Do Black Or Green Grapes Have More Pesticides: अंगूर स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. इन्हें लोग स्नैक के रूप में, फ्रूट सलाद में या कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंगूर खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है. बिना धोए अंगूर खाने से शरीर में कीटनाशकों, बैक्टीरिया या गंदगी के जाने का खतरा बढ़ सकता है. सोशल मीडिया पर भी इन दिनों बिना धोए अंगूर खाने के नुकसान को लेकर काफी चर्चा हो रही है.
क्यों साफ करने चाहिए अंगूर?
कई लोग बताते हैं कि खेती के दौरान अंगूर पर पेस्टिसाइड और वैक्स जैसी परत लग सकती है, इसलिए इन्हें खाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. फूड ब्लॉगर वाणी शर्मा ने इंस्टाग्राम पर एक टिप साझा करते हुए बताया कि अंगूर को साफ करने के लिए उन्हें सिरका और बेकिंग सोडा वाले पानी में करीब 15 मिनट तक भिगोकर रखना चाहिए और फिर तीन-चार बार अच्छी तरह धोना चाहिए.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
हालांकि, इस बारे में एक्सपर्ट की राय थोड़ी अलग भी है. फिटनेस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट रिया श्रॉफ एकलास, जो Body Fit TV और The Diet Channel की फाउंडर हैं, उन्होंने बताया कि अंगूर खाने से पहले उन्हें धोना बेहद जरूरी है. उनके अनुसार बिना धोए अंगूर खाने से कीटनाशक, मिट्टी और बैक्टीरिया शरीर में जा सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर निगेटिव असर पड़ सकता है.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
Causes Of Bloating And Gas: हम क्या खाते हैं, इसका हमारी सेहत पर काफी असर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन फूड कॉम्बिनेशन से आपको बचना चाहिए और आयुर्वेद इसको लेकर क्या कहता है Which Foods Should Not Be Eaten Together: खाना खाते समय हमें कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है. हम क्या खाते हैं और किन चीजों को साथ में मिलाकर खाते हैं, इसका सीधा असर हमारे डाइजेशन शक्ति पर पड़ता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन पाचन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक तत्व जमा कर सकते हैं. इसका नतीजा गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. चलिए आपको आयुर्वेद के हिसाब से बताते हैं कि किन कॉम्बिनेशन से हमें बचना चाहिए. क्या कहता है आयुर्वेद? आयुर्वेद के बारे में जानकारी देने वाली संस्था kevaayurveda के अनुसार, आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की वात, पित्त, कफ और पाचन क्षमता अलग होती है कुछ खानें की चीजें एक-दूसरे के विपरीत गुण रखते हैं. यदि इन्हें बार-बार साथ में खाया जाए तो डाइजेशन सिस्टम पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है. इससे गैस, कब्ज, सीने में जलन, मुंहासे, कमजोर इम्यूनिटी और डाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. किन फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए? kevaayurveda के अनुसार, कुछ प्रमुख गलत फूड कॉम्बिनेशन जिनसे बचने की सलाह दी जाती है, उनमें सबसे पहले आता है दूध और मछली. आयुर्वेद के अनुसार दूध ठंडा और भारी होता है, जबकि मछली गर्म तासीर वाली मानी जाती है. दोनों को साथ लेने से पाचन गड़बड़ा सकता है और स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी तरह दूध के साथ खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू या अनानास भी ठीक नहीं माने जाते, क्योंकि ये पेट में दूध को फाड़ सकते हैं और गैस या एसिडिटी बढ़ा सकते हैं. गरम भोजन के साथ शहद मिलाना भी आयुर्वेद में हानिकारक बताया गया है. शहद को गर्म करने से उसके गुण बदल सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक प्रभाव पैदा हो सकता है. भारी भोजन के तुरंत बाद फल खाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि फल जल्दी पचते हैं और भारी भोजन के साथ पेट में फर्मेंटेशन शुरू कर सकते हैं. दही और चीनी का मेल भी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. दही पहले से ही खट्टा और ठंडा होता है, जबकि रिफाइंड चीनी शरीर में असंतुलन बढ़ा सकती है. रात में दही को फल या ठंडी चीजों के साथ लेना कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या हो सकती है. बासी भोजन के साथ दूध लेना भी पाचन के लिए सही नहीं माना गया. किन चीजों का सेवन करना चाहिए? आयुर्वेद सलाह देता है कि मौसमी आहार लें, जरूरत से ज्यादा न खाएं और अदरक, जीरा, सौंफ जैसे मसालों का उपयोग करें, जो डाइजेशन को मजबूत बनाते हैं. सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाने से डाइजेशन मजबूत रहती है, न्यूट्रिशन तत्वों का ऑब्जर्वेशन बेहतर होता है और शरीर संतुलित रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह नियम और भी लाभकारी माने जाते हैं.
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.
Fruit Cleaning Tips: अंगूर को ज्यादातर लोग घर लाते हैं और पानी से साफ करके खा लेते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसको कैसे साफ करना चाहिए और कौन से अंगूर पर सबसे ज्यादा पेस्टिसाइड लगा होता है. Do Black Or Green Grapes Have More Pesticides: अंगूर स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. इन्हें लोग स्नैक के रूप में, फ्रूट सलाद में या कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंगूर खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है. बिना धोए अंगूर खाने से शरीर में कीटनाशकों, बैक्टीरिया या गंदगी के जाने का खतरा बढ़ सकता है. सोशल मीडिया पर भी इन दिनों बिना धोए अंगूर खाने के नुकसान को लेकर काफी चर्चा हो रही है. क्यों साफ करने चाहिए अंगूर? कई लोग बताते हैं कि खेती के दौरान अंगूर पर पेस्टिसाइड और वैक्स जैसी परत लग सकती है, इसलिए इन्हें खाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. फूड ब्लॉगर वाणी शर्मा ने इंस्टाग्राम पर एक टिप साझा करते हुए बताया कि अंगूर को साफ करने के लिए उन्हें सिरका और बेकिंग सोडा वाले पानी में करीब 15 मिनट तक भिगोकर रखना चाहिए और फिर तीन-चार बार अच्छी तरह धोना चाहिए. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? हालांकि, इस बारे में एक्सपर्ट की राय थोड़ी अलग भी है. फिटनेस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट रिया श्रॉफ एकलास, जो Body Fit TV और The Diet Channel की फाउंडर हैं, उन्होंने बताया कि अंगूर खाने से पहले उन्हें धोना बेहद जरूरी है. उनके अनुसार बिना धोए अंगूर खाने से कीटनाशक, मिट्टी और बैक्टीरिया शरीर में जा सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर निगेटिव असर पड़ सकता है.
Shab e Qadr 2026 Date: रमजान के आखिरी दस दिनों में शब-ए-कद्र की रातें पड़ती हैं. इसे लैलतुल कद्र भी कहा जाता है. इस मुकद्दर रात में दुआ, इबादत, नमाज के जरिए अल्लाह की रहमत और मगफिरत हासिल होती है. Shab e Qadr 2026 Date: इस्लामिक कैलेंडर माह-ए-रमजान का हर दिन पाक और मुकद्दस वाला होता है. लेकिन रमजान आखिरी 10 दिनों में पड़ने वाली शब-ए-कद्र की रात महत्वपूर्ण मानी गई है. शब-ए-कद्र को सबसे पवित्र रातों में एक माना जाता है जोकि हर मुसलमान के लिए खास महत्व रखती है. शब-ए-कद्र को कई नामों के जाना जाता है. अरबी में लैलातुल क्रद के नाम से भी जाता है. अंग्रजी में इसे नाइट ऑफ डिक्री, नाइट ऑफ पावर और नाइट ऑफ वैल्यू कहते हैं. इसके अलावा इसे भाग्य की रात और मुकद्दस की रात भी कहा जाता है. कब है शब-ए-कद्र (Shab e Qadr 2026 Date in Islamic Calnedar) आमतौर पर रमजान की 27वीं रात को शब-ए-कद्र या लैलातुल कद्र कहा जाता है. इस साल रमजान की शुरुआत 19 फरवरी 2026 से हुई है. ऐसे में 27वीं रात 16 मार्च 2026 को होगी. हालांकि रमजान महीने में आखिरी अशरे यानी आखिरी 10 दिनों मं पड़ने वाली विषम रातों जैसे- 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रातों को भी शब-ए-कद्र की रात माना जाता है. शब-ए-कद्र का महत्व (Shab e Qadr 2026 Significance) इस्लामी मान्यता है कि, शब-ए-कद्र की रात को कुरान की आयतें पहली बार दुनिया में जिब्रील फरिश्ते के जरिए पैगंबर मोहम्मद पर उतारी गई थी. पैगंबर मोहम्मद के जरिए अल्लाह ने इसी शक्तिशाली रात इंसानियत को हिदायत देने का पैगाम भेजा. ऐसा माना जाता है कि, शब-ए-कद्र की रात की कई इबादत हजार सालों तक की गई इबादतों के बराबर है. लैलातुल क़द्र की रात का ज़िक्र कुरान में सूरह क़द्र में किया गया है- निःसंदेह, हमने क़ुरआन को शबे क़द्र की रात में उतारा और तुम्हें क्या पता शबे क़द्र की रात कैसी होती है? शबे क़द्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है. उसमें फ़रिश्ते और रूह अपने रब की अनुमति से हर काम के लिए उतरते हैं. वे सुबह होने तक शांति की रात होती है. कुरान | 97:1-5 शब-ए-कद्र की रात क्या करते हैं मुसलमान शब-ए-कद्र की रात मुसलमान पूरी रात जागकर नमाज और कुरान पढ़ते हैं और दुआ करते हैं. शब-ए-कद्र की रात लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. शब-ए-कद्र की रात मुसलमान तरावीह पढ़ते हैं, रात की आखिरी तहज्जुद की नमाज पढ़ी जाती है. साथ ही कुरान शरीफ की तिलावत की जाती है, हदीस की आयतें, पारा और नफ्ल की नमाज भी पढ़ते हैं.
REM Sleep Disorder Causes: कई लोग सोते समय तमाम तरह की हरकतें करते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आप भी सपने में चिल्लाते और चीखते हैं तो आपको कौन सी दिक्कत हो सकती है? Parkinson’s Disease And Sleep Disorder: नींद का समय शरीर के आराम करने और दिमाग के पूरे दिन की जानकारी को व्यवस्थित करने का समय माना जाता है, इस दौरान सपने आना सामान्य बात है. कई बार ये सपने साफ-साफ याद रहते हैं, तो कभी अजीब और धुंधले लगते हैं. लेकिन आमतौर पर सपने सिर्फ दिमाग तक ही सीमित रहते हैं. हालांकि कुछ लोगों के साथ ऐसा नहीं होता. उनके सपनों के साथ-साथ शरीर भी हरकत करने लगता है. कई बार व्यक्ति सोते-सोते चिल्लाने लगता है, हाथ-पैर चलाने लगता है या अचानक बिस्तर से उठ बैठता है. पास में सो रहे लोग रात में अचानक होने वाली इन हरकतों से चौंक सकते हैं. सुबह उठने पर अक्सर ऐसे लोग बताते हैं कि उन्होंने कोई बहुत जीवंत या डरावना सपना देखा था. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? डॉक्टर इस स्थिति को रैपिड स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर कहते हैं. यह एक दुर्लभ लेकिन महत्वपूर्ण नींद से जुड़ी समस्या है, क्योंकि इसमें सोते समय व्यक्ति खुद को या अपने साथी को चोट पहुंचा सकता है. कुछ मामलों में यह दिमाग से जुड़ी अन्य बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है. न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट और हेड ऑफ एपिलेप्सी सर्विस डॉ. केनी रविश राजीव ने TOI को बताया कि "रैपिड स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर में व्यक्ति सोते समय अपने सपनों को वास्तविक हरकतों में बदल देता है. सामान्य तौर पर REM स्लीप के दौरान ब्रेन शरीर की मांसपेशियों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर देता है, ताकि हम सपनों के अनुसार हरकत न करें. लेकिन RBD में यह प्रक्रिया सही तरह से काम नहीं करती." इसी समय आते हैं सबसे ज्यादा सपने नींद के कई चरण होते हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण चरण REM स्लीप होता है. इसी समय दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय होता है और अधिकतर सपने आते हैं. सामान्य स्थिति में इस दौरान शरीर की मांसपेशियां कुछ समय के लिए निष्क्रिय हो जाती हैं. लेकिन RBD में यह सिक्योरिटी पैटर्न काम नहीं करता और व्यक्ति सपने के अनुसार हाथ-पैर चलाने लगता है. ऐसे लोगों में रात के दौरान जोर से बोलना, चिल्लाना, हाथ-पैर मारना या अचानक उठ बैठना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार वे सपने में खुद को किसी से बचाते या भागते हुए महसूस करते हैं. Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.