West Asia Tensions: अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही बुने जाल में फंसते हुए ईरान युद्ध में नजर आ रहे हैं. वह ईरान की तरफ से बिछाई बिसात की 'ढाई चाल' में फंस गए हैं. इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, खाड़ी देशों में अमेरिकी कार्रवाई से हड़कंप और एक जो महत्वपूर्ण हैं, कि ईरान ने सीधे तौर पर इस युद्ध में अमेरिका को निशाने पर लेते हुए, उसके अन्य देशों में मौजूद एयरबेस को निशाना बनाया है.
इसके अलावा एक तरफ अमेरिका पर युद्ध के दौरान पड़ा आर्थिक बोझ है, तो दूसरी तरफ ईरान भी किसी तरह से पीछे हटने को तैयार नहीं है. सहयोगी देशों ने भी उनका साथ देने से साफ इनकार कर दिया है, इनमें फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, स्पेन जैसे नाटो सदस्य देश शामिल हैं. इसके अलावा लगातार अमेरिका का मिसाइल भंडार भी कम हो रहा है. अमेरिका इस युद्ध में रोजाना 1 अरब डॉलर खर्च कर रहा है. पांचवे हफ्ते में ही इस युद्ध में अमेरिका के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.
भले ही ट्रंप ने 2 अप्रैल को दी अपनी स्पीच में जंग खत्म न होने की बात साफगोई से कही हो, और कहा हो कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी है, लेकिन अमेरिका युद्ध में हर मोर्चे पर कमजोर पड़ता हुआ दिख रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा है कि हम अपने टारगेट को पूरा करने के लिए अभियान जारी रखेंगे. अमेरिका अपने सभी लक्ष्य को जल्द पूरा करने की राह पर है. इसके अलावा उन्होंने आने वाले हफ्तों ईरान पर कड़ा प्रहार करने की धमकी दी है. साथ ही कहा है कि वह ईरान को वापस पाषाण युग (Stone Age) में ले जाएंगे. जहां वे वास्तव में थे.
ईरान की 'ढाई चाल' जिसमें अमेरिका पूरी तरह घिर गया?
ईरान पर अमेरिकी और इजरायल की तरफ से 28 फरवरी को की गई संयुक्त कार्रवाई में भले ही देश ने सुप्रीम लीडर को खो दिया था, लेकिन उसके बाद खामेनेई के लड़ाकों ने हर कदम फूंक-फूंककर रखा. सबसे पहले ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों पर रोक लगाते हुए, रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया था. इससे वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति पर असर पड़ा, और पूरी दुनिया की लगभग सभी देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा गई. दुनिया में तेल आपूर्ति का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रमुख रास्ता है.
इस स्थिति में ईरान ने मित्र देशों जिनमें भारत, रूस, चीन शामिल हैं, उनके लिए इस रास्ते को बंद नहीं किया. वहीं दुश्मन देशों के लिए इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया. इस रास्ते से लगभग 20% तेल दुनिया के देशों में भेजा जाता है. ईरान ने इस रास्ते से निकलने वाले जहाजों से टोल वसूलने की भी घोषणा की है.
अमेरिकी कार्रवाई से खाड़ी देशों में हड़कंप, बढ़ा सुरक्षा का खतरा
युद्ध के बाद से खाड़ी देशों में संघर्ष बढ़ गया. इन देशों में यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे देश शामिल हैं. ईरान से सीधे हमले का इन देशों को खतरा है. यूएई और बहरीन की इंडस्ट्रियल साइट दांव पर है. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से इन देशों पर वैश्विक तेल आपूर्ति का असर सीधे तौर पर पड़ा है. खाड़ी देशों की सबसे प्रमुख चिंताएं एल्युमिनियम संयंत्र और बहरीन हमले में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है.
इसके अलावा ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है. इन देशों का भरोसा भी अमेरिका पर कम हुआ है. यह सभी देश अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इसके अलावा यूएई में मौजूद प्रवासी कामगारों का भी खतरा बढ़ गया है. यूएई पर इस युद्ध का काफी असर पड़ा है. खाड़ी के देश खुलकर इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते हैं. वह युद्ध में ईरान की आक्रमक कार्रवाई को लेकर इंटरनेशनल कम्युनिटी से गुहार भी लगा रहे हैं.
अमेरिका एयरबेस को बनाया निशाना, सैन्य क्षमता को बनाया नुकसान
इसके अलावा ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका को इस युद्ध में अपना दुश्मन मानकर उसके अन्य देशों में मौजूद एयरबेस को निशाना बनाया है. इनमें ईरान ने यूएई में प्रिंस सुल्तान एयरबेस समेत कई अन्य अमेरिकी ठिकानों को निशाने पर लिया है. इनपर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इनमें अमेरिका का महत्वपूर्ण E-3 AWACS विमान नष्ट किया है. लगभग 12 अमेरिकी सैनिक इन हमलों में घायल हुए हैं. इसके अलावा यूएई में अलधाफरा एयरबेस और कतर में अल उदीद एयरबेस को भी ईरान ने निशाना बनाया है. इनपर भी करीबन 10 से 12 सैनिक घायल हुए हैं.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
Dhurandhar 2 Advance Booking: रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉलीवुड की सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है. हालांकि ये एक साउथ हीरो की फिल्म को मात नहीं दे पा रही है. रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अर्जुन रामपाल स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही गदर मचाया हुआ है. फिलहाल ये 18 मार्च, 2026 को होने वाले पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में गर्दा उड़ा रही है. वैसे ये फिल्म पहले ही 'स्त्री 2' के पेड प्रीव्यू शो को रिकॉर्ड को मिट्टी में मिलाकर बॉलीवुड के लिए इतिहास रच चुकी है. लेकिन आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म के साउथ के एक स्टार का रिकॉर्ड तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. धुरंधर 2 ने पेड प्रीव्यू के लिए एडवांस बुकिंग में कितनी कर ली है कमाई? धुरंधर को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली थी. ऐसे में इसकी सीक्वल धुरंधर द रिवेंज या धुरंधर 2 को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की तो पूरी उम्मीद है ही लेकिन ये फिल्म तो रिलीज से पहले ही कमाल कर रही है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर रही है. सैकनिल्क के मुताबिक, इसने पेड प्रीव्यू से अब तक 18.78 करोड़ (ब्लॉक्ड सीटों को छोड़कर) कमा लिएए हैं वहीं ब्लॉक सीटों के साथ इसका पेड प्रीव्यू के लिए प्री टिकट सेल का कलेक्शन 23.99 करोड़ पहुंच चुका है. देश भर में 8 हजार 31 शोज के लिए इसके 3 लाख 51 हजार 4 सौ 13 टिकट बिक चुके हैं. धुरंधर 2 ने स्त्री 2 को पछाड़ बनाया नया रिकॉर्ड बता दें कि कि 2024 में, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 ने इंडिया में पेड प्रीव्यू में 9.40 करोड़ की नेट कमाई करके नया माइलस्टोन हासिल किया था. लेकिन धुरंधर: द रिवेंज ने एडवांस बुकिंग में इससे कई गुना ज़्यादा सेल्स के साथ इसे धूल चटा दी है. इसकी के साथ .े बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम भी कर चुकी है. धुरंधर 2 के पवन कल्याण की OG को मात देने में छूटे पसीने इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि धुरंधर 2 ने पेड पीव्यू के लिए प्री सेल्स में बेशक धमाकेदार कमाई कर ली हैं लेकिन इसका टारगेट इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी पेड प्रीव्यू कमाई का रिकॉर्ड अपने नाम करना है. दरअसल पवन कल्याण की दे कॉल हिम OG ने 21 करोड़ के बड़े नेट कलेक्शन के साथ किसी इंडियन फिल्म के लिए अब तक के सबसे ज़्यादा पेड प्रीव्यू अपने नाम किए हुए हैं. फिलहाल रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 के लिए इस रिकॉर्ड को तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. हालांकि अभी फिल्म के पेड प्रीव्यू शो में 6 दिन बचे हैं और इसे पवन कल्याण के रिकॉर्ड को मात देने से सिर्फ 3 करोड़ के करीब पीछे है. इसलिए पूरी उम्मीद है कि धुरंधर 2 इस उपलब्धि को हासिल कर इतिहास रच सकती है.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे. बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है। नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी। नई सरकार का गठन कब होगा? राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है। इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है। क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा? अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा। संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन? नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। 2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। 3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा? अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं। विपक्ष की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। बिहार की राजनीति पर संभावित असर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं: बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था। आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
Iran-US Talk: ईरान शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचने पर US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस को उमर फारूक ज़हूर से मिलवाया गया था, जिस पर कई तरह के संगीन आरोप है. US Iran Talks 2.0: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ शांति बातचीत के पहले दौर के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे. उस वक्त से जुड़ी एक छोटी सी घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. हाल ही में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, वेंस को एक व्यक्ति से मिलवाते दिखे. बाद में नॉर्वे के अखबार VG ने उस व्यक्ति की पहचान उमर फारूक ज़हूर के रूप में की. यही से यह मामला चर्चा में आ गया. उमर फारूक ज़हूर एक ऐसा नाम है जिसे अलग-अलग देशों में अलग नजर से देखा जाता है. नॉर्वे में वह एक वॉन्टेड व्यक्ति हैं जिन पर बड़े वित्तीय अपराधों के आरोप हैं, जबकि पाकिस्तान में उन्हें सम्मानित निवेशक के रूप में देखा जाता है. उमर फारूक ज़हूर का जन्म ओस्लो में हुआ था. उनके माता-पिता पाकिस्तान के सियालकोट से थे. नॉर्वे में उमर फारुक खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई 2003 में हुई थी, जब एक अदालत ने उन्हें अपने ही परिवार की ट्रैवल एजेंसी से पैसे के गबन के मामले में एक साल की सजा सुनाई थी. लेकिन वह सजा सुनाए जाने के समय कोर्ट में पेश नहीं हुए और देश छोड़कर चले गए. नॉर्वे सरकार का आरोप साल 2010 से नॉर्वे की पुलिस उमर फारूक ज़हूर को एक बड़े बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग केस में तलाश रही है. आरोप है कि नॉर्डिया बैंक से जुड़े एक मामले में 60 मिलियन से ज्यादा नॉर्वेजियन क्रोनर की हेराफेरी हुई. नॉर्वे की एजेंसियां लगातार उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की मांग करती रही हैं, लेकिन ज़हूर इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं. स्विट्जरलैंड और अन्य देशों में जांच ज़हूर का नाम सिर्फ नॉर्वे तक सीमित नहीं रहा. स्विट्जरलैंड में भी उनके खिलाफ जांच हुई थी. 2004 में उन पर एक नकली बैंक के जरिए निवेशकों से लगभग 20 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी के आरोप लगे. हालांकि इस मामले में उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और बाद में केस समय सीमा खत्म होने के कारण बंद हो गया. इसके अलावा 2015 में घाना के साथ एक बड़े पावर प्रोजेक्ट डील में भी उनका नाम सामने आया. हालांकि इसमें उनकी सीधी भूमिका कितनी थी, यह साफ नहीं हो पाया और इस मामले में भी कोई सजा नहीं हुई. पाकिस्तान में अलग छवि यूरोप में लगे आरोपों के बावजूद पाकिस्तान में ज़हूर की छवि बिल्कुल अलग है. यहां उन्हें एक सफल बिजनेस मैन और निवेश लाने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है. उन्हें देश में विदेशी निवेश लाने का श्रेय दिया गया है. मार्च 2025 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘हिलाल-ए-इम्तियाज़’ दिया. यह सम्मान उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, लॉजिस्टिक्स और एनर्जी सेक्टर में लगभग 700 मिलियन डॉलर के निवेश को आसान बनाने के लिए दिया गया. इमरान खान केस से जुड़ाव ज़हूर का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े तोशाखाना मामले में भी सामने आया. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस केस में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाई थी. इसी मामले में आरोप था कि इमरान खान ने सरकारी तोहफे बेचे थे. ज़हूर ने दावा किया था कि उन्होंने एक महंगी घड़ी करीब 2 मिलियन डॉलर में खरीदी थी. इंटरपोल और कानूनी स्थिति एक समय पर ज़हूर के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी हुआ था, जो पाकिस्तान में दर्ज एक केस से जुड़ा था. लेकिन 2022 में यह नोटिस वापस ले लिया गया, क्योंकि पाकिस्तान ने अपनी मांग वापस ले ली थी और जांच में पर्याप्त सबूत नहीं मिले. पाकिस्तान की अदालतों में भी उन्हें कुछ मामलों में राहत मिली है. 2025 में एक कोर्ट ने नॉर्वे के एक मीडिया आउटलेट के खिलाफ मानहानि केस में ज़हूर के पक्ष में फैसला दिया. इस्लामाबाद में मौजूदगी पर सवाल इन सब घटनाओं के बीच, 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ के साथ ज़हूर का दिखना कई सवाल खड़े करता है. यह साफ नहीं है कि वह किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे या निजी तौर पर वहां मौजूद थे, लेकिन यह बात साफ है कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसे एक देश में वॉन्टेड माना जाता है, दूसरे देश में सम्मानित है और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के करीब नजर आता है. उमर फारूक ज़हूर की कहानी उमर फारूक ज़हूर की कहानी एक ही व्यक्ति की दो अलग पहचान दिखाती है. नॉर्वे में वह एक बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा आरोपी है, जबकि पाकिस्तान में वह एक सम्मानित निवेशक और प्रभावशाली शख्सियत है. यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और ज्यादा दिलचस्प और जटिल बनाता है.
US Iran talks: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के लिए पाकिस्तान सहित क्षेत्रीय देशों द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता प्रयास अब विफल हो गए हैं. US Iran talks: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के लिए की जा रही मध्यस्थता प्रयासों में ठहराव आ गया है. ईरान ने तय वार्ता में हिस्सा लेने से साफ इंकार कर दिया है. यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान समेत क्षेत्रीय देशों द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराए जाने के प्रयास अब नाकाम साबित हो रहे हैं. ईरान ने मध्यस्थों को स्पष्ट रूप से कहा है कि वह आगामी दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार नहीं है और अमेरिका की मांगों को अस्वीकार्य मानता है. रिपोर्ट में कहा गया, “ईरान ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थों को बताया कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है और अमेरिकी मांगें अस्वीकार्य हैं.” पाकिस्तान की भूमिका पर असर इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की थी, लेकिन मध्यस्थता प्रयासों में प्रगति न होने के कारण यह प्रस्ताव अब टल गया है. इस्लामाबाद ने कहा था कि वह सार्थक वार्ता की मेजबानी और सुविधा देने के लिए तैयार है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि देश सम्मानित महसूस करेगा और सार्थक वार्ता में मदद देगा.” अमेरिका की प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए थे कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत में है. उन्होंने कहा था, “हम इस वार्ता में बेहद अच्छी प्रगति कर रहे हैं." हालांकि उन्होंने कोई और विवरण नहीं दिया. ईरान का इनकार ईरान ने साफ कहा है कि वह पाकिस्तान के जरिए होने वाली बातचीत में शामिल नहीं है. ईरान के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने बताया कि अमेरिका से कोई सीधी बात नहीं हुई. सिर्फ दूसरे लोगों के जरिए अमेरिका की “ज्यादा और गलत” मांगें भेजी गई हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी तरफ से कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान उसमें शामिल नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होना अच्छा है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि शुरुआत किसने की. ईरान को अमेरिका की तरफ से 15 पॉइंट का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उसे “अवास्तविक और बेकार” बताते हुए ठुकरा दिया गया.
Middle East Conflict: अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां इजरायली हमले में IRGC के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसिरी की मौत की पुष्टी हुई है. हाल ही में इजरायल ने इस बात का दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के लिए जिम्मेदार तंगसिरी की मौत हो गई है. इजरायली हमले के बाद गंभीर चोटों से वह उबर नहीं पाए. IRIB ने उनकी मौत की पुष्टी की है. इससे पहले इजरायल के रक्षामंत्री काट्ज ने पिछले हफ्ते जानकारी दी थी कि कमांडर को इजरायली सेना के लक्षित ऑपरेशन में मार गिराया गया था. अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. खाड़ी युद्ध में अमेरिका और इजरायल के जहाजों को चुनौती देने में उनकी भूमिका अहम रही थी. लीरेजा तंगसिरी 26 मार्च को हुए बंदर अब्बास में इजरायली हमले के दौरान गंभीर चोट के चलते घायल हो गए थे. ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक हमले में मारे जा चुके हैं इससे पहले इस युद्ध में कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य हस्तियों की जान जा चुकी है. सबसे पहले इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में उनके परिसर पर हवाई हमला किया गया था. वह 86 साल के थे. 1989 से ईरान शीर्ष नेतृ्त्व संभाल रहे थे. इनके अलावा अली लारीजानी जो सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव थे. उनकी मौत 17 मार्च को हमले के दौरान हो गई थी. वह 67 साल के थे. ईरानी मीडिया के अनुसार उनके साथ उनके बेटे और उनके एक डिप्टी भी मारे गए थे. इस्माइल खतीब ईरान के खुफिया मंत्री थे. 18 मार्च को इजरायल के हमले में उनकी मौत हो गई थी. अगस्त 2021 में उन्होंने नागरिक खुफिया तंत्र का नेतृत्व संभाला था. इनके अलावा आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ मोहम्मद पाकपुर की 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मौत हो गई थी. इसके अलावा वायुसेना अधिकारी अजीज नासिरजादेह 28 फरवरी को तेहरान के हमले में मारे गए. ईरान सशस्त्र बल के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी 28 फरवरी के हमले में मारे गए. बासिज अर्धसैनिक बल के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी 17 मार्च को हुए हमले में मारे गए. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसेना खुफिया प्रमुख बेहनम रजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास के बंदरगाह शहर में हमले के दौरान मारे गए.