Inflation in India: पश्चिमी एशिया तनाव और ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी से वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ी, जिससे ऊर्जा संकट और भारत समेत दुनिया में महंगाई का खतरा गहराया Iran War Impact on India: ईरान संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर खतरा, पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है और इसका असर अब भारत तक साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने वैश्विक बाजारों में बेचैनी पैदा कर दी है। खास तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिए गए संकेतों ने ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट गहराता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक सब कुछ महंगा हो सकता है। ऐसे में आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर किसी भी कारण से यह मार्ग बंद होता है या यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की वैश्विक सप्लाई बाधित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, उन पर इसका असर ज्यादा होगा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। देश में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। अगर सप्लाई बाधित होती है तो भारत को महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और एविएशन फ्यूल की कीमतों पर पड़ेगा। तेल महंगा होने का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से हर सामान की कीमत प्रभावित होगी। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी इस संभावित संकट पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो यह 1970 के दशक के तेल संकट जैसा बड़ा झटका साबित हो सकता है। उस दौर में तेल संकट के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं हिल गई थीं। अब अगर वैसा हालात बनते हैं तो भारत, चीन और रूस जैसे बड़े आयातक देशों को सबसे ज्यादा मुश्किल झेलनी पड़ सकती है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। ट्रक, बस, टैक्सी और मालवाहक वाहनों की लागत बढ़ती है। इससे फल-सब्जी, दूध, अनाज, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरत के सामान की ढुलाई महंगी हो जाती है। जब ढुलाई महंगी होती है तो दुकानों तक पहुंचने वाले सामान की कीमतें बढ़ जाती हैं। इसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है। अगर तेल संकट गहराता है तो सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा। पहले से महंगाई झेल रहे परिवारों के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल हो सकता है। स्कूल फीस, बिजली बिल, किराया, परिवहन खर्च और खाने-पीने का खर्च एक साथ बढ़ सकता है। यही वजह है कि वैश्विक तनाव की खबरें सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ जाती हैं। सीटीआई के महासचिव रमेश आहूजा और गुरमीत अरोड़ा के अनुसार भारत में मार्च के दौरान खुदरा महंगाई दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। हालांकि यह आंकड़ा नियंत्रण में माना गया, लेकिन तेल संकट की स्थिति में इसमें तेजी से उछाल आ सकता है। पान और तंबाकू, फूड और बेवरेजेज, कपड़े, हाउसिंग, बिजली-पानी और रेस्टोरेंट सेवाओं जैसी श्रेणियों में पहले से कीमतें बढ़ रही हैं। अगर ईंधन महंगा होता है तो इन सभी क्षेत्रों में और तेजी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज मार्ग बंद होता है तो भारत में महंगाई दर 4 प्रतिशत के पार जा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक के लिए भी ऐसी स्थिति चुनौतीपूर्ण होगी क्योंकि महंगाई बढ़ने पर ब्याज दरों को लेकर फैसले मुश्किल हो जाते हैं। दूसरी ओर सरकार पर टैक्स घटाने या सब्सिडी देने का दबाव बढ़ सकता है ताकि जनता को राहत दी जा सके। भारत सरकार के पास रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल आपातकालीन हालात में किया जा सकता है। इसके अलावा भारत रूस, अमेरिका और अन्य देशों से भी तेल खरीद बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन अगर वैश्विक संकट लंबा चलता है तो वैकल्पिक सप्लाई भी महंगी पड़ सकती है। इसलिए संकट का असर पूरी तरह टालना आसान नहीं होगा। इस तनाव का असर शेयर बाजार और रुपये पर भी पड़ सकता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है तो भारत का आयात बिल बढ़ता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव बन सकता है। रुपया कमजोर होने से आयातित सामान और महंगा हो जाता है। यानी असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में महसूस होता है। आने वाले दिनों में भारत की नजर पश्चिम एशिया के हालात, अमेरिकी नीति और समुद्री व्यापार मार्गों की स्थिति पर रहेगी। अगर तनाव कम होता है तो राहत मिल सकती है, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो आम आदमी को महंगाई के नए दौर के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। फिलहाल यही कहा जा सकता है कि ईरान संकट सिर्फ युद्ध की खबर नहीं है, बल्कि यह भारत की जेब, बाजार और अर्थव्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
Gold Silver Rate Today, 10 April 2026: सोने-चांदी की कीमतों में शुक्रवार को गिरावट देखने को मिल रही है. MCX पर गोल्ड और सिल्वर दोनों कमजोर रहे और बाजार में हल्की नरमी का रुख बना हुआ है. Gold Silver Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में शुक्रवार, 10 अप्रैल को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. कारोबार के शुरूआत में सोने-चांदी लुढ़क गए थे. खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा करीब 650 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था. एमसीएक्स पर गोल्ड वायदा 1,52,685 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,53,434 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था. सुबह करीब 9:55 बजे, गोल्ड वायदा 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,52,783 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,52,985 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं आज आपके शहर में इन बहुमूल्य धातुओं को कीमत क्या चल रही है. चांदी की कीमत (Silver Price Today) एमसीएक्स पर 5 मई 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 0.53 प्रतिशत या 1,300 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,42,515 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,42,954 रुपये था. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी आज 2,600 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 26,000 रुपये देने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,650 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) (Gold Price in Delhi) 24 कैरेट - 1,51,620 रुपए 22 कैरेट - 1,38,990 रुपए 18 कैरेट - 1,13,750 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) (Gold Price in Mumbai) 24 कैरेट - 1,53,000 रुपए 22 कैरेट - 1,40,250 रुपए 18 कैरेट - 1,14,750 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,52,720 रुपए 22 कैरेट - 1,39,990 रुपए 18 कैरेट - 1,16,490 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,000 रुपए 22 कैरेट - 1,40,250 रुपए 18 कैरेट - 1,14,750 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,050 रुपए 22 कैरेट - 1,40,300 रुपए 18 कैरेट - 1,14,800 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,150 रुपए 22 कैरेट - 1,40,400 रुपए 18 कैरेट - 1,14,900 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,050 रुपए 22 कैरेट - 1,40,300 रुपए 18 कैरेट - 1,14,800 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,53,000 रुपए 22 कैरेट - 1,40,250 रुपए 18 कैरेट - 1,14,750 रुपए
UPI Record: मार्च 2026 में UPI ने 22.64 अरब लेन-देन के साथ 29.53 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बनाया. त्योहारों और वित्तीय वर्ष के समापन के कारण दैनिक औसत लेन-देन 73 करोड़ रहा. UPI Record: त्योहारों और फाइनेंशियल ईयर के समापन के चलते, लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के ज़रिए होने वाले लेन-देन ने मार्च 2026 में एक नया रिकॉर्ड बनाया. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने लेन-देन का कुल मूल्य 29.53 लाख करोड़ रुपये और संख्या (वॉल्यूम) 22.64 अरब तक पहुंच गई. मार्च 2026 का यह रिकॉर्ड इसलिए खास है क्योंकि UPI नेटवर्क पर औसतन 73 करोड़ दैनिक लेन-देन हुए, जो फरवरी 2026 में दर्ज 72.8 करोड़ के दैनिक औसत से ज्यादा हैं. इसी महीने में होली और ईद जैसे बड़े त्योहार भी मनाए गए थे. NPCI ने बताया कि मार्च में लेन-देन का कुल मूल्य 29.53 लाख करोड़ रुपये था, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 24.77 लाख करोड़ रुपये था. इस तरह, सालाना आधार पर लेन-देन में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. महीने-दर-महीने तुलना में फरवरी 2026 में यह आंकड़ा 26.84 लाख करोड़ रुपये था, जिससे मार्च में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. UPI का मार्च रिकॉर्ड: 22.64 अरब लेन-देन वॉल्यूम के आधार पर भी मार्च ने नया रिकॉर्ड बनाया. इस महीने कुल 22.64 अरब लेन-देन हुए, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 18.3 अरब था. फरवरी में लेन-देन की संख्या 20.39 अरब दर्ज की गई थी. PayNearby के MD और CEO आनंद कुमार बजाज ने कहा, "भारत में डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में लगातार हो रही वृद्धि यह दर्शाती है कि रियल-टाइम भुगतान प्रणालियां लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं. मार्च 2026 में 22.64 अरब लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.53 लाख करोड़ रुपये रहा. यह साबित करता है कि UPI देश की सबसे भरोसेमंद और सुविधाजनक भुगतान प्रणालियों में से एक है." डिजिटल भुगतान का है भरोसेमंद माध्यम आज भारत में होने वाले कुल डिजिटल लेन-देन में UPI की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है. इसका प्रभाव देश की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दे रहा है. वैश्विक स्तर पर लगभग 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान UPI के माध्यम से होते हैं. UPI पहले से ही सात देशों में सक्रिय है. UAE, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस. फ्रांस में इसका प्रवेश यूरोप में UPI का पहला कदम माना जा रहा है, जिससे वहां रहने या यात्रा करने वाले भारतीय आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं. UPI का संचालन NPCI, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की पहल से होता है. यह प्रणाली लोगों और व्यापारियों के बीच रियल-टाइम भुगतान की सुविधा प्रदान करती है, जिससे दैनिक लेन-देन और खरीदारी बहुत आसान हो गई है.
वैश्विक उथल-पुथल के बीच मार्च 2026 में भारतीय रुपया ऐतिहासिक रूप से कमजोर हुआ है, जबकि अफगानी अफगानी ने मजबूती दिखाई है. जानें रुपए में गिरावट के क्या कारण हैं. पढ़ें ये रिपोर्ट. India and Afghanistan Currency News: वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और ईरान-अमेरिका वॉर के बीच इस साल मार्च का महीना करेंसी के मामने में काफी हलचल भरा रहा है. भारतीय करेंसी यानी रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को पार कर 95.22 पर आ गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि मार्च महीने में अफगान अफगानी (AFN) ने भारतीय रुपए (INR) के मुकाबले अधिक मजबूती दिखाई है. एक मार्च से 31 मार्च 2026 के बीच दोनों करेंसी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चौंकाने वाली बात देखने को मिलती है. पहले बात भारतीय रुपया की ईरान युद्ध के चलते मार्च के महीने में रुपया भारी दबाव में रहा. 30 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में रुपये में 9.88% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 14 सालों में इसकी सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है. मार्च के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को भी पार कर गया है. अब बात अफगानी मुद्रा की ध्यान देने वाली बात है कि रुपए के तुलना में अफगानिस्तान की मुद्रा ने मजबूती दर्ज की है. अफगान सेंट्रल बैंक के अनुसार, 20 मार्च 2026 को समाप्त हुए उनके कैलेंडर वर्ष में अफगानी डॉलर के मुकाबले 9.93% मजबूत हुई है, हालांकि मार्च के पहले हफ्ते में इसमें मामूली 4.2% की गिरावट देखी गई थी, लेकिन महीने के अंत तक यह रुपए की तुलना में अफगानी करेंसी स्थिर रही. ताजा स्थिति क्या है? मार्च 2026 के आखिर में एक्सचेंज रेट लगभग इस तरह है- 1 भारतीय रुपया (INR) ≈ 0.67 अफगान अफगानी (AFN). इसका मतलब है कि मूल्य के मामले में 1 रुपया 1 अफगानी से छोटा है. हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अफगानिस्तान से कहीं बड़ी है, लेकिन करेंसी की 'यूनिट वैल्यू' और हालिया 'मजबूती की दर' के मामले में अफगानी फिलहाल बेहतर प्रदर्शन कर रही है. भारतीय रुपया कमजोर होने के कारण क्या है? विदेशी फंड की निकासी- विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है. कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण मार्च में कच्चे तेल की कीमतें $105 - $115 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है. अमेरिकी टैरिफ: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों यानी टैरिफ ने भी रुपए पर दबाव बनाया है. व्यापार घाटा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ऊर्जा व्यापार प्रभावित हुआ, जिससे भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर असर पड़ा है. अफगानी करेंसी मजबूत होने के कारण क्या हैं? सख्त मौद्रिक नीतियां: अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक ने बाजार में डॉलर की निरंतर आपूर्ति की और मुद्रा के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया है. डिजिटल बैंकिंग और नए नोट: पुराने नोटों को चलन से बाहर करने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से मुद्रा की मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहा है. सीमित वैश्विक व्यापार जुड़ाव: वैश्विक वित्तीय बाजारों से कम जुड़ाव होने के कारण, अफगानिस्तान वैश्विक मंदी या डॉलर की मजबूती से उस तरह प्रभावित नहीं हुआ जैसे भारत हुआ. आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 में भारतीय रुपया कमजोर हुआ है, जबकि अफगान अफगानी ने अपनी मजबूती बरकरार रखी है. जहां भारत को बाहरी झटकों (तेल और भू-राजनीति) का सामना करना पड़ा, वहीं अफगानिस्तान ने आंतरिक नियंत्रण और सीमित बाजार जोखिमों के कारण अपनी करेंसी को गिरने से बचाए रखा.
LPG, CNG, PNG rates today: देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. LPG, CNG, PNG rates today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई पर पड़ा है. जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, देश में LPG, CNG और PNG की बढ़ती कीमतों और उनकी उपलब्धता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. देश भर के यूजर्स फ्यूल की कीमतों में होने वाले बार-बार के बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि भारत एनर्जी के लिए पश्चिम एशियाई देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. भारत अपनी जरूरत का 40 परसेंट से ज्यादा क्रूड ऑयल और LPG का 90 परसेंट सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से आयात करता है. हालांकि, इस निर्भरता के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि LPG की सप्लाई स्थिर बनी हुई है और डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर किसी भी तरह की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं है. 31 मार्च को 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 913 रुपये कोलकाता 939 रुपये मुंबई 912.50 रुपये चेन्नई 928.50 रुपये बेगलुरु 915.50 रुपये हैदराबाद 965 रुपये 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आज कीमत शहर प्रति सिलेंडर कीमत दिल्ली 1,884.50 रुपये कोलकाता 1,988.50 मुंबई 1,836.50 चेन्नई 2,043.50 बेंगलुरु 1,958 हैदराबाद 2,105.50 आज 31 मार्च को CNG की कीमत शहर कीमत (प्रति किलो) दिल्ली 77.09 रुपये कोलकाता 93.50 रुपये मुंबई 80.50 रुपये चेन्नई 91.50 रुपये बेंगलुरु 88.95 रुपये हैदराबाद 97 रुपये देश के प्रमुख शहरों में आज PNG की कीमत शहर कीमत (प्रति SCM) दिल्ली 47.89 रुपये कोलकाता 50 रुपये मुंबई 50 रुपये चेन्नई 50 रुपये बेंगलुरु 52 रुपये हैदराबाद 51 रुपये सरकार की कोशिश इस बीच, केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के दबाव के बीच घरों में खाना पकाने और रोशनी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन का एड-हॉक (तदर्थ) आवंटन करने की अनुमति दे दी है. इन क्षेत्रों में वे इलाके भी शामिल हैं जिन्हें पहले 'केरोसिन-मुक्त' घोषित किया गया था. हालांकि, उपलब्ध LPG की आपूर्ति में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन सीमित स्टॉक के कारण वितरण केंद्रों पर लोग घबराकर ज़्यादा खरीदारी करने लगे हैं और लंबी कतारें लग गई हैं. LPG पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने पूरे देश में—उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित जिन्हें पहले केरोसिन-मुक्त घोषित किया गया था—खाना पकाने और रोशनी के लिए केरोसिन के अस्थायी उपयोग की अनुमति दे दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 मार्च को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें 'पेट्रोलियम अधिनियम, 1934' और 'पेट्रोलियम नियम, 2002' के तहत अस्थायी छूट की अनुमति दी गई है. इससे निर्दिष्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PDS केरोसिन के वितरण में आसानी होगी. साथ ही, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और समय पर आपूर्ति के लिए भंडारण, सुरक्षा और लाइसेंसिंग से जुड़ी शर्तें भी लागू होंगी.
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
Dhurandhar 2 Advance Booking: रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉलीवुड की सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है. हालांकि ये एक साउथ हीरो की फिल्म को मात नहीं दे पा रही है. रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अर्जुन रामपाल स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही गदर मचाया हुआ है. फिलहाल ये 18 मार्च, 2026 को होने वाले पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में गर्दा उड़ा रही है. वैसे ये फिल्म पहले ही 'स्त्री 2' के पेड प्रीव्यू शो को रिकॉर्ड को मिट्टी में मिलाकर बॉलीवुड के लिए इतिहास रच चुकी है. लेकिन आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म के साउथ के एक स्टार का रिकॉर्ड तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. धुरंधर 2 ने पेड प्रीव्यू के लिए एडवांस बुकिंग में कितनी कर ली है कमाई? धुरंधर को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली थी. ऐसे में इसकी सीक्वल धुरंधर द रिवेंज या धुरंधर 2 को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की तो पूरी उम्मीद है ही लेकिन ये फिल्म तो रिलीज से पहले ही कमाल कर रही है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर रही है. सैकनिल्क के मुताबिक, इसने पेड प्रीव्यू से अब तक 18.78 करोड़ (ब्लॉक्ड सीटों को छोड़कर) कमा लिएए हैं वहीं ब्लॉक सीटों के साथ इसका पेड प्रीव्यू के लिए प्री टिकट सेल का कलेक्शन 23.99 करोड़ पहुंच चुका है. देश भर में 8 हजार 31 शोज के लिए इसके 3 लाख 51 हजार 4 सौ 13 टिकट बिक चुके हैं. धुरंधर 2 ने स्त्री 2 को पछाड़ बनाया नया रिकॉर्ड बता दें कि कि 2024 में, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 ने इंडिया में पेड प्रीव्यू में 9.40 करोड़ की नेट कमाई करके नया माइलस्टोन हासिल किया था. लेकिन धुरंधर: द रिवेंज ने एडवांस बुकिंग में इससे कई गुना ज़्यादा सेल्स के साथ इसे धूल चटा दी है. इसकी के साथ .े बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम भी कर चुकी है. धुरंधर 2 के पवन कल्याण की OG को मात देने में छूटे पसीने इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि धुरंधर 2 ने पेड पीव्यू के लिए प्री सेल्स में बेशक धमाकेदार कमाई कर ली हैं लेकिन इसका टारगेट इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी पेड प्रीव्यू कमाई का रिकॉर्ड अपने नाम करना है. दरअसल पवन कल्याण की दे कॉल हिम OG ने 21 करोड़ के बड़े नेट कलेक्शन के साथ किसी इंडियन फिल्म के लिए अब तक के सबसे ज़्यादा पेड प्रीव्यू अपने नाम किए हुए हैं. फिलहाल रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 के लिए इस रिकॉर्ड को तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. हालांकि अभी फिल्म के पेड प्रीव्यू शो में 6 दिन बचे हैं और इसे पवन कल्याण के रिकॉर्ड को मात देने से सिर्फ 3 करोड़ के करीब पीछे है. इसलिए पूरी उम्मीद है कि धुरंधर 2 इस उपलब्धि को हासिल कर इतिहास रच सकती है.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे. बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है। नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी। नई सरकार का गठन कब होगा? राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है। इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है। क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा? अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा। संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन? नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। 2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। 3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा? अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं। विपक्ष की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। बिहार की राजनीति पर संभावित असर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं: बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था। आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।