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US Israel Iran War

7 दिनों में तबाह किए 3000 से ठिकाने अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग को लेकर किया बड़ा दावा

Metroheadlines मार्च 7, 2026 0

 

  US Israel Iran War: 7 दिनों में 3000 से ज्यादा ठिकाने तबाह, ईरान ने जारी किया

 

  अमेरिकी ठिकानों पर हमले का 

 

 

मध्य पूर्व में इस समय दुनिया का सबसे खतरनाक युद्ध चल रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ यह सैन्य संघर्ष अब लगातार और ज्यादा हिंसक होता जा रहा है। पिछले सात दिनों में जिस तेजी से हमले हुए हैं, उसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आशंका से डरा दिया है। अमेरिकी सेना और इजरायली डिफेंस फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने युद्ध शुरू होने के बाद केवल एक सप्ताह के अंदर ईरान के करीब 3000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में मिसाइल बेस, सैन्य ठिकाने, हथियार फैक्ट्रियां, नौसेना ठिकाने और कई रणनीतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह अभियान बेहद तेज गति से चलाया गया और इसे आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े एयर स्ट्राइक अभियानों में से एक माना जा रहा है।

 

इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर अचानक हमला किया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। अब यह संघर्ष केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव फैल गया है। कई अन्य देश भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने लगा है।

 


 

7 दिनों में 3000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला

 

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार युद्ध के पहले सात दिनों में लगभग 3000 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में सैकड़ों प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों और आधुनिक बमों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार पहले 36 घंटों में ही हजारों गाइडेड म्यूनिशन का इस्तेमाल किया गया था।

 

अमेरिकी सेना ने बताया कि इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता, ड्रोन सिस्टम और सैन्य कमांड संरचना को कमजोर करना था। कई एयरबेस, हथियार भंडार और नौसैनिक ठिकाने पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इजरायल ने भी कहा कि उसने ईरान के कई प्रमुख सैन्य ढांचों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है।

 


 

ईरान का पलटवार

 

हालांकि ईरान ने भी इस युद्ध में जोरदार पलटवार किया है। ईरानी सेना ने कई बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला करने का वीडियो भी जारी किया है।

 

इन हमलों में खाड़ी क्षेत्र के कई सैन्य बेस निशाने पर रहे। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी और इजरायली सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा इजरायल के कई शहरों में भी मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं।

 


 

युद्ध में बढ़ती मौतें और तबाही

 

इस युद्ध में अब तक हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार ईरान में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें बड़ी संख्या आम नागरिकों की है।

 

कई शहरों में भारी तबाही देखी जा रही है। राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में लगातार बमबारी हो रही है। कई इमारतें मलबे में बदल चुकी हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

 


 

अमेरिका का बड़ा दावा

 

अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान पीछे नहीं हटता तो हमले और तेज किए जाएंगे।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल की रणनीति ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह कमजोर करने की है ताकि भविष्य में वह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बन सके।

 


 

इजरायल की रणनीति

 

इजरायल इस युद्ध को अपनी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बता रहा है। इजरायली सेना का कहना है कि ईरान लंबे समय से इजरायल के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन नेटवर्क तैयार कर रहा था।

 

इजरायल का दावा है कि इस युद्ध में वह ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना चाहता है ताकि भविष्य में इजरायल पर हमलों का खतरा कम हो सके।

 


 

मध्य पूर्व में फैलता युद्ध

 

इस संघर्ष का असर पूरे मध्य पूर्व में दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रीय समूह और संगठन भी इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं।

कुछ जगहों पर रॉकेट और ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है और तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।

 


 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

 

इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है क्योंकि मध्य पूर्व दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है।

यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

 


 

तीसरे विश्व युद्ध की आशंका?

 

कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा तो यह बड़े वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है।

क्योंकि इस क्षेत्र में कई शक्तिशाली देशों के हित जुड़े हुए हैं और किसी भी बड़े सैन्य टकराव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है।

 


 

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

 

दुनिया के कई देशों ने इस युद्ध को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक संगठनों ने युद्ध रोकने की अपील की है।

कई देशों ने कहा है कि कूटनीतिक समाधान ही इस संकट का स्थायी रास्ता हो सकता है।

 


 

आगे क्या होगा?

 

इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह युद्ध कब और कैसे खत्म होगा।

यदि कूटनीतिक बातचीत शुरू होती है तो संभव है कि स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हो सके। लेकिन अगर सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो यह संघर्ष और ज्यादा विनाशकारी हो सकता है।

 

 

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी 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के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित 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हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा वॉट्सएप:सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट होगा

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा।   समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?   1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।     2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।     3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है।     4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।     5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।     ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी…   1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग     सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है।     2. BSNL अफसर का मामला     हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है।     नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग?     सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

नॉट आउट @100' का आगाज़, CM मोहन ने शुरू किया 100 घंटे का ऐतिहासिक क्रिकेट महोत्सव

Madhya Pradesh News: भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 का शुभारंभ किया, जिसमें 25 से अधिक राज्यों के खिलाड़ी 100 घंटे की प्रतियोगिता में भाग लेंगे.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं. दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है. प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है. समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं.   सीएम मोहन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है. उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है. इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है. प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है.    100 घंटे क्रिकेट: अद्भुत और गर्व का अवसर   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया. पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा. इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है.   उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी. उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है. यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है.   दिव्यांग बेटियों की इच्छाशक्ति को सराहा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं.  

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7 दिनों में तबाह किए 3000 से ठिकाने अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जंग को लेकर किया बड़ा दावा

    US Israel Iran War: 7 दिनों में 3000 से ज्यादा ठिकाने तबाह, ईरान ने जारी किया     अमेरिकी ठिकानों पर हमले का      मध्य पूर्व में इस समय दुनिया का सबसे खतरनाक युद्ध चल रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ यह सैन्य संघर्ष अब लगातार और ज्यादा हिंसक होता जा रहा है। पिछले सात दिनों में जिस तेजी से हमले हुए हैं, उसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आशंका से डरा दिया है। अमेरिकी सेना और इजरायली डिफेंस फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने युद्ध शुरू होने के बाद केवल एक सप्ताह के अंदर ईरान के करीब 3000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में मिसाइल बेस, सैन्य ठिकाने, हथियार फैक्ट्रियां, नौसेना ठिकाने और कई रणनीतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह अभियान बेहद तेज गति से चलाया गया और इसे आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े एयर स्ट्राइक अभियानों में से एक माना जा रहा है।   इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर अचानक हमला किया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। अब यह संघर्ष केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव फैल गया है। कई अन्य देश भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने लगा है।     7 दिनों में 3000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला   अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार युद्ध के पहले सात दिनों में लगभग 3000 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में सैकड़ों प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों और आधुनिक बमों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार पहले 36 घंटों में ही हजारों गाइडेड म्यूनिशन का इस्तेमाल किया गया था।   अमेरिकी सेना ने बताया कि इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता, ड्रोन सिस्टम और सैन्य कमांड संरचना को कमजोर करना था। कई एयरबेस, हथियार भंडार और नौसैनिक ठिकाने पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इजरायल ने भी कहा कि उसने ईरान के कई प्रमुख सैन्य ढांचों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है।     ईरान का पलटवार   हालांकि ईरान ने भी इस युद्ध में जोरदार पलटवार किया है। ईरानी सेना ने कई बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला करने का वीडियो भी जारी किया है।   इन हमलों में खाड़ी क्षेत्र के कई सैन्य बेस निशाने पर रहे। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी और इजरायली सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा इजरायल के कई शहरों में भी मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं।     युद्ध में बढ़ती मौतें और तबाही   इस युद्ध में अब तक हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार ईरान में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें बड़ी संख्या आम नागरिकों की है।   कई शहरों में भारी तबाही देखी जा रही है। राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में लगातार बमबारी हो रही है। कई इमारतें मलबे में बदल चुकी हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।     अमेरिका का बड़ा दावा   अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान पीछे नहीं हटता तो हमले और तेज किए जाएंगे।   विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल की रणनीति ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह कमजोर करने की है ताकि भविष्य में वह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बन सके।     इजरायल की रणनीति   इजरायल इस युद्ध को अपनी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बता रहा है। इजरायली सेना का कहना है कि ईरान लंबे समय से इजरायल के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन नेटवर्क तैयार कर रहा था।   इजरायल का दावा है कि इस युद्ध में वह ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना चाहता है ताकि भविष्य में इजरायल पर हमलों का खतरा कम हो सके।     मध्य पूर्व में फैलता युद्ध   इस संघर्ष का असर पूरे मध्य पूर्व में दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रीय समूह और संगठन भी इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं। कुछ जगहों पर रॉकेट और ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है और तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।     वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर   इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है क्योंकि मध्य पूर्व दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है। यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर गंभीर असर पड़ सकता है।     तीसरे विश्व युद्ध की आशंका?   कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा तो यह बड़े वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है। क्योंकि इस क्षेत्र में कई शक्तिशाली देशों के हित जुड़े हुए हैं और किसी भी बड़े सैन्य टकराव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है।     अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया   दुनिया के कई देशों ने इस युद्ध को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक संगठनों ने युद्ध रोकने की अपील की है। कई देशों ने कहा है कि कूटनीतिक समाधान ही इस संकट का स्थायी रास्ता हो सकता है।     आगे क्या होगा?   इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह युद्ध कब और कैसे खत्म होगा। यदि कूटनीतिक बातचीत शुरू होती है तो संभव है कि स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हो सके। लेकिन अगर सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो यह संघर्ष और ज्यादा विनाशकारी हो सकता है।    

Metroheadlines मार्च 7, 2026 0

हम भारत के साथ चीन वाली गलती ट्रेड डील पर ट्रंप के करीबी क्रिस्टोफर का बड़ा बयान, 'अमेरिका फर्स्ट' का छेड़ा राग

अमेरिका भारत के पोर्ट्स से ईरान पर दाग रहा मिसाइलें...?', दावे पर विदेश मंत्रालय ने बता दिया क्या है सच

दिल्ली में गर्मी धीरे-धीरे बढ़ रही है. सोमवार को अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक है. साफ आसमान और धूप के चलते आने वाले दिनों में तापमान में 2–3 डिग्री की और बढ़ोतरी हो सकती है

अमेरिका-इजरायल के ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए तेहरान की दूसरी और तीसरी लीडरशिप के खात्मे का भी दावा किया है.

  ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का दावा, ट्रंप बोले- दूसरी और तीसरी लीडरशिप भी खत्म   पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए ताबड़तोड़ हवाई हमलों के बीच यह बड़ा दावा सामने आया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शनिवार (28 फरवरी) को मौत हो गई। यह दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अभियान में ईरान की “दूसरे और तीसरे स्तर की नेतृत्व संरचना” को भी खत्म कर दिया गया है।   हालांकि ईरान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि या खंडन को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। लेकिन यदि यह दावा सच साबित होता है, तो यह न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्यपूर्व और वैश्विक राजनीति के लिए ऐतिहासिक और विस्फोटक मोड़ साबित हो सकता है।     क्या हुआ 28 फरवरी को?   अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर एक साथ हवाई हमले किए गए। बताया जा रहा है कि इन हमलों का लक्ष्य ईरान की सैन्य कमांड, परमाणु प्रतिष्ठान और शीर्ष नेतृत्व से जुड़े ठिकाने थे। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि “यह ऑपरेशन बेहद सटीक और योजनाबद्ध था” और इसका मकसद ईरान की “आक्रामक क्षमताओं” को जड़ से खत्म करना था।   ट्रंप का दावा है कि इस हमले में न केवल खामेनेई मारे गए, बल्कि वे वरिष्ठ नेता भी मारे गए जिन्हें संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था। इसी वजह से अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि ईरान की सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।     ‘दूसरे और तीसरे स्तर की लीडरशिप खत्म’ – ट्रंप का बयान   डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की “सेकंड और थर्ड टियर लीडरशिप” को भी निशाना बनाया गया और वे इस हमले में मारे गए। यह बयान कई मायनों में गंभीर है, क्योंकि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सर्वोच्च नेता के बाद भी कई शक्तिशाली धार्मिक और सैन्य पदाधिकारी होते हैं, जिनके पास व्यापक अधिकार और प्रभाव होता है।   यदि इन पदों पर बैठे लोग भी मारे गए हैं, तो इससे सत्ता के भीतर शून्य की स्थिति पैदा हो सकती है। यह आंतरिक अस्थिरता, सत्ता संघर्ष और सैन्य व धार्मिक गुटों के बीच टकराव को जन्म दे सकता है।     ईरान की राजनीतिक व्यवस्था और संभावित संकट   ईरान की शासन व्यवस्था विशिष्ट है, जहां सर्वोच्च नेता के पास सेना, न्यायपालिका, मीडिया और सुरक्षा एजेंसियों पर अंतिम अधिकार होता है। राष्ट्रपति और संसद जैसे संस्थान मौजूद जरूर हैं, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वोच्च नेता का होता है।   यदि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि होती है और उनके संभावित उत्तराधिकारी भी हमले में मारे गए हैं, तो ईरान के संवैधानिक ढांचे के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे में अस्थायी नेतृत्व परिषद या धार्मिक परिषद को आगे आना पड़ सकता है।     इजरायल और अमेरिका का रणनीतिक मकसद   इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है। अमेरिका भी ईरान पर प्रतिबंध और दबाव की नीति अपनाता रहा है। ट्रंप प्रशासन के दौरान यह टकराव और भी तीखा हो गया था।   इस संयुक्त हमले को कुछ विश्लेषक “डिसीजनल स्ट्राइक” यानी निर्णायक प्रहार के रूप में देख रहे हैं, जिसका मकसद ईरान की सैन्य और राजनीतिक क्षमता को एक झटके में कमजोर करना था। हालांकि ऐसे हमलों का जोखिम भी बड़ा होता है—वे व्यापक युद्ध को जन्म दे सकते हैं।     क्षेत्रीय और वैश्विक असर   यदि ईरान में नेतृत्व संकट गहराता है, तो इसका असर पूरे मध्यपूर्व में पड़ेगा। ईरान का प्रभाव इराक, सीरिया, लेबनान और यमन तक फैला हुआ है। इन क्षेत्रों में सक्रिय गुट और संगठनों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।   इसके अलावा, वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। तेल की कीमतों में तेज उछाल, शेयर बाजारों में गिरावट और सुरक्षित निवेश जैसे सोने की मांग में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका सीधा आर्थिक असर पड़ सकता है।     ईरान की संभावित प्रतिक्रिया   अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान की प्रतिक्रिया क्या होगी। यदि शीर्ष नेतृत्व खत्म हो गया है, तो जवाबी कार्रवाई का निर्णय कौन लेगा? क्या ईरान प्रत्यक्ष सैन्य जवाब देगा, या अपने सहयोगी गुटों के माध्यम से परोक्ष हमला करेगा?   विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी सैन्य प्रतिष्ठा और घरेलू समर्थन बनाए रखने के लिए किसी न किसी रूप में जवाब देने की कोशिश कर सकता है। हालांकि यदि नेतृत्व ढांचा कमजोर हो गया है, तो निर्णय प्रक्रिया में देरी और भ्रम की स्थिति भी बन सकती है।     उत्तराधिकारी कौन?   खामेनेई के बाद संभावित उत्तराधिकारियों को लेकर पहले भी कई अटकलें लगती रही हैं। धार्मिक प्रतिष्ठान, रिवोल्यूशनरी गार्ड और राजनीतिक नेतृत्व के बीच संतुलन साधना किसी भी नए नेता के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।   लेकिन यदि ट्रंप का दावा सही है कि संभावित उत्तराधिकारी भी मारे गए हैं, तो सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। इससे सत्ता संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है, जो देश को अस्थिर कर सकती है।     अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक बहस   किसी संप्रभु राष्ट्र के शीर्ष नेता को लक्षित कर मारने का दावा अंतरराष्ट्रीय कानून और नैतिकता की दृष्टि से भी विवादास्पद है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।   कई देश इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मान सकते हैं, जबकि कुछ देश इसे आत्मरक्षा या पूर्व-निवारक कार्रवाई के रूप में देख सकते हैं। यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।     भारत और अन्य देशों के लिए चुनौती   भारत सहित कई देशों के ईरान और इजरायल दोनों से संबंध हैं। ऐसे में संतुलन बनाए रखना कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को सावधानी से कदम उठाने होंगे।   निष्कर्ष   अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और “दूसरे-तीसरे स्तर की लीडरशिप” खत्म होने का दावा वैश्विक राजनीति में भूचाल ला सकता है। यदि यह सच है, तो ईरान में सत्ता का बड़ा शून्य पैदा होगा, जिससे आंतरिक अस्थिरता और क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ जाएगी। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान आधिकारिक रूप से क्या प्रतिक्रिया देता है, और क्या इस घटनाक्रम से व्यापक युद्ध की स्थिति बनती है या कूटनीति के जरिए हालात संभाले जाते हैं।

Metroheadlines मार्च 2, 2026 0

Israel Iran War के बाद विरोध प्रदर्शन तेज, कश्मीर में लगीं कईं पाबंदियां, स्कूल और यूनिवर्सिटी बंद

सड़क पर तड़पते युवक को देख कृषि मंत्री शिवराज ने रुकवा दिया काफिला, खुद की गाड़ी से पहुंचवाया अस्पताल

UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

नॉट आउट @100' का आगाज़, CM मोहन ने शुरू किया 100 घंटे का ऐतिहासिक क्रिकेट महोत्सव

Madhya Pradesh News: भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 का शुभारंभ किया, जिसमें 25 से अधिक राज्यों के खिलाड़ी 100 घंटे की प्रतियोगिता में भाग लेंगे.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं. दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है. प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है. समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं.   सीएम मोहन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है. उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है. इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है. प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है.    100 घंटे क्रिकेट: अद्भुत और गर्व का अवसर   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया. पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा. इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है.   उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी. उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है. यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है.   दिव्यांग बेटियों की इच्छाशक्ति को सराहा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं.  

Metroheadlines फ़रवरी 25, 2026 0

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