मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से एमपी कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है, हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एमपी के श्योपुर जिले स्थित विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर दिया है. अदालत ने उनके निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रामनिवास रावत को विजयी घोषित किया है.
दरअसल, विजयपुर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा की जीत को चुनौती देते हुए भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटिशन दायर की थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन के दौरान दाखिल किए गए एफिडेविट में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी.
मामले की सुनवाई के बाद एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त करते हुए भाजपा के रामनिवास रावत को विजयपुर उपचुनाव में विजयी घोषित कर दिया. हालांकि, हाईकोर्ट फिलहाल मुकेश मल्होत्रा को 15 दिन का स्टे देने पर विचार कर रहा है. अगर स्टे दिया जाता है तो यह आदेश 15 दिन बाद प्रभावी होगा.
वहीं अदालत के फैसले पर बीजेपी के रामनिवास रावत के वकील एमपीएस रघुवंशी का बयान भी सामने आया है. हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के फैसले पर रामनिवास रावत के वकील एमपीएस रघुवंशी ने मीडिया से बातचीत में अहम जानकारी दी है. अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने कहा कि, उच्च न्यायालय बार-बार कह रहा है कि चुनाव लड़ने से पहले जनप्रतिनिधियों को नामांकन पत्र के साथ एक एफिडेविट चुनाव आयोग देना चाहिए.
उन्होंने बताया कि, चुनाव आयोग को दिए गए एफिडेविट में प्रत्याशी जो चुनाव लड़ेगा वो अपनी आपराधिक हिस्ट्री बताएगा. उन्होंने बताया कि, कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा के द्वारा चार क्रिमिनल केस की जानकारी अपूर्ण दी गई, इसके साथ ही कुछ मामलों की जानकारी नहीं दी गई.
उन्होंने बताया कि, एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त करते हुए भाजपा के रामनिवास रावत को विजयपुर उपचुनाव में विजयी घोषित कर दिया. हाईकोर्ट मुकेश मल्होत्रा को 15 दिन का स्टे देने पर विचार कर रहा है. अगर स्टे दिया जाता है तो यह आदेश 15 दिन बाद प्रभावी होगा.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। देखिए तस्वीरें… NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया। NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन। विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो। सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है। 'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा' सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए। डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है। 'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों' सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा। आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया। डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया। कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.
Mallikarjun Kharge on PM Modi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर दिए बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिया गया विवादित बयान भारतीय राजनीति में एक नए टकराव का कारण बन गया है, खासकर जब देश Assembly Elections 2026 की तैयारी के दौर से गुजर रहा है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को दिए गए अपने बयान में खरगे ने पीएम मोदी को “आतंकवादी” तक कह दिया, जिससे सियासी माहौल अचानक गरमा गया। इस बयान के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद आपत्तिजनक, गैर-जिम्मेदाराना और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया हो, बल्कि उनके अनुसार, अब तक कांग्रेस द्वारा मोदी के खिलाफ 175 से अधिक अपमानजनक टिप्पणियां की जा चुकी हैं। यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में इस तरह के व्यक्तिगत हमले राजनीतिक विमर्श के स्तर को गिराने वाले माने जा रहे हैं। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस मुद्दों पर बहस करने के बजाय व्यक्तिगत आरोपों और अपशब्दों का सहारा ले रही है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पार्टी ने यह भी मांग की कि खरगे को अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस की तरफ से इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने इसे खरगे की व्यक्तिगत राय बताया, जबकि कुछ ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। कांग्रेस का तर्क है कि वह सरकार की नीतियों और फैसलों की आलोचना करती रही है और आगे भी करती रहेगी, लेकिन भाजपा इस आलोचना को व्यक्तिगत हमले के रूप में पेश कर रही है ताकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। पार्टी के प्रवक्ताओं ने यह भी कहा कि भाजपा बार-बार पुराने बयानों को गिनाकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं, जहां नेताओं द्वारा तीखी भाषा का इस्तेमाल कर अपने समर्थकों को सक्रिय करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है, क्योंकि आम मतदाता अब विकास, रोजगार, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। ऐसे में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप कई बार उल्टा असर भी डाल सकते हैं और जनता में राजनीतिक दलों के प्रति निराशा बढ़ा सकते हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में राजनीतिक संवाद का स्तर हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। समय-समय पर नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर तीखे हमले किए जाते रहे हैं, लेकिन जब यह भाषा मर्यादा की सीमा पार करती है, तो व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ता है। इस मामले में भी कई गैर-राजनीतिक हस्तियों और सामाजिक संगठनों ने संयमित भाषा के इस्तेमाल की अपील की है। उनका कहना है कि नेताओं को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि उनके बयान समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय राजनीति में स्वस्थ और मुद्दा-आधारित बहस की जगह कम होती जा रही है? जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल विपक्ष पर आरोप लगाता है कि वह केवल नकारात्मक राजनीति कर रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पा रही और हर असहमति को देशविरोध या व्यक्तिगत हमले के रूप में पेश करती है। इस टकराव के बीच असली मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मल्लिकार्जुन खरगे अपने बयान पर कायम रहते हैं या किसी तरह की सफाई या माफी सामने आती है। साथ ही, भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को चुनावी प्रचार में किस तरह इस्तेमाल करती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल इतना तय है कि इस बयान ने राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है और चुनावी माहौल को और अधिक तीखा बना दिया है।
केरल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Thrissur में एक भव्य रोड शो कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस रोड शो की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी साफ तौर पर देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने खुद इस रोड शो की झलकियां साझा करते हुए लोगों का आभार व्यक्त किया और इसे “अविस्मरणीय” बताया। उनके इस संदेश ने साफ कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। 🔸 रोड शो में उमड़ा जनसैलाब Thrissur की सड़कों पर प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए हजारों लोग जुटे। हर तरफ पार्टी के झंडे, पोस्टर और नारों की गूंज सुनाई दे रही थी। लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के बीच। रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री का काफिला धीरे-धीरे आगे बढ़ा, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों का अभिवादन कर सकें। लोग सड़क के दोनों ओर खड़े होकर उनका स्वागत कर रहे थे, वहीं कई जगहों पर फूलों की वर्षा भी की गई। यह रोड शो केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि BJP अब केरल जैसे राज्य में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। 🔸 सोशल मीडिया पर छाया रोड शो प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस रोड शो के वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास और यादगार रहा। इस पोस्ट के सामने आते ही लाखों लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया। ट्विटर (अब X) पर यह पोस्ट तेजी से ट्रेंड करने लगी। इससे साफ जाहिर होता है कि यह रोड शो सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी काफी सफल रहा। 🔸 केरल में BJP की रणनीति केरल पारंपरिक रूप से Bharatiya Janata Party के लिए चुनौतीपूर्ण राज्य रहा है, जहां मुख्य मुकाबला वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच होता रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में BJP ने यहां अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री का यह रोड शो भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। Thrissur को खास तौर पर इसलिए चुना गया क्योंकि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। BJP का लक्ष्य इस बार केरल में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाना और राज्य की राजनीति में एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में उभरना है। 🔸 चुनावी संकेत और राजनीतिक संदेश इस रोड शो के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया कि BJP अब केवल उत्तर और पश्चिम भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत में भी अपनी जड़ें मजबूत कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बड़े रोड शो मतदाताओं पर सीधा प्रभाव डालते हैं और पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरते हैं। इसके अलावा, यह रोड शो विपक्षी दलों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि BJP अब केरल में भी गंभीरता से चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। 🔸 जनता की प्रतिक्रिया रोड शो के दौरान लोगों की भारी भीड़ यह संकेत देती है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है। खासकर युवा वर्ग में उनका क्रेज साफ नजर आया। कई लोगों ने इसे “ऐतिहासिक” बताया, वहीं कुछ ने इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा माना। हालांकि, इसमें कोई शक नहीं कि इस आयोजन ने केरल की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है। തൃശ്ശൂർ, നന്ദി! ഇന്നലെ നടന്ന റോഡ് ഷോ മറക്കാനാവാത്തതായിരുന്നു. ഇതാ പ്രധാന ഹൈലൈറ്റുകൾ… pic.twitter.com/DAiMyO1JLT — Narendra Modi (@narendramodi) March 30, 2026
चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (MCC) के सख्त निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के सख्त क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने बताया कि 5,173 से अधिक उड़न दस्ते और 5,200 से अधिक स्थिर निगरानी टीमों (एसएसटी) को राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि शिकायतों का समाधान 100 मिनट के भीतर किया जा सके। एक दिन पहले आयोग ने इन राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्र में विधानसभा चुनावों के लिए कार्यक्रम की घोषणा की थी। आयोग ने छह अन्य राज्यों में भी आचार संहिता लागू करने के निर्देश दिए हैं, जहां इसी अवधि के दौरान आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। एमसीसी चुनावी राज्यों में केंद्र सरकार पर भी लागू होगा होगा यानी वह इनसे संबंधित घोषणाएं या नीतिगत फैसले नहीं ले पाएगी। चुनाव एलान के साथ ही विधायक-सांसदों के निधि जारी करने पर रोक लग गई है। चुनाव आयोग ने केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिव और मुख्य सचिवों को लिखे पत्रों में चुनाव आचार संहिता के प्रविधानों को तुरंत प्रभाव से लागू करने को कहा है, जिसमें निजी और सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित होने से रोकना, सार्वजनिक स्थानों का दुरुपयोग रोकना, सरकारी वाहनों का दुरुपयोग रोकना, सरकारी खर्चे पर विज्ञापन देना रोकना और सरकारी वेबसाइटों से राजनीतिक पदाधिकारियों की तस्वीरें हटाने के निर्देश शामिल हैं। चुनाव एलान के साथ ही विधायक-सांसदों के निधि जारी करने पर रोक चुनावी राज्यों में 5,200 से अधिक स्थिर निगरानी टीमें तैनात की गई आयोग ने कहा कि जिला स्तर पर 24 घंटे नियंत्रण कक्ष को तुरंत सक्रिय किया जाए जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित किया जाए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि मंत्रीगण अपनी आधिकारिक यात्राओं को चुनाव प्रचार से न जोड़ें और सरकारी मशीनरी का उपयोग चुनाव संबंधी गतिविधियों के लिए न करें। आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाई। पार्टियों को सार्वजनिक बैठकों और जुलूसों के संबंध में पुलिस अधिकारियों को पूर्व में सूचित करना चाहिए ताकि यातायात प्रबंधन के लिए उचित व्यवस्था की जा सके। क्या है आदर्श आचार संहिता? आदर्श आचार संहिता के तहत वह नियम आते हैं जिसे चुनाव आयोग चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए गाइडलाइन के तौर पर जारी करता है। इसका उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के लिए बनाई गई एक नियमावली है जिसका पालन चुनाव के समय आवश्यक रूप से करना होता है। आचार संहिता चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद से लागू हो जाती है और चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने तक लागू रहती है। एमसीसी लागू होने के बाद क्या होता है? धर्म, जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जा सकती। विरोधी की आलोचना केवल नीतियों, प्रदर्शन और कार्यक्रमों पर केंद्रित होनी चाहिए न कि उसके निजी जीवन पर। सरकारी जनसंचार माध्यमों का उपयोग सत्ताधारी दल के पक्ष में पक्षपातपूर्ण कवरेज के लिए नहीं किया जा सकता। मतदान केंद्रों के पास प्रलोभन देना, डराना-धमकाना, प्रचार करना जैसी अवैध गतिविधियां प्रतिबंधित होती हैं। निजी भवनों के बाहर प्रदर्शन करना या प्रचार के लिए किसी और की संपत्ति का उपयोग करना प्रतिबंधित है। दलों को बैठकों और जुलूसों के बारे में अधिकारियों को सूचित करना होगा। पहले से तय मार्गों, समय और शुरू/समाप्ति बिंदुओं का पालन करना होगा। दलों को अन्य जुलूसों के साथ टकराव से बचना होगा। लाउडस्पीकर या सभाओं के लिए अनुमति प्राप्त करनी होगी। शांति बनाए रखने और यातायात प्रबंधन के लिए पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा। दलों और उम्मीदवारों को मतदान के दौरान चुनाव अधिकारियों के साथ सहयोग करना होगा। मतदान केंद्रों के पास कोई शराब या भीड़भाड़ नहीं होनी चाहिए। सरकारें प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी, धन या पदों का उपयोग नहीं कर सकतीं। किसी भी तरह के वित्तीय अनुदान, नई परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे से जुड़े वादों या तदर्थ नियुक्तियों की कोई घोषणा नहीं की जाएगी, जोकि मतदाताओं को प्रभावित करती हो।