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खाटू श्याम में निशान लेकर क्यों जाते हैं भक्त? जानिए इसका धार्मिक महत्व और नियम? देखें फोटो

Metroheadlines मार्च 6, 2026 0

 

श्याम में निशान लेकर क्यों जाते हैं भक्त? जानिए इसका धार्मिक महत्व और नियम? देखें फोटो

 

Khatu Shayam Nishan Importance: खाटू श्याम आने वाले भक्त निशान लेकर 17 किमी की लंबी यात्रा तय करते हैं. जानिए आखिर ये निशान यात्रा क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्व श्यामप्रेमियों के लिए क्यों खास?

 

भारत में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के बीच Khatu Shyam Baba का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित Khatu Shyam Temple लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल यहां देश-विदेश से भक्त दर्शन करने आते हैं।

 

खाटू श्याम बाबा को “तीन बाणधारी” भी कहा जाता है। मान्यता है कि उनके दरबार में आने से भक्तों की परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

 

खास बात यह है कि खाटू धाम आने वाले कई भक्तों को निशान यात्रा के महत्व के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। दरअसल, निशान यात्रा श्याम भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक है।

 


 

क्या है खाटू श्याम बाबा का निशान

 

खाटू श्याम बाबा के निशान को एक विशेष प्रकार का ध्वज माना जाता है। यह ध्वज श्रद्धा, आस्था और भक्ति का प्रतीक होता है।

निशान आमतौर पर इन रंगों का होता है:

  • केसरी

  • लाल

  • सफेद

  • नीला

इन झंडों पर अक्सर श्याम बाबा या भगवान कृष्ण की तस्वीरें बनी होती हैं। इसके अलावा झंडे पर “जय श्री श्याम” जैसे जयकारे भी लिखे होते हैं।

 

कुछ निशानों में:

  • नारियल

  • मोरपंख

  • पवित्र धागे

भी लगाए जाते हैं, जो इसे और पवित्र बनाते हैं।

 


 

निशान का धार्मिक महत्व

 

श्याम भक्तों के लिए निशान केवल एक झंडा नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार:

  • निशान खाटू श्याम बाबा के बलिदान और पराक्रम का प्रतीक है।

  • यह भक्त और भगवान के बीच प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

  • जो भक्त निशान लेकर पदयात्रा करता है, उसकी भक्ति और श्रद्धा विशेष रूप से स्वीकार की जाती है।

कई श्रद्धालु मानते हैं कि घर में श्याम बाबा का निशान लगाने से:

  • घर में सुख-शांति आती है

  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है

  • समृद्धि बढ़ती है


 

17 किलोमीटर की पदयात्रा का महत्व

 

खाटू श्याम बाबा की निशान यात्रा का सबसे खास हिस्सा पदयात्रा है।

अक्सर श्रद्धालु Ringas से खाटू धाम तक लगभग 17 किलोमीटर पैदल चलकर निशान लेकर जाते हैं।

यह यात्रा भक्तों के लिए:

  • श्रद्धा

  • भक्ति

  • तपस्या

का प्रतीक होती है।

 

भक्त इस यात्रा के दौरान:

  • भजन गाते हैं

  • जयकारे लगाते हैं

  • समूह में चलते हैं

जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है।

 

 

फाल्गुन मेले में बढ़ जाता है निशान यात्रा का महत्व

 

 

खाटू श्याम बाबा के मंदिर में हर साल Falgun Mela Khatu Shyam का आयोजन किया जाता है।

यह मेला हिंदू कैलेंडर के फाल्गुन महीने में आयोजित होता है और इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

फाल्गुन मेले के दौरान:

  • निशान यात्रा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है

  • हजारों भक्त निशान लेकर पदयात्रा करते हैं

  • मंदिर में विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं

इस दौरान पूरा खाटू धाम भक्तों से भरा रहता है।

 


 

कैसे की जाती है निशान यात्रा

 

निशान यात्रा की एक खास परंपरा होती है।

भक्त आमतौर पर:

  1. सबसे पहले श्याम बाबा का स्मरण करते हैं।

  2. फिर निशान को सिर या कंधे पर उठाते हैं।

  3. समूह में भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा करते हैं।

  4. अंत में मंदिर पहुंचकर निशान बाबा को अर्पित करते हैं।

कई भक्त अपने परिवार या दोस्तों के साथ यह यात्रा करते हैं।

 


 

निशान चढ़ाने से जुड़ी मान्यताएं

धार्मिक मान्यता के अनुसार:

  • जो भक्त निशान चढ़ाता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

  • बाबा जल्दी प्रसन्न होते हैं।

  • जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

इसी कारण हर साल लाखों श्रद्धालु यह यात्रा करते हैं।

 


 

निशान यात्रा से पहले जानने वाली जरूरी बातें

 

निशान यात्रा शुरू करने से पहले भक्तों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जैसे:

  • श्रद्धा और भक्ति के साथ यात्रा करें

  • साफ-सुथरे कपड़े पहनें

  • किसी का अपमान न करें

  • यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें

इन नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है।

 


 

खाटू श्याम बाबा की कथा

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम बाबा का असली नाम बर्बरीक था।

वह महाभारत काल के महान योद्धा थे और भीम के पौत्र थे।

कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने बर्बरीक से उनका सिर दान में मांगा था ताकि वह महाभारत युद्ध को निष्पक्ष रूप से देख सकें।

बर्बरीक ने अपना सिर दान कर दिया। उनकी इस महान बलिदान भावना से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में लोग उन्हें श्याम बाबा के रूप में पूजेंगे।

 


 

खाटू श्याम मंदिर की प्रसिद्धि

 

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर आज भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है।

यहां हर साल:

  • लाखों श्रद्धालु आते हैं

  • बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं

  • भव्य मेले लगते हैं

खासतौर पर फाल्गुन महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

 


 

निष्कर्ष

 

खाटू श्याम बाबा का निशान केवल एक ध्वज नहीं बल्कि श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

निशान यात्रा भक्तों के प्रेम और आस्था को दर्शाती है। जब कोई भक्त 17 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा को निशान अर्पित करता है, तो यह उसके विश्वास और समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल होती है।

इसी कारण खाटू श्याम बाबा के भक्त हर साल बड़ी संख्या में यह यात्रा करते हैं और बाबा से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा वॉट्सएप:सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट होगा

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा।   समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?   1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।     2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।     3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है।     4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।     5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।     ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी…   1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग     सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है।     2. BSNL अफसर का मामला     हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है।     नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग?     सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

नॉट आउट @100' का आगाज़, CM मोहन ने शुरू किया 100 घंटे का ऐतिहासिक क्रिकेट महोत्सव

Madhya Pradesh News: भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 का शुभारंभ किया, जिसमें 25 से अधिक राज्यों के खिलाड़ी 100 घंटे की प्रतियोगिता में भाग लेंगे.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं. दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है. प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है. समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं.   सीएम मोहन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है. उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है. इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है. प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है.    100 घंटे क्रिकेट: अद्भुत और गर्व का अवसर   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया. पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा. इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है.   उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी. उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है. यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है.   दिव्यांग बेटियों की इच्छाशक्ति को सराहा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं.  

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खाटू श्याम में निशान लेकर क्यों जाते हैं भक्त? जानिए इसका धार्मिक महत्व और नियम? देखें फोटो

  श्याम में निशान लेकर क्यों जाते हैं भक्त? जानिए इसका धार्मिक महत्व और नियम? देखें फोटो   Khatu Shayam Nishan Importance: खाटू श्याम आने वाले भक्त निशान लेकर 17 किमी की लंबी यात्रा तय करते हैं. जानिए आखिर ये निशान यात्रा क्या है और इसका आध्यात्मिक महत्व श्यामप्रेमियों के लिए क्यों खास?   भारत में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के बीच Khatu Shyam Baba का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित Khatu Shyam Temple लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल यहां देश-विदेश से भक्त दर्शन करने आते हैं।   खाटू श्याम बाबा को “तीन बाणधारी” भी कहा जाता है। मान्यता है कि उनके दरबार में आने से भक्तों की परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।   खास बात यह है कि खाटू धाम आने वाले कई भक्तों को निशान यात्रा के महत्व के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। दरअसल, निशान यात्रा श्याम भक्तों की आस्था और समर्पण का प्रतीक है।     क्या है खाटू श्याम बाबा का निशान   खाटू श्याम बाबा के निशान को एक विशेष प्रकार का ध्वज माना जाता है। यह ध्वज श्रद्धा, आस्था और भक्ति का प्रतीक होता है। निशान आमतौर पर इन रंगों का होता है: केसरी लाल सफेद नीला इन झंडों पर अक्सर श्याम बाबा या भगवान कृष्ण की तस्वीरें बनी होती हैं। इसके अलावा झंडे पर “जय श्री श्याम” जैसे जयकारे भी लिखे होते हैं।   कुछ निशानों में: नारियल मोरपंख पवित्र धागे भी लगाए जाते हैं, जो इसे और पवित्र बनाते हैं।     निशान का धार्मिक महत्व   श्याम भक्तों के लिए निशान केवल एक झंडा नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार: निशान खाटू श्याम बाबा के बलिदान और पराक्रम का प्रतीक है। यह भक्त और भगवान के बीच प्रेम का प्रतीक माना जाता है। जो भक्त निशान लेकर पदयात्रा करता है, उसकी भक्ति और श्रद्धा विशेष रूप से स्वीकार की जाती है। कई श्रद्धालु मानते हैं कि घर में श्याम बाबा का निशान लगाने से: घर में सुख-शांति आती है नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है समृद्धि बढ़ती है   17 किलोमीटर की पदयात्रा का महत्व   खाटू श्याम बाबा की निशान यात्रा का सबसे खास हिस्सा पदयात्रा है। अक्सर श्रद्धालु Ringas से खाटू धाम तक लगभग 17 किलोमीटर पैदल चलकर निशान लेकर जाते हैं। यह यात्रा भक्तों के लिए: श्रद्धा भक्ति तपस्या का प्रतीक होती है।   भक्त इस यात्रा के दौरान: भजन गाते हैं जयकारे लगाते हैं समूह में चलते हैं जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है।     फाल्गुन मेले में बढ़ जाता है निशान यात्रा का महत्व     खाटू श्याम बाबा के मंदिर में हर साल Falgun Mela Khatu Shyam का आयोजन किया जाता है। यह मेला हिंदू कैलेंडर के फाल्गुन महीने में आयोजित होता है और इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। फाल्गुन मेले के दौरान: निशान यात्रा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है हजारों भक्त निशान लेकर पदयात्रा करते हैं मंदिर में विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं इस दौरान पूरा खाटू धाम भक्तों से भरा रहता है।     कैसे की जाती है निशान यात्रा   निशान यात्रा की एक खास परंपरा होती है। भक्त आमतौर पर: सबसे पहले श्याम बाबा का स्मरण करते हैं। फिर निशान को सिर या कंधे पर उठाते हैं। समूह में भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा करते हैं। अंत में मंदिर पहुंचकर निशान बाबा को अर्पित करते हैं। कई भक्त अपने परिवार या दोस्तों के साथ यह यात्रा करते हैं।     निशान चढ़ाने से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक मान्यता के अनुसार: जो भक्त निशान चढ़ाता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बाबा जल्दी प्रसन्न होते हैं। जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। इसी कारण हर साल लाखों श्रद्धालु यह यात्रा करते हैं।     निशान यात्रा से पहले जानने वाली जरूरी बातें   निशान यात्रा शुरू करने से पहले भक्तों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे: श्रद्धा और भक्ति के साथ यात्रा करें साफ-सुथरे कपड़े पहनें किसी का अपमान न करें यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें इन नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है।     खाटू श्याम बाबा की कथा   धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम बाबा का असली नाम बर्बरीक था। वह महाभारत काल के महान योद्धा थे और भीम के पौत्र थे। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने बर्बरीक से उनका सिर दान में मांगा था ताकि वह महाभारत युद्ध को निष्पक्ष रूप से देख सकें। बर्बरीक ने अपना सिर दान कर दिया। उनकी इस महान बलिदान भावना से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में लोग उन्हें श्याम बाबा के रूप में पूजेंगे।     खाटू श्याम मंदिर की प्रसिद्धि   राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर आज भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां हर साल: लाखों श्रद्धालु आते हैं बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं भव्य मेले लगते हैं खासतौर पर फाल्गुन महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।     निष्कर्ष   खाटू श्याम बाबा का निशान केवल एक ध्वज नहीं बल्कि श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। निशान यात्रा भक्तों के प्रेम और आस्था को दर्शाती है। जब कोई भक्त 17 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा को निशान अर्पित करता है, तो यह उसके विश्वास और समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल होती है। इसी कारण खाटू श्याम बाबा के भक्त हर साल बड़ी संख्या में यह यात्रा करते हैं और बाबा से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Metroheadlines मार्च 6, 2026 0

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