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हम भारत के साथ चीन वाली गलती ट्रेड डील पर ट्रंप के करीबी क्रिस्टोफर का बड़ा बयान, 'अमेरिका फर्स्ट' का छेड़ा राग

Metroheadlines मार्च 6, 2026 0

 

नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान अमेरिका की ओर से एक बड़ा और स्पष्ट संदेश सामने आया है। अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडाउ ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर अहम बयान देते हुए कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक समझौते में चीन के साथ 20 साल पहले हुई गलती को नहीं दोहराएगा

 

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच बाइलेटरल ट्रेड डील (Bilateral Trade Deal) को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से बातचीत चल रही है। लैंडाउ ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका भारत के साथ मजबूत साझेदारी चाहता है, लेकिन यह साझेदारी संतुलित और पारस्परिक हितों पर आधारित होगी

 

इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राजनीति के गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

 


 

रायसीना डायलॉग क्या है और इसका महत्व

 

रायसीना डायलॉग भारत का सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल और स्ट्रैटेजिक कॉन्फ्रेंस माना जाता है। इसका आयोजन हर साल नई दिल्ली में किया जाता है।

 

इस मंच पर दुनिया के कई बड़े नेता, राजनयिक, रणनीतिक विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल होते हैं। यहां वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और व्यापार से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होती है।

 

2026 के रायसीना डायलॉग में अमेरिका, यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के कई बड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अमेरिका की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व क्रिस्टोफर लैंडाउ कर रहे थे।

 


 

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: फिनिश लाइन के करीब

 

क्रिस्टोफर लैंडाउ ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील अब “फिनिश लाइन” के करीब पहुंच चुकी है

उनके अनुसार यह समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होगा।

उन्होंने कहा:

“हम इस ट्रेड डील को लेकर बहुत उत्साहित हैं। यह अब लगभग अंतिम चरण में है और इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।”

भारत और अमेरिका पहले से ही एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और यह समझौता इस रिश्ते को और मजबूत कर सकता है।

 


 

चीन के साथ अमेरिका की पुरानी गलती

 

लैंडाउ ने अपने बयान में चीन का विशेष रूप से जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि लगभग 20 साल पहले अमेरिका ने चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अपने बाजार खोल दिए थे। उस समय अमेरिका को उम्मीद थी कि इससे चीन की अर्थव्यवस्था विकसित होगी और दोनों देशों को फायदा होगा।

लेकिन बाद में स्थिति बदल गई।

चीन ने कई क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की और धीरे-धीरे अमेरिका के उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने लगी।

लैंडाउ ने कहा:

“हम भारत के साथ वही गलती नहीं करेंगे जो हमने चीन के साथ 20 साल पहले की थी।”

इस बयान का मतलब यह है कि अमेरिका अब किसी भी व्यापारिक समझौते में अपने राष्ट्रीय हितों को पहले स्थान पर रखेगा

 


 

“अमेरिका फर्स्ट” नीति का असर

 

लैंडाउ ने अपने बयान में अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का भी जिक्र किया।

यह नीति अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की विदेश और व्यापार नीति का मुख्य आधार रही है।

इस नीति का मुख्य उद्देश्य है:

  • अमेरिकी उद्योगों को मजबूत करना

  • घरेलू रोजगार बढ़ाना

  • व्यापार घाटे को कम करना

  • अंतरराष्ट्रीय समझौतों में अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देना

लैंडाउ ने स्पष्ट किया कि “अमेरिका फर्स्ट” का मतलब “अमेरिका अकेला” नहीं है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों के साथ सहयोग करेगा, लेकिन केवल उन समझौतों में जहां दोनों देशों के हित सुरक्षित हों।

 


 

भारत के लिए क्या मायने रखता है यह बयान

लैंडाउ के बयान के कई महत्वपूर्ण संकेत हैं।

पहला संकेत यह है कि अमेरिका भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार मानता है।

दूसरा संकेत यह है कि अमेरिका चाहता है कि व्यापारिक समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभदायक हो

भारत के लिए यह मौका है कि वह अपनी बढ़ती आर्थिक ताकत और बाजार क्षमता का इस्तेमाल करके अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक शर्तें तय करे।

 


 

भारत का बढ़ता वैश्विक महत्व

लैंडाउ ने भारत की बढ़ती शक्ति और महत्व पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत का प्रभाव तेजी से बढ़ेगा क्योंकि:

  • भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है

  • इसकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है

  • तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र मजबूत हो रहे हैं

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की साझेदारी किसी प्रकार की चैरिटी नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के हितों पर आधारित है।

उन्होंने कहा:

“मैं यहां सोशल वर्क या चैरिटी करने नहीं आया हूं। मैं यहां इसलिए हूं क्योंकि यह हमारे देश के हित में है।”


 

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है।

दोनों देशों के बीच मुख्य व्यापारिक क्षेत्र हैं:

  • सूचना प्रौद्योगिकी

  • दवाइयां

  • रक्षा उपकरण

  • ऊर्जा

  • कृषि उत्पाद

अमेरिका भारत का एक बड़ा निर्यात बाजार है। वहीं भारत भी अमेरिकी कंपनियों के लिए तेजी से बढ़ता हुआ बाजार बन चुका है।

 


 

टैरिफ विवाद और व्यापारिक तनाव

हालांकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हैं, लेकिन कई बार टैरिफ और व्यापारिक नियमों को लेकर विवाद भी हुए हैं

अमेरिका ने पहले भारत पर कुछ उत्पादों पर टैरिफ लगाए थे। इसके जवाब में भारत ने भी कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिया था।

हाल के महीनों में दोनों देशों ने इन विवादों को सुलझाने के लिए अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर बातचीत की है।

अब उम्मीद है कि नया समझौता इन समस्याओं को काफी हद तक खत्म कर सकता है।

 


 

डिफेंस और स्ट्रैटेजिक सहयोग

रायसीना डायलॉग के दौरान केवल व्यापार ही नहीं बल्कि कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

इनमें शामिल हैं:

  • रक्षा सहयोग

  • क्रिटिकल मिनरल्स

  • ऊर्जा सुरक्षा

  • काउंटर-नारकोटिक्स

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध पिछले दशक में काफी मजबूत हुए हैं।

भारत अमेरिका से कई उन्नत रक्षा उपकरण खरीद चुका है और दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करते हैं।

 


 

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग

लैंडाउ ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के लिए एक बेहतर ऊर्जा स्रोत बन सकता है।

खासतौर पर उस स्थिति में जब Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में तनाव या बाधा आती है।

अमेरिका दुनिया के बड़े ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है और वह भारत को तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ा सकता है।

 


 

वैश्विक राजनीति में भारत-अमेरिका साझेदारी

आज के समय में भारत और अमेरिका की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है।

यह साझेदारी कई क्षेत्रों में फैल चुकी है:

  • इंडो-पैसिफिक रणनीति

  • टेक्नोलॉजी सहयोग

  • साइबर सुरक्षा

  • आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain)

चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भी भारत और अमेरिका के बीच सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।

 


 

चीन का संदर्भ क्यों महत्वपूर्ण है

लैंडाउ द्वारा चीन का जिक्र करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

पिछले दो दशकों में चीन ने वैश्विक व्यापार में जबरदस्त वृद्धि की है और कई क्षेत्रों में अमेरिका को कड़ी चुनौती दी है।

अमेरिका अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी नए व्यापारिक समझौते में उसकी अर्थव्यवस्था और उद्योगों को नुकसान न हो

इसलिए भारत के साथ समझौते में अमेरिका अधिक सावधानी बरत रहा है।

 


 

भारत के लिए अवसर और चुनौतियां

भारत के लिए यह व्यापारिक समझौता कई बड़े अवसर लेकर आ सकता है।

संभावित लाभ:

  • निर्यात में वृद्धि

  • निवेश में बढ़ोतरी

  • नई तकनीक का हस्तांतरण

  • रोजगार के नए अवसर

लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी होंगी:

  • घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा

  • बाजार में विदेशी कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति

  • व्यापारिक संतुलन बनाए रखना


 

भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापारिक समझौता 21वीं सदी के वैश्विक आर्थिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है

अगर यह समझौता सफल होता है तो:

  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी

  • एशिया में आर्थिक संतुलन बदलेगा

  • भारत की वैश्विक भूमिका और मजबूत होगी

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित 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नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

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1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा वॉट्सएप:सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट होगा

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा।   समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?   1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।     2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।     3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है।     4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।     5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।     ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी…   1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग     सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है।     2. BSNL अफसर का मामला     हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है।     नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग?     सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

नॉट आउट @100' का आगाज़, CM मोहन ने शुरू किया 100 घंटे का ऐतिहासिक क्रिकेट महोत्सव

Madhya Pradesh News: भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 का शुभारंभ किया, जिसमें 25 से अधिक राज्यों के खिलाड़ी 100 घंटे की प्रतियोगिता में भाग लेंगे.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं. दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है. प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है. समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं.   सीएम मोहन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है. उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है. इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है. प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है.    100 घंटे क्रिकेट: अद्भुत और गर्व का अवसर   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया. पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा. इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है.   उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी. उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है. यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है.   दिव्यांग बेटियों की इच्छाशक्ति को सराहा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं.  

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हम भारत के साथ चीन वाली गलती ट्रेड डील पर ट्रंप के करीबी क्रिस्टोफर का बड़ा बयान, 'अमेरिका फर्स्ट' का छेड़ा राग

  नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान अमेरिका की ओर से एक बड़ा और स्पष्ट संदेश सामने आया है। अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडाउ ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर अहम बयान देते हुए कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक समझौते में चीन के साथ 20 साल पहले हुई गलती को नहीं दोहराएगा।   यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच बाइलेटरल ट्रेड डील (Bilateral Trade Deal) को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से बातचीत चल रही है। लैंडाउ ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका भारत के साथ मजबूत साझेदारी चाहता है, लेकिन यह साझेदारी संतुलित और पारस्परिक हितों पर आधारित होगी।   इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राजनीति के गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।     रायसीना डायलॉग क्या है और इसका महत्व   रायसीना डायलॉग भारत का सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल और स्ट्रैटेजिक कॉन्फ्रेंस माना जाता है। इसका आयोजन हर साल नई दिल्ली में किया जाता है।   इस मंच पर दुनिया के कई बड़े नेता, राजनयिक, रणनीतिक विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल होते हैं। यहां वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और व्यापार से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होती है।   2026 के रायसीना डायलॉग में अमेरिका, यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के कई बड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अमेरिका की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व क्रिस्टोफर लैंडाउ कर रहे थे।     भारत-अमेरिका ट्रेड डील: फिनिश लाइन के करीब   क्रिस्टोफर लैंडाउ ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील अब “फिनिश लाइन” के करीब पहुंच चुकी है। उनके अनुसार यह समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने कहा: “हम इस ट्रेड डील को लेकर बहुत उत्साहित हैं। यह अब लगभग अंतिम चरण में है और इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।” भारत और अमेरिका पहले से ही एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और यह समझौता इस रिश्ते को और मजबूत कर सकता है।     चीन के साथ अमेरिका की पुरानी गलती   लैंडाउ ने अपने बयान में चीन का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लगभग 20 साल पहले अमेरिका ने चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अपने बाजार खोल दिए थे। उस समय अमेरिका को उम्मीद थी कि इससे चीन की अर्थव्यवस्था विकसित होगी और दोनों देशों को फायदा होगा। लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। चीन ने कई क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की और धीरे-धीरे अमेरिका के उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने लगी। लैंडाउ ने कहा: “हम भारत के साथ वही गलती नहीं करेंगे जो हमने चीन के साथ 20 साल पहले की थी।” इस बयान का मतलब यह है कि अमेरिका अब किसी भी व्यापारिक समझौते में अपने राष्ट्रीय हितों को पहले स्थान पर रखेगा।     “अमेरिका फर्स्ट” नीति का असर   लैंडाउ ने अपने बयान में अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का भी जिक्र किया। यह नीति अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की विदेश और व्यापार नीति का मुख्य आधार रही है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य है: अमेरिकी उद्योगों को मजबूत करना घरेलू रोजगार बढ़ाना व्यापार घाटे को कम करना अंतरराष्ट्रीय समझौतों में अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देना लैंडाउ ने स्पष्ट किया कि “अमेरिका फर्स्ट” का मतलब “अमेरिका अकेला” नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों के साथ सहयोग करेगा, लेकिन केवल उन समझौतों में जहां दोनों देशों के हित सुरक्षित हों।     भारत के लिए क्या मायने रखता है यह बयान लैंडाउ के बयान के कई महत्वपूर्ण संकेत हैं। पहला संकेत यह है कि अमेरिका भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार मानता है। दूसरा संकेत यह है कि अमेरिका चाहता है कि व्यापारिक समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभदायक हो। भारत के लिए यह मौका है कि वह अपनी बढ़ती आर्थिक ताकत और बाजार क्षमता का इस्तेमाल करके अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक शर्तें तय करे।     भारत का बढ़ता वैश्विक महत्व लैंडाउ ने भारत की बढ़ती शक्ति और महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत का प्रभाव तेजी से बढ़ेगा क्योंकि: भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है इसकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र मजबूत हो रहे हैं उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की साझेदारी किसी प्रकार की चैरिटी नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के हितों पर आधारित है। उन्होंने कहा: “मैं यहां सोशल वर्क या चैरिटी करने नहीं आया हूं। मैं यहां इसलिए हूं क्योंकि यह हमारे देश के हित में है।”   भारत-अमेरिका व्यापार संबंध भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच मुख्य व्यापारिक क्षेत्र हैं: सूचना प्रौद्योगिकी दवाइयां रक्षा उपकरण ऊर्जा कृषि उत्पाद अमेरिका भारत का एक बड़ा निर्यात बाजार है। वहीं भारत भी अमेरिकी कंपनियों के लिए तेजी से बढ़ता हुआ बाजार बन चुका है।     टैरिफ विवाद और व्यापारिक तनाव हालांकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हैं, लेकिन कई बार टैरिफ और व्यापारिक नियमों को लेकर विवाद भी हुए हैं। अमेरिका ने पहले भारत पर कुछ उत्पादों पर टैरिफ लगाए थे। इसके जवाब में भारत ने भी कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिया था। हाल के महीनों में दोनों देशों ने इन विवादों को सुलझाने के लिए अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर बातचीत की है। अब उम्मीद है कि नया समझौता इन समस्याओं को काफी हद तक खत्म कर सकता है।     डिफेंस और स्ट्रैटेजिक सहयोग रायसीना डायलॉग के दौरान केवल व्यापार ही नहीं बल्कि कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इनमें शामिल हैं: रक्षा सहयोग क्रिटिकल मिनरल्स ऊर्जा सुरक्षा काउंटर-नारकोटिक्स भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध पिछले दशक में काफी मजबूत हुए हैं। भारत अमेरिका से कई उन्नत रक्षा उपकरण खरीद चुका है और दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करते हैं।     ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लैंडाउ ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के लिए एक बेहतर ऊर्जा स्रोत बन सकता है। खासतौर पर उस स्थिति में जब Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में तनाव या बाधा आती है। अमेरिका दुनिया के बड़े ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है और वह भारत को तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ा सकता है।     वैश्विक राजनीति में भारत-अमेरिका साझेदारी आज के समय में भारत और अमेरिका की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। यह साझेदारी कई क्षेत्रों में फैल चुकी है: इंडो-पैसिफिक रणनीति टेक्नोलॉजी सहयोग साइबर सुरक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भी भारत और अमेरिका के बीच सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।     चीन का संदर्भ क्यों महत्वपूर्ण है लैंडाउ द्वारा चीन का जिक्र करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। पिछले दो दशकों में चीन ने वैश्विक व्यापार में जबरदस्त वृद्धि की है और कई क्षेत्रों में अमेरिका को कड़ी चुनौती दी है। अमेरिका अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी नए व्यापारिक समझौते में उसकी अर्थव्यवस्था और उद्योगों को नुकसान न हो। इसलिए भारत के साथ समझौते में अमेरिका अधिक सावधानी बरत रहा है।     भारत के लिए अवसर और चुनौतियां भारत के लिए यह व्यापारिक समझौता कई बड़े अवसर लेकर आ सकता है। संभावित लाभ: निर्यात में वृद्धि निवेश में बढ़ोतरी नई तकनीक का हस्तांतरण रोजगार के नए अवसर लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी होंगी: घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बाजार में विदेशी कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति व्यापारिक संतुलन बनाए रखना   भविष्य की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापारिक समझौता 21वीं सदी के वैश्विक आर्थिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अगर यह समझौता सफल होता है तो: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी एशिया में आर्थिक संतुलन बदलेगा भारत की वैश्विक भूमिका और मजबूत होगी

Metroheadlines मार्च 6, 2026 0

अमेरिका भारत के पोर्ट्स से ईरान पर दाग रहा मिसाइलें...?', दावे पर विदेश मंत्रालय ने बता दिया क्या है सच

दिल्ली में गर्मी धीरे-धीरे बढ़ रही है. सोमवार को अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक है. साफ आसमान और धूप के चलते आने वाले दिनों में तापमान में 2–3 डिग्री की और बढ़ोतरी हो सकती है

अमेरिका-इजरायल के ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए तेहरान की दूसरी और तीसरी लीडरशिप के खात्मे का भी दावा किया है.

Israel Iran War के बाद विरोध प्रदर्शन तेज, कश्मीर में लगीं कईं पाबंदियां, स्कूल और यूनिवर्सिटी बंद

Israel Iran War के बाद विरोध प्रदर्शन तेज, कश्मीर में लगीं कईं पाबंदियां, स्कूल और यूनिवर्सिटी बंद       Strike on Iran: इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद जम्मू और कश्मीर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. इसके बाद कश्मीर में कई पाबंदियां लगीं हैं.                                                                       खामेनेई की मौत पर श्रीनगर में शिया मुसलमानों ने शोक जताया     कश्मीर में सोमवार को अधिकारियों ने उन इलाकों में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे.ईरान पर इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के दौरान शनिवार को तेहरान में एक हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी. ईरानी सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है.अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक स्थित घंटाघर को चारों ओर अवरोधक लगाकर बंद कर दिया गया है.   उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जुटने से रोकने के लिए पूरे शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया है.  एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया आबादी है. खामेनेई के मौत के खिलाफ लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखे गए. प्रदर्शनकारियों को छाती पीटकर मातम मनाते और अमेरिका व इजराइल विरोधी नारे लगाते देखा गया.  अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर ये पाबंदियां लगाई गई हैं.   Iran Protest: कटीले तार और अवरोधक लगाए गए   उन्होंने बताया कि महत्वपूर्ण चौराहों पर कटीले तार और अवरोधक लगाए गए हैं. घाटी के अन्य जिलों के शिया बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं.  ये पाबंदियां मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक द्वारा एक दिवसीय बंद के आह्वान की पृष्ठभूमि में आई हैं. मीरवाइज ने कहा, 'हम लोगों से इसे एकता, गरिमा और पूर्ण शांति के साथ मनाने का आग्रह करते हैं.'   एमएमयू के बंद के आह्वान को विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है.मुफ्ती ने कहा, 'ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक के बंद के आह्वान को हम अपना पूर्ण समर्थन देते हैं. यह शोक का दिन है जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय पूरी मुस्लिम उम्माह और सच्चाई के साथ खड़े सभी लोगों को आहत करता है.'अधिकारियों ने छात्रों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर निजी स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों को भी दो दिन के लिए बंद कर दिया है.   

Metroheadlines मार्च 2, 2026 0

सड़क पर तड़पते युवक को देख कृषि मंत्री शिवराज ने रुकवा दिया काफिला, खुद की गाड़ी से पहुंचवाया अस्पताल

UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

नॉट आउट @100' का आगाज़, CM मोहन ने शुरू किया 100 घंटे का ऐतिहासिक क्रिकेट महोत्सव

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