Dollar vs Rupee: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, मजबूत डॉलर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण गुरुवार को भारतीय रुपया दबाव में आ गया. हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन Indian Rupee अमेरिकी मुद्रा US Dollar के मुकाबले गिरकर 92.36 के स्तर तक पहुंच गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.25 पर खुला और आगे गिरते हुए 92.32 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर से करीब 31 पैसे कमजोर है. एक दिन पहले रुपया 92.01 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.
गिरावट की मुख्य वजह
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये में कमजोरी के पीछे कई कारण हैं: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली और घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट.
वैश्विक तेल मानक Brent Crude करीब 9.94% बढ़कर 101.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. शेयर बाजार का हाल घरेलू बाजार में भी दबाव देखने को मिला. BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 992.53 अंक गिरकर 75,871.18 पर पहुंच गया. NSE Nifty 50 310.55 अंक टूटकर 23,556.30 के स्तर पर आ गया. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 6,267.31 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
रुपये पर इतना दबाव क्यों
भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है. इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो देश का आयात बिल बढ़ जाता है और तेल कंपनियों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है. इससे Indian Rupee पर सीधा दबाव बढ़ जाता है. वैश्विक घटनाओं का असर तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब Iraq के समुद्री क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर हमला होने की खबर आई है.
इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहा और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है। शिक्षा विभाग की भूमिका स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए। शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया। वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया। राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है। विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है। आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है। राजनीतिक और सामाजिक संदेश Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है। संभावित चुनौतियां हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों की अपेक्षाएं इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं। UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है? Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है? सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है. जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है. चांदी के ताजा भाव दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए
Causes Of Bloating And Gas: हम क्या खाते हैं, इसका हमारी सेहत पर काफी असर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन फूड कॉम्बिनेशन से आपको बचना चाहिए और आयुर्वेद इसको लेकर क्या कहता है Which Foods Should Not Be Eaten Together: खाना खाते समय हमें कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है. हम क्या खाते हैं और किन चीजों को साथ में मिलाकर खाते हैं, इसका सीधा असर हमारे डाइजेशन शक्ति पर पड़ता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन पाचन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक तत्व जमा कर सकते हैं. इसका नतीजा गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. चलिए आपको आयुर्वेद के हिसाब से बताते हैं कि किन कॉम्बिनेशन से हमें बचना चाहिए. क्या कहता है आयुर्वेद? आयुर्वेद के बारे में जानकारी देने वाली संस्था kevaayurveda के अनुसार, आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की वात, पित्त, कफ और पाचन क्षमता अलग होती है कुछ खानें की चीजें एक-दूसरे के विपरीत गुण रखते हैं. यदि इन्हें बार-बार साथ में खाया जाए तो डाइजेशन सिस्टम पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है. इससे गैस, कब्ज, सीने में जलन, मुंहासे, कमजोर इम्यूनिटी और डाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. किन फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए? kevaayurveda के अनुसार, कुछ प्रमुख गलत फूड कॉम्बिनेशन जिनसे बचने की सलाह दी जाती है, उनमें सबसे पहले आता है दूध और मछली. आयुर्वेद के अनुसार दूध ठंडा और भारी होता है, जबकि मछली गर्म तासीर वाली मानी जाती है. दोनों को साथ लेने से पाचन गड़बड़ा सकता है और स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी तरह दूध के साथ खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू या अनानास भी ठीक नहीं माने जाते, क्योंकि ये पेट में दूध को फाड़ सकते हैं और गैस या एसिडिटी बढ़ा सकते हैं. गरम भोजन के साथ शहद मिलाना भी आयुर्वेद में हानिकारक बताया गया है. शहद को गर्म करने से उसके गुण बदल सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक प्रभाव पैदा हो सकता है. भारी भोजन के तुरंत बाद फल खाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि फल जल्दी पचते हैं और भारी भोजन के साथ पेट में फर्मेंटेशन शुरू कर सकते हैं. दही और चीनी का मेल भी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. दही पहले से ही खट्टा और ठंडा होता है, जबकि रिफाइंड चीनी शरीर में असंतुलन बढ़ा सकती है. रात में दही को फल या ठंडी चीजों के साथ लेना कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या हो सकती है. बासी भोजन के साथ दूध लेना भी पाचन के लिए सही नहीं माना गया. किन चीजों का सेवन करना चाहिए? आयुर्वेद सलाह देता है कि मौसमी आहार लें, जरूरत से ज्यादा न खाएं और अदरक, जीरा, सौंफ जैसे मसालों का उपयोग करें, जो डाइजेशन को मजबूत बनाते हैं. सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाने से डाइजेशन मजबूत रहती है, न्यूट्रिशन तत्वों का ऑब्जर्वेशन बेहतर होता है और शरीर संतुलित रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह नियम और भी लाभकारी माने जाते हैं.
रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए. नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है. 41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील एक तरफ एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है, वहीं दूसरी ओर चीन के बढ़ते प्रभाव को संदेश देने की रणनीति भी मानी जा रही है US Taiwan Defence Deal: ताइवान को लेकर China और United States के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. चीन लंबे समय से Taiwan को अपना हिस्सा बताता रहा है और किसी भी देश द्वारा ताइवान के समर्थन को वह सख्ती से नापसंद करता है. ऐसे में अमेरिका और ताइवान के बीच प्रस्तावित बड़ा रक्षा समझौता बीजिंग को नाराज कर सकता है. समाचार एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान के लिए उन्नत इंटरसेप्टर मिसाइलों समेत करीब 14 अरब डॉलर का रक्षा पैकेज अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मंजूरी के लिए तैयार है. सूत्रों के अनुसार इस डील को इस महीने ट्रंप के चीन दौरे के बाद मंजूरी दी जा सकती है. क्यों नाराज हो सकता है चीन? ताइवान लगातार चीन के सैन्य दबाव का सामना कर रहा है. ऐसे में यह रक्षा सौदा उसके लिए अब तक का सबसे बड़ा रक्षा समझौता माना जा रहा है. माना जा रहा है कि यह डील ताइवान की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगी, जिससे चीन की नाराजगी बढ़ सकती है. सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप का 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच Beijing दौरा प्रस्तावित है. इसी दौरान इस रक्षा समझौते को अंतिम रूप दिया गया है और ट्रंप की वापसी के बाद इसके आधिकारिक ऐलान की संभावना जताई जा रही है. इससे पहले चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने फरवरी में कहा था कि ताइवान के साथ रक्षा सौदों को लेकर सावधानी बरती जानी चाहिए. ट्रंप प्रशासन के इस कदम से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ताइवान के साथ अपने रणनीतिक रिश्ते बनाए रखना चाहता है और उसे सैन्य मदद भी बढ़ा सकता है. डील के रणनीतिक मायने विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील एक तरफ एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है, वहीं दूसरी ओर चीन के बढ़ते प्रभाव को संदेश देने की रणनीति भी मानी जा रही है. China के विदेश मंत्रालय ने समाचार एजेंसी Reuters से कहा है कि United States द्वारा Taiwan को हथियार बेचने के कदम का चीन की सरकार एकजुट होकर विरोध करेगी. चीन का कहना है कि ताइवान को हथियारों की बिक्री क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकती है. गौरतलब है कि चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा बताता रहा है और वह लगातार अमेरिका से मांग करता रहा है कि वह ताइवान को हथियार बेचना बंद करे. बीजिंग का मानना है कि इस तरह के रक्षा सौदे “वन चाइना पॉलिसी” के सिद्धांत के खिलाफ हैं और इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है. वहीं अमेरिका ताइवान की सुरक्षा के लिए उसे रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की नीति पर कायम है.
डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, ट्रंप के बयान और कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को राहत वैश्विक बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय मुद्रा में मंगलवार को कुछ मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद कि Iran से जुड़ा युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है, निवेशकों में राहत का माहौल बना। इसी का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा और Indian Rupee अपने हालिया ऑल टाइम लो से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हो गया। मंगलवार को सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 7 पैसे मजबूत होकर 92.14 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को रुपया गिरावट के साथ बंद हुआ था और उसने नया रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया था। कैसे रहा मंगलवार को रुपये का कारोबार अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार सुबह Indian Rupee 91.92 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन बाद में यह 92.14 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। यह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 7 पैसे की मजबूती को दर्शाता है। सोमवार को रुपया 39 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 92.21 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो कि अब तक का सबसे निचला बंद स्तर था। उस दिन वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ था। रुपये में मजबूती के पीछे क्या रहे कारण मंगलवार को रुपये में आई मजबूती के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण रहे। सबसे बड़ा कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और डॉलर में कमजोरी रही। वैश्विक तेल मानक Brent Crude वायदा कारोबार में लगभग 4.69 प्रतिशत गिरकर 94.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होता है। इसके अलावा छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला US Dollar Index भी 0.26 प्रतिशत गिरकर 98.92 पर आ गया। डॉलर में आई इस कमजोरी से भी रुपये को मजबूती मिली। घरेलू शेयर बाजार में तेजी से मिला सहारा भारतीय शेयर बाजार की मजबूती ने भी रुपये को समर्थन दिया। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज उछाल देखने को मिला। BSE Sensex 809.57 अंक की तेजी के साथ 78,375.73 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी 252.75 अंक बढ़कर 24,280.80 पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाजार में तेजी आने से विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जिससे मुद्रा को भी समर्थन मिलता है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपये की मजबूती सीमित रही। ट्रंप के बयान से बाजार को राहत वैश्विक निवेशकों को राहत उस समय मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि Iran से जुड़ा युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण पिछले कुछ दिनों से तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही थी। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई थी। ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों को उम्मीद जगी कि यदि तनाव कम होता है तो ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। G7 देशों के संकेत का भी असर रुपये को मजबूती मिलने की एक और वजह यह रही कि दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह G7 ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वे तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग कर सकते हैं। इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की मुद्राओं को समर्थन मिला। विशेषज्ञों की क्या है राय Anil Kumar Bhansali, जो Finrex Treasury Advisors LLP में हेड ऑफ ट्रेजरी और कार्यकारी निदेशक हैं, के अनुसार सोमवार को रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन जब G7 ने तेल बाजार को स्थिर करने के लिए कदम उठाने के संकेत दिए, तो तेल की कीमतों में गिरावट आई और बाजार को राहत मिली। भंसाली के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बयान से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा कि युद्ध की स्थिति जल्द खत्म हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में संभावित ढील और तेल कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयासों से भी बाजार को सहारा मिला। रुपये का आगे का अनुमान विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में Indian Rupee सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। Anil Kumar Bhansali के मुताबिक आने वाले दिनों में रुपया 91.50 से 92.10 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है। हालांकि यह पूरी तरह वैश्विक बाजार के रुख, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
भू-राजनीतिक तनावों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में अब तक तेज उछाल देखा गया है. Iran पर United States और Israel के हमलों के बाद वैश्विक मानक Brent Crude करीब 16.8 प्रतिशत तक चढ़ चुका है Petrol & Diesel Price Today: ईरान पर हमले के बाद जैसे ही वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ा, संभावित पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गईं. हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर अब तक इसका असर नहीं पड़ा है. भारत सरकार ने कहा कि अब वे सिर्फ कतर के ऊपर गैस के भरोसे नहीं है, बल्कि नए बाजार की तलाश की जा रही है. उन बाजारों का रुख किया जा रहा है, जहां पर युद्ध का असर नहीं है. ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने गैस का ऑफर भी किया है. इस बीच, समाचार एजेंसी Press Trust of India (पीटीआई) ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि निकट भविष्य में भी कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है. मिडिल ईस्ट तनाव का तेल पर कैसा असर? सरकार ने ऐसी रणनीति अपनाई है जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें कम होने पर तेल कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ा सकती हैं, जबकि जब वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ती हैं तो कंपनियां कुछ समय तक उसका बोझ खुद उठाकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करती हैं. वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी Nomura की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का असर खुद वहन कर रही हैं और उसे सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही हैं. भू-राजनीतिक तनावों (Geo-political Tensions) के बीच कच्चे तेल की कीमतों में अब तक तेज उछाल देखा गया है. Iran पर United States और Israel के हमलों के बाद वैश्विक मानक Brent Crude करीब 16.8 प्रतिशत तक चढ़ चुका है, जबकि West Texas Intermediate (डब्ल्यूटीआई) में लगभग 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दूसरी तरफ, भारत ने मिडिल ईस्ट में तनाव और अपनी जरूरतों को देखते हुए रूस से दोबारा तेल आयात शुरू कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में बाधा आने की वजह से भारत ने अब रूसी तेल के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत तक आयात करता है और हाल में उसने रूस की बजाय मिडिल ईस्ट से तेल की खरीद को बढ़ा दिया था. लेकिन, ईरान वॉर की वजह से जो हालात पैदा हुए हैं, ऐसे में मुसीबत से बचने के लिए रूसी क्रूड ऑयल की ओर रुख किया है. 5 मार्च 2026 को प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम Delhi: पेट्रोल 94.77 रुपये/लीटर, डीजल 87.67 रुपये/लीटर Hyderabad: पेट्रोल 107.46 रुपये/लीटर, डीजल 95.70 रुपये/लीटर Bengaluru: पेट्रोल 102.92 रुपये/लीटर, डीजल 90.99 रुपये/लीटर Chennai: पेट्रोल 100.84 रुपये/लीटर, डीजल 92.39 रुपये/लीटर Kolkata: पेट्रोल 105.45 रुपये/लीटर, डीजल 92.39 रुपये/लीटर Lucknow: पेट्रोल 94.69 रुपये/लीटर, डीजल 87.81 रुपये/लीटर