लाइफस्टाइल

बार-बार आ रही है जम्हाई तो हल्के में न लें, जानें किन-किन बीमारियों का खतरा?

  Yawning And Stroke Link: जम्हाई का संबंध दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने से हो सकता है.   जब ब्रेन अपने तापमान को संतुलित रखने में संघर्ष करता है, तो जम्हाई के जरिए ठंडी हवा अंदर जाती है.     Is Excessive Yawning A Sign Of Disease: बार-बार जम्हाई आना अक्सर लोग थकान या नींद की कमी से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन नई रिसर्च यह इशारा कर रही है कि हर बार जम्हाई लेना इतना सामान्य नहीं होता. कई मामलों में यह शरीर के अंदर चल रही गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कब यह आपके सेहत के बारे में बताती है और किन इशारों को इग्नोर नहीं करना चाहिए.    क्या कब होती है दिक्कत?    लगातार और बिना किसी क्लियर कारण के आने वाली जम्हाई को हल्के में नहीं लेना चाहिए. क्लीनिकल रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई लेने का संबंध कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी हो सकता है, जैसे मिर्गी , स्ट्रोक या ब्रेन में घाव. कुछ मामलों में तो  जांच में यह भी सामने आया कि बार-बार जम्हाई लेना फ्रंटल लोब सीज़र का हिस्सा हो सकता है,    ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम    इसके अलावा, जम्हाई हमारे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से भी जुड़ी होती है, जो शरीर की कई अनैच्छिक कामों, जैसे दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और पाचन को कंट्रोल करता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई आना इस सिस्टम में असंतुलन का संकेत हो सकता है. माइक्रोन्यूरोग्राफी जैसी तकनीक के जरिए यह देखा गया कि जम्हाई के दौरान मांसपेशियों से जुड़े नर्व सिग्नल्स कुछ समय के लिए दब जाते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि शरीर में पैरासिम्पेथेटिक एक्टिविटी बढ़ जाती है.   साइंटिस्ट यह भी मानते हैं कि जम्हाई का संबंध दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने से हो सकता है. जब ब्रेन अपने तापमान को संतुलित रखने में संघर्ष करता है, तो जम्हाई के जरिए ठंडी हवा अंदर जाती है और ब्लड फ्लो बढ़ता है. स्ट्रोक के कुछ मरीजों में यह पाया गया कि जहां दिमाग के तापमान को कंट्रोल करने वाले हिस्से प्रभावित होते हैं, वहां ज्यादा जम्हाई देखी जाती है. इससे संकेत मिलता है कि यह शरीर की एक तरह की कूलिंग मैकेनिज्म हो सकती है.   डोपामिन के असंतुलन का प्रभाव   इतना ही नहीं, जम्हाई का संबंध शरीर के मेटाबोलिज्म और ब्रेन के केमिकल्स से भी जुड़ा हुआ है। JAMA Network में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, जम्हाई का सीधा संबंध डोपामिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर से है, जो मूड, मोटिवेशन और मूवमेंट को नियंत्रित करता है। डोपामिन के असंतुलन की स्थिति में भी ज्यादा जम्हाई आ सकती है.   दूसरे भी होते हैं कारण   हालांकि, हर बार जम्हाई आना खतरे की घंटी नहीं है. नींद की कमी, ज्यादा काम या थकान भी इसका सामान्य कारण हो सकते हैं. लेकिन अगर जम्हाई लगातार आ रही हो, बिना वजह हो, या इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी या सोचने-समझने में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.

Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0
रात में विटामिन D लेना सही या गलत, जानें आपकी नींद और हार्मोन से इसका कितना गहरा कनेक्शन?

  Best Time To Take Vitamin D: कुछ रिसर्च यह संकेत देती हैं कि अगर विटामिन D रात में लिया जाए, तो यह शरीर में मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं.   Should You Take Vitamin D At Night: विटामिन D हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि सूजन को कंट्रोल करने और नींद के पैटर्न को संतुलित रखने में भी मदद करता है. हालांकि, कई लोग यह नहीं जानते कि इसे किस समय लेना ज्यादा फायदेमंद होता है और क्या इसका असर नींद पर पड़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से.      विटामिन डी रात में लेने का असर   हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट health की रिपोर्ट के अनुसार,  कुछ रिसर्च यह संकेत देती हैं कि अगर विटामिन D रात में लिया जाए, तो यह शरीर में मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. मेलाटोनिन वही हार्मोन है जो हमारे शरीर को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय है और यह नींद-जागने के साइकिल  सर्कैडियन रिदम को नियंत्रित करता है. चूंकि विटामिन D का मुख्य सोर्स सूर्य की रोशनी है, इसलिए माना जाता है कि दिन के समय इसका स्तर ज्यादा और रात में कम होना चाहिए. इसी वजह से कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसे दिन के समय लेना ज्यादा बेहतर हो सकता है, ताकि शरीर का नेचुरल स्लीप साइकिल प्रभावित न हो.       क्या होता है इसका असर?   विटामिन D का असर सेरोटोनिन नाम के हार्मोन पर भी पड़ता है, जो मूड और मेलाटोनिन दोनों से जुड़ा होता है. सामान्य मात्रा में विटामिन D सेरोटोनिन के निर्माण में मदद करता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा बहुत ज्यादा हो जाए तो यह उल्टा असर भी डाल सकता है और सेरोटोनिन का स्तर कम कर सकता है. हालांकि, दूसरी तरफ कुछ स्टडीज यह भी बताती हैं कि विटामिन D की कमी से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है. जिन लोगों के शरीर में इसका स्तर कम होता है, उनमें स्लीप डिसऑर्डर और कम नींद की समस्या ज्यादा देखी गई है.     इस बात का रखें ध्यान   इसका एक और पहलू यह है कि विटामिन D एक फैट-सोल्युबल विटामिन है, यानी यह शरीर में बेहतर तरीके से तब एब्जॉर्ब होता है जब इसे फैट वाली चीजों के साथ लिया जाए. इसलिए इसे नाश्ते या ऐसे भोजन के साथ लेना बेहतर माना जाता है, जिसमें हेल्दी फैट मौजूद हो.  इसे दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है, लेकिन अगर रात में लेने से नींद पर असर महसूस हो, तो इसे दिन में लेना बेहतर रहेगा. सबसे जरूरी बात यह है कि इसे नियमित रूप से लिया जाए, क्योंकि सही स्तर बनाए रखना ही इसके असली फायदे देता है.     Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Metroheadlines अप्रैल 2, 2026 0
ब्लैक मैजिक या नेगेटिव एनर्जी से जूझ रहे हैं? इन 4 तरीकों से खुद को रखें सुरक्षित!

  कई बार हम अपने आसपास काफी नेगेटिव एनर्जी महसूस करते हैं, जिस वजह से हमारा किसी भी काम में मन हीं लगता है. कई बार इसके पीछे ब्लैक मैजिक भी हो सकता है. ऐसे में काले जादू को बेअसर करने के सरल उपाय जानिए?       कई बार हम अपने आसपास काफी नेगेटिव एनर्जी महसूस करते हैं, जिस वजह से हमारा किसी भी काम में मन हीं लगता है. कई बार इसके पीछे ब्लैक मैजिक भी हो सकता है. ऐसे में काले जादू को बेअसर करने के सरल उपाय जानिए?       क्या आप भी अपने आसपास नकारात्मक ऊर्जा को महसूस करते हैं, डरावने सपने देखते हैं या कुछ अजीब-सा अनुभव करते हैं? आप सोच रहे होंगे, अरे यह तो सामान्य बात है, सबके साथ होती है. जी हां, यह आम बात है और सबके साथ होती भी है, लेकिन क्या आप जानना चाहेंगे ऐसा क्यों होता है?       यह हम सभी के साथ ईर्ष्या, बुरी नजर और दबी हुई दुर्भावना के कारण हो रहा है, जो हमारे मन, शरीर और मनोविज्ञान को प्रभावित कर रहा है. इस भावना को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे अपने आसपास घटित घटनाओं के जरिए महसूस किया जा सकता है. इस लेख के माध्यम से हम उन लोगों को बताएंगे कि, इस स्थिति से कैसे निपटें?       काले जादू से खुद को बचाने के लिए आध्यात्मिक बनें. आध्यात्म होना उबाऊ नहीं है और न ही इसका मतलब 24 घंटे पूजा करनी है, बल्कि यहां हमारा मतलब है कि, आपको आध्यात्मिकता के बारे में पढ़ना और जानना चाहिए. आपको अपनी ऊर्जा को रक्षा करने और संरक्षित करना सीखना चाहिए. आपको ध्यान, योग और श्वास तकनीक सीखनी होगी. यह अभ्यास आप किसी भी आध्यात्मिक गुरु से सीख सकते हैं या किसी जानकार से मार्गदर्शन ले सकते हैं.       हनुमान चालीसा सबसे शक्तिशाली पाठों में से एक है, जिसे कोई भी पढ़ सकता है. यदि हम कहते हैं कि, कोई भी तो इसका मतलब यह नहीं है कि केवल हिंदू ही इसका पाठ कर सकते हैं, बल्कि सभी लोग कर सकते हैं. इसका धर्म, जाति या पंथ से कोई लेना-देना नहीं है. यह हम मानवता की बात कर रहे हैं और आपको अपनी सुरक्षा के लिए इसका पाठ करना चाहिए. जिन लोगों के पास संपूर्ण हनुमान चालीसा पाठ करने का समय नहीं है, उन्हें चालीसा से जुड़ी इस पंक्ति- "संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बल बीरा" "भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे" उच्चारण करना चाहिए.       हनुमान चालीसा के बाद हम दुर्गा सप्तशती पाठ की ओर बढ़ते हैं. शास्त्रों मं काले जादू को एक शक्तिशाली आक्रमण बताया गया है और इससे निपटना काफी मुश्किल है, लेकिन आप दुर्गा माता की तरह अपने दुश्मनों पर जीत हासिल कर सकते हैं, जिन्होंने महिषासुर और अन्य राक्षसों का अंत किया था. ये पाठ हमारी सुरक्षा के लिए हैं और इन पवित्र ग्रंथों का हमें जरूर पढ़ना चाहिए   काला जादू दूर करने का एक और सरल उपाय है, वो है महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना. इस मंत्र को सुनना भी कारगर है, लेकिन हम केवल उन्हीं लोगों को इसे सुनने जकी सलाह दे रहे हैं, जिन्हें इसका उच्चारण नहीं आता. गलत तरीके से उच्चारण करने से बचें, क्योंकि इससे अच्छे परिणाम नहीं मिलेंगे. इसे 108 बार सुनें. जो लोग प्रतिदिन 108 बार इस मंत्र का जाप करते हैं, उनके लिए यह चमत्कारिक रूप से कारगर होता है.

Metroheadlines मार्च 31, 2026 0
75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट, जानें इससे डरने की जरूरत कितनी?

  New Covid Variant: अब एक नए कोविड वैरिएंट की खबर फिर से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए वैरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं.     New Covid Variant : ऐसा लगने लगा था कि कोरोना महामारी अब हर जगह से धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. लोग बिना डर के बाहर निकल रहे थे. लोगों का मास्क लगाना बिल्कुल बंद हो गया था और अस्पतालों में भी पहले जैसी भीड़ नहीं थी, लेकिन अब एक नए कोविड वैरिएंट की खबर फिर से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है.   रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए वैरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं. यह वही हिस्सा होता है जिससे वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैरिएंट हमारी इम्युनिटी को कुछ हद तक धोखा भी दे सकता है और इसके स्पाइक प्रोटीन वायरस को हमारे शरीर में घुसने में मदद करता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है और इससे डरने की जरूरत कितनी है.    75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है? यह नया कोरोना वैरिएंट पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था. इसमें बहुत ज्यादा म्यूटेशन हैं. यह पहले के वैरिएंट (जैसे ओमिक्रॉन) से अलग है. यह शरीर की इम्युनिटी से कुछ हद तक बच सकता है. इसका मतलब यह है कि अगर आपने वैक्सीन लगवाई हो या पहले कोरोना हो चुका हो, फिर भी आपको दोबारा संक्रमण हो सकता है. अब वायरल थोड़ा बदल गया है इसलिए शरीर उसे तुरंत पहचान नहीं पाता है और इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.    इस नए वैरिएंट से डरने की जरूरत कितनी है? पिछले कुछ सालों में बहुत से लोगों में हाइब्रिड इम्युनिटी बन चुकी है. विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन और पहले हुए संक्रमण दोनों का असर मिलकर शरीर को कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं. इसके अलावा अब इलाज के तरीके पहले से बेहतर हैं, हॉस्पिटल ज्यादा तैयार हैं और टेस्टिंग दवाएं भी आसानी से उपलब्ध हैं. इसलिए अगर मामलों में बढ़ोतरी होती है तो उसका असर पहले जितना खतरनाक होने की संभावना कम है. वहीं ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण हल्के या मीडियम ही देखे जा सकते हैं. बुखार, खांसी, थकान, शरीर में दर्द और हल्की कमजोरी जैसे लक्षण सामने आते हैं. ज्यादातर लोग बिना हॉस्पिटल जाए, घर पर आराम और सामान्य इलाज से ठीक हो सकते हैं.    किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए? हर किसी के लिए जोखिम एक जैसा नहीं होता है. कुछ लोगों को अभी भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. इसमें बुजुर्ग, पहले से किसी बीमारी (जैसे डायबिटीज या दिल की बीमारी) से पीड़ित लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग शामिल हैं. इन लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना अब एंडेमिक हो चुका है, यानी यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा बल्कि फ्लू की तरह समय-समय पर आता रहेगा. कभी इसके मामले बढ़ेंगे, तो कभी कम हो जाएंगे.    क्या सावधानियां रखें? वैक्सीन और अन्य सावधानियां आज भी कोविड से बचाव के सबसे जरूरी हैं. बूस्टर डोज लेना शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखता है और गंभीर बीमारी होने के जोखिम को कम करता है. इसके अलावा, अगर किसी में लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत टेस्ट करवाना संक्रमण को जल्दी पहचानने और फैलने से रोकने में मदद करता है. भीड़ भाड़ वाली जगहों में सावधानी रखें. मास्क पहन कर जाएं.

Metroheadlines मार्च 28, 2026 0
घर में अंगूर से कैसे बना सकते हैं किशमिश, एक किलो बनाने के लिए कितना अंगूर होना जरूरी ?

  Raisins From Grapes Process: किशमिश खाना हमारे सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. आप इसको घर पर भी तैयार कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसके लिए क्या करना होगा.   How Much Grapes Needed For 1 Kg Raisins: क्या आप जानते हैं कि घर पर ही अंगूर से ताजी और स्वादिष्ट किशमिश बनाई जा सकती है? एक बार इसे बनाने के बाद आपको बाजार की किशमिश फीकी लग सकती है. यह न सिर्फ सस्ती पड़ती है, बल्कि ज्यादा ताजी, मुलायम और जूसी भी होती है. अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए सिर्फ एक ही चीज की जरूरत होती है अच्छे और मीठे अंगूर. चलिए आपको बताते हैं कि घर पर अंगूर से किशमिश कैसे बना सकते हैं आप.    कैसे किशमिश बना सकते हैं आप?   सबसे पहले सवाल यही आता है कि एक किलो किशमिश बनाने के लिए कितना अंगूर चाहिए. आम तौर पर 1 किलो ताजे अंगूर से करीब आधा किलो यानी 500 ग्राम किशमिश तैयार होती है. यानी जितना वजन सूखने के बाद कम होता है, उतना ही पानी उसमें से निकल जाता है. किशमिश बनाने के लिए हमेशा पतले छिलके वाले, मीठे और पके हुए अंगूर चुनें. गोल आकार वाले अंगूर से बनी किशमिश ज्यादा सॉफ्ट बनती है. आप हरे या लाल, दोनों तरह के अंगूर इस्तेमाल कर सकते हैं.   क्या होती है बनाने की प्रक्रिया? सबसे पहले अंगूर को डंठल से अलग करके अच्छे से धो लें. फिर एक बर्तन में पानी गर्म करें और जब पानी हल्का उबलने लगे तो उसमें अंगूर डाल दें. 3-4 मिनट तक पकाएं, जब तक अंगूर ऊपर तैरने न लगें. ध्यान रखें कि ज्यादा देर तक न पकाएं, वरना उनका टेक्सचर खराब हो सकता है.   इसके बाद अंगूर को छानकर थोड़ा ठंडा होने दें. अब इन्हें सुखाने की बारी आती है. किसी सूती कपड़े या ट्रे पर अंगूर को एक-एक करके फैलाएं, ताकि वे आपस में चिपके नहीं. फिर इन्हें सीधी धूप में सुखाएं. आमतौर पर तेज धूप में इन्हें सूखने में 1 से 2 दिन लगते हैं. बीच-बीच में इन्हें पलटते रहें, ताकि हर तरफ से बराबर सूख जाएं. जब अंगूर पूरी तरह सूख जाएं लेकिन हल्के सॉफ्ट रहें, तब आपकी किशमिश तैयार है. अगर इनमें नमी रह गई, तो वे खराब हो सकती हैं, इसलिए पूरी तरह सूखना जरूरी है.    कैसे कर सकते हैं स्टोर?   तैयार किशमिश को साफ कांच के जार में भरकर सामान्य तापमान पर स्टोर करें. यह सालभर तक इस्तेमाल की जा सकती है. ध्यान रखें कि किशमिश सेहत के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन इसमें कैलोरी ज्यादा होती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही सेवन करें.  

Metroheadlines मार्च 25, 2026 0
Home Tipsघर में बार-बार लग जाता है मकड़ी का जाला, ये ट्रिक आएगी काम ?

  आपके घर में बार-बार मकड़ी के जाले लग जाते हैं तो आप कुछ आसान और असरदार घरेलू उपाय की मदद से आप मकड़ियों को दूर रख सकते हैं और अपने घर को हमेशा साफ और हेल्दी बनाए रख सकते हैं.   घर मे सबको स्वस्थ रखने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना बहुत जरूरी है. इसके लिए हम में से कई लोग अपने घरों में झाड़ू-पोंछा नियमित रूप से लगाते हैं. हालांकि, छत या सीलिंग की रोजाना सफाई नहीं कर पाती, जिसकी वजह से मकड़ी का जाला आपके घर के लुक को बिगाड़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए  भी फायदेमंद नहीं माना जाता है. इतना ही नही, वास्तु के मुताबिक भी मकड़ी का जाला शुभ भी नही माना जाता है.   सबसे ज्यादा दिक्कत तो तब होती है जब इन जालों को साफ करने के बाद भी कुछ दिनों के बाद ये दोबारा से उसी जगह पर नजर आते हैं. इस बीच कुछ ऐसे नुस्खे हैं, जिन्हें इस्तेमाल करते ही फिर कभी नहीं लगेगा घर के किसी भी कोने में मकड़ी का जाला, आइए जानते हैं.     मकड़ी के जाले हटाने के 5 रामबाण ट्रिक्स   पुदीने के तेल का स्प्रे: पुदीने के तेल का स्प्रे मकड़ी के जालों से छुटकारा पाने का एक बेहद कारगर प्राकृतिक उपाय है. पुदीने की तेज गंध मकड़ियों को पसंद नहीं होती, जिससे वे भाग जाती हैं और दोबारा नहीं आतीं.    सिरका और पानी: सिरका और पानी का मिश्रण मकड़ियों को घर से दूर भगाने का एक बहुत ही असरदार, सस्ता और प्राकृतिक तरीका माना जाता है. सिरके में मौजूद एसिडिक एसिड की तेज गंध मकड़ियों को नापसंद होती है और यह उनके लिए एक प्राकृतिक रिपेलेंट का काम करती है. आधे कप सफेद सिरके में आधा कप पानी मिलाकर स्प्रे बोतल में भरकर, जाले वाले स्थानों पर छिड़काव कर दें.    नींबू या संतरे के छिलके: मकड़ी के जालों से छुटकारा पाने के लिए नींबू या संतरे के छिलके भी एक बहुत ही कारगर और प्राकृतिक उपाय भी माना जाता है. इसको खिड़कियों या दरवाजों के पास रख दें, जहां मकड़ियां ज्यादा जाले बनाती है, जिसकी तीखी गंध मकड़ियों को पसंद नहीं आती और वो दोबारा नहींआती.   नियमित रूप से झाड़ू-पोछा: झाड़ू-पोछा न केवल साफ-सफाई के लिए, बल्कि मकड़ी के जालों को रोकने के लिए भी सबसे कारगर उपाय है, जिससे रोज़ाना सफाई से धूल जमा नहीं होती और मकड़ियों को जाला बनाने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिलता, चाहे छत के कोनों, पंखों के ऊपर और अलमारियों के पीछे क्यो न हो , ऐसी जगह पर मकड़ी जाले सबसे ज्यादा बनते हैं, इन्हें रोज साफ करें.   कपूर का इस्तेमाल: कपूर में जीवाणुरोधी और फफूंदरोधी गुण होते हैं, इसलिए इसका सौंदर्य और औषधीय उत्पादों में इसका उपयोग किया जाता है. कपूर से बने स्प्रे, बाम, क्रीम और मलहम में इसका सुखदायक और शीतल प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, घर के कोनों में कपूर जलाने से भी मकड़ी भाग जाती है और साथ ही  इसके उपयोग से मच्छर भी भाग जाते है.  

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0
चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन कब ? तारीख, मुहूर्त जानें

  Kanya Pujan 2026: नवरात्रि में कन्या पूजन के बिना माता की पूजा अधूरी मानी जाती है. अष्टमी-नवमी कन्या पूजन के लिए श्रेष्ठ है. ऐसे में 2026 में चैत्र नवरात्रि पर कन्या पूजन किस दिन होगी, मुहूर्त भी जानें.     Chaitra Navratri 2026 Kanya Pujan: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च 2026 तक मां दुर्गा की पूजा का पर्व मनाया जाएगा. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि के दिन कन्या पूजा का विधान है. कहते हैं जो लोग नवरात्रि में कन्या पूजन करते हैं माता रानी उनकी सारी परेशानियां स्वंय हर लेती हैं. इस साल चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन कब किया जाएगा, क्या है मुहूर्त.   कन्या पूजन 2026 में कब   चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च और नवमी 27 मार्च को है. देवी पुराण के अनुसार ज्योतिष में अष्टमी और नवमी तिथियों को शक्ति और ऊर्जा की प्रबल तिथियां माना जाता है इसलिए इस दिन कन्या पूजन करने से माता प्रसन्न होती हैं और रक्षा प्रदान करती हैं.   कन्या पूजन 2026 मुहूर्त   अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त  नवमी कन्या पूजन मुहूर्त सुबह 6.18 - सुबह 7.50 सुबह 6.17 - सुबह 10.54 सुबह 10.55 - दोपहर 1.59 दोपहर 12.27 - दोपहर 1.59     कन्या पूजन क्यों किया जाता है   कुमार्यः पूजिताः सम्यक् पूजिता जगदम्बिका. अर्थात - जो व्यक्ति कन्याओं की श्रद्धा से पूजा करता है, वह वास्तव में जगदंबा की ही पूजा करता है.देवी भागवत पुराण और मार्कण्य पुराण के अनुसार नवरात्रि में जो व्यक्ति कन्या पूजन करता है उसे माता रानी की कृपा प्राप्त होती है.   धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि छोटी कन्याओं में दुर्गा का वास होता है इसलिए कन्या की पूजा करना देवी की पूजा के समान माना जाता है. मान्यता है इससे नवरात्रि के 9 दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है. कन्या पूजन   आयु देवी का स्वरूप 2 वर्ष कुमारी 3 वर्ष त्रिमूर्ति 4 वर्ष कल्याणी 5 वर्ष रोहिणी 6 वर्ष कालिका 7 वर्ष चंडिका 8 वर्ष शांभवी 9 वर्ष दुर्गा 10 वर्ष सुभद्रा     कन्या पूजन विधि   कन्या पूजन से पहले घर और पूजा स्थान को साफ करें. इसके बाद मां दुर्गा की पूजा करके कन्याओं को घर बुलाएं. एक छोटे बालक (भैरव) को आमंत्रित किया जाता है. सबसे पहले घर आई कन्याओं का सम्मानपूर्वक स्वागत करें और उन्हें साफ स्थान पर बैठाएं. एक थाल या लोटे में पानी लेकर कन्याओं के पैर धोएँ। यह सम्मान और सेवा का प्रतीक माना जाता है. कन्याओं के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएँ और उनके चरणों में फूल अर्पित करें. कन्याओं को देवी का रूप मानकर लाल चुनरी या रुमाल अर्पित करें. इसके बाद कन्याओं को श्रद्धा से भोजन कराया जाता है. भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, फल, मिठाई या छोटे उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें. कन्याओं के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें और सम्मानपूर्वक विदा करें. कन्या पूजन में क्या गिफ्ट दें   लाल चुनरी या रूमाल चूड़ियाँ बिंदी और कुमकुम पेन-कॉपी या पढ़ाई का सामान फल और मिठाई नारियल और दक्षिणा छोटे खिलौने कन्या पूजन का भोग पूड़ी काले चने हलवा या खीर

Metroheadlines मार्च 13, 2026 0
Brain Fog Symptoms: 30 की उम्र में भूलने लगे हैं छोटी-छोटी बातें, कहीं आपके दिमाग पर 'ब्रेन फॉग' तो नहीं छा रहा?

  Brain Fog Symptoms: 30 की उम्र में भूलने लगे हैं छोटी-छोटी बातें, कहीं आपके दिमाग पर 'ब्रेन फॉग' तो नहीं छा रहा?   Can Stress Cause Brain Fog: उम्र का एक पड़ाव होता है, जिसमें इंसान चीजों को भूलने लगता है. हालांकि, 30 साल की उम्र में इस तरह की दिक्कत नहीं होती है. अगर आपको हो रही है, तो सावधान होने की जरूरत है.           30 की उम्र में भूलने की समस्या होने की वजह क्या?   Why Do I Feel Mentally Slow In My 30s: तीस की उम्र में याददाश्त कम होना आम बात नहीं है.  लेकिन कई लोग एक अलग तरह की परेशानी महसूस कर रहे हैं जैसे कि दिमाग में धुंध-सा छाया रहना, सोचने की रफ्तार धीमी पड़ जाना, मीटिंग में ध्यान न टिक पाना, या बात करते-करते साधारण शब्द भूल जाना. जो काम पहले आसानी से हो जाते थे, अब बोझ जैसे लगते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह किन कारणों के चलते हो रहा है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.    क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?   न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार ने TOI को बताया कि यह डिमेंशिया नहीं, बल्कि 'ब्रेन फॉग' है. इसमें मेंटल थकान, उलझन और एकाग्रता में कमी की दिक्कत का सामना करना पड़ता है.  एक्सपर्ट के अनुसार,  लगातार तनाव, नींद की कमी, पोषण की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और कुछ मामलों में कोविड के बाद की रिकवरी इसकी बड़ी वजहें हैं. यानी दिमाग जवाब नहीं दे रहा, वह संकेत दे रहा है कि उसे संभालने की जरूरत है.   क्या यह कोई बीमारी है?   ब्रेन फॉग कोई आधिकारिक बीमारी नहीं, बल्कि लक्षणों का मेल है जिसमें मानसिक सुस्ती, छोटी-छोटी बातें भूलना, मल्टीटास्किंग में दिक्कत और दोपहर तक थकावट शामिल होती है. दिमाग शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा इस्तेमाल करता है. जब नींद अधूरी हो, तनाव ज्यादा हो या पोषण कम मिले, तो सबसे पहले सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है. ब्रेन बंद नहीं होता, बस लो पावर मोड में चला जाता है.   क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?   तीस की उम्र बॉयोलॉजिकल रूप से मेंटल क्षमता का अच्छा दौर माना जाता है, लेकिन लाइफस्टाइल बदल चुकी है. काम का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश, सोशल मीडिया की तुलना और लगातार डिजिटल एक्सपोजर तनाव बढ़ाते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन बताते हैं कि लंबी कार्य अवधि और कम नींद ध्यान और वर्किंग मेमोरी को कमजोर करती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, एक तिहाई एडल्ट पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जबकि नींद के दौरान ही दिमाग खुद को रिपेयर करता है.   आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?   पोषक तत्वों की कमी भी अहम कारण हो सकती है. विटामिन B12, विटामिन D3 और आयरन की कमी से एकाग्रता और एनर्जी घटती है. इसके साथ में थकान, झुनझुनी, बाल झड़ना या पीली त्वचा जैसे संकेत मिलें तो ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है. नींद, नियमित व्यायाम और पानी की पर्याप्त मात्रा, ये तीन चीजें अक्सर नजरअंदाज होती हैं. रोज 30 मिनट हल्का-फुल्का एक्सराइज ब्लड फ्लो बढ़ाता है और ध्यान सुधारता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी फोकस बिगाड़ सकता है. संतुलित आहार और स्क्रीन से दूरी भी मददगार है. अगर भूलने की समस्या रोजमर्रा के काम या नौकरी को प्रभावित करे, या अचानक भ्रम, तेज सिरदर्द, बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

Metroheadlines मार्च 10, 2026 0
खाटू श्याम में निशान लेकर क्यों जाते हैं भक्त? जानिए इसका धार्मिक महत्व और नियम? देखें फोटो

  श्याम में निशान लेकर क्यों जाते हैं भक्त? जानिए इसका धार्मिक महत्व और नियम? देखें फोटो   Khatu Shayam Nishan Importance: खाटू श्याम आने वाले भक्त निशान लेकर 17 किमी की लंबी यात्रा तय करते हैं. जानिए आखिर ये निशान यात्रा क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्व श्यामप्रेमियों के लिए क्यों खास?   भारत में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के बीच Khatu Shyam Baba का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित Khatu Shyam Temple लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल यहां देश-विदेश से भक्त दर्शन करने आते हैं।   खाटू श्याम बाबा को “तीन बाणधारी” भी कहा जाता है। मान्यता है कि उनके दरबार में आने से भक्तों की परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।   खास बात यह है कि खाटू धाम आने वाले कई भक्तों को निशान यात्रा के महत्व के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। दरअसल, निशान यात्रा श्याम भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक है।     क्या है खाटू श्याम बाबा का निशान   खाटू श्याम बाबा के निशान को एक विशेष प्रकार का ध्वज माना जाता है। यह ध्वज श्रद्धा, आस्था और भक्ति का प्रतीक होता है। निशान आमतौर पर इन रंगों का होता है: केसरी लाल सफेद नीला इन झंडों पर अक्सर श्याम बाबा या भगवान कृष्ण की तस्वीरें बनी होती हैं। इसके अलावा झंडे पर “जय श्री श्याम” जैसे जयकारे भी लिखे होते हैं।   कुछ निशानों में: नारियल मोरपंख पवित्र धागे भी लगाए जाते हैं, जो इसे और पवित्र बनाते हैं।     निशान का धार्मिक महत्व   श्याम भक्तों के लिए निशान केवल एक झंडा नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार: निशान खाटू श्याम बाबा के बलिदान और पराक्रम का प्रतीक है। यह भक्त और भगवान के बीच प्रेम का प्रतीक माना जाता है। जो भक्त निशान लेकर पदयात्रा करता है, उसकी भक्ति और श्रद्धा विशेष रूप से स्वीकार की जाती है। कई श्रद्धालु मानते हैं कि घर में श्याम बाबा का निशान लगाने से: घर में सुख-शांति आती है नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है समृद्धि बढ़ती है   17 किलोमीटर की पदयात्रा का महत्व   खाटू श्याम बाबा की निशान यात्रा का सबसे खास हिस्सा पदयात्रा है। अक्सर श्रद्धालु Ringas से खाटू धाम तक लगभग 17 किलोमीटर पैदल चलकर निशान लेकर जाते हैं। यह यात्रा भक्तों के लिए: श्रद्धा भक्ति तपस्या का प्रतीक होती है।   भक्त इस यात्रा के दौरान: भजन गाते हैं जयकारे लगाते हैं समूह में चलते हैं जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है।     फाल्गुन मेले में बढ़ जाता है निशान यात्रा का महत्व     खाटू श्याम बाबा के मंदिर में हर साल Falgun Mela Khatu Shyam का आयोजन किया जाता है। यह मेला हिंदू कैलेंडर के फाल्गुन महीने में आयोजित होता है और इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। फाल्गुन मेले के दौरान: निशान यात्रा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है हजारों भक्त निशान लेकर पदयात्रा करते हैं मंदिर में विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं इस दौरान पूरा खाटू धाम भक्तों से भरा रहता है।     कैसे की जाती है निशान यात्रा   निशान यात्रा की एक खास परंपरा होती है। भक्त आमतौर पर: सबसे पहले श्याम बाबा का स्मरण करते हैं। फिर निशान को सिर या कंधे पर उठाते हैं। समूह में भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा करते हैं। अंत में मंदिर पहुंचकर निशान बाबा को अर्पित करते हैं। कई भक्त अपने परिवार या दोस्तों के साथ यह यात्रा करते हैं।     निशान चढ़ाने से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक मान्यता के अनुसार: जो भक्त निशान चढ़ाता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बाबा जल्दी प्रसन्न होते हैं। जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। इसी कारण हर साल लाखों श्रद्धालु यह यात्रा करते हैं।     निशान यात्रा से पहले जानने वाली जरूरी बातें   निशान यात्रा शुरू करने से पहले भक्तों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे: श्रद्धा और भक्ति के साथ यात्रा करें साफ-सुथरे कपड़े पहनें किसी का अपमान न करें यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें इन नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है।     खाटू श्याम बाबा की कथा   धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम बाबा का असली नाम बर्बरीक था। वह महाभारत काल के महान योद्धा थे और भीम के पौत्र थे। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने बर्बरीक से उनका सिर दान में मांगा था ताकि वह महाभारत युद्ध को निष्पक्ष रूप से देख सकें। बर्बरीक ने अपना सिर दान कर दिया। उनकी इस महान बलिदान भावना से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में लोग उन्हें श्याम बाबा के रूप में पूजेंगे।     खाटू श्याम मंदिर की प्रसिद्धि   राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर आज भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां हर साल: लाखों श्रद्धालु आते हैं बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं भव्य मेले लगते हैं खासतौर पर फाल्गुन महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।     निष्कर्ष   खाटू श्याम बाबा का निशान केवल एक ध्वज नहीं बल्कि श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। निशान यात्रा भक्तों के प्रेम और आस्था को दर्शाती है। जब कोई भक्त 17 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा को निशान अर्पित करता है, तो यह उसके विश्वास और समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल होती है। इसी कारण खाटू श्याम बाबा के भक्त हर साल बड़ी संख्या में यह यात्रा करते हैं और बाबा से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Metroheadlines मार्च 6, 2026 0
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सिनेमा शादी के बाद रश्मिका-विजय जीत रहे लोगों का दिल, अब तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलो को दिया ये बड़ा तोहफा

Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.                                         रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे   न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है.     तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट   दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है.   सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था     शादी की रस्में   रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था.     कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन   यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है.     विजय-रश्मिका फिल्म   प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.   

T20 World Cup Semifinal Streaming: सेमीफाइनल में होगी भारत और इंग्लैंड की टक्कर, जानें कब-कहां और कैसे देखें लाइव स्ट्रीमिंग

भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही.   IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.   भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे.   IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा?   भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं.   IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा?   यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है.   IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव?   भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे.   दोनों टीमों के स्क्वॉड   भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा.   इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड. 

इस हीरो का रिकॉर्ड तोड़ने में छूटे 'धुरंधर 2' के पसीने, पेड प्रीव्यू में मात देने से इतनी पीछे है रणवीर सिंह की फिल्म

  Dhurandhar 2 Advance Booking: रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉलीवुड की सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है. हालांकि ये एक साउथ हीरो की फिल्म को मात नहीं दे पा रही है.   रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अर्जुन रामपाल स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही गदर मचाया हुआ है. फिलहाल ये 18 मार्च, 2026 को होने वाले पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में गर्दा उड़ा रही है. वैसे ये फिल्म पहले ही 'स्त्री 2' के पेड प्रीव्यू शो को रिकॉर्ड को मिट्टी में मिलाकर बॉलीवुड के लिए इतिहास रच चुकी है. लेकिन आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म के साउथ के एक स्टार का रिकॉर्ड तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं.   धुरंधर 2 ने पेड प्रीव्यू के लिए एडवांस बुकिंग में कितनी कर ली है कमाई?   धुरंधर को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली थी. ऐसे में इसकी सीक्वल धुरंधर द रिवेंज या धुरंधर 2 को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की तो पूरी उम्मीद है ही लेकिन ये फिल्म तो रिलीज से पहले ही कमाल कर रही है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर रही है.  सैकनिल्क के मुताबिक, इसने पेड प्रीव्यू से अब तक 18.78 करोड़ (ब्लॉक्ड सीटों को छोड़कर) कमा लिएए हैं वहीं ब्लॉक सीटों के साथ इसका पेड प्रीव्यू के लिए प्री टिकट सेल का कलेक्शन 23.99 करोड़ पहुंच चुका है.  देश भर में 8 हजार 31 शोज के लिए इसके 3 लाख 51 हजार 4 सौ 13 टिकट बिक चुके हैं.    धुरंधर 2 ने स्त्री 2 को पछाड़ बनाया नया रिकॉर्ड   बता दें कि कि 2024 में, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 ने इंडिया में पेड प्रीव्यू में 9.40 करोड़ की नेट कमाई करके नया माइलस्टोन हासिल किया था. लेकिन धुरंधर: द रिवेंज ने एडवांस बुकिंग में इससे कई गुना ज़्यादा सेल्स के साथ इसे धूल चटा दी है. इसकी के साथ .े बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम भी कर चुकी है.    धुरंधर 2 के पवन कल्याण की OG को मात देने में छूटे पसीने   इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि धुरंधर 2 ने पेड पीव्यू के लिए प्री सेल्स में बेशक धमाकेदार कमाई कर ली हैं लेकिन इसका टारगेट इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी पेड प्रीव्यू कमाई का रिकॉर्ड अपने नाम करना है. दरअसल पवन कल्याण की दे कॉल हिम OG ने 21 करोड़ के बड़े नेट कलेक्शन के साथ किसी इंडियन फिल्म के लिए अब तक के सबसे ज़्यादा पेड प्रीव्यू अपने नाम किए हुए हैं. फिलहाल रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 के लिए इस रिकॉर्ड को तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. हालांकि अभी फिल्म के पेड प्रीव्यू शो में 6 दिन बचे हैं और इसे पवन कल्याण के रिकॉर्ड को मात देने से सिर्फ 3 करोड़ के करीब पीछे है. इसलिए पूरी उम्मीद है कि  धुरंधर 2 इस उपलब्धि को हासिल कर इतिहास रच सकती है.      

MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे.  Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है.   रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे   इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्‍यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे.   गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा   करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.  

बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? बड़ा अपडेट

  Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे.   बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम   बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा।   नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है।     नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।   लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है।   नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी।     नई सरकार का गठन कब होगा?   राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।   दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है।   इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है।     क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा?   अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा।   विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा।     संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन?   नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।   1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।   2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं।   3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है।     एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा?   अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं।     विपक्ष की प्रतिक्रिया   इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं।     बिहार की राजनीति पर संभावित असर   नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है।   इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं:   बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है   क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है।     बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था।     आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।  

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन: कनेक्टिविटी, पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बूस्ट

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क्या नीतीश के दिल्ली शिफ्ट के बाद जेडीयू बिहार में दबदबा बरकरार रख पाएगी?