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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- 'इजरायल कैंसर, बनाने वाले नर्क में जलेंगे', नेतन्याहू का आया तगड़ा जवाब

Metroheadlines अप्रैल 10, 2026 0

 

📰 ईरान-अमेरिका सीजफायर के बीच पाकिस्तान-इजरायल टकराव: मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कूटनीतिक संकट

 

मध्य पूर्व (Middle East) एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। एक ओर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के बीच संभावित सीजफायर की चर्चा चल रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान और इजरायल के बीच बयानबाजी ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों को नई चुनौती दी है।

 


 

🔥 क्या है पूरा मामला?

 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इजरायल को लेकर बेहद विवादित बयान दिया। उन्होंने इजरायल को “कैंसर” बताते हुए कहा कि यह देश दुनिया के लिए अभिशाप है और इसके निर्माताओं को “नर्क की आग में जलना चाहिए।”

यह बयान ऐसे समय आया जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की संभावनाएं बन रही थीं। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद ख्वाजा आसिफ ने अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया।

 


 

🇮🇱 इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया

 

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बयान को “अस्वीकार्य” करार दिया। उन्होंने कहा कि:

“किसी भी सरकार के जिम्मेदार मंत्री द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बेहद चिंताजनक है, खासकर तब जब वह देश खुद को शांति प्रक्रिया का हिस्सा बताता हो।”

इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे बयान हिंसा को बढ़ावा देते हैं और इससे इजरायल की सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है।

 


 

⚔️ इजरायल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष ने बढ़ाया तनाव

 

इस विवाद के पीछे एक बड़ा कारण हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष भी है। लेबनान में हाल ही में हुए हमलों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।

लेबनान में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इजरायल लगातार हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा है, जबकि हिज़्बुल्लाह भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है।

इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है।

 


 

🕊️ सीजफायर पर मतभेद

 

जहां शहबाज शरीफ का कहना है कि सीजफायर पूरे क्षेत्र पर लागू होना चाहिए, वहीं इजरायल और अमेरिका का मानना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है।

इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मतभेद सामने आए हैं। कई देशों का मानना है कि अगर लेबनान को शामिल नहीं किया गया, तो शांति प्रक्रिया अधूरी रह जाएगी।

 


 

🇮🇷 ईरान का रुख और कूटनीतिक दबाव

 

ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि लेबनान में हमले नहीं रुके, तो वह अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता को टाल सकता है।

ईरान, जो हिज़्बुल्लाह का प्रमुख समर्थक माना जाता है, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

यदि ईरान वार्ता से पीछे हटता है, तो यह न केवल सीजफायर प्रयासों को प्रभावित करेगा बल्कि क्षेत्रीय तनाव को और अधिक बढ़ा सकता है।

 


 

🌍 अमेरिका की भूमिका

 

संयुक्त राज्य अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम में एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

अमेरिका की कोशिश है कि इजरायल और ईरान के बीच सीधा टकराव टाला जाए और क्षेत्र में शांति स्थापित की जा सके।

हालांकि, लेबनान को लेकर मतभेद और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने अमेरिका की कोशिशों को कठिन बना दिया है।

 


 

🧭 आगे क्या हो सकता है?

 

आने वाले दिनों में कुछ अहम घटनाएं हो सकती हैं:

  • अमेरिका में इजरायल और लेबनान के बीच संभावित वार्ता
  • ईरान का शांति वार्ता में शामिल रहने या हटने का फैसला
  • हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष का विस्तार
  • पाकिस्तान और इजरायल के बीच कूटनीतिक तनाव का बढ़ना

अगर इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।

 


 

📊 विश्लेषण: क्यों बढ़ रहा है तनाव?

 

  1. राजनीतिक बयानबाजी
    नेताओं के आक्रामक बयान स्थिति को और भड़का रहे हैं।
  2. धार्मिक और क्षेत्रीय टकराव
    मध्य पूर्व में लंबे समय से धार्मिक और राजनीतिक मतभेद हैं।
  3. प्रॉक्सी वॉर (Proxy War)
    ईरान और इजरायल के बीच अप्रत्यक्ष संघर्ष लंबे समय से चल रहा है।
  4. अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की भूमिका
    अमेरिका, रूस और अन्य देशों के हित भी इस क्षेत्र में जुड़े हुए हैं।
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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

  भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया।   कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   देखिए तस्वीरें…     NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया।     NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन।     विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो।     सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार   इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा।   उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है।     'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा'   सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए।   डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है।     'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों'   सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा।   आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया।     डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान   कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।   कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- 'इजरायल कैंसर, बनाने वाले नर्क में जलेंगे', नेतन्याहू का आया तगड़ा जवाब

  📰 ईरान-अमेरिका सीजफायर के बीच पाकिस्तान-इजरायल टकराव: मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कूटनीतिक संकट   मध्य पूर्व (Middle East) एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। एक ओर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के बीच संभावित सीजफायर की चर्चा चल रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान और इजरायल के बीच बयानबाजी ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों को नई चुनौती दी है।     🔥 क्या है पूरा मामला?   पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इजरायल को लेकर बेहद विवादित बयान दिया। उन्होंने इजरायल को “कैंसर” बताते हुए कहा कि यह देश दुनिया के लिए अभिशाप है और इसके निर्माताओं को “नर्क की आग में जलना चाहिए।” यह बयान ऐसे समय आया जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की संभावनाएं बन रही थीं। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद ख्वाजा आसिफ ने अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया।     🇮🇱 इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया   इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बयान को “अस्वीकार्य” करार दिया। उन्होंने कहा कि: “किसी भी सरकार के जिम्मेदार मंत्री द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बेहद चिंताजनक है, खासकर तब जब वह देश खुद को शांति प्रक्रिया का हिस्सा बताता हो।” इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे बयान हिंसा को बढ़ावा देते हैं और इससे इजरायल की सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है।     ⚔️ इजरायल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष ने बढ़ाया तनाव   इस विवाद के पीछे एक बड़ा कारण हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष भी है। लेबनान में हाल ही में हुए हमलों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। लेबनान में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इजरायल लगातार हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा है, जबकि हिज़्बुल्लाह भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है।     🕊️ सीजफायर पर मतभेद   जहां शहबाज शरीफ का कहना है कि सीजफायर पूरे क्षेत्र पर लागू होना चाहिए, वहीं इजरायल और अमेरिका का मानना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मतभेद सामने आए हैं। कई देशों का मानना है कि अगर लेबनान को शामिल नहीं किया गया, तो शांति प्रक्रिया अधूरी रह जाएगी।     🇮🇷 ईरान का रुख और कूटनीतिक दबाव   ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि लेबनान में हमले नहीं रुके, तो वह अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता को टाल सकता है। ईरान, जो हिज़्बुल्लाह का प्रमुख समर्थक माना जाता है, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यदि ईरान वार्ता से पीछे हटता है, तो यह न केवल सीजफायर प्रयासों को प्रभावित करेगा बल्कि क्षेत्रीय तनाव को और अधिक बढ़ा सकता है।     🌍 अमेरिका की भूमिका   संयुक्त राज्य अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम में एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका की कोशिश है कि इजरायल और ईरान के बीच सीधा टकराव टाला जाए और क्षेत्र में शांति स्थापित की जा सके। हालांकि, लेबनान को लेकर मतभेद और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने अमेरिका की कोशिशों को कठिन बना दिया है।     🧭 आगे क्या हो सकता है?   आने वाले दिनों में कुछ अहम घटनाएं हो सकती हैं: अमेरिका में इजरायल और लेबनान के बीच संभावित वार्ता ईरान का शांति वार्ता में शामिल रहने या हटने का फैसला हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष का विस्तार पाकिस्तान और इजरायल के बीच कूटनीतिक तनाव का बढ़ना अगर इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।     📊 विश्लेषण: क्यों बढ़ रहा है तनाव?   राजनीतिक बयानबाजी नेताओं के आक्रामक बयान स्थिति को और भड़का रहे हैं। धार्मिक और क्षेत्रीय टकराव मध्य पूर्व में लंबे समय से धार्मिक और राजनीतिक मतभेद हैं। प्रॉक्सी वॉर (Proxy War) ईरान और इजरायल के बीच अप्रत्यक्ष संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की भूमिका अमेरिका, रूस और अन्य देशों के हित भी इस क्षेत्र में जुड़े हुए हैं।

Metroheadlines अप्रैल 10, 2026 0

ईरान का सऊदी अरब की ‘रीढ़’ अल जुबैल पर हमला, इसके मायने क्या और दुनिया पर क्या होगा असर?

रिपोर्ट- ईरान जंग रोकने पर आज बन सकती है सहमति: पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका को सीजफायर प्लान सौंपा, होर्मुज खोलने का प्रस्ताव भी शामिल

ईरान ने ठुकराई अमेरिका की शर्तें, बातचीत के लिए मिलने से किया मना, खत्म नहीं होगी जंग?

ईरान की वो 'ढाई चाल', जिसमें फंस गए ट्रंप… यूं ही नहीं ईरान वॉर में अमेरिका का निकल रहा दम

  Middle East Conflict: ईरान ने अमेरिका को पूरी तरह से जंग की बिसात पर घेर दिया है. ईरान ने अमेरिका इस युद्ध में काफी नुकसान तो पहुंचाया, साथ ही ट्रंप के मंसूबों को अभी तक कामयाब नहीं होने दिया   West Asia Tensions: अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही बुने जाल में फंसते हुए ईरान युद्ध में नजर आ रहे हैं. वह ईरान की तरफ से बिछाई बिसात की 'ढाई चाल' में फंस गए हैं. इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, खाड़ी देशों में अमेरिकी कार्रवाई से हड़कंप और एक जो महत्वपूर्ण हैं, कि ईरान ने सीधे तौर पर इस युद्ध में अमेरिका को निशाने पर लेते हुए, उसके अन्य देशों में मौजूद एयरबेस को निशाना बनाया है.    इसके अलावा एक तरफ अमेरिका पर युद्ध के दौरान पड़ा आर्थिक बोझ है, तो दूसरी तरफ ईरान भी किसी तरह से पीछे हटने को तैयार नहीं है. सहयोगी देशों ने भी उनका साथ देने से साफ इनकार कर दिया है, इनमें फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, स्पेन जैसे नाटो सदस्य देश शामिल हैं. इसके अलावा लगातार अमेरिका का मिसाइल भंडार भी कम हो रहा है. अमेरिका इस युद्ध में रोजाना 1 अरब डॉलर खर्च कर रहा है. पांचवे हफ्ते में ही इस युद्ध में अमेरिका के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.     भले ही ट्रंप ने 2 अप्रैल को दी अपनी स्पीच में जंग खत्म न होने की बात साफगोई से कही हो, और कहा हो कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी है, लेकिन अमेरिका युद्ध में हर मोर्चे पर कमजोर पड़ता हुआ दिख रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा है कि हम अपने टारगेट को पूरा करने के लिए अभियान जारी रखेंगे. अमेरिका अपने सभी लक्ष्य को जल्द पूरा करने की राह पर है. इसके अलावा उन्होंने आने वाले हफ्तों ईरान पर कड़ा प्रहार करने की धमकी दी है. साथ ही कहा है कि वह ईरान को वापस पाषाण युग (Stone Age) में ले जाएंगे. जहां वे वास्तव में थे.      ईरान की 'ढाई चाल' जिसमें अमेरिका पूरी तरह घिर गया?  ईरान पर अमेरिकी और इजरायल की तरफ से 28 फरवरी को की गई संयुक्त कार्रवाई में भले ही देश ने सुप्रीम लीडर को खो दिया था, लेकिन उसके बाद खामेनेई के लड़ाकों ने हर कदम फूंक-फूंककर रखा. सबसे पहले ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों पर रोक लगाते हुए, रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया था. इससे वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति पर असर पड़ा, और पूरी दुनिया की लगभग सभी देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा गई. दुनिया में तेल आपूर्ति का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रमुख रास्ता है.   इस स्थिति में ईरान ने मित्र देशों जिनमें भारत, रूस, चीन शामिल हैं, उनके लिए इस रास्ते को बंद नहीं किया. वहीं दुश्मन देशों के लिए इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया. इस रास्ते से लगभग 20% तेल दुनिया के देशों में भेजा जाता है. ईरान ने इस रास्ते से निकलने वाले जहाजों से टोल वसूलने की भी घोषणा की है.      अमेरिकी कार्रवाई से खाड़ी देशों में  हड़कंप, बढ़ा सुरक्षा का खतरा युद्ध के बाद से खाड़ी देशों में संघर्ष बढ़ गया. इन देशों में यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे देश शामिल हैं. ईरान से सीधे हमले का इन देशों को खतरा है. यूएई और बहरीन की इंडस्ट्रियल साइट दांव पर है. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से इन देशों पर वैश्विक तेल आपूर्ति का असर सीधे तौर पर पड़ा है. खाड़ी देशों की सबसे प्रमुख चिंताएं एल्युमिनियम संयंत्र और बहरीन हमले में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है.   इसके अलावा ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है. इन देशों का भरोसा भी अमेरिका पर कम हुआ है. यह सभी देश अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इसके अलावा यूएई में मौजूद प्रवासी कामगारों का भी खतरा बढ़ गया है. यूएई पर इस युद्ध का काफी असर पड़ा है. खाड़ी के देश खुलकर इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते हैं. वह युद्ध में ईरान की आक्रमक कार्रवाई को लेकर इंटरनेशनल कम्युनिटी से गुहार भी लगा रहे हैं.     अमेरिका एयरबेस को बनाया निशाना, सैन्य क्षमता को बनाया नुकसान इसके अलावा ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका को इस युद्ध में अपना दुश्मन मानकर उसके अन्य देशों में मौजूद एयरबेस को निशाना बनाया है. इनमें ईरान ने यूएई में प्रिंस सुल्तान एयरबेस समेत कई अन्य अमेरिकी ठिकानों को निशाने पर लिया है. इनपर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इनमें अमेरिका का महत्वपूर्ण E-3 AWACS विमान नष्ट किया है. लगभग 12 अमेरिकी सैनिक इन हमलों में घायल हुए हैं. इसके अलावा यूएई में अलधाफरा एयरबेस और कतर में अल उदीद एयरबेस को भी ईरान ने निशाना बनाया है. इनपर भी करीबन 10 से 12 सैनिक घायल हुए हैं. 

Metroheadlines अप्रैल 2, 2026 0
ट्रंप ने किया जीत का ऐलान तो ईरान ने मिसाइल दागकर दिया जवाब, अब क्या करेगा अमेरिका?

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'सेना भेजने की नहीं पड़ेगी जरूरत', अमेरिका-ईरान के बीच कब खत्म होगा युद्ध? ट्रंप ने तय कर दी आखिरी तारीख!

  US Iran conflict: मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर अमेरिका ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा.   US Iran conflict:  मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने पहली बार साफ संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यह ऑपरेशन “महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों” में खत्म हो सकता है और इसके लिए जमीनी सेना उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फ्रांस में जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने तय लक्ष्यों को समय से पहले या उसके आसपास हासिल कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ अमेरिकी सैनिकों को इलाके में तैनात किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर विकल्प खुले रहें.     मरीन और एयरबोर्न सैनिकों की तैनाती शुरू अमेरिकी विदेश मंत्री ने भले ही जमीनी युद्ध से इनकार किया हो, लेकिन पेंटागन ने हजारों मरीन और एयरबोर्न सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजना शुरू कर दिया है. जानकारी के मुताबिक, सैनिकों का पहला दल इसी मार्च के अंत तक एक बड़े एम्फीबियस जहाज के जरिए पहुंचने वाला है. इससे यह आशंका बढ़ गई है कि अगर हालात बिगड़े तो जंग जमीनी स्तर तक फैल सकती है.     ट्रंप का अल्टीमेटम, 10 दिन की डेडलाइन इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस जंग को जल्द खत्म करने के संकेत दे रहे हैं. उन्होंने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 10 दिन की नई समय सीमा दी है. साथ ही चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर ऊर्जा ढांचे पर हमला किया जा सकता है. ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव भी भेजा है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने और मिसाइल कार्यक्रम सीमित करने जैसी शर्तें शामिल हैं.     ईरान ने बातचीत से किया इनकार हालांकि तेहरान ने अब तक इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हमलों के बीच बातचीत करना अस्वीकार्य है और ईरान इसका भारी जवाब देगा. इस जंग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान में अब तक 1900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 20 हजार से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. वहीं अमेरिका के 300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए हैं और 13 की मौत हो चुकी है.

Metroheadlines मार्च 28, 2026 0

' ईरान की दो-तिहाई हथियार फैक्ट्रियां तबाह ' , अमेरिकी सेंट्रल कमांड के चीफ ने किया बड़ा दावा ?

लेबनान के 10 फीसदी इलाके पर कब्जा करेगा इजरायल, रक्षा मंत्री काटजू ने कर दिया बड़ा दावा

ईरान ने मिसाइल पर स्पेनिश PM का बयान लिखा:इसमें मैसेज था- हम युद्ध के खिलाफ; यह मिसाइल इजराइल पर दागी

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