इंडियन प्रीमियर लीग का 19वां सीजन यानी IPL 2026 28 मार्च से शुरू होने जा रहा है, और इस बार सिर्फ टीमों के बीच मुकाबला ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी चर्चा में हैं। खासतौर पर गेंदबाजी में एक बड़ा माइलस्टोन देखने को मिल सकता है—200 विकेट का आंकड़ा। अभी तक आईपीएल इतिहास में केवल Yuzvendra Chahal ही इस उपलब्धि को हासिल कर पाए हैं, लेकिन इस सीजन में तीन और गेंदबाज इस खास क्लब में शामिल हो सकते हैं।
सबसे पहले बात करें Yuzvendra Chahal की, जिन्होंने आईपीएल में 174 मैचों में 221 विकेट लेकर खुद को सबसे सफल गेंदबाज के रूप में स्थापित किया है। उनकी कलाई की स्पिन और विकेट लेने की क्षमता उन्हें बाकी गेंदबाजों से अलग बनाती है। चहल ने एक बार पांच विकेट और आठ बार चार विकेट हॉल लेकर यह साबित किया है कि वे किसी भी परिस्थिति में मैच का रुख बदल सकते हैं। फिलहाल वे अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 200 विकेट का आंकड़ा पार किया है, लेकिन अब यह रिकॉर्ड ज्यादा समय तक अकेला नहीं रहने वाला।
इस सूची में अगला नाम है Bhuvneshwar Kumar का, जो इस माइलस्टोन के बेहद करीब हैं। भुवनेश्वर ने 2011 में आईपीएल में डेब्यू किया था और अपनी स्विंग गेंदबाजी से शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है। उन्होंने 190 मैचों में 198 विकेट लिए हैं और सिर्फ 2 विकेट दूर हैं 200 विकेट के आंकड़े से। ऐसे में Royal Challengers Bengaluru के लिए खेलते हुए वे सीजन के पहले ही मैच में यह उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और डेथ ओवर में किफायती गेंदबाजी उन्हें लीग के सबसे भरोसेमंद गेंदबाजों में शामिल करती है।
तीसरे नंबर पर हैं Sunil Narine, जो आईपीएल में अपनी मिस्ट्री स्पिन के लिए जाने जाते हैं। 2012 से Kolkata Knight Riders के लिए खेल रहे नरेन ने 189 मैचों में 192 विकेट लिए हैं। उन्हें 200 विकेट तक पहुंचने के लिए 8 विकेट की जरूरत है, जो उनके अनुभव और फॉर्म को देखते हुए संभव लगता है। नरेन की खास बात यह है कि वे न सिर्फ गेंद से बल्कि बल्ले से भी टीम के लिए योगदान देते हैं, जिससे उनकी अहमियत और बढ़ जाती है।
अब बात करें Jasprit Bumrah की, जिन्हें ‘यॉर्कर किंग’ कहा जाता है। 2013 से Mumbai Indians के लिए खेल रहे बुमराह ने 145 मैचों में 183 विकेट लिए हैं। उन्हें 200 विकेट तक पहुंचने के लिए 17 विकेट की जरूरत है, और उनकी क्षमता को देखते हुए यह लक्ष्य इस सीजन में हासिल करना बिल्कुल संभव है। बुमराह अपनी सटीक यॉर्कर, धीमी गेंद और डेथ ओवर में शानदार कंट्रोल के लिए जाने जाते हैं, जो उन्हें टी20 क्रिकेट का सबसे खतरनाक गेंदबाज बनाता है।
आईपीएल 2026 का पहला मुकाबला Royal Challengers Bengaluru और Sunrisers Hyderabad के बीच खेला जाएगा। इस मैच में ही भुवनेश्वर कुमार इतिहास रच सकते हैं, जिससे सीजन की शुरुआत और भी रोमांचक हो जाएगी।
इस सीजन की खास बात यह है कि जहां एक तरफ युवा खिलाड़ी अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेंगे, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी गेंदबाज नए रिकॉर्ड बनाने के लिए तैयार हैं। 200 विकेट का आंकड़ा टी20 क्रिकेट में किसी भी गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि इस फॉर्मेट में बल्लेबाजों का दबदबा ज्यादा होता है। ऐसे में जो गेंदबाज इस आंकड़े तक पहुंचते हैं, वे अपनी निरंतरता और कौशल का शानदार उदाहरण पेश करते हैं।
कुल मिलाकर, आईपीएल 2026 सिर्फ एक और सीजन नहीं बल्कि रिकॉर्ड्स और उपलब्धियों का मंच बनने जा रहा है। फैंस को इस बार न सिर्फ रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे, बल्कि इतिहास बनते हुए भी देखने को मिलेगा। खासतौर पर यह देखना दिलचस्प होगा कि भुवनेश्वर, नरेन और बुमराह में से कौन सबसे पहले 200 विकेट के क्लब में शामिल होता है।
Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है. तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था शादी की रस्में रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था. कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है. विजय-रश्मिका फिल्म प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे. Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है. रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे. गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे. IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा? भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं. IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा? यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है. IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव? भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे. दोनों टीमों के स्क्वॉड भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा. इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड.
LPG संकट के बीच BJP नेताओं ने गाड़ियों से उतारे पार्टी का झंडा! अखिलेश यादव ने किया चौंकाने वाला दावा देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत में भी एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं. इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया है कि गैस संकट को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से बचने के लिए बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे तक हटा दिए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. अखिलेश यादव का बड़ा दावा कन्नौज से सांसद और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने लिखा कि अगर बीजेपी यह कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उनकी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता जनता के बीच क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसके नेता आज जनता से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं. उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को अपने भूमिगत ठिकानों से बाहर निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए और गैस एजेंसियों के माध्यम से लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करनी चाहिए. ‘जनता के गुस्से से बचने के लिए झंडे उतारे’ सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे उतार दिए हैं. उन्होंने लिखा कि जब जनता को गैस नहीं मिल रही है तो लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि जनता किसका घेराव करे— बीजेपी नेताओं के घरों का उनके कार्यालयों का या फिर उनकी उन गाड़ियों का जिनसे पार्टी का झंडा हटा दिया गया है. गैस संकट पर सरकार को घेरा सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी हमेशा संकट को स्वीकार करने के बजाय उसे नकारने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर सरकार ने शुरुआत में इनकार किया था, उसी तरह आज एलपीजी और खाद जैसी आवश्यक चीजों की कमी को भी नकारा जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी किसी जरूरी वस्तु की कमी होती है तो बीजेपी उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और बयानों के जरिए उसे छिपाने की कोशिश करती है. कोरोना काल का भी किया जिक्र अपने बयान में Akhilesh Yadav ने कोरोना महामारी का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि कोरोना के समय देश में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन उस समय भी सरकार और बीजेपी नेताओं ने इसे स्वीकार करने में देरी की. उनका कहना था कि अब वही स्थिति गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखने को मिल रही है. ‘बीजेपी आपदा में भी कालाबाजारी ढूंढ लेती है’ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि संकट की स्थिति में भी पार्टी के लोग कालाबाजारी करने के अवसर तलाश लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब जनता संकट में होती है, तब सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह स्थिति को संभाले और लोगों को राहत दे. लेकिन उनके मुताबिक बीजेपी ऐसा करने के बजाय समस्या को ही नकार देती है. मुफ्त भोजनालय चलाने की मांग सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गैस संकट और महंगाई के कारण लोग भोजन के लिए भी परेशान हो रहे हैं तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को आगे आकर मुफ्त भोजनालय चलाने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और उसके समर्थक संगठन जनता की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें जनता के सामने आने से बचना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कई देशों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़े एलपीजी संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. सरकार की ओर से क्या कहा गया सरकार के सूत्रों के अनुसार देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य है और तेल विपणन कंपनियां लगातार सिलेंडर की आपूर्ति बनाए हुए हैं. सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश में गैस संकट कहना सही नहीं होगा. विपक्ष का हमला जारी हालांकि विपक्षी दल लगातार महंगाई और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर सवाल उठाए हैं. यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैस संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में यूपी की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं. सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए. वहीं बीजेपी समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. जनता की सबसे बड़ी चिंता – महंगाई राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को लेकर है. एलपीजी सिलेंडर पहले ही कई शहरों में महंगा हो चुका है और अगर सप्लाई में भी समस्या आती है तो इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है.
Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे. बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा। नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है। नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी। नई सरकार का गठन कब होगा? राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है। इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है। क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा? अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा। संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन? नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। 2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। 3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा? अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं। विपक्ष की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। बिहार की राजनीति पर संभावित असर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं: बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है। बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था। आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
IPL 2026 के शुरुआती 5 मैचों में कोई विकेट नहीं लेने वाले जसप्रीत बुमराह ने गुजरात के खिलाफ पहली गेंद पर साईं सुदर्शन को आउट किया. हार्दिक पांड्या ने मैच के बाद इस पर बात की. Jasprit Bumrah एक बार फिर अपनी घातक गेंदबाजी से चर्चा में हैं। IPL 2026 के एक अहम मुकाबले में Mumbai Indians और Gujarat Titans आमने-सामने थे, जहां बुमराह ने मैच की पहली ही गेंद पर विकेट लेकर सभी को चौंका दिया। यह विकेट खास इसलिए भी था क्योंकि IPL 2026 के शुरुआती 6 मैचों में यह उनकी पहली सफलता थी। इससे पहले टीम मैनेजमेंट उन्हें पहले ओवर में गेंदबाजी का मौका नहीं दे रहा था, जिस पर लगातार सवाल उठ रहे थे। दरअसल, क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स के बीच लंबे समय से यह बहस चल रही है कि जब बुमराह जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज टीम में मौजूद हैं, तो उन्हें नई गेंद से शुरुआत क्यों नहीं कराई जाती। इस मैच में कप्तान Hardik Pandya ने इस रणनीति को बदलते हुए बुमराह को पहला ओवर सौंपा और उन्होंने तुरंत असर दिखाया। पहली ही गेंद पर विकेट लेकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह किसी भी समय मैच का रुख बदल सकते हैं। मैच के बाद हार्दिक पांड्या ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बुमराह जैसे गेंदबाज बेहद खास होते हैं और उन्हें किसी भी समय इस्तेमाल किया जा सकता है। पांड्या के अनुसार, बुमराह ने अपने पूरे करियर में बहुत कम बार पहला ओवर डाला है—करीब 7-8 बार। इसका मतलब यह है कि यह सिर्फ मौजूदा कप्तान का फैसला नहीं, बल्कि एक लंबे समय से अपनाई जा रही रणनीति है। पांड्या ने यह भी स्पष्ट किया कि टीम बुमराह को डेथ ओवर्स के लिए बचाकर रखना पसंद करती है, क्योंकि मैच के आखिरी ओवरों में उनका प्रभाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। डेथ ओवर्स में बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं, और ऐसे समय में बुमराह की यॉर्कर और सटीक लाइन-लेंथ विरोधी टीम के लिए मुश्किल खड़ी कर देती है। यही वजह है कि कई बार उन्हें शुरुआत में नहीं लाया जाता, ताकि बाद में उनका अधिकतम फायदा उठाया जा सके। इस मुकाबले की बात करें तो मुंबई इंडियंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 199 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। इस पारी के हीरो रहे Tilak Varma, जिन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 45 गेंदों में नाबाद 101 रन बनाए। यह उनके IPL करियर का पहला शतक था और उन्होंने इसे बेहद नाटकीय अंदाज में पूरा किया—पारी की आखिरी गेंद पर चौका लगाकर। तिलक वर्मा की यह पारी कई मायनों में खास रही। उन्होंने न सिर्फ टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया, बल्कि रिकॉर्ड बुक में भी अपना नाम दर्ज कराया। उन्होंने Sanath Jayasuriya के 45 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड की बराबरी की, जो लंबे समय से एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती रही है। तिलक की इस पारी ने यह साबित कर दिया कि वह भविष्य में मुंबई इंडियंस के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक बन सकते हैं। 199 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस की टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। मुंबई के गेंदबाजों ने लगातार विकेट लेकर विपक्षी टीम को संभलने का मौका ही नहीं दिया। नतीजा यह रहा कि पूरी टीम मात्र 100 रन पर सिमट गई। यह एकतरफा मुकाबला बन गया, जिसमें गुजरात के 7 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। मुंबई इंडियंस की गेंदबाजी इस मैच में पूरी तरह हावी रही। इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में आए अश्वनी कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट झटके और गुजरात की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। इसके अलावा अल्लाह गजनफर और मिचेल सैंटनर ने 2-2 विकेट लेकर टीम की जीत को आसान बना दिया। कप्तान हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह ने भी 1-1 विकेट हासिल किया और अपनी भूमिका निभाई। इस मैच ने एक बार फिर यह दिखाया कि मुंबई इंडियंस की टीम कितनी संतुलित और खतरनाक है। बल्लेबाजी में जहां युवा खिलाड़ियों ने जिम्मेदारी उठाई, वहीं गेंदबाजी में अनुभवी और नए खिलाड़ियों का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। खास तौर पर बुमराह की भूमिका को लेकर जो चर्चा चल रही थी, उस पर भी इस मैच के बाद काफी हद तक विराम लग गया है। रणनीतिक रूप से देखा जाए तो बुमराह को पहले ओवर में गेंदबाजी कराना या न कराना पूरी तरह मैच की स्थिति और टीम की योजना पर निर्भर करता है। हर मैच में एक ही रणनीति काम नहीं करती, इसलिए कप्तान और कोचिंग स्टाफ परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेते हैं। इस मैच में बुमराह को नई गेंद देना सफल रहा, लेकिन भविष्य में टीम फिर से उन्हें डेथ ओवर्स के लिए बचाकर रख सकती है। कुल मिलाकर, यह मुकाबला मुंबई इंडियंस के लिए हर मायने में परफेक्ट रहा—बल्लेबाजी, गेंदबाजी और रणनीति तीनों में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। वहीं गुजरात टाइटंस के लिए यह मैच कई सवाल खड़े करता है, खासकर उनकी बल्लेबाजी को लेकर, जिसे आने वाले मैचों में सुधारने की जरूरत होगी।
MS Dhoni IPL 2026: एमएस धोनी की वापसी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसमें बताया गया कि किस मैच के जरिए IPL 2026 में उनकी वापसी हो सकती है. MS Dhoni IPL 2026 Return Update: CSK के लिए कब वापसी करेंगे ‘थाला’? टीम को मिलेगी बड़ी राहत इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (Indian Premier League 2026) में Chennai Super Kings की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। टीम अपने शुरुआती तीन मुकाबले हार चुकी है, और इन हारों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही रहा—कहां हैं ‘थाला’? यानी MS Dhoni। पांच बार टीम को खिताब जिताने वाले दिग्गज कप्तान की गैरमौजूदगी ने सीएसके के प्रदर्शन पर साफ असर डाला है। अब धोनी की वापसी को लेकर जो ताजा अपडेट सामने आया है, उसने फैंस की उम्मीदें फिर जगा दी हैं। धोनी की वापसी पर बड़ा अपडेट रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमएस धोनी जल्द ही चेन्नई के ऐतिहासिक मैदान MA Chidambaram Stadium (चेपॉक) में फिटनेस टेस्ट देने वाले हैं। अगर वह इस टेस्ट में पास हो जाते हैं, तो उनकी वापसी Delhi Capitals के खिलाफ होने वाले मुकाबले में हो सकती है। यह मैच सीएसके के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि टीम लगातार तीन हार झेल चुकी है और उसे अपने अभियान को पटरी पर लाने के लिए एक बड़ी जीत की सख्त जरूरत है। ऐसे में धोनी का अनुभव और नेतृत्व टीम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हालांकि, अभी तक फ्रेंचाइजी की ओर से उनकी वापसी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन अगर सब कुछ सही रहा, तो ‘थाला’ को फिर से मैदान पर देखना फैंस के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होगा। काफ स्ट्रेन बनी बड़ी वजह आईपीएल 2026 की शुरुआत से ठीक पहले धोनी को काफ स्ट्रेन (पिंडली में खिंचाव) की समस्या हुई थी। यह चोट भले ही गंभीर नहीं मानी जाती, लेकिन एक अनुभवी खिलाड़ी के लिए इसे नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। सीएसके मैनेजमेंट ने पहले ही साफ कर दिया था कि धोनी शुरुआती दो हफ्तों तक रिहैब में रहेंगे। इसी वजह से वह शुरुआती मुकाबलों में नहीं खेल पाए। हालांकि, सकारात्मक संकेत यह रहे कि उन्हें नेट्स में अभ्यास करते हुए देखा गया। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनकी फिटनेस धीरे-धीरे बेहतर हो रही है और वह जल्द ही मैच फिट हो सकते हैं। धोनी की गैरमौजूदगी का असर सीएसके की टीम हमेशा से संतुलित और अनुभवी मानी जाती रही है, लेकिन धोनी की गैरमौजूदगी ने टीम की रणनीति और आत्मविश्वास दोनों को प्रभावित किया है। 1. नेतृत्व की कमी धोनी को दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में गिना जाता है। मैदान पर उनकी रणनीति, गेंदबाजों का इस्तेमाल और मैच पढ़ने की क्षमता अद्भुत है। उनके बिना टीम में वह स्थिरता नजर नहीं आई। 2. फिनिशिंग की समस्या धोनी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और मैच फिनिश करने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। उनकी गैरहाजिरी में सीएसके को लोअर ऑर्डर में मजबूती की कमी महसूस हुई। 3. विकेटकीपिंग का अनुभव धोनी की विकेटकीपिंग सिर्फ कैच और स्टंपिंग तक सीमित नहीं है—वह गेंदबाजों को गाइड करते हैं और विपक्षी बल्लेबाजों की कमजोरियों को पहचानते हैं। CSK की लगातार तीन हार सीजन की शुरुआत में सीएसके का प्रदर्शन उम्मीदों के बिल्कुल उलट रहा है: राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ: 8 विकेट से हार पंजाब किंग्स के खिलाफ: 5 विकेट से हार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ: 43 रन से हार इन तीनों मुकाबलों में टीम का बैटिंग और बॉलिंग दोनों विभाग असंतुलित नजर आया। खासकर मिडिल ऑर्डर और डेथ ओवर्स में टीम संघर्ष करती दिखी। क्या धोनी बदल सकते हैं CSK की किस्मत? यह सवाल अब हर क्रिकेट फैन के मन में है। और इसका जवाब काफी हद तक ‘हां’ में हो सकता है। अनुभव का फायदा धोनी ने कई बार मुश्किल हालात में टीम को जीत दिलाई है। उनका शांत स्वभाव और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। टीम का मनोबल उनकी वापसी से ड्रेसिंग रूम का माहौल पूरी तरह बदल सकता है। युवा खिलाड़ी अधिक आत्मविश्वास के साथ खेलेंगे। रणनीतिक बढ़त धोनी की गेम रीडिंग क्षमता सीएसके को विपक्षी टीम पर बढ़त दिला सकती है, खासकर चेपॉक जैसे स्पिन-फ्रेंडली पिच पर। फैंस के लिए बड़ी खबर धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक भावना हैं। Indian Premier League में उनकी लोकप्रियता किसी सुपरस्टार से कम नहीं है। उनकी वापसी का मतलब सिर्फ एक खिलाड़ी का मैदान पर उतरना नहीं है—यह करोड़ों फैंस के लिए एक उत्सव जैसा होगा। चेपॉक स्टेडियम में अगर वह खेलते हैं, तो वहां का माहौल ऐतिहासिक हो सकता है।
चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ा खतरा वैभव सूर्यवंशी होंगे. वैभव अगर छह ओवर के पावरप्ले में खेल गए, तो चेन्नई का गेंदबाजी अटैक मुश्किलों में घिर सकता है. आईपीएल 2026 के तीसरे मुकाबले में सोमवार को चेन्नई सुपर किंग्स की भिड़ंत राजस्थान रॉयल्स के साथ होगी. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है. आइए आपको राजस्थान के उन 5 खिलाड़ियों के नाम बताते हैं, जो चेन्नई के लिए इस मुकाबले में बड़ा खतरा बन सकते हैं. वैभव सूर्यवंशी: चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ा खतरा वैभव सूर्यवंशी होंगे. वैभव अगर छह ओवर के पावरप्ले में खेल गए, तो चेन्नई का गेंदबाजी अटैक मुश्किलों में घिर सकता है. वैभव ने पिछले एक साल में अपनी बल्लेबाजी से खासा प्रभावित किया है. आईपीएल 2025 में वैभव ने 7 मुकाबलों में 206 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 252 रन बनाए थे. वैभव के खेल में पिछले सीजन के बाद और ज्यादा सुधार आया है. यशस्वी जायसवाल: राजस्थान रॉयल्स के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को चेन्नई सुपर किंग्स का गेंदबाजी अटैक खूब रास आता है. यशस्वी ने चेन्नई के खिलाफ खेले 8 मुकाबलों में 161 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 266 रन बनाए हैं. इस दौरान वह तीन अर्धशतक लगा चुके हैं. यशस्वी अगर लय में नजर आए, तो चेन्नई की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. शिमरोन हेटमायर: वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज शिमरोन हेटमायर की हालिया फॉर्म काफी अच्छी चल रही है. हाल ही में खत्म हुए टी20 विश्व कप 2026 में हेटमायर का प्रदर्शन शानदार रहा था. उन्होंने 7 मुकाबलों में 186 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 248 रन बनाए थे. इस दौरान हेटमायर ने दो अर्धशतक लगाए थे. कैरेबियाई बल्लेबाज अकेले दम पर किसी भी मैच का रुख पलटने की काबिलियत रखता है. रवींद्र जडेजा: चेन्नई सुपर किंग्स के साथ लंबे समय तक खेलने के बाद जडेजा इस सीजन में राजस्थान रॉयल्स की टीम का हिस्सा हैं. जडेजा चेन्नई के बल्लेबाजों और गेंदबाजों की ताकत और कमजोरी से अच्छी तरह से वाकिफ हैं, जिसका फायदा राजस्थान को रणनीति बनाने में मिल सकता है. जडेजा इस मुकाबले में राजस्थान के लिए सबसे बड़े ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं. वह बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान दे सकते हैं. जोफ्रा आर्चर: इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर चेन्नई सुपर किंग्स के बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा लेते हुए नजर आ सकते हैं. आर्चर के पास जबरदस्त रफ्तार मौजूद है और अच्छी लाइन एंड लेंथ के बूते वह चेन्नई के बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त कर सकते हैं. आर्चर का प्रदर्शन टी20 विश्व कप 2026 में शानदार रहा था और वह टूर्नामेंट में सर्वाधिक डॉट गेंदें फेंकने वाले गेंदबाज रहे थे.