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अब महीने में दो बार मिलेगी सैलरी, नया नियम लाया भारत का पड़ोसी देश, इससे क्या फायदा होगा?

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0

 

Nepal Salaries Twice a Month: नेपाल सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों के पास हर 15 दिन में पैसा आएगा, जिससे उन्हें महीने के अंत में होने वाली पैसों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.

 

नेपाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करते हुए पारंपरिक “महीने के अंत में सैलरी” देने की व्यवस्था को खत्म कर “पाक्षिक भुगतान प्रणाली” लागू करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब कर्मचारियों को हर 15 दिन में आधी-आधी सैलरी दी जाएगी, यानी महीने में दो बार वेतन मिलेगा। यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

दशकों से चली आ रही पुरानी प्रणाली में कर्मचारियों को महीने के अंत तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे अक्सर महीने के आखिरी दिनों में आर्थिक दबाव बढ़ जाता था। कई कर्मचारियों को जरूरी खर्च पूरे करने के लिए उधार लेना पड़ता था या अपनी बचत तोड़नी पड़ती थी। नई प्रणाली इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है क्योंकि अब हर दो सप्ताह में नियमित रूप से पैसे उपलब्ध रहेंगे।

 

नेपाल के वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) को बेहतर बनाना और बाजार में धन के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करना है। जब लोगों के पास नियमित अंतराल पर पैसा आता रहेगा, तो वे अपनी दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे। इससे उनकी जीवनशैली में स्थिरता आएगी और मानसिक तनाव भी कम होगा। खासकर मध्यम वर्गीय कर्मचारियों के लिए यह कदम राहत भरा साबित हो सकता है, क्योंकि उनके खर्च अक्सर महीने के बीच या अंत में अधिक बढ़ जाते हैं। हर 15 दिन में सैलरी मिलने से वे अपने खर्चों को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएंगे और अनावश्यक कर्ज लेने की जरूरत भी कम होगी।

 

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आमतौर पर देखा जाता है कि महीने की शुरुआत में बाजार में ज्यादा भीड़ और खरीदारी होती है, जबकि महीने के अंत में बाजार में मंदी आ जाती है। इस नई व्यवस्था से यह असंतुलन खत्म हो सकता है, क्योंकि अब पूरे महीने बाजार में समान रूप से मांग बनी रहेगी। इससे छोटे व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और स्थानीय व्यवसायों को फायदा होगा। नियमित अंतराल पर उपभोक्ताओं के पास पैसा होने से बिक्री में निरंतरता बनी रहेगी, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।

 

कर्मचारियों के दृष्टिकोण से देखें तो यह प्रणाली उनके बजट प्रबंधन को काफी आसान बना सकती है। उदाहरण के लिए, स्कूल फीस, बिजली बिल, किराया, राशन और अन्य जरूरी खर्चों को अब दो हिस्सों में बांटकर आसानी से संभाला जा सकता है। पहले जहां एक साथ बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती थी, अब वह बोझ दो भागों में विभाजित हो जाएगा। इससे वित्तीय योजना अधिक व्यवस्थित होगी और बचत की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके अलावा, अचानक आने वाले खर्चों से निपटना भी आसान हो जाएगा क्योंकि हर 15 दिन में आय का स्रोत उपलब्ध रहेगा।

 

यह मॉडल पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों जैसे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही इस तरह की वेतन प्रणाली अपनाई जाती है। वहां इसे “बाय-वीकली पेमेंट सिस्टम” कहा जाता है, जो कर्मचारियों के लिए अधिक सुविधाजनक माना जाता है। नेपाल द्वारा इस मॉडल को अपनाना यह दर्शाता है कि वह अपने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक बनाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में कदम उठा रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो दक्षिण एशिया के अन्य देश भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

 

हालांकि, इस नई प्रणाली के कुछ संभावित चुनौतियां भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, सरकारी विभागों को अपने अकाउंटिंग और भुगतान सिस्टम में बदलाव करना होगा, जिससे शुरुआती चरण में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों को भी अपने खर्च और बचत की आदतों में बदलाव लाना पड़ेगा, क्योंकि अब उन्हें महीने भर की योजना दो हिस्सों में बांटकर बनानी होगी। लेकिन अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो इसके फायदे चुनौतियों से कहीं ज्यादा हो सकते हैं।

 

सरकार इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असुविधा से बचा जा सके। शुरुआती दौर में कुछ विभागों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद धीरे-धीरे सभी सरकारी कर्मचारियों तक इसका विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों से फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके।

 

कुल मिलाकर, नेपाल सरकार का यह कदम एक दूरदर्शी और प्रगतिशील निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा। नियमित आय के प्रवाह से जहां एक ओर व्यक्तिगत वित्तीय स्थिरता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बेहतर होगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो यह अन्य देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है और वे भी अपने वेतन भुगतान सिस्टम में सुधार करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

 

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

  भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया।   कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   देखिए तस्वीरें…     NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया।     NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन।     विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो।     सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार   इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा।   उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है।     'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा'   सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए।   डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है।     'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों'   सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा।   आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया।     डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान   कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।   कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

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LPG गैस की अफवाहों के बीच सरकार का बड़ा बयान, ऑनलाइन बुकिंग का डेटा बताया, सप्लाई पर क्या कहा?

  LPG Booking: गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच सरकार ने खुलासा किया है कि इसकी ऑनलाइन बुकिंग्स बढ़ गई हैं. हालांकि ग्लोबली हालातों में फिलहाल खास सुधार नहीं है लेकिन फिर भी कहीं- कहीं सुधार की स्थिति है.   हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग में अचानक वृद्धि देखी गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव। इन दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार न होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर दिखाई दे रहा है।   भारत सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी को लगभग 99 प्रतिशत तक सुनिश्चित कर दिया गया है, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। इसके लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखें।   इस दौरान डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) आधारित डिलीवरी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। DAC एक सुरक्षा प्रणाली है जिसमें ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक कोड भेजा जाता है, जिसे डिलीवरी के समय सत्यापित किया जाता है। इससे फर्जी डिलीवरी या गलत वितरण की संभावना कम हो जाती है। सरकार के मुताबिक, DAC आधारित डिलीवरी अब लगभग 92 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो पारदर्शिता और दक्षता दोनों को दर्शाता है।   पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी बताया है कि कई एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स अब रविवार को भी काम कर रहे हैं, ताकि बढ़ती मांग को समय पर पूरा किया जा सके। यह कदम खासतौर पर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रभावी साबित हो रहा है, जहां मांग में तेजी से वृद्धि देखी गई है।   कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की स्थिति पर बात करें तो सरकार ने इसे भी संतुलित बनाए रखने का प्रयास किया है। मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी का आवंटन अब प्री-क्राइसिस स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसमें 10 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन सुधारात्मक कदम के रूप में शामिल किया गया है। इससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो एलपीजी पर निर्भर हैं।   23 मार्च 2026 से अब तक 5 किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री 18.45 लाख यूनिट से अधिक हो चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि छोटे और अस्थायी उपभोक्ताओं के बीच भी गैस की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा, पिछले पांच दिनों में औसतन 7,000 मीट्रिक टन से अधिक कमर्शियल एलपीजी की दैनिक बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।   इस पूरी स्थिति की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह समिति विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल एलपीजी वितरण की योजना बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें कर रही है।   दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों की मांग में भी वृद्धि देखी गई है। मार्च 2026 से अब तक 4.93 लाख से अधिक PNG कनेक्शनों का गैसीकरण किया जा चुका है। वहीं, 5.51 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने नए PNG कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। यह दर्शाता है कि लोग वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।   इसके अलावा, MYPNGD.in वेबसाइट के माध्यम से 19 अप्रैल तक लगभग 39,200 उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। यह बदलाव शहरी क्षेत्रों में अधिक देखने को मिल रहा है, जहां पाइप्ड गैस की सुविधा आसानी से उपलब्ध है और इसे अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है।   कुल मिलाकर, यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक घटनाओं का सीधा प्रभाव भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश पर पड़ता है। हालांकि, सरकार द्वारा उठाए गए त्वरित और रणनीतिक कदमों ने स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित रखा है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना, डिलीवरी सिस्टम को मजबूत करना और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना—ये सभी कदम आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।   यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव जारी रहता है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों और सप्लाई पर और प्रभाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में सरकार और उपभोक्ताओं दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।  

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0

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एयर इंडिया का सफर महंगा, डोमेस्टिक-इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जेब पर पड़ेगा भारी बोझ

  Air India Fuel Surcharge: Air India Group ने 8 अप्रैल 2026 से Fuel Surcharge में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत, पुराने Flat Surcharge को हटाकर Distance के हिसाब से नया Slab System लागू किया है.   Air India Fuel Surcharge: ग्लोबल लेवल पर जेट फ्यूल की कीमतें करीब 100 परसेंट तक उछलने के बाद एयर इंडिया ने भी अब Fuel Surcharge में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत, कंपनी  8 अप्रैल 2026 से  पुराने Flat Surcharge को हटाकर Distance के हिसाब से नया Slab System लागू करने जा रही है. घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह के रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज में बदलाव करने की कंपनी की इस घोषणा से आने वाले समय में एयर इंडिया की उड़ानों का किराया अब और महंगा होने जा रहा है. यह बदलाव अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण ग्लोबल जेट फ्यूल की कीमतों में आई भारी तेज़ी की वजह से किया गया है.    टाटा ग्रुप के मालिकाना हक वाली इस एयरलाइन ने बताया कि फ्यूल सरचार्ज का यह नया ढांचा 8 अप्रैल से घरेलू रूट्स पर और 10 अप्रैल से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर लागू होगा. यह कदम एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है, जिससे दुनिया भर की एयरलाइंस के लिए ऑपरेशनल लागत काफी बढ़ गई है.    घरेलू उड़ानों पर असर (8 अप्रैल से)   घरेलू यात्रा के लिए एयर इंडिया ने एक समान फ्यूल सरचार्ज से हटकर दूरी-आधारित मॉडल अपना लिया है. छोटी दूरी के रूट (0–500 km) पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अब प्रति सेक्टर 299 रुपये अतिरिक्त देने होंगे, जबकि 2,000 km से ज्यादा लंबी दूरी के रूट पर यात्रियों से 899 रुपये तक लिए जाएंगे.   यह बदलाव सरकार के उस फैसले के अनुरूप है, जिसमें घरेलू ATF की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 परसेंट तक सीमित किया गया है, जिससे एयरलाइंस और यात्रियों को कुछ हद तक राहत मिली है. हालांकि, इस सीमित बढ़ोतरी से भी ज्यादातर सेक्टरों में टिकट की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है.    अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर असर (10 अप्रैल से)   उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया- इन सबसे लंबे रूट्स पर प्रति सेक्टर (एक तरफा) किराया 280 डॉलर (लगभग 23400 रुपये) का सरचार्ज लगेगा. यानी कि आने-जाने की टिकट पर करीब 47000 रुपये का एक्स्ट्रा खर्च आएगा.  यूरोप और यूके- प्रति सेक्टर 205 डॉलर यानी कि लगभग 17000 रुपये का सरचार्ज. अफ्रीका और मध्य एशिया- प्रति सेक्टर 130 डॉलर यानी कि लगभग 10800 रुपये का सरचार्ज. मिडिल ईस्ट- प्रति सेक्टर 50 डॉलर यानी कि लगभग 4200 रुपये का सरचार्ज. दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन- प्रति सेक्टर 100 डॉलर यानी कि लगभग 8300 रुपये का सरचार्ज. हालांकि, सिंगापुर के लिए यह 60 डॉलर प्रति सेक्टर है.  SAARC देश (नेपाल, श्रीलंका)- इन देशों के लिए प्रति सेक्टर 24 डॉलर का सरचार्ज. यानी कि लगभग 2000 रुपये का अतिरिक्त खर्च.   पहले से बुक Tickets पर क्या होगा?   Air India ने साफ कह दिया है कि जो Tickets इन तारीखों से पहले Issue हो चुके हैं उन पर नया Surcharge नहीं लगेगा जब तक यात्री Date या Itinerary में कोई बदलाव न करे. एयरलाइन ने यह भी कहा है कि हालात के मुताबिक Surcharge की समीक्षा होती रहेगी. 

Metroheadlines अप्रैल 7, 2026 0

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भारत या आफगानिस्तान, किसकी करेंसी ज्यादा मजबूत, बीते 1 महीने में रुपया घटा या बढ़ा?

  वैश्विक उथल-पुथल के बीच मार्च 2026 में भारतीय रुपया ऐतिहासिक रूप से कमजोर हुआ है, जबकि अफगानी अफगानी ने मजबूती दिखाई है. जानें रुपए में गिरावट के क्या कारण हैं. पढ़ें ये रिपोर्ट.   India and Afghanistan Currency News: वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और ईरान-अमेरिका वॉर के बीच इस साल मार्च का महीना करेंसी के मामने में काफी हलचल भरा रहा है. भारतीय करेंसी यानी रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को पार कर 95.22 पर आ गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि मार्च महीने में अफगान अफगानी (AFN) ने भारतीय रुपए (INR) के मुकाबले अधिक मजबूती दिखाई है.   एक मार्च से 31 मार्च 2026 के बीच दोनों करेंसी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चौंकाने वाली बात देखने को मिलती है.     पहले बात भारतीय रुपया की   ईरान युद्ध के चलते मार्च के महीने में रुपया भारी दबाव में रहा. 30 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में रुपये में 9.88% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 14 सालों में इसकी सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है. मार्च के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को भी पार कर गया है.     अब बात अफगानी मुद्रा की   ध्यान देने वाली बात है कि रुपए के तुलना में अफगानिस्तान की मुद्रा ने मजबूती दर्ज की है. अफगान सेंट्रल बैंक के अनुसार, 20 मार्च 2026 को समाप्त हुए उनके कैलेंडर वर्ष में अफगानी डॉलर के मुकाबले 9.93% मजबूत हुई है, हालांकि मार्च के पहले हफ्ते में इसमें मामूली 4.2% की गिरावट देखी गई थी, लेकिन महीने के अंत तक यह रुपए की तुलना में अफगानी करेंसी स्थिर रही.     ताजा स्थिति क्या है?   मार्च 2026 के आखिर में एक्सचेंज रेट लगभग इस तरह है- 1 भारतीय रुपया (INR) ≈ 0.67 अफगान अफगानी (AFN). इसका मतलब है कि मूल्य के मामले में 1 रुपया 1 अफगानी से छोटा है. हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अफगानिस्तान से कहीं बड़ी है, लेकिन करेंसी की 'यूनिट वैल्यू' और हालिया 'मजबूती की दर' के मामले में अफगानी फिलहाल बेहतर प्रदर्शन कर रही है.     भारतीय रुपया कमजोर होने के कारण क्या है?   विदेशी फंड की निकासी- विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है. कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण मार्च में कच्चे तेल की कीमतें $105 - $115 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है. अमेरिकी टैरिफ: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों यानी टैरिफ ने भी रुपए पर दबाव बनाया है. व्यापार घाटा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ऊर्जा व्यापार प्रभावित हुआ, जिससे भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर असर पड़ा है.     अफगानी करेंसी मजबूत होने के कारण क्या हैं?   सख्त मौद्रिक नीतियां: अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक ने बाजार में डॉलर की निरंतर आपूर्ति की और मुद्रा के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया है. डिजिटल बैंकिंग और नए नोट: पुराने नोटों को चलन से बाहर करने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से मुद्रा की मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहा है. सीमित वैश्विक व्यापार जुड़ाव: वैश्विक वित्तीय बाजारों से कम जुड़ाव होने के कारण, अफगानिस्तान वैश्विक मंदी या डॉलर की मजबूती से उस तरह प्रभावित नहीं हुआ जैसे भारत हुआ.  आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 में भारतीय रुपया कमजोर हुआ है, जबकि अफगान अफगानी ने अपनी मजबूती बरकरार रखी है. जहां भारत को बाहरी झटकों (तेल और भू-राजनीति) का सामना करना पड़ा, वहीं अफगानिस्तान ने आंतरिक नियंत्रण और सीमित बाजार जोखिमों के कारण अपनी करेंसी को गिरने से बचाए रखा.

Metroheadlines मार्च 31, 2026 0

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