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ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब को IDF ने किया ढेर, इजरायल के रक्षा मंत्री का बड़ा दावा

Metroheadlines मार्च 18, 2026 0

 

Iran Israel US War: इस्माइल खातिब उन अधिकारियों में शामिल थे जिनके सिर पर अमेरिका ने पिछले हफ्ते अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था.

 

इजरायल के रक्षा मंत्री बुधवार (18 मार्च 2026) दावा किया है कि IDF ने ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब को मार दिया है. उन्होंने कहा कि खतीब को रात भर चले हमले में मार गिराया गया. हालांकि इसे लेकर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. इस्माइल खातिब की मौत इजरायल की ओर से ईरान के शक्तिशाली राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और आईआरजीसी के बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख की हत्या की पुष्टि के बाद हुई है.

 

इस्माइल खातिब के सिर अमेरिका ने रखा था इनाम

 

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल के रक्षामंत्री इजराइल कार्ट्ज ने कहा कि उन्होंने और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के किसी भी अन्य वरिष्ठ ईरानी अधिकारी को निशाना बनाकर मारने का अधिकार दे दिया है. खतीब उन अधिकारियों में शामिल थे जिनके बारे में अमेरिका पिछले हफ्ते जानकारी जुटा रहा था और उनका पता बताने वाले को 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम देने की पेशकश की थी.

 

इस बीच इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने तेहरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड यूनिट, सुरक्षा बलों के लिए आपूर्ति केंद्र और मिसाइल सिस्टम पर हमला किया है. इस हमले में कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं. इजरायली वायु सेना ने कहा कि उन्होंने तेहरान में कमांड सेंटर और मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया है.

 

ईरान के टॉप लीडरशिप को निशाना बना रहा इजरायल

 

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इससे पहले पुष्टि की थी कि उसके सचिव अली लारीजानी इजरायली हमले में मारे गए हैं. ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक बयान में काउंसिल ने कहा कि लारीजानी की मौत मंगलवार (17 मार्च 2026) सुबह हुई. उनके साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी, काउंसिल के सचिवालय में सुरक्षा मामलों के उप-प्रमुख अलीरेजा बायात और कई अन्य लोग भी मारे गए.

 

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि IDF ने ईरान पर चल रहे हमलों में लारीजानी को मार गिराया है. इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को पुष्टि की थी कि बसीज स्वयंसेवक बल के प्रमुख घोलमरेजा सोलेमानी की मौत अमेरिका-इजरायल के एक हमले में हुई है.

 

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा वॉट्सएप:सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट होगा

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत फोन में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएगा।   समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर?   1. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।     2. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।     3. मार्च के बाद यूजर्स को क्या करना होगा? यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर सकता है।     4. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? इंडस्ट्री एसोसिएशन IAMAI ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉग-आउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा जो काम के लिए वॉट्सएप वेब पर निर्भर हैं। साथ ही उन परिवारों को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं।     5. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।     ज्यातिरादित्य सिंधिया ने दो अन्य मामलों पर भी जानकारी दी…   1. स्टारलिंक की लॉन्चिंग     सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस 'स्टारलिंक' के बारे में सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर कंट्रोल दे सकती है।     2. BSNL अफसर का मामला     हाल ही में BSNL डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे का एक सरकारी आदेश वायरल हुआ था। इसमें उनकी सेवा के लिए करीब 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने को कहा गया था। सिंधिया ने कहा कि इस मामले में 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया गया है। 21वीं सदी के भारत में ऐसा आदेश जारी होना कतई मंजूर नहीं है। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। विवादों के बीच मंत्री सिंधिया ने ये भी बताया कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और कंपनी "हेल्दी कैश फ्लो" जेनरेट कर रही है।     नॉलेज पार्ट: क्या है सिम बाइंडिंग?     सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ 'लॉक' कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा।

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  Dubai Airport Drone Attack: अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग में दुबई भी जल रहा है. कुछ देर पहले दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला हुआ है. इसमें 4 लोग घायल हो गए, जिसमे एक भारतीय भी शामिल है.   ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग के बीच दुबई में बड़ा हादसा हुआ है. दुबई मीडिया ऑफिस ने आधिकारिक तौर पर कन्फर्म किया है कि कुछ देर पहले दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) के आसपास दो ड्रोन गिरे. इस हादसे में चार लोग घायल हुए हैं. दो घानाई नागरिकों और एक बांग्लादेशी नागरिक और एक भारतीय नागरिक को मामूली चोटें आईं हैं.     ड्रोन-मिसाइल अटैक से सिक्योरिटी हाई अलर्ट अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि ड्रोन ईरान से आए थे या किसी और वजह से गिरे, लेकिन जंग के चलते इलाके में ईरानी ड्रोन और मिसाइल अटैक्स की वजह से सिक्योरिटी अलर्ट बहुत हाई है. UAE के एयर डिफेंस सिस्टम ने पिछले कुछ घंटों में कई ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है. दुबई एयरपोर्ट दुनिया का सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है, लेकिन अभी फ्लाइट्स पूरी तरह सामान्य चल रही हैं और कोई बड़ा डिसरप्शन नहीं हुआ है.       खाड़ी देशों में ईरान के हमले बढ़े ये घटना ऐसे समय पर हुई है जब ईरान ने गल्फ देशों यानी UAE, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और कुवैत पर काउंटर अटैक्स तेज कर दिए हैं. अबू धाबी के रुवैस रिफाइनरी में भी ड्रोन हमले से आग लगी थी और उसे बंद करना पड़ा था. भारत सरकार और भारतीय दूतावास दुबई में घायल भारतीय नागरिक की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरी मदद पहुंचाने की तैयारी में हैं.   ये अटैक्स जंग शुरू होने यानी 28 फरवरी 2026 से अब तक जारी हैं. ईरान ने गल्फ देशों पर सैकड़ों मिसाइल-ड्रोन दागे हैं, जबकि UAE जैसे देशों ने ज्यादातर इंटरसेप्ट किए हैं.       UAE में भारतीयों के लिए एडवाइजरी भारत सरकार ने UAE में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है. दुबई और अबू धाबी में रहने वाले भारतीयों को अलर्ट रहने और लोकल अथॉरिटीज के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है. अगर कोई भारतीय नागरिक प्रभावित हुआ है, तो भारतीय दूतावास दुबई (+971-4-3971222) या अबू धाबी (+971-2-4492700) से संपर्क करें.

Metroheadlines मार्च 11, 2026 0

दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:

9 दिन बाद भी जंग से दूर शिया लड़ाके, समर्थन में सिर्फ बयान दे रहे

नेपाल में कांग्रेस-वामपंथी पार्टियों का सफाया:चार साल पुरानी पार्टी RSP ने 36 सीटें जीतीं, 83 पर बढ़त; बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना तय

भारत विरोधी ओली 4000 वोटों से पीछे:बालेन शाह से अपने गढ़ में मिल रही हार, 4 साल पुरानी पार्टी RSP सबसे आगे

  नेपाल आम चुनाव 2026: बालेन शाह की RSP सबसे आगे, ओली अपने गढ़ में पीछे   नेपाल में हुए ताजा संसदीय चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार रैपर से नेता बने और काठमांडू के लोकप्रिय मेयर रहे बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) चुनाव में सबसे आगे चल रही है। यह पार्टी केवल चार साल पहले बनी थी, लेकिन वर्तमान चुनाव में जिस तरह का समर्थन उसे मिल रहा है, वह नेपाल की पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।   रुझानों के अनुसार राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी एक सीट जीत चुकी है और 93 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। दूसरी ओर नेपाल की पुरानी और स्थापित पार्टी नेपाली कांग्रेस, जिसके प्रमुख नेताओं में गगन थापा शामिल हैं, एक सीट जीतने के साथ लगभग 10 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (CPN-UML) भी करीब 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केपी ओली अपने ही गढ़ झापा-5 सीट पर बालेन शाह से लगभग 4000 वोटों से पीछे चल रहे हैं।     नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव   नेपाल की राजनीति पिछले कई दशकों से कुछ चुनिंदा पार्टियों के बीच ही घूमती रही है। इनमें प्रमुख रूप से नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (CPN-UML) और माओवादी केंद्र जैसे दल शामिल रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में जनता के बीच इन पारंपरिक दलों के प्रति असंतोष बढ़ा है।   भ्रष्टाचार के आरोप, राजनीतिक अस्थिरता, सरकारों का बार-बार गिरना और आर्थिक समस्याओं के कारण लोगों में नई राजनीतिक ताकतों की तलाश बढ़ी है। इसी माहौल में बालेन शाह और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का उदय हुआ।   बालेन शाह ने पहले काठमांडू के मेयर चुनाव में जीत हासिल करके देशभर में लोकप्रियता हासिल की थी। उन्होंने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया जो पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से अलग है और सीधे जनता के मुद्दों पर काम करता है।     बालेन शाह कौन हैं   बालेन शाह का असली नाम बालेन्द्र शाह है। वे पेशे से इंजीनियर हैं और युवाओं के बीच रैपर के रूप में भी काफी लोकप्रिय रहे हैं। उनकी छवि एक ईमानदार और आधुनिक सोच वाले नेता की है। काठमांडू के मेयर बनने के बाद उन्होंने शहर में कई प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यों की शुरुआत की, जिससे उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 2022 में बनी थी। इतनी नई पार्टी होने के बावजूद वर्तमान चुनाव में जिस तरह का समर्थन उसे मिल रहा है, वह नेपाल की राजनीति में एक नई लहर का संकेत है।     केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका   नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे हैं। वे कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (CPN-UML) के प्रमुख नेता हैं और कई बार प्रधानमंत्री पद संभाल चुके हैं। लेकिन इस चुनाव में उन्हें अपने ही क्षेत्र झापा-5 में कठिन मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। शुरुआती रुझानों के अनुसार वे लगभग 4000 वोटों से पीछे चल रहे हैं। यह सीट उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है क्योंकि उन्होंने 2017 और 2022 दोनों चुनाव इसी सीट से जीते थे। अगर अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में जाते हैं तो यह नेपाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जाएगा।   गगन थापा और नेपाली कांग्रेस की स्थिति   नेपाल की प्रमुख लोकतांत्रिक पार्टी नेपाली कांग्रेस भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। गगन थापा इस पार्टी के युवा और प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। शुरुआती रुझानों में नेपाली कांग्रेस एक सीट जीत चुकी है और लगभग 10 सीटों पर आगे चल रही है। हालांकि यह प्रदर्शन पार्टी की उम्मीदों से कम माना जा रहा है। नेपाली कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह इस चुनाव में बड़ी ताकत बनकर उभरेगी, लेकिन अभी तक के रुझान बताते हैं कि जनता का रुझान नई पार्टियों की ओर बढ़ रहा है।   नेपाल में मतदान प्रतिशत   नेपाल में इस बार चुनाव के दौरान मतदाताओं का उत्साह काफी देखने को मिला। चुनाव आयोग के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मतदान किया। यह पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। चुनाव के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मतदान के बाद बैलट बॉक्स को सील कर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और अब उनकी गिनती की जा रही है। चुनाव आयोग के अनुसार मतगणना पूरी होने में तीन से चार दिन का समय लग सकता है और कोशिश की जा रही है कि 9 मार्च तक सभी सीटों के परिणाम घोषित कर दिए जाएं।   चुनाव से पहले हुए हिंसक प्रदर्शन   नेपाल में चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण रहा था। पिछले साल सितंबर में कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण सरकार की नीतियों और आर्थिक समस्याओं को माना जा रहा था। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए थे। इन घटनाओं के बाद चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना सरकार और चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि चुनाव के दिन मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा और लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया।     नेपाल-भारत संबंधों पर प्रभाव   नेपाल की राजनीति का असर भारत के साथ उसके संबंधों पर भी पड़ता है। केपी शर्मा ओली को अक्सर भारत विरोधी रुख अपनाने वाले नेता के रूप में देखा जाता रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान नेपाल और भारत के संबंधों में कई बार तनाव देखने को मिला था। यदि इस चुनाव में उनकी पार्टी कमजोर पड़ती है और नई राजनीतिक ताकतें सत्ता में आती हैं तो इससे नेपाल-भारत संबंधों में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह जैसे नए नेता भारत और अन्य पड़ोसी देशों के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाने की कोशिश कर सकते हैं।     युवाओं की राजनीति में बढ़ती भूमिका   नेपाल के इस चुनाव की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें युवाओं की भूमिका काफी बढ़ गई है। बड़ी संख्या में युवा मतदाता नई पार्टियों और नए नेताओं का समर्थन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी राजनीतिक अभियान चलाए गए, जिसने युवाओं को राजनीति से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। बालेन शाह की लोकप्रियता भी काफी हद तक युवाओं के बीच उनके प्रभाव के कारण है।   पारंपरिक राजनीति को चुनौती   राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का उभार यह दिखाता है कि नेपाल की जनता अब पारंपरिक राजनीति से बदलाव चाहती है। दशकों से सत्ता में रहने वाली पार्टियों के खिलाफ लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। नई पार्टियां खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ और पारदर्शिता के समर्थक के रूप में पेश कर रही हैं। यही कारण है कि मतदाता उन्हें मौका देने के लिए तैयार दिख रहे हैं।   आगे क्या होगा   अभी मतगणना पूरी नहीं हुई है और अंतिम परिणाम आने में कुछ दिन लग सकते हैं। लेकिन शुरुआती रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि नेपाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। यदि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी अपनी बढ़त बरकरार रखती है तो यह नेपाल के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होगी। इससे देश में नई राजनीतिक दिशा तय हो सकती है।

Metroheadlines मार्च 6, 2026 0

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