जा चाहिए, तो परांठा सही रहेगा.   Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.    

Metroheadlines अप्रैल 2, 2026 0
रात में विटामिन D लेना सही या गलत, जानें आपकी नींद और हार्मोन से इसका कितना गहरा कनेक्शन?

  Best Time To Take Vitamin D: कुछ रिसर्च यह संकेत देती हैं कि अगर विटामिन D रात में लिया जाए, तो यह शरीर में मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं.   Should You Take Vitamin D At Night: विटामिन D हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि सूजन को कंट्रोल करने और नींद के पैटर्न को संतुलित रखने में भी मदद करता है. हालांकि, कई लोग यह नहीं जानते कि इसे किस समय लेना ज्यादा फायदेमंद होता है और क्या इसका असर नींद पर पड़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से.      विटामिन डी रात में लेने का असर   हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट health की रिपोर्ट के अनुसार,  कुछ रिसर्च यह संकेत देती हैं कि अगर विटामिन D रात में लिया जाए, तो यह शरीर में मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. मेलाटोनिन वही हार्मोन है जो हमारे शरीर को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय है और यह नींद-जागने के साइकिल  सर्कैडियन रिदम को नियंत्रित करता है. चूंकि विटामिन D का मुख्य सोर्स सूर्य की रोशनी है, इसलिए माना जाता है कि दिन के समय इसका स्तर ज्यादा और रात में कम होना चाहिए. इसी वजह से कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसे दिन के समय लेना ज्यादा बेहतर हो सकता है, ताकि शरीर का नेचुरल स्लीप साइकिल प्रभावित न हो.       क्या होता है इसका असर?   विटामिन D का असर सेरोटोनिन नाम के हार्मोन पर भी पड़ता है, जो मूड और मेलाटोनिन दोनों से जुड़ा होता है. सामान्य मात्रा में विटामिन D सेरोटोनिन के निर्माण में मदद करता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा बहुत ज्यादा हो जाए तो यह उल्टा असर भी डाल सकता है और सेरोटोनिन का स्तर कम कर सकता है. हालांकि, दूसरी तरफ कुछ स्टडीज यह भी बताती हैं कि विटामिन D की कमी से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है. जिन लोगों के शरीर में इसका स्तर कम होता है, उनमें स्लीप डिसऑर्डर और कम नींद की समस्या ज्यादा देखी गई है.     इस बात का रखें ध्यान   इसका एक और पहलू यह है कि विटामिन D एक फैट-सोल्युबल विटामिन है, यानी यह शरीर में बेहतर तरीके से तब एब्जॉर्ब होता है जब इसे फैट वाली चीजों के साथ लिया जाए. इसलिए इसे नाश्ते या ऐसे भोजन के साथ लेना बेहतर माना जाता है, जिसमें हेल्दी फैट मौजूद हो.  इसे दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है, लेकिन अगर रात में लेने से नींद पर असर महसूस हो, तो इसे दिन में लेना बेहतर रहेगा. सबसे जरूरी बात यह है कि इसे नियमित रूप से लिया जाए, क्योंकि सही स्तर बनाए रखना ही इसके असली फायदे देता है.     Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Metroheadlines अप्रैल 2, 2026 0
ब्लैक मैजिक या नेगेटिव एनर्जी से जूझ रहे हैं? इन 4 तरीकों से खुद को रखें सुरक्षित!

  कई बार हम अपने आसपास काफी नेगेटिव एनर्जी महसूस करते हैं, जिस वजह से हमारा किसी भी काम में मन हीं लगता है. कई बार इसके पीछे ब्लैक मैजिक भी हो सकता है. ऐसे में काले जादू को बेअसर करने के सरल उपाय जानिए?       कई बार हम अपने आसपास काफी नेगेटिव एनर्जी महसूस करते हैं, जिस वजह से हमारा किसी भी काम में मन हीं लगता है. कई बार इसके पीछे ब्लैक मैजिक भी हो सकता है. ऐसे में काले जादू को बेअसर करने के सरल उपाय जानिए?       क्या आप भी अपने आसपास नकारात्मक ऊर्जा को महसूस करते हैं, डरावने सपने देखते हैं या कुछ अजीब-सा अनुभव करते हैं? आप सोच रहे होंगे, अरे यह तो सामान्य बात है, सबके साथ होती है. जी हां, यह आम बात है और सबके साथ होती भी है, लेकिन क्या आप जानना चाहेंगे ऐसा क्यों होता है?       यह हम सभी के साथ ईर्ष्या, बुरी नजर और दबी हुई दुर्भावना के कारण हो रहा है, जो हमारे मन, शरीर और मनोविज्ञान को प्रभावित कर रहा है. इस भावना को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे अपने आसपास घटित घटनाओं के जरिए महसूस किया जा सकता है. इस लेख के माध्यम से हम उन लोगों को बताएंगे कि, इस स्थिति से कैसे निपटें?       काले जादू से खुद को बचाने के लिए आध्यात्मिक बनें. आध्यात्म होना उबाऊ नहीं है और न ही इसका मतलब 24 घंटे पूजा करनी है, बल्कि यहां हमारा मतलब है कि, आपको आध्यात्मिकता के बारे में पढ़ना और जानना चाहिए. आपको अपनी ऊर्जा को रक्षा करने और संरक्षित करना सीखना चाहिए. आपको ध्यान, योग और श्वास तकनीक सीखनी होगी. यह अभ्यास आप किसी भी आध्यात्मिक गुरु से सीख सकते हैं या किसी जानकार से मार्गदर्शन ले सकते हैं.       हनुमान चालीसा सबसे शक्तिशाली पाठों में से एक है, जिसे कोई भी पढ़ सकता है. यदि हम कहते हैं कि, कोई भी तो इसका मतलब यह नहीं है कि केवल हिंदू ही इसका पाठ कर सकते हैं, बल्कि सभी लोग कर सकते हैं. इसका धर्म, जाति या पंथ से कोई लेना-देना नहीं है. यह हम मानवता की बात कर रहे हैं और आपको अपनी सुरक्षा के लिए इसका पाठ करना चाहिए. जिन लोगों के पास संपूर्ण हनुमान चालीसा पाठ करने का समय नहीं है, उन्हें चालीसा से जुड़ी इस पंक्ति- "संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बल बीरा" "भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे" उच्चारण करना चाहिए.       हनुमान चालीसा के बाद हम दुर्गा सप्तशती पाठ की ओर बढ़ते हैं. शास्त्रों मं काले जादू को एक शक्तिशाली आक्रमण बताया गया है और इससे निपटना काफी मुश्किल है, लेकिन आप दुर्गा माता की तरह अपने दुश्मनों पर जीत हासिल कर सकते हैं, जिन्होंने महिषासुर और अन्य राक्षसों का अंत किया था. ये पाठ हमारी सुरक्षा के लिए हैं और इन पवित्र ग्रंथों का हमें जरूर पढ़ना चाहिए   काला जादू दूर करने का एक और सरल उपाय है, वो है महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना. इस मंत्र को सुनना भी कारगर है, लेकिन हम केवल उन्हीं लोगों को इसे सुनने जकी सलाह दे रहे हैं, जिन्हें इसका उच्चारण नहीं आता. गलत तरीके से उच्चारण करने से बचें, क्योंकि इससे अच्छे परिणाम नहीं मिलेंगे. इसे 108 बार सुनें. जो लोग प्रतिदिन 108 बार इस मंत्र का जाप करते हैं, उनके लिए यह चमत्कारिक रूप से कारगर होता है.

Metroheadlines मार्च 31, 2026 0
डाइनिंग टेबल या सोफे पर करते हैं ऑफिस का काम तो हो जाएं सावधान, जल्दी बदल लें WFH की यह आदत
डाइनिंग टेबल या सोफे पर करते हैं ऑफिस का काम तो हो जाएं सावधान, जल्दी बदल लें WFH की यह आदत

  Work From Home Neck Pain: कोविड काल से शुरू हुआ वर्क फ्रॉम होम का कल्चर अब लोगों की आदत बन चुका है. हालांकि, इससे कई तरह की दिक्कतें भी हो सकती हैं. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.   Sitting Posture While Working From Home: वर्क फ्रॉम होम अब अपवाद नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. जो व्यवस्था कभी अस्थायी समाधान के तौर पर शुरू हुई थी, आज कई लोगों के लिए वही स्थायी ऑफिस बन गई है. न ट्रैफिक का झंझट, न तय समय की पाबंदी और घर के आराम में काम करने की आजादी, यह सब सुनने में जितना आसान लगता है, उतना ही आकर्षक भी है. लेकिन इसी आराम के बीच एक ऐसी आदत पनप रही है, जिस पर लोग ध्यान नहीं दे रहे, घर से काम करने का गलत तरीका.   सोफा, बेड, डाइनिंग टेबल या फिर फर्श पर बैठकर लैपटॉप पर काम करना अब आम बात हो गई है. मोबाइल देखते समय घंटों गर्दन झुकाए रखना, लैपटॉप गोद में रखकर काम करना या आधी लेटी अवस्था में मीटिंग अटेंड करना शुरुआत में भले ही आरामदेह लगे, लेकिन शरीर इसे चुपचाप सहन करता रहता है, असर धीरे-धीरे दिखता है.   क्या कहते हैं एक्सपर्ट? सीनियर स्पाइन सर्जन डॉ. नवीन पंडिता ने TOI को बताया कि वर्क फ्रॉम होम अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन गलत पॉस्चर और खराब बैठने की आदतें रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा रही हैं. उनके मुताबिक, अब पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा लोग गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं.   असल दिक्कत यह है कि घर का फर्नीचर ऑफिस के लिए बना ही नहीं होता. डाइनिंग चेयर लंबे समय तक बैठने के लिए नहीं होती, बेड पीठ को कोई सपोर्ट नहीं देता और सोफा रीढ़ की हड्डी को गलत एंगल में मोड़ देता है. रोज कई घंटे इसी तरह बैठने से गर्दन में जकड़न, कमर दर्द, कंधों में खिंचाव, सिरदर्द और आंखों में जलन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं.   इन दिक्कतों के बढ़ रहे मामले डॉक्टरों के अनुसार, अब 20 और 30 की उम्र के युवाओं में भी क्रॉनिक लोअर बैक पेन और सर्वाइकल पेन के मामले बढ़ रहे हैं. कंप्यूटर स्क्रीन अक्सर आंखों की ऊंचाई से नीचे होती है, जिससे लोग आगे की ओर झुककर बैठते हैं और रीढ़ पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है. समस्या यह है कि दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. पॉस्चर खराब होने का असर सिर्फ मांसपेशियों तक सीमित नहीं रहता. इससे सांस लेने की प्रक्रिया, ब्लड सर्कुलेशन, पाचन और यहां तक कि एकाग्रता पर भी असर पड़ता है. जब शरीर असहज होता है, तो दिमाग भी पूरी तरह फोकस नहीं कर पाता.   अच्छी बात यह है कि इसके लिए महंगे ऑफिस सेटअप की जरूरत नहीं. स्क्रीन को आंखों की सीध में रखना, पैरों को ज़मीन पर टिकाकर बैठना, कमर के पीछे तौलिया या कुशन का सहारा लेना और हर 30 से 40 मिनट में उठकर थोड़ा चलना या स्ट्रेच करना काफी मददगार हो सकता है. डॉ. पंडिता सलाह देते हैं कि अगर दर्द चार से छह हफ्तों तक बना रहे, बढ़ता जाए या सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से मिलना चाहिए. समय रहते छोटी आदतों में सुधार कर लिया जाए, तो वर्क फ्रॉम होम से जुड़ी बड़ी समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.   कैसे कर सकते हैं ठीक? डॉक्टर बताते हैं कि अब 20 और 30 की उम्र के लोग भी क्रॉनिक लोअर बैक पेन, गर्दन दर्द और कंधों की जकड़न के साथ आ रहे हैं. स्क्रीन नीचे होने से लोग आगे की ओर झुककर बैठते हैं, जिससे रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. अच्छी बात यह है कि इसके लिए महंगे फर्नीचर की जरूरत नहीं. स्क्रीन को आंखों की सीध में रखना, पैरों को जमीन पर टिकाकर बैठना, कमर के पीछे तौलिया रखकर सपोर्ट देना और हर 30 से 40 मिनट में उठकर स्ट्रेच करना काफी मददगार हो सकता है.  

Metroheadlines मार्च 30, 2026 0
आज खाने में क्या बनाएं? इस सबसे मुश्किल सवाल का ऐसे मिलेगा जवाब, तुरंत मिलेंगी रेसिपीज

  Cooking With Available Ingredients: अक्सर खाना बनाते समय हमारे मन में एक सवाल आता है कि खाने में क्या बनाया जाए. चलिए आपको बताते हैं कि आप अपने इस सवाल का समाधान कैसे पा सकते हैं.   What To Cook Today With Available Ingredients: हम सभी कभी न कभी इस स्थिति से गुजरते हैं कि फ्रिज खोलकर उसमें रखी अलग-अलग चीजों को देखते रहते हैं और दिमाग में वही सवाल घूमता रहता है कि आज आखिर क्या पकाया जाए?. सुनने में यह सवाल आसान लगता है, लेकिन असल में यह डेली रूटीन की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक बन जाता है. घर में सब्जियां भी होती हैं, मसाले भी होते हैं, लेकिन यह समझ नहीं आता कि इनसे कौन-सी डिश बनाई जाए. ऐसे में कई लोग इंटरनेट पर रेसिपी खोजने लगते हैं, लेकिन वहां इतनी ज्यादा रेसिपीज मिलती हैं कि कन्फ्यूजन और बढ़ जाता है.     कैसे मिलेगा आपकी समस्या का समाधान?   अगर आप भी इस तरह की दिक्कत में खुद को पाते हैं, तो अच्छी बात यह है कि आज के डिजिटल दौर में इस समस्या का भी आसान समाधान मौजूद है. कई ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइट्स हैं जहां आपको किसी खास डिश का नाम सर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती. बस आपको यह बताना होता है कि आपके पास कौन-कौन से इंग्रीडिएंट्स मौजूद हैं और उसके आधार पर आपको तुरंत कई रेसिपी के विकल्प मिल जाते हैं.     कैसे काम करती हैं ये वेबसाइट्स?   अगर आपके मन में सवाल है कि ये बेवसाइट कैसे काम करती हैं और क्या सच में यह आपके सवालों के जवाब देने में सक्षम हैं. तो चलिए, इसका जवाब भी जान लेते हैं. मान लीजिए आपके किचन में आलू, टमाटर और कुछ बेसिक मसाले हैं. इन वेबसाइट्स पर जाकर आप इन चीजों के नाम डालते हैं और कुछ ही सेकंड में आपको कई तरह की रेसिपीज की लिस्ट मिल जाती है. इनमें साधारण सब्जियों से लेकर स्नैक्स और कुछ नई फ्यूजन डिशेज तक शामिल हो सकती हैं, जिनके बारे में आपने पहले शायद सोचा भी न हो. इससे रोज-रोज एक जैसा खाना बनाने की बोरियत भी खत्म हो जाती है और किचन में कुछ नया ट्राई करने का मौका मिलता है.     सेहत का भी रखा जाता है ख्याल   इन प्लेटफॉर्म्स की खासियत यह भी है कि वे रेसिपी के साथ पूरा तरीका स्टेप-बाय-स्टेप बताते हैं. यानी अगर आप कुकिंग में एक्सपर्ट नहीं हैं, तब भी आसानी से नई डिश बना सकते हैं.  इतना ही नहीं, इन प्लेटफॉर्म्स पर आप अपनी जरूरत के हिसाब से रेसिपी फिल्टर भी कर सकते हैं. अगर आप हेल्दी खाना चाहते हैं तो हाई-प्रोटीन या लो-कैलोरी विकल्प चुन सकते हैं. इसका एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे खाने की बर्बादी कम होती है और आपको आपका पसंदीदा खाना मिल जाता है. 

Metroheadlines मार्च 30, 2026 0
75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट, जानें इससे डरने की जरूरत कितनी?

  New Covid Variant: अब एक नए कोविड वैरिएंट की खबर फिर से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए वैरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं.     New Covid Variant : ऐसा लगने लगा था कि कोरोना महामारी अब हर जगह से धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. लोग बिना डर के बाहर निकल रहे थे. लोगों का मास्क लगाना बिल्कुल बंद हो गया था और अस्पतालों में भी पहले जैसी भीड़ नहीं थी, लेकिन अब एक नए कोविड वैरिएंट की खबर फिर से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है.   रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए वैरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं. यह वही हिस्सा होता है जिससे वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैरिएंट हमारी इम्युनिटी को कुछ हद तक धोखा भी दे सकता है और इसके स्पाइक प्रोटीन वायरस को हमारे शरीर में घुसने में मदद करता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है और इससे डरने की जरूरत कितनी है.    75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है? यह नया कोरोना वैरिएंट पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था. इसमें बहुत ज्यादा म्यूटेशन हैं. यह पहले के वैरिएंट (जैसे ओमिक्रॉन) से अलग है. यह शरीर की इम्युनिटी से कुछ हद तक बच सकता है. इसका मतलब यह है कि अगर आपने वैक्सीन लगवाई हो या पहले कोरोना हो चुका हो, फिर भी आपको दोबारा संक्रमण हो सकता है. अब वायरल थोड़ा बदल गया है इसलिए शरीर उसे तुरंत पहचान नहीं पाता है और इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.    इस नए वैरिएंट से डरने की जरूरत कितनी है? पिछले कुछ सालों में बहुत से लोगों में हाइब्रिड इम्युनिटी बन चुकी है. विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन और पहले हुए संक्रमण दोनों का असर मिलकर शरीर को कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं. इसके अलावा अब इलाज के तरीके पहले से बेहतर हैं, हॉस्पिटल ज्यादा तैयार हैं और टेस्टिंग दवाएं भी आसानी से उपलब्ध हैं. इसलिए अगर मामलों में बढ़ोतरी होती है तो उसका असर पहले जितना खतरनाक होने की संभावना कम है. वहीं ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण हल्के या मीडियम ही देखे जा सकते हैं. बुखार, खांसी, थकान, शरीर में दर्द और हल्की कमजोरी जैसे लक्षण सामने आते हैं. ज्यादातर लोग बिना हॉस्पिटल जाए, घर पर आराम और सामान्य इलाज से ठीक हो सकते हैं.    किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए? हर किसी के लिए जोखिम एक जैसा नहीं होता है. कुछ लोगों को अभी भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. इसमें बुजुर्ग, पहले से किसी बीमारी (जैसे डायबिटीज या दिल की बीमारी) से पीड़ित लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग शामिल हैं. इन लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना अब एंडेमिक हो चुका है, यानी यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा बल्कि फ्लू की तरह समय-समय पर आता रहेगा. कभी इसके मामले बढ़ेंगे, तो कभी कम हो जाएंगे.    क्या सावधानियां रखें? वैक्सीन और अन्य सावधानियां आज भी कोविड से बचाव के सबसे जरूरी हैं. बूस्टर डोज लेना शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखता है और गंभीर बीमारी होने के जोखिम को कम करता है. इसके अलावा, अगर किसी में लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत टेस्ट करवाना संक्रमण को जल्दी पहचानने और फैलने से रोकने में मदद करता है. भीड़ भाड़ वाली जगहों में सावधानी रखें. मास्क पहन कर जाएं.

Metroheadlines मार्च 28, 2026 0
अंजीर खरीदते वक्त क्या है उन्हें पहचानने का तरीका, जिससे भूलकर भी न हो गलती?

  How To Identify Sweet Anjeer: अंजीर हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. हालांकि इसको खरीदने से पहले आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए वरना अंजीर खराब निकल सकती है.   How To Identify Fresh And Sweet Anjeer: अंजीर, जिसे ड्राई फिग्स भी कहा जाता है, अपने मीठे स्वाद और सेहत से जुड़े फायदों की वजह से काफी पसंद किया जाता है. चाहे इसे स्नैक के रूप में खाएं या किसी मिठाई में मिलाएं, अच्छी क्वालिटी का अंजीर स्वाद के साथ-साथ पोषण भी बढ़ाता है. लेकिन बाजार में मिलने वाला हर अंजीर मीठा या ताजा हो, यह जरूरी नहीं है. कई बार लोग सख्त या बासी अंजीर खरीद लेते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें सही पहचान नहीं होती,    सही अंजीर की पहचान कैसे कर सकते हैं   अलग- अलग रिपोर्ट के अनुसार, अंजीर आमतौर पर सूखे रूप में मिलता है, इसलिए उसकी क्वालिटी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कैसे प्रोसेस और स्टोर किया गया है. अगर आप मीठा और अच्छा अंजीर लेना चाहते हैं, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले, अंजीर की नरमी जांचें. अच्छा अंजीर हमेशा हल्का सॉफ्ट और स्पंजी होता है. अगर यह बहुत ज्यादा सख्त या सूखा लगे, तो समझ लें कि वह ताजा नहीं है. वहीं हल्का चिपचिपा और मुलायम अंजीर अच्छी क्वालिटी और मिठास का संकेत देता है. खरीदते समय हल्का दबाकर इसकी ताजगी का अंदाजा लगाया जा सकता है.    रंग और दिखावट से कैसे पता कर सकते हैं   इसके बाद, उसके रंग और दिखावट पर ध्यान दें. ताजा और मीठा अंजीर आमतौर पर हल्के भूरे या सुनहरे रंग का होता है. अगर अंजीर का रंग बहुत गहरा, फीका या उस पर काले धब्बे नजर आएं, तो यह खराब स्टोरेज या पुराना होने का संकेत हो सकता है. समान रंग और बिना दरार वाला अंजीर बेहतर माना जाता है. अंजीर की खुशबू भी काफी अहम होती है. अच्छे अंजीर में हल्की और प्राकृतिक मिठास वाली खुशबू होती है, अगर उसमें खट्टापन महसूस हो या कोई खुशबू न आए, तो वह अच्छी क्वालिटी का नहीं हो सकता. इसके साथ ही, ऊपर से चीनी की परत चढ़े अंजीर से बचना बेहतर है.   अगर संभव हो तो अंजीर को तोड़कर उसके अंदर का हिस्सा भी देखें. अच्छा अंजीर अंदर से भरा हुआ और बीजों से युक्त होता है. ये बीज ही उसके स्वाद और पोषण को बढ़ाते हैं. वहीं खराब अंजीर अंदर से सूखा या खाली लग सकता है.    किनको खरीदने से बचना चाहिए   बहुत ज्यादा सूखे या सख्त अंजीर खरीदने से बचें. ऐसे अंजीर में नमी कम होती है और ये खाने में भी अच्छे नहीं लगते. सही अंजीर में हल्की नमी और सॉफ्टनेस बनी रहती है, भले ही वह ड्राई हो. स्टोरेज का भी खास ध्यान रखें. अंजीर को हमेशा ठंडी और सूखी जगह पर रखा जाना चाहिए. खरीदते समय देखें कि वह साफ और बंद कंटेनर में रखा हो, ताकि उसकी क्वालिटी बनी रहे.  

Metroheadlines मार्च 26, 2026 0
घर में अंगूर से कैसे बना सकते हैं किशमिश, एक किलो बनाने के लिए कितना अंगूर होना जरूरी ?

  Raisins From Grapes Process: किशमिश खाना हमारे सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. आप इसको घर पर भी तैयार कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसके लिए क्या करना होगा.   How Much Grapes Needed For 1 Kg Raisins: क्या आप जानते हैं कि घर पर ही अंगूर से ताजी और स्वादिष्ट किशमिश बनाई जा सकती है? एक बार इसे बनाने के बाद आपको बाजार की किशमिश फीकी लग सकती है. यह न सिर्फ सस्ती पड़ती है, बल्कि ज्यादा ताजी, मुलायम और जूसी भी होती है. अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए सिर्फ एक ही चीज की जरूरत होती है अच्छे और मीठे अंगूर. चलिए आपको बताते हैं कि घर पर अंगूर से किशमिश कैसे बना सकते हैं आप.    कैसे किशमिश बना सकते हैं आप?   सबसे पहले सवाल यही आता है कि एक किलो किशमिश बनाने के लिए कितना अंगूर चाहिए. आम तौर पर 1 किलो ताजे अंगूर से करीब आधा किलो यानी 500 ग्राम किशमिश तैयार होती है. यानी जितना वजन सूखने के बाद कम होता है, उतना ही पानी उसमें से निकल जाता है. किशमिश बनाने के लिए हमेशा पतले छिलके वाले, मीठे और पके हुए अंगूर चुनें. गोल आकार वाले अंगूर से बनी किशमिश ज्यादा सॉफ्ट बनती है. आप हरे या लाल, दोनों तरह के अंगूर इस्तेमाल कर सकते हैं.   क्या होती है बनाने की प्रक्रिया? सबसे पहले अंगूर को डंठल से अलग करके अच्छे से धो लें. फिर एक बर्तन में पानी गर्म करें और जब पानी हल्का उबलने लगे तो उसमें अंगूर डाल दें. 3-4 मिनट तक पकाएं, जब तक अंगूर ऊपर तैरने न लगें. ध्यान रखें कि ज्यादा देर तक न पकाएं, वरना उनका टेक्सचर खराब हो सकता है.   इसके बाद अंगूर को छानकर थोड़ा ठंडा होने दें. अब इन्हें सुखाने की बारी आती है. किसी सूती कपड़े या ट्रे पर अंगूर को एक-एक करके फैलाएं, ताकि वे आपस में चिपके नहीं. फिर इन्हें सीधी धूप में सुखाएं. आमतौर पर तेज धूप में इन्हें सूखने में 1 से 2 दिन लगते हैं. बीच-बीच में इन्हें पलटते रहें, ताकि हर तरफ से बराबर सूख जाएं. जब अंगूर पूरी तरह सूख जाएं लेकिन हल्के सॉफ्ट रहें, तब आपकी किशमिश तैयार है. अगर इनमें नमी रह गई, तो वे खराब हो सकती हैं, इसलिए पूरी तरह सूखना जरूरी है.    कैसे कर सकते हैं स्टोर?   तैयार किशमिश को साफ कांच के जार में भरकर सामान्य तापमान पर स्टोर करें. यह सालभर तक इस्तेमाल की जा सकती है. ध्यान रखें कि किशमिश सेहत के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन इसमें कैलोरी ज्यादा होती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही सेवन करें.  

Metroheadlines मार्च 25, 2026 0
Home Tipsघर में बार-बार लग जाता है मकड़ी का जाला, ये ट्रिक आएगी काम ?

  आपके घर में बार-बार मकड़ी के जाले लग जाते हैं तो आप कुछ आसान और असरदार घरेलू उपाय की मदद से आप मकड़ियों को दूर रख सकते हैं और अपने घर को हमेशा साफ और हेल्दी बनाए रख सकते हैं.   घर मे सबको स्वस्थ रखने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना बहुत जरूरी है. इसके लिए हम में से कई लोग अपने घरों में झाड़ू-पोंछा नियमित रूप से लगाते हैं. हालांकि, छत या सीलिंग की रोजाना सफाई नहीं कर पाती, जिसकी वजह से मकड़ी का जाला आपके घर के लुक को बिगाड़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए  भी फायदेमंद नहीं माना जाता है. इतना ही नही, वास्तु के मुताबिक भी मकड़ी का जाला शुभ भी नही माना जाता है.   सबसे ज्यादा दिक्कत तो तब होती है जब इन जालों को साफ करने के बाद भी कुछ दिनों के बाद ये दोबारा से उसी जगह पर नजर आते हैं. इस बीच कुछ ऐसे नुस्खे हैं, जिन्हें इस्तेमाल करते ही फिर कभी नहीं लगेगा घर के किसी भी कोने में मकड़ी का जाला, आइए जानते हैं.     मकड़ी के जाले हटाने के 5 रामबाण ट्रिक्स   पुदीने के तेल का स्प्रे: पुदीने के तेल का स्प्रे मकड़ी के जालों से छुटकारा पाने का एक बेहद कारगर प्राकृतिक उपाय है. पुदीने की तेज गंध मकड़ियों को पसंद नहीं होती, जिससे वे भाग जाती हैं और दोबारा नहीं आतीं.    सिरका और पानी: सिरका और पानी का मिश्रण मकड़ियों को घर से दूर भगाने का एक बहुत ही असरदार, सस्ता और प्राकृतिक तरीका माना जाता है. सिरके में मौजूद एसिडिक एसिड की तेज गंध मकड़ियों को नापसंद होती है और यह उनके लिए एक प्राकृतिक रिपेलेंट का काम करती है. आधे कप सफेद सिरके में आधा कप पानी मिलाकर स्प्रे बोतल में भरकर, जाले वाले स्थानों पर छिड़काव कर दें.    नींबू या संतरे के छिलके: मकड़ी के जालों से छुटकारा पाने के लिए नींबू या संतरे के छिलके भी एक बहुत ही कारगर और प्राकृतिक उपाय भी माना जाता है. इसको खिड़कियों या दरवाजों के पास रख दें, जहां मकड़ियां ज्यादा जाले बनाती है, जिसकी तीखी गंध मकड़ियों को पसंद नहीं आती और वो दोबारा नहींआती.   नियमित रूप से झाड़ू-पोछा: झाड़ू-पोछा न केवल साफ-सफाई के लिए, बल्कि मकड़ी के जालों को रोकने के लिए भी सबसे कारगर उपाय है, जिससे रोज़ाना सफाई से धूल जमा नहीं होती और मकड़ियों को जाला बनाने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिलता, चाहे छत के कोनों, पंखों के ऊपर और अलमारियों के पीछे क्यो न हो , ऐसी जगह पर मकड़ी जाले सबसे ज्यादा बनते हैं, इन्हें रोज साफ करें.   कपूर का इस्तेमाल: कपूर में जीवाणुरोधी और फफूंदरोधी गुण होते हैं, इसलिए इसका सौंदर्य और औषधीय उत्पादों में इसका उपयोग किया जाता है. कपूर से बने स्प्रे, बाम, क्रीम और मलहम में इसका सुखदायक और शीतल प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, घर के कोनों में कपूर जलाने से भी मकड़ी भाग जाती है और साथ ही  इसके उपयोग से मच्छर भी भाग जाते है.  

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0
नवरात्रि के व्रत में भरपूर एनर्जी चाहिए तो शाम को खाएं ये डिश, दिनभर रहेंगे तरोजाता

  नवरात्रि व्रत में शाम की थकान दूर करने और दिनभर एनर्जी बनाए रखने के लिए साबूदाना खिचड़ी, मखाने, शकरकंद चाट, कुट्टू या सिंघाड़े का चीला और फल-दही जैसे हल्के लेकिन पौष्टिक विकल्प बेहद फायदेमंद होते हैं.     नवरात्रि के 9 दिनों के उपवास में ऊर्जा की कमी महसूस होना बिल्कुल आम है. इस दौरान सही आहार और तरल पदार्थ लेना बहुत जरूरी है, ताकि ऊर्जा बनी रहे और शरीर स्वस्थ रहे. व्रत के दौरान शरीर को हेल्दी और एनर्जेटिक बनाए रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक खाली पेट रहने से कमजोरी, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. खासतौर पर शाम के समय तक चेहरा बिल्कुल लटक जाता है और थकान महसूस होने लगती है. ऐसे में जरूरी है कि कुछ ऐसा खाया और पिया जाए, जो इंस्टेंट एनर्जी दे और जिसे व्रत में खाया भी जा सके. आइए जानते हैं इंस्टेंट एनर्जी वाले डिश, जिन्हें आप व्रत में भी खा सकती हैं.      साबूदाना खिचड़ी   साबूदाना खिचड़ी एक ऊर्जावान और पौष्टिक नाश्ता है, जो व्रत में तुरंत एनर्जी (कार्बोहाइड्रेट्स) देता है और आसानी से पच भी जाता है. इसके अलावा यह हड्डियों को भी मजबूत बनाता है. इसमें पोटैशियम होता है जो व्रत के दौरान ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है. साथ ही इसमें मूंगफली और आलू मिलाकर इसकी पौष्टिकता बढ़ाई भी जा सकती है.     घी में भुने मखाने    व्रत के दौरान काफी लोगों को गैस की दिक्कत हो जाती है. इस बीच घी में भुने मखाने खाने से ऊर्जा निलती है और पाचन में भी फायदा होता है. इसे हड्डियों की मजबूती के लिए भी सबसे बेहतरीन माना जाता है. यह यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते और वजन भी कंट्रोल रखता हैं.     शकरकंद चाट   व्रत (fast) के दौरान शकरकंद चाट एक पौष्टिक, तुरंत ऊर्जा देने वाला नाश्ता है. यह हाई फाइबर, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो उपवास में कमजोरी दूर कर पेट को लंबे समय तक भरा रखती है.   कुट्टू या सिंघाड़े के आटा का चीला   कुट्टू या सिंघाड़े का चीला व्रत के लिए एक पौष्टिक और झटपट बनने वाला नाश्ता है. इससे फाइबर और प्रोटीन अधिक मात्रा में होते है, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखता है और पेट भरा रहता है. साथ ही यह पचाने में आसान है. इसके अलावा कुट्टू शरीर को गर्मी देता है, जबकि सिंघाड़ा ठंडक प्रदान करता है.      फल और दही की रायता   व्रत के दौरान फल और दही की रायता खाना पाचन को दुरुस्त रखता है, साथ ही पेट को ठंडा करता है और तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. यह प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत है, जो कब्ज और सूजन कम करता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम हड्डियों व मांसपेशियों को स्वस्थ रखते हैं, जिससे कमजोरी नहीं होती और दिनभर तरोताजा रखता है.     

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0
युवा हैं और शरीर में दिख रहे ये 5 साइलेंट लक्षण तो हो जाएं अलर्ट, वरना यह कैंसर बना लेगा शिकार

  Constipation And Diarrhea Causes: कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसके 5 लक्षण कौन से दिखाई देते हैं.     What Are The Early Signs Of Colon Cancer: आजकल युवाओं में कोलन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे लेकर डॉक्टरों ने खास चेतावनी दी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह बीमारी शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाती है, तो इसके बाद सर्वाइवल रेट काफी कम होकर लगभग 10 प्रतिशत तक रह जाता है. इसलिए इसके शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके.     क्या कहते हैं एक्सपर्ट?   सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. कई बार ये लक्षण दर्द भी नहीं करते, इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते. ब्रिस्टल के द लैगॉम क्लिनिक के जीपी डॉ. जैक ओग्डेन के अनुसार, ये पांच लक्षण अक्सर इतने हल्के होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि इनमें ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता।, कुछ ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.      क्या होते हैं संकेत?   पहला संकेत है आयरन की कमी यानी एनीमिया. अगर बिना किसी वजह के थकान, त्वचा का पीला पड़ना या सांस फूलने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. कई बार यह अंदरूनी ब्लीडिंग की वजह से होता है, जो ट्यूमर के कारण हो सकती है.   दूसरा लक्षण है मल त्याग से जुड़ी दिक्कतें. जैसे बार-बार कब्ज या दस्त होना, या फिर स्टूल का बहुत पतला हो जाना. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आंत में कोई रुकावट है, जो ट्यूमर की वजह से बन रही हो.   तीसरा संकेत है बिना कोशिश के अचानक वजन कम होना। अगर आप डाइटिंग या एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं, फिर भी वजन तेजी से घट रहा है, तो यह शरीर के अंदर किसी समस्या का संकेत हो सकता है. कई बार ट्यूमर की वजह से शरीर पोषक तत्वों को सही से अब्जर्व नहीं कर पाता.   चौथा लक्षण पेट से जुड़ा होता है, जैसे लगातार दर्द, ऐंठन या थोड़ी सी मात्रा में खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना. यह संकेत भी आंत से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकता है.     मल में खून आना   पांचवां और सबसे अहम संकेत है मल में खून आना. अगर स्टूल में काला या गहरा लाल रंग दिखे, तो यह शरीर के अंदर कहीं ऊपर ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है. हालांकि, कई बार यह बवासीर या एनल फिशर की वजह से भी हो सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर इन लक्षणों में से कोई भी लंबे समय तक बना रहे, तो तुरंत जांच करानी चाहिए. खासकर स्टूल टेस्ट और अन्य मेडिकल जांच से सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है.  

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0
Constipation Relief Tips: क्या सुबह-सुबह पानी पीने से सच में बन जाता है प्रेशर, कितनी सच है यह बात?

  Morning Water And Digestion: सुबह उठते ही पानी पीने की आदत को लेकर अक्सर कहा जाता है.   चलिए आपको बताते हैं कि क्या सच में इससे प्रेशर बनता है या फिर यह पूरा तरह मिथक है?   सुबह उठते ही पानी पीने की आदत को लेकर हम अक्सर सुनते हैं कि इससे पेट साफ होता है, कब्ज दूर होती है और टॉयलेट का प्रेशर बनता है। कई लोग इसे एक घरेलू नुस्खा मानते हैं, तो कुछ इसे केवल एक मिथ समझते हैं। लेकिन सच्चाई इन दोनों के बीच कहीं मौजूद है। यह आदत न केवल पारंपरिक ज्ञान का हिस्सा है बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपे हुए हैं। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि सुबह पानी पीने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, क्या वास्तव में इससे प्रेशर बनता है, और यह आदत कितनी फायदेमंद है।     1. सुबह पानी पीने की आदत क्यों मानी जाती है खास?   रातभर सोने के दौरान हमारा शरीर कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से गुजरता है। इस दौरान शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) भी हो जाती है क्योंकि हम कई घंटों तक कुछ पीते नहीं हैं। सुबह उठते ही पानी पीने से शरीर को तुरंत हाइड्रेशन मिलता है, जो पूरे सिस्टम को सक्रिय करने में मदद करता है। यह आदत खासतौर पर पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि यह आंतों को "जगाने" का काम करती है। यही कारण है कि कई लोगों को पानी पीने के तुरंत बाद टॉयलेट जाने की इच्छा होती है।     2. क्या सच में सुबह पानी पीने से प्रेशर बनता है?   इस सवाल का जवाब है—हाँ, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। जब आप सुबह खाली पेट पानी पीते हैं, तो शरीर में एक प्राकृतिक प्रक्रिया सक्रिय होती है जिसे गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स (Gastrocolic Reflex) कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रतिक्रिया है जिसमें पेट में कुछ भी (खाना या पानी) जाने पर बड़ी आंत (कोलन) सक्रिय हो जाती है और मल को बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही कारण है कि कई लोगों को पानी पीते ही टॉयलेट जाने का दबाव महसूस होता है।     3. पाचन तंत्र कैसे काम करता है? (सरल भाषा में समझें)   हमारा पाचन तंत्र कई हिस्सों में काम करता है: छोटी आंत (Small Intestine): यहां भोजन से पोषक तत्व अवशोषित होते हैं। बड़ी आंत (Large Intestine): यहां बचा हुआ पदार्थ आता है और उससे पानी सोख लिया जाता है। अगर शरीर में पानी की कमी होती है, तो बड़ी आंत अधिक पानी सोख लेती है, जिससे मल सूखा और सख्त हो जाता है। यही स्थिति कब्ज (Constipation) का कारण बनती है।     4. कब्ज क्यों होती है?   कब्ज एक बहुत आम समस्या है और इसके कई कारण हो सकते हैं: शरीर में पानी की कमी फाइबर की कमी शारीरिक गतिविधि की कमी अनियमित खानपान तनाव और खराब लाइफस्टाइल इन सभी कारणों में पानी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होगा, तो मल को मुलायम बनाना मुश्किल हो जाएगा।     5. सुबह पानी पीने से कब्ज में कैसे राहत मिलती है?   सुबह पानी पीने से कब्ज में राहत मिलने के पीछे कई कारण हैं:   (1) मल को मुलायम बनाता है पानी मल में नमी बनाए रखता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल सकता है।   (2) आंतों की गति बढ़ाता है गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स के कारण आंतें सक्रिय होती हैं और मल त्याग आसान हो जाता है।   (3) डिहाइड्रेशन को दूर करता है रातभर की पानी की कमी को पूरा करता है।   (4) टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद सुबह पानी पीने से शरीर से विषैले पदार्थ (toxins) बाहर निकलते हैं।     6. सुबह पानी पीने के अन्य फायदे   ✔️ मेटाबॉलिज्म को तेज करता है सुबह पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म एक्टिव हो जाता है, जिससे कैलोरी बर्न होने की प्रक्रिया तेज होती है।   ✔️ स्किन हेल्थ बेहतर होती है हाइड्रेशन सही रहने से त्वचा में निखार आता है और ड्राइनेस कम होती है।   ✔️ किडनी के लिए फायदेमंद पानी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे किडनी स्वस्थ रहती है।   ✔️ वजन कम करने में मदद खाली पेट पानी पीने से भूख नियंत्रित होती है और ओवरईटिंग कम होती है।   ✔️ दिमाग को एक्टिव करता है पानी की कमी से थकान और ध्यान की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन फंक्शन बेहतर होता है।     7. सुबह पानी पीने का सही तरीका क्या है?   बहुत से लोग सोचते हैं कि सिर्फ पानी पीना काफी है, लेकिन सही तरीका अपनाना भी जरूरी है: उठते ही 1–2 गिलास गुनगुना पानी पिएं धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पिएं खाली पेट पिएं (कुछ खाने से पहले) तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना भी फायदेमंद माना जाता है (हालांकि यह जरूरी नहीं है)   8. क्या ठंडा या गुनगुना पानी बेहतर है?   गुनगुना पानी: पाचन के लिए बेहतर माना जाता है सामान्य तापमान का पानी: भी पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद है बहुत ठंडा पानी: सुबह खाली पेट पीना टालना चाहिए   9. किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?   हालांकि सुबह पानी पीना ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए: जिन लोगों को किडनी या हार्ट से जुड़ी समस्या है जिनको बार-बार पेशाब की समस्या होती है गैस या एसिडिटी से परेशान लोग (उन्हें धीरे-धीरे पानी पीना चाहिए)   10. क्या सिर्फ पानी पीने से कब्ज पूरी तरह ठीक हो जाएगी?   नहीं, यह एक महत्वपूर्ण आदत है लेकिन अकेले इससे समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। इसके साथ आपको: फाइबर युक्त आहार (फल, सब्जियां, साबुत अनाज) लेना होगा नियमित व्यायाम करना होगा तनाव कम करना होगा समय पर भोजन करना होगा   11. सुबह पानी पीने से जुड़ी आम गलतफहमियां   ❌ मिथ: जितना ज्यादा पानी पिएंगे उतना अच्छा ✔️ सच: जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है   ❌ मिथ: सिर्फ पानी पीने से डिटॉक्स हो जाएगा ✔️ सच: शरीर का डिटॉक्स सिस्टम (लिवर, किडनी) पहले से ही काम करता है   ❌ मिथ: हर किसी को एक जैसा फायदा होगा ✔️ सच: हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है

Metroheadlines मार्च 20, 2026 0
प्यास लगने का इंतजार करना पड़ सकता है भारी! शरीर दे रहा है ये 'खामोश' संकेत

  Benefits Of Drinking Water: हम पानी तभी पीते हैं, जब हमें जरूरत महसूस होती है, फिर चाहे कुछ खाने के बाद हो या फिर प्यास लगने पर. चलिए आपको बताते हैं कि यह आपके लिए कितना खतरनाक है.     What Are The Early Signs Of Dehydration: पानी कितना पीना है, कितनी बार पीना है और कब नहीं पानी है, इसको लेकर उतनी चर्चा नहीं होती, लेकिन यही शरीर की हर सेल्स को जीवित रखता है. एक एडल्ट शरीर का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है. थोड़ी-सी भी पानी की कमी मूड, याददाश्त, स्किन और डाइजेशन पर असर डाल सकती है. मुश्किल यह है कि प्यास हमेशा शुरुआती चेतावनी नहीं होती. जब तक मुंह सूखने लगे, तब तक शरीर पहले ही पानी की कमी झेल रहा होता है. चलिए आपको बताते हैं कि कब आपको पानी पीना चाहिए.   क्यों पानी पीना हमारे लिए जरूरी?   वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, पर्याप्त पानी शरीर के तापमान, ब्लड फ्लो और अंगों के सही कामकाज के लिए जरूरी है. खासकर गर्म मौसम, बीमारी या अधिक फिजिकल एक्टिविटी के दौरान डिहाइड्रेशन तेजी से हो सकता है. यह हमेशा गंभीर लक्षणों के साथ नहीं आता, बल्कि रोजमर्रा की छोटी असुविधाओं के रूप में सामने आता है.   क्या होते हैं पानी की कमी के संकेत?   लगातार थकान, जो पूरी नींद के बाद भी दूर न हो, पानी की कमी का संकेत हो सकती है। शरीर में तरल कम होने पर रक्त की मात्रा घटती है, जिससे दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे एकाग्रता भी प्रभावित हो सकती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, धीरे-धीरे बढ़ने वाला हल्का सिरदर्द भी डिहाइड्रेशन का शुरुआती संकेत है.   पानी की कमी से ब्रेन के टिश्यू में अस्थायी सिकुड़न आ सकती है, जिससे दबाव बदलता है और दर्द महसूस होता है. त्वचा का बेजान और कसा हुआ महसूस होना भी संकेत हो सकता है. चेहरा धोने के बाद त्वचा में खिंचाव या महीन रेखाएं ज्यादा दिखना इस ओर इशारा करता है. हाथ की त्वचा को हल्के से खींचकर देखें, अगर वह सामान्य स्थिति में लौटने में समय लेती है, तो शरीर में पानी की कमी हो सकती है.   यूरिन से भी मिलता है संकेत   यूरिन का रंग भी बहुत कुछ बताता है. यूएस की हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, हल्का पीला रंग सामान्य माना जाता है, लेकिन गहरा पीला या तेज गंध वाला यूरिन तरल की कमी का संकेत है. इसी तरह कब्ज या पाचन धीमा पड़ना भी पर्याप्त पानी न मिलने से जुड़ा हो सकता है,   क्योंकि आंतें मल से पानी ऑब्जर्वेशन करती हैं. अचानक मीठा खाने की इच्छा भी कभी-कभी डिहाइड्रेशन से जुड़ी होती है. शरीर एनर्जी के लिए ग्लूकोज छोड़ने में पानी का उपयोग करता है, और कमी होने पर थकान बढ़ सकती है. मांसपेशियों में ऐंठन या अचानक चक्कर आना भी इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का संकेत हो सकता है.   ज्यादातर एक्सपर्ट वयस्कों के लिए दिन में 2 से 3 लीटर तरल लेने की सलाह देते हैं, हालांकि जरूरत उम्र, मौसम और एक्टिविटी पर निर्भर करती है कि आपको कितना पानी पीना चाहिए. 

Metroheadlines मार्च 17, 2026 0
काले अंगूर पर ज्यादा पेस्टिसाइड लगा होता है या हरे अंगूर पर? जानें इसे सही से साफ करने का तरीका

  Fruit Cleaning Tips: अंगूर को ज्यादातर लोग घर लाते हैं और पानी से साफ करके खा लेते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसको कैसे साफ करना चाहिए और कौन से अंगूर पर सबसे ज्यादा पेस्टिसाइड लगा होता है.   Do Black Or Green Grapes Have More Pesticides: अंगूर स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. इन्हें लोग स्नैक के रूप में, फ्रूट सलाद में या कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंगूर खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है. बिना धोए अंगूर खाने से शरीर में कीटनाशकों, बैक्टीरिया या गंदगी के जाने का खतरा बढ़ सकता है. सोशल मीडिया पर भी इन दिनों बिना धोए अंगूर खाने के नुकसान को लेकर काफी चर्चा हो रही है.    क्यों साफ करने चाहिए अंगूर?   कई लोग बताते हैं कि खेती के दौरान अंगूर पर  पेस्टिसाइड और वैक्स जैसी परत लग सकती है, इसलिए इन्हें खाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. फूड ब्लॉगर वाणी शर्मा ने इंस्टाग्राम पर एक टिप साझा करते हुए बताया कि अंगूर को साफ करने के लिए उन्हें सिरका और बेकिंग सोडा वाले पानी में करीब 15 मिनट तक भिगोकर रखना चाहिए और फिर तीन-चार बार अच्छी तरह धोना चाहिए.   क्या कहते हैं एक्सपर्ट?   हालांकि, इस बारे में एक्सपर्ट की राय थोड़ी अलग भी है. फिटनेस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट रिया श्रॉफ एकलास, जो Body Fit TV और The Diet Channel की फाउंडर हैं, उन्होंने बताया कि अंगूर खाने से पहले उन्हें धोना बेहद जरूरी है. उनके अनुसार बिना धोए अंगूर खाने से कीटनाशक, मिट्टी और बैक्टीरिया शरीर में जा सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर निगेटिव असर पड़ सकता है.

Metroheadlines मार्च 14, 2026 0
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MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे.  Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है.   रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे   इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्‍यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे.   गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा   करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.  

UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

  भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया।   कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   देखिए तस्वीरें…     NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया।     NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन।     विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो।     सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार   इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा।   उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है।     'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा'   सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए।   डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है।     'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों'   सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा।   आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया।     डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान   कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।   कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

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भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

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