भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता को लेकर जारी ‘Wealth Tracker India 2026’ रिपोर्ट ने एक बार फिर देश की आर्थिक संरचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Centre for Financial Accountability द्वारा 1 अप्रैल 2026 को ‘Tax the Top’ अभियान के तहत जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की संपत्ति का बड़ा हिस्सा बेहद कम लोगों के पास सिमटता जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सिर्फ 1,688 अमीर लोगों के पास करीब 166 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो देश के कुल GDP का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बनती है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है।
रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि भारत में संपत्ति का वितरण लगातार असंतुलित होता जा रहा है। इस स्थिति की तुलना औपनिवेशिक काल की असमानताओं से की गई है, जब देश की आर्थिक संपत्ति सीमित वर्ग के हाथों में केंद्रित थी।
रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच देश के ऊपरी वर्ग की संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जबकि निचले तबके की आर्थिक स्थिति लगभग स्थिर बनी रही। यह ट्रेंड इस बात की ओर इशारा करता है कि आर्थिक विकास का फायदा समान रूप से वितरित नहीं हो रहा।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं:
ये आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक पिरामिड के शीर्ष पर मौजूद लोगों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है, जबकि निचले तबके के लिए हालात लगभग जस के तस बने हुए हैं।
रिपोर्ट में देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया है।
मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, सावित्री जिंदल, सुनील मित्तल और शिव नादर जैसे बड़े नामों की संपत्ति में 2019 से 2025 के बीच भारी उछाल दर्ज किया गया।
यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में वेल्थ क्रिएशन तेजी से हो रहा है, लेकिन उसका वितरण असमान है।
रिपोर्ट में इस असमानता को कम करने के लिए कुछ ठोस सुझाव भी दिए गए हैं।
सबसे प्रमुख सुझाव है—अमीरों पर प्रोग्रेसिव वेल्थ टैक्स लागू करना।
Centre for Financial Accountability के अनुसार:
अगर यह दोनों टैक्स लागू किए जाते हैं, तो सरकार को हर साल करीब 10.63 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अतिरिक्त राजस्व का इस्तेमाल सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है—जैसे:
इससे समाज के कमजोर वर्गों तक ज्यादा संसाधन पहुंचेंगे और अमीर-गरीब के बीच की खाई को कम करने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट अप्रत्यक्ष रूप से कुछ कारणों की ओर भी इशारा करती है:
इन सभी कारकों ने मिलकर अमीरों को और ज्यादा अमीर बनने में मदद की है।
आर्थिक असमानता सिर्फ पैसों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका समाज पर गहरा असर पड़ता है:
अगर यह असमानता लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह देश के समग्र विकास को प्रभावित कर सकती है।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
Navratri Second Day Brahmacharini: नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जो तप और संयम की देवी हैं. जानिए दूसरे दिन माता की पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती, और शुभ योग के बारे में? Chaitra Navratri Second Day of Goddess Brahmacharini: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. जहां पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है, वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दे रहे हैं. मां दुर्गा का दूसरा अवतार देवी ब्रह्मचारिणी तप, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी हैं. माता को सफेद रंग के वस्त्र, चंदन, फूल और श्वेत मिठाई चढ़ाया जाता है. इस दिन का काफी खास महत्व है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है. आइए जानते हैं उनके मंत्र, पूजा विधि, कथा और आरती से जुड़ी सटीक जानकारी के बारे में. मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ? मां ब्रह्मचारिणी तप शक्ति का प्रतीक हैं. ब्रह्मचारिणी माता की आराधना से भक्तों में तप की शक्ति बढ़ती है. इसके अलावा उन्हें मनोवांछित फल की भी प्राप्ति होती है. देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से दूसरे स्वरूप का नाम देवी ब्रह्मचारिणी है. नवरात्रि के दूसरे दिन के दौरान मां के इस अवतार की पूजा संपूर्ण विधि-विधान से करनी चाहिए. 'ब्रह्मचारिणी' नाम का मतलब ब्रह्म और चारिणी से मिलकर बना हुआ है. ब्रह्म का अर्थ है तप या तपस्या, वही चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली. ऐसे में ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ है, तप का आचरण करने वाली देवी. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए मां ने इस रूप में कठोर तपस्या की थी. नवरात्र के दूसरे दिन खास योग! चैत्र नवरात्रि के दूसरे सर्वार्थ सिद्धि के साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जो शुक्रवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट से लेकर देर रात 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही शनिवार दोपहर2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक विजय मुहूर्त का संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यता है कि, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए काम सफल होते हैं और राहुकाल में कोई नया काम या पूजा करने से वह निष्फल होता है. मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja Vidhi) नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद आसन पर बैठकर मां का ध्यान करते हुए पूजा करें. उन्हें फूल, चंदन, अक्षत, रोली, धूप, भोग आदि अर्पित करें. मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं. उसके बाद मां को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करें. उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करना शुभ माना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी से जुड़ा ध्यान मंत्र (Maa Brahmacharini Mantra) या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू। देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ इस मंत्र का अर्थ है कि, देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप दिव्यता से भरा है. माता के दाहिने हाथ में जप की माला तो बाएं हाथ में कमंडल है. माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करने के लिए ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग (Maa Brahmacharini Bhog) नवरात्र के दूसरे मां ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग शर्करा या गुड़ अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से आयुष्मान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ब्रह्मचारिणी माता जी की आरती (Maa Brahmacharini Aarti) जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।आरती करते समय खासतौर पर इस बात का ध्यान दें कि, देवी-देवताओं की 14 बार आरती उतारना है. 4 बार उनके चरणों पर से, 2 बार नाभि पर से, 1 बार मुख पर से और 7 बार पूरे शरीर पर से. आरती की बत्तियां 1, 5, 7 यानी विषम संख्या में ही बनाकर आरती करनी चाहिए.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.
देश में संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के अनुसार, भारत में 1,688 अमीर लोगों के पास देश की 50% GDP के बराबर दौलत है. भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता को लेकर जारी ‘Wealth Tracker India 2026’ रिपोर्ट ने एक बार फिर देश की आर्थिक संरचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Centre for Financial Accountability द्वारा 1 अप्रैल 2026 को ‘Tax the Top’ अभियान के तहत जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की संपत्ति का बड़ा हिस्सा बेहद कम लोगों के पास सिमटता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सिर्फ 1,688 अमीर लोगों के पास करीब 166 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो देश के कुल GDP का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बनती है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। क्या कहती है रिपोर्ट? रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि भारत में संपत्ति का वितरण लगातार असंतुलित होता जा रहा है। इस स्थिति की तुलना औपनिवेशिक काल की असमानताओं से की गई है, जब देश की आर्थिक संपत्ति सीमित वर्ग के हाथों में केंद्रित थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच देश के ऊपरी वर्ग की संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जबकि निचले तबके की आर्थिक स्थिति लगभग स्थिर बनी रही। यह ट्रेंड इस बात की ओर इशारा करता है कि आर्थिक विकास का फायदा समान रूप से वितरित नहीं हो रहा। आंकड़ों से समझिए असमानता का स्तर रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं: देश के टॉप 1% लोगों के पास 40% से ज्यादा संपत्ति है। वहीं निचले 50% लोग सिर्फ 15% आय पर निर्भर हैं। 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा संपत्ति रखने वालों की संख्या में 77% की वृद्धि दर्ज की गई है। इन अमीरों की कुल संपत्ति 31 लाख करोड़ से बढ़कर 88 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो करीब 227% की बढ़ोतरी है। ये आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक पिरामिड के शीर्ष पर मौजूद लोगों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है, जबकि निचले तबके के लिए हालात लगभग जस के तस बने हुए हैं। अमीर और अमीर हो रहे हैं रिपोर्ट में देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया गया है। मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, सावित्री जिंदल, सुनील मित्तल और शिव नादर जैसे बड़े नामों की संपत्ति में 2019 से 2025 के बीच भारी उछाल दर्ज किया गया। इन पांच बड़े परिवारों की कुल संपत्ति 6.68 लाख करोड़ से बढ़कर 26.54 लाख करोड़ रुपये हो गई। मुकेश अंबानी की संपत्ति में करीब 153% वृद्धि हुई। गौतम अडानी की दौलत में 625% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में वेल्थ क्रिएशन तेजी से हो रहा है, लेकिन उसका वितरण असमान है। समाधान क्या सुझाती है रिपोर्ट? रिपोर्ट में इस असमानता को कम करने के लिए कुछ ठोस सुझाव भी दिए गए हैं। सबसे प्रमुख सुझाव है—अमीरों पर प्रोग्रेसिव वेल्थ टैक्स लागू करना। Centre for Financial Accountability के अनुसार: देश के 1,688 सबसे अमीर परिवारों पर 2% से 6% तक वेल्थ टैक्स लगाया जा सकता है। इसके साथ इनहेरिटेंस (विरासत) टैक्स भी लागू करने की सिफारिश की गई है। अगर यह दोनों टैक्स लागू किए जाते हैं, तो सरकार को हर साल करीब 10.63 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है। इस पैसे का क्या होगा उपयोग? रिपोर्ट के मुताबिक, इस अतिरिक्त राजस्व का इस्तेमाल सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है—जैसे: स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार शिक्षा प्रणाली में सुधार गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सब्सिडी रोजगार सृजन कार्यक्रम इससे समाज के कमजोर वर्गों तक ज्यादा संसाधन पहुंचेंगे और अमीर-गरीब के बीच की खाई को कम करने में मदद मिलेगी। क्यों बढ़ रही है असमानता? रिपोर्ट अप्रत्यक्ष रूप से कुछ कारणों की ओर भी इशारा करती है: पूंजी बाजार में तेजी, जिससे बड़े निवेशकों को ज्यादा फायदा संपत्ति (रियल एस्टेट, शेयर) में बढ़ोतरी टैक्स स्ट्रक्चर में असमानता सामाजिक सुरक्षा तंत्र की सीमाएं इन सभी कारकों ने मिलकर अमीरों को और ज्यादा अमीर बनने में मदद की है। क्या है इसका सामाजिक असर? आर्थिक असमानता सिर्फ पैसों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका समाज पर गहरा असर पड़ता है: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच सामाजिक असंतोष में वृद्धि आर्थिक अवसरों में कमी गरीबी का स्थायीकरण अगर यह असमानता लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह देश के समग्र विकास को प्रभावित कर सकती है।
LPG, CNG, PNG rates today: देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. LPG, CNG, PNG rates today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई पर पड़ा है. जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, देश में LPG, CNG और PNG की बढ़ती कीमतों और उनकी उपलब्धता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. भारत अपनी जरूरत का 40 परसेंट से ज्यादा क्रूड ऑयल और LPG का 90 परसेंट सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से आयात करता है. हालांकि, इस निर्भरता के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि LPG की सप्लाई स्थिर बनी हुई है और डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर किसी भी तरह की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं है. 31 मार्च को 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 913 रुपये कोलकाता 939 रुपये मुंबई 912.50 रुपये चेन्नई 928.50 रुपये बेगलुरु 915.50 रुपये हैदराबाद 965 रुपये 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आज कीमत शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 1,884.50 रुपये कोलकाता 1,988.50 मुंबई 1,836.50 चेन्नई 2,043.50 बेंगलुरु 1,958 हैदराबाद 2,105.50 आज 31 मार्च को CNG की कीमत शहर कीमत (प्रति किलो) दिल्ली 77.09 रुपये कोलकाता 93.50 रुपये मुंबई 80.50 रुपये चेन्नई 91.50 रुपये बेंगलुरु 88.95 रुपये हैदराबाद 97 रुपये देश के प्रमुख शहरों में आज PNG की कीमत शहर कीमत (प्रति SCM) दिल्ली 47.89 रुपये कोलकाता 50 रुपये मुंबई 50 रुपये चेन्नई 50 रुपये बेंगलुरु 52 रुपये हैदराबाद 51 रुपये सरकार की कोशिश इस बीच, केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के दबाव के बीच घरों में खाना पकाने और रोशनी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन का एड-हॉक (तदर्थ) आवंटन करने की अनुमति दे दी है. इन क्षेत्रों में वे इलाके भी शामिल हैं जिन्हें पहले 'केरोसिन-मुक्त' घोषित किया गया था. हालांकि, उपलब्ध LPG की आपूर्ति में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन सीमित स्टॉक के कारण वितरण केंद्रों पर लोग घबराकर ज़्यादा खरीदारी करने लगे हैं और लंबी कतारें लग गई हैं. LPG पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने पूरे देश में—उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित जिन्हें पहले केरोसिन-मुक्त घोषित किया गया था—खाना पकाने और रोशनी के लिए केरोसिन के अस्थायी उपयोग की अनुमति दे दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 मार्च को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें 'पेट्रोलियम अधिनियम, 1934' और 'पेट्रोलियम नियम, 2002' के तहत अस्थायी छूट की अनुमति दी गई है. इससे निर्दिष्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PDS केरोसिन के वितरण में आसानी होगी. साथ ही, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और समय पर आपूर्ति के लिए भंडारण, सुरक्षा और लाइसेंसिंग से जुड़ी शर्तें भी लागू होंगी.
पश्चिम एशिया में तनाव का असर पड़ोसी देशों पर भी साफ दिख रहा है. बांग्लादेश में जेट ईंधन की कीमतों में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है India's Workforce Grow: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से पैदा हुए ऊर्जा संकट ने दुनियाभर में हड़कंप मचा दिया है. वैश्विक स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अगर ईरान से जुड़ा यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो यह एक बड़े संकट का रूप ले सकता है. पश्चिम एशिया में तनाव का असर पड़ोसी देशों पर भी साफ दिख रहा है. बांग्लादेश में जेट ईंधन की कीमतों में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है. इसके साथ ही, सरकार ने औद्योगिक ईंधन (डीजल) और पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है. भारत के लिए खुशखबरी हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में देश में रोजगार के अवसरों में करीब 4.7% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी स्टार्टअप, हेल्थ सर्विसेज, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वृद्धि के चलते रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. टीमलीज सर्विसेज की एम्प्लॉयमेंट आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती में सुधार का रुझान बड़ी कंपनियों में सबसे अधिक देखने को मिल रहा है, जहां 74% कंपनियों ने विस्तार के संकेत दिए हैं. वहीं, मीडियम साइज कंपनियों में यह आंकड़ा 57% और छोटे व्यवसायों में 38 प्रतिशत है, जो यह दिखाता है कि रोजगार वृद्धि में बड़ी कंपनियों की भूमिका अहम बनी हुई है. बढ़ेंगे रोजगार के मौके रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच रोजगार की मांग डिजिटल और पारंपरिक दोनों क्षेत्रों में बढ़ेगी. E-Commerce और टेक स्टार्टअप सेक्टर में नेट एम्प्लॉयमेंट चेंज (एनईसी) 8.9% रहने का अनुमान है. इसके बाद स्वास्थ्य सेवा और दवा क्षेत्र 7% और विनिर्माण, इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर 6.6% के साथ आगे रहेंगे. कुल मिलाकर इस अवधि में एनईसी 4.7% रहने का अनुमान है. यह रिपोर्ट 23 उद्योगों और 20 शहरों में 1,268 नियोक्ताओं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है, जिसका सर्वेक्षण नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच किया गया था. टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस चीफ बालासुब्रमण्यम का कहना है कि भारत में वर्कफोर्स की प्रकृति अब चक्रीय मांग के बजाय संरचनात्मक और नीतिगत बदलावों से अधिक प्रभावित हो रही है. लेबर कोड के लागू होने के बाद 64% संगठनों ने रोजगार लागत बढ़ने की बात कही है, जबकि 80% कंपनियां सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं और नए कानूनी ढांचे के अनुरूप अपने वर्कफोर्स को पुनर्गठित कर रही हैं.