मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने लगा है। Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण यह रणनीतिक समुद्री मार्ग बाधित हो गया है, जिससे कच्चे तेल, एलपीजी और नेचुरल गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसी स्थिति को देखते हुए Ministry of Petroleum and Natural Gas ने नेचुरल गैस की सप्लाई को लेकर एक नई प्राथमिकता सूची जारी की है ताकि संभावित कमी की स्थिति में जरूरी सेक्टरों को पहले गैस उपलब्ध कराई जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर गैस की सप्लाई में कमी आती है तो सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं और आम जनता से जुड़े क्षेत्रों को पूरी आपूर्ति दी जाएगी, जबकि औद्योगिक सेक्टरों को सीमित गैस दी जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित होने से बचाना और आवश्यक सेवाओं को सुचारू रूप से जारी रखना है।
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। मध्य-पूर्व के कई बड़े तेल और गैस उत्पादक देश जैसे Saudi Arabia, United Arab Emirates, Kuwait और Qatar अपने ऊर्जा उत्पादों को इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक भेजते हैं।
अगर यह मार्ग बंद हो जाता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर पड़ता है। जहाजों की आवाजाही रुकने से तेल और गैस की कीमतों में तेजी आ जाती है और आयात पर निर्भर देशों को सप्लाई संकट का सामना करना पड़ता है। भारत भी ऐसे ही देशों में शामिल है, जो अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है। देश में तेजी से बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगिक विकास के कारण ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन घरेलू उत्पादन इस मांग को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाता। इसलिए भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस आयात करनी पड़ती है।
एलपीजी के मामले में भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। इन आयातों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व के देशों से आता है और इनकी समुद्री सप्लाई का प्रमुख रास्ता Strait of Hormuz ही है। यही वजह है कि इस मार्ग के बंद होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
संभावित संकट को देखते हुए Ministry of Petroleum and Natural Gas ने गैस वितरण के लिए स्पष्ट प्राथमिकता तय की है। इसके तहत कुछ सेक्टरों को 100 प्रतिशत गैस सप्लाई दी जाएगी, जबकि कुछ क्षेत्रों में कटौती की जाएगी।
सरकार का कहना है कि आम नागरिकों से जुड़े सेक्टरों को किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इसलिए घरेलू इस्तेमाल और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े क्षेत्रों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है।
सरकार की प्राथमिकता सूची के मुताबिक निम्नलिखित क्षेत्रों को गैस की पूरी सप्लाई दी जाएगी और इनमें कोई कटौती नहीं की जाएगी।
घरों में पाइपलाइन के जरिए पहुंचने वाली गैस को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। यह गैस सीधे रसोई में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होती है। सरकार का मानना है कि घरेलू रसोई गैस की कमी होने से करोड़ों परिवार प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए इसे टॉप प्रायोरिटी दी गई है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट और निजी वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की सप्लाई भी पूरी तरह जारी रहेगी। देश के कई बड़े शहरों में ऑटो, टैक्सी और बसें सीएनजी पर चलती हैं। अगर इसकी कमी होती है तो सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
घरेलू रसोई गैस सिलेंडर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस की सप्लाई भी बिना किसी कटौती के जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता बनी रहे।
गैस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क को लगातार चलाना जरूरी होता है। इसलिए पाइपलाइन संचालन के लिए जरूरी गैस को भी पूरी तरह उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में गैस सप्लाई सीमित करने का फैसला लिया है। इन सेक्टरों को उनके पिछले छह महीनों के औसत उपयोग के आधार पर कम गैस दी जाएगी।
चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को उनकी औसत खपत का केवल 80 प्रतिशत गैस दिया जाएगा। इससे उत्पादन की लागत बढ़ सकती है और उत्पादन में कमी आ सकती है।
खाद बनाने वाली कंपनियों को केवल 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उर्वरक उत्पादन में प्राकृतिक गैस का उपयोग एक प्रमुख कच्चे माल के रूप में होता है।
रिफाइनरीज को उनके औसत उपयोग का केवल 65 प्रतिशत गैस मिलेगा। इससे पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पहले ही इस संकट को लेकर चिंता जता चुका है। कई होटल एसोसिएशन का कहना है कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई कम हुई तो बड़े शहरों में होटल और रेस्टोरेंट चलाना मुश्किल हो सकता है।
खास तौर पर आईटी हब के रूप में प्रसिद्ध Bengaluru जैसे शहरों में होटल उद्योग गैस सप्लाई पर काफी निर्भर है। अगर सप्लाई में कमी आती है तो कई होटल अस्थायी रूप से बंद भी हो सकते हैं।
सरकार का यह फैसला मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसका अधिकांश हिस्सा मध्य-पूर्व से आता है।
युद्ध के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित होने से आयात में बाधा आई है। इसके चलते कमर्शियल एलपीजी की कमी पहले ही देखी जा रही है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना सरकार की रणनीति का हिस्सा है।
सरकार ने घरेलू गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
पहला, रिफाइनरीज को घरेलू एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरा, घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतराल 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध स्टॉक ज्यादा समय तक चल सके।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश में फिलहाल लगभग 40 दिनों के लिए पर्याप्त एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है। यानी अगर आयात पूरी तरह रुक भी जाए तो भी कुछ समय तक घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
इसके अलावा सरकार वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश भी कर रही है।
भारत अब मध्य-पूर्व के अलावा अन्य देशों से गैस और एलपीजी आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इनमें प्रमुख रूप से United States और Australia जैसे देश शामिल हैं।
इन देशों से आयात बढ़ाकर भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।
अगर मध्य-पूर्व में युद्ध लंबा चलता है और Strait of Hormuz लंबे समय तक बंद रहता है, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
औद्योगिक उत्पादन में कमी आ सकती है, खासकर चाय उद्योग और उर्वरक उद्योग में। इससे कृषि क्षेत्र और निर्यात पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही ऊर्जा कीमतों में वृद्धि होने से महंगाई भी बढ़ सकती है।
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
Causes Of Bloating And Gas: हम क्या खाते हैं, इसका हमारी सेहत पर काफी असर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन फूड कॉम्बिनेशन से आपको बचना चाहिए और आयुर्वेद इसको लेकर क्या कहता है Which Foods Should Not Be Eaten Together: खाना खाते समय हमें कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है. हम क्या खाते हैं और किन चीजों को साथ में मिलाकर खाते हैं, इसका सीधा असर हमारे डाइजेशन शक्ति पर पड़ता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन पाचन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक तत्व जमा कर सकते हैं. इसका नतीजा गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. चलिए आपको आयुर्वेद के हिसाब से बताते हैं कि किन कॉम्बिनेशन से हमें बचना चाहिए. क्या कहता है आयुर्वेद? आयुर्वेद के बारे में जानकारी देने वाली संस्था kevaayurveda के अनुसार, आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की वात, पित्त, कफ और पाचन क्षमता अलग होती है कुछ खानें की चीजें एक-दूसरे के विपरीत गुण रखते हैं. यदि इन्हें बार-बार साथ में खाया जाए तो डाइजेशन सिस्टम पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है. इससे गैस, कब्ज, सीने में जलन, मुंहासे, कमजोर इम्यूनिटी और डाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. किन फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए? kevaayurveda के अनुसार, कुछ प्रमुख गलत फूड कॉम्बिनेशन जिनसे बचने की सलाह दी जाती है, उनमें सबसे पहले आता है दूध और मछली. आयुर्वेद के अनुसार दूध ठंडा और भारी होता है, जबकि मछली गर्म तासीर वाली मानी जाती है. दोनों को साथ लेने से पाचन गड़बड़ा सकता है और स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी तरह दूध के साथ खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू या अनानास भी ठीक नहीं माने जाते, क्योंकि ये पेट में दूध को फाड़ सकते हैं और गैस या एसिडिटी बढ़ा सकते हैं. गरम भोजन के साथ शहद मिलाना भी आयुर्वेद में हानिकारक बताया गया है. शहद को गर्म करने से उसके गुण बदल सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक प्रभाव पैदा हो सकता है. भारी भोजन के तुरंत बाद फल खाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि फल जल्दी पचते हैं और भारी भोजन के साथ पेट में फर्मेंटेशन शुरू कर सकते हैं. दही और चीनी का मेल भी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. दही पहले से ही खट्टा और ठंडा होता है, जबकि रिफाइंड चीनी शरीर में असंतुलन बढ़ा सकती है. रात में दही को फल या ठंडी चीजों के साथ लेना कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या हो सकती है. बासी भोजन के साथ दूध लेना भी पाचन के लिए सही नहीं माना गया. किन चीजों का सेवन करना चाहिए? आयुर्वेद सलाह देता है कि मौसमी आहार लें, जरूरत से ज्यादा न खाएं और अदरक, जीरा, सौंफ जैसे मसालों का उपयोग करें, जो डाइजेशन को मजबूत बनाते हैं. सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाने से डाइजेशन मजबूत रहती है, न्यूट्रिशन तत्वों का ऑब्जर्वेशन बेहतर होता है और शरीर संतुलित रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह नियम और भी लाभकारी माने जाते हैं.
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.
US Israel Iran War: ईरान के नए सुप्रीम लीडर को भी नहीं बख्शेगा इजरायल! नेतन्याहू बोले-‘मुज्तबा खामेनेई की जान की कोई गारंटी नहीं’ मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। इस जंग ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसी बीच Benjamin Netanyahu ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी ऐसे नेता को बख्शने वाला नहीं है जो आतंकवाद या इजरायल विरोधी गतिविधियों में शामिल हो। इजरायली प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के संभावित नए सुप्रीम लीडर माने जा रहे Mojtaba Khamenei की जान की भी कोई गारंटी नहीं है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष पिछले कुछ समय से मध्य-पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। Israel और Iran के बीच तनाव नया नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में यह संघर्ष खुली जंग की शक्ल लेता दिख रहा है। अमेरिका के समर्थन के साथ इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसकी बढ़ती सैन्य ताकत को रोकने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ दो देशों के बीच नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शक्ति संतुलन की लड़ाई है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। नेतन्याहू की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सख्त संदेश इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि इजरायल अपने दुश्मनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सुन्नी और शिया दोनों तरह के चरमपंथी समूह दुनिया के लिए खतरा हैं और इनसे निपटना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह समस्या अपने आप खत्म नहीं होने वाली है। अगर आतंकवादी संगठन और उनके समर्थक देशों को रोका नहीं गया तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायल अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और वह अपने दुश्मनों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुज्तबा खामेनेई को लेकर चेतावनी ईरान की राजनीति में Mojtaba Khamenei को एक बेहद प्रभावशाली शख्स माना जाता है। वह ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के बेटे हैं और लंबे समय से सत्ता के केंद्र में सक्रिय बताए जाते हैं। नेतन्याहू ने जब पत्रकारों के सवाल का जवाब दिया तो उन्होंने कहा कि इजरायल किसी भी आतंकवादी संगठन के नेताओं के लिए “लाइफ इंश्योरेंस” नहीं लेगा। इसका मतलब साफ है कि अगर जरूरत पड़ी तो ऐसे नेताओं को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैं किसी भी आतंकवादी संगठन के नेताओं के लिए जीवन बीमा पॉलिसी नहीं लूंगा। उनकी जान की कोई गारंटी नहीं है।” इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है। हिजबुल्लाह को लेकर भी कड़ी चेतावनी इजरायल और लेबनान के बीच तनाव का एक बड़ा कारण Hezbollah है। यह शिया मिलिशिया संगठन लंबे समय से इजरायल के खिलाफ सक्रिय रहा है और इसे ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है। नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने लेबनान सरकार को पहले ही चेतावनी दे दी है कि अगर उसने हिजबुल्लाह को निहत्था नहीं किया तो परिणाम गंभीर होंगे। उन्होंने कहा कि अगर लेबनान सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो इजरायल खुद कार्रवाई करेगा और हिजबुल्लाह को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। नईम कासिम का नाम भी चर्चा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने हिजबुल्लाह के नेता Naim Qassem के बारे में भी सवाल पूछा। इस पर नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि इजरायल अपने दुश्मनों के नेताओं को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि उन्होंने किसी विशेष ऑपरेशन की जानकारी देने से इनकार कर दिया लेकिन संकेत दिया कि आने वाले समय में कुछ अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं। क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश? एक सवाल के जवाब में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान में मौजूदा शासन को गिराने का काम ईरानी जनता ही कर सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल और उसके सहयोगी ईरान के लोगों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान का मौजूदा शासन खत्म हो जाता है तो क्षेत्र में स्थिरता आ सकती है। नेतन्याहू के अनुसार, “अगर यह शासन खत्म हो जाता है तो समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं भी होता है तो यह बेहद कमजोर जरूर हो जाएगा।” पूरे मिडिल ईस्ट को बदलने का दावा इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले भी वादा किया था कि वह मध्य-पूर्व की तस्वीर बदल देंगे। उनके अनुसार अब क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल रहा है और कई देश इजरायल के साथ सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अब इजरायल पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और उसके दुश्मन भी यह बात समझने लगे हैं। नेतन्याहू के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। अमेरिका की भूमिका इस पूरे संघर्ष में United States की भूमिका भी बेहद अहम है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी वह लगातार दबाव बना रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है। क्षेत्रीय देशों की चिंता मिडिल ईस्ट के कई देश इस बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित हैं। तेल उत्पादन करने वाले देशों को डर है कि अगर युद्ध फैलता है तो इससे तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा क्षेत्र में पहले से मौजूद राजनीतिक और धार्मिक तनाव भी और बढ़ सकता है।
Iran New Supreme Leader: ईरान में मोजतबा हुसैनी खामेनेई अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की गद्दी पर बैठ गए हैं. उन्हें देश का सर्वोच्च नेता बना दिया गया है. यह फैसला ट्रंप की धमकी के बावजूद लिया गया ईरान के सर्वोच्च नेता बने मोजतबा हुसैनी खामेनेई ईरान के इतिहास में एक अहम पल आ गया है. आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता बना दिया गया है. उनके पिता की मौत के कुछ दिन बाद ही ईरान के एक्सपर्ट्स असेंबली ने यह फैसला लिया. ईरान की 88 सदस्यों वाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने 'निर्णायक वोट' से मोजतबा खामेनेई को तीसरे सर्वोच्च नेता के रूप में चुना है. अब वह अपने पिता आयतुल्लाह खामेनेई की गद्दी पर बैठ गए हैं. सेना से लेकर राजनेताओं ने ली वफादारी की शपथ अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही नाम की घोषणा हुई, ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और राजनीतिक नेताओं ने तुरंत मोजतबा खामेनेई के प्रति निष्ठा की शपथ ली. IRGC ने बयान जारी करते हुए कहा, 'हम नए नेता आयतुल्लाह सैयद मोजतबा खामेनेई के हुक्म का पालन करने और खुद को कुर्बान करने के लिए तैयार हैं. सेना के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी वफादारी का वादा किया है.' संसद के स्पीकर ने इसे 'धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य' बताया है. सुरक्षा प्रमुख ने कहा कि नया नेता इस मुश्किल वक्त में देश को सही दिशा दिखाने में सक्षम हैं. पावर ब्रेकर कहे जाते थे मोजतबा खामेनेई असेंबली ने मदरसों और यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स समेत पूरे देश से अपील की है कि वे नए नेता के पीछे एकजुट हो जाएं और देश की एकता बनाए रखें. मोजतबा खामेनेई 56 साल के हैं. वे लंबे समय से अपने पिता के ऑफिस में काम कर रहे थे और IRGC से बहुत करीबी रिश्ते रखते हैं. वे सार्वजनिक रूप से ज्यादा नहीं दिखते थे, लेकिन पीछे से बहुत ताकतवर माने जाते थे. उन्हें 'पावर ब्रोकर' और 'गेटकीपर' कहा जाता था. इराक के साथ जंग में लड़े थे मोजतबा मोजतबा 1980-88 तक 17-18 साल की उम्र में ईरान-इराक युद्ध के आखिरी दिनों में शामिल हुए थे. IRGC की हबीब इब्न मजाहिर बटालियन में सेवा दी थी. युद्ध के कई कमांडर बाद में IRGC में ऊंचे पदों पर पहुंचे. युद्ध के बाद मोजतबा कोम चले गए, जहां उन्होंने शिया धर्म की पढ़ाई की. कई कंजर्वेटिव विद्वानों के पास तालीम ली. आज उनकी रैंक हुज्जतुल इस्लाम (मिड-लेवल क्लेरिक) है.
दिल्ली में इस सप्ताह गर्मी का असर और तेज होने वाला है. मौसम में हो रहे बदलावों के बीच सोमवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.5 डिग्री ज्यादा है. वहीं न्यूनतम तापमान 15.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औसत से 1.7 डिग्री अधिक है. मौसम विभाग और प्राइवेट वेदर एजेंसियों के मुताबिक आने वाले दिनों में दिन और रात दोनों के तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मैदानों पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर कमजोर पड़ रहा है, जबकि कोई नया सिस्टम फिलहाल पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित रहने की रहने की संभावना है. Skymet के अनुसार, साफ आसमान और तेज धूप के कारण दिल्ली में अगले कुछ दिनों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ सकता है. इसका असर सुबह और दोपहर के समय ज्यादा महसूस किया जाएगा. आया नगर में 31.1 डिग्री सेल्सियस तापमान शहर के अलग-अलग मौसम केंद्रों की बात करें तो आया नगर में सबसे अधिक तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सफदरजंग में 30.9 डिग्री, रिज में 30.7 डिग्री, लोधी रोड में 30.2 डिग्री और पालम में 29.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ. न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे रातें भी अपेक्षाकृत गर्म महसूस हो रही हैं. हवा की गुणवत्ता के मोर्चे पर भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. गर्मी की आहट के साथ AQI में दिखा सुधार दिल्ली में 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 193 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के ज्यादातर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर मीटर ‘मध्यम’ और कुछ स्टेशनों पर ‘खराब श्रेणी में रहा, जबकि पंजाबी बाग में एक्यूआई 343 के साथ ‘बहुत खराब’ दर्ज किया गया. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते तापमान और स्थिर मौसम की वजह से प्रदूषण के कण हवा में ज्यादा समय तक टिक सकते हैं. एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ने 5 मार्च तक हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ बने रहने का अनुमान जताया है. ऐसे में लोगों को दोपहर के समय धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और संवेदनशील वर्ग को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है