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दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:

Metroheadlines मार्च 10, 2026 0

दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:90% ईरानी तेल का एक्सपोर्ट यहां से, एक्सपर्ट बोले- इस पर हमले से विश्वयुद्ध तय

 

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अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड अचानक बेहद अहम हो गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है।

 

दरअसल ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। यहां बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और जहाजों में तेल भरने की फैसिलिटी मौजूद हैं।

 

इस टर्मिनल से हर दिन करीब 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है। 1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस जगह को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर डेवलप किया गया था और तब से यह ईरान की ऑयल सप्लाई की रीढ़ बन गया।

 

हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल डोरान ने कहा कि ट्रम्प सरकार युद्ध के बाद की ईरानी अर्थव्यवस्था के आधार को तबाह नहीं करना चाहती है। यह एक लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी रेड लाइन है। अगर यहां हमला हुआ तो ईरान बहुत बड़े पैमाने पर हमला कर सकते हैं, जिससे तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन जाएंगे।

 

 

जंग के बीच भी जारी है तेल निर्यात

 

अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है, लेकिन खार्ग आइलैंड को अब तक सीधे हमला करके निशाना नहीं बनाया गया।

सैटेलाइट डेटा और जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनियों के मुताबिक युद्ध के बावजूद ईरान यहां से लगातार तेल निर्यात कर रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल टैंकरों के जरिए बाहर भेजा गया है। असली आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है क्योंकि ईरान के कई जहाज अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं।

 

 

डार्क फ्लीट से भेजा जा रहा तेल

 

ईरान कई बार ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। ये जहाज अपनी लोकेशन दिखाने वाली ट्रैकिंग मशीन बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर स्थित है।

 

हाल ही में एक बड़ा तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करते समय कुछ समय के लिए ट्रैकिंग से गायब हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि वह जहाज एशिया की ओर जा रहा था ।

 

 

खार्ग आइलैंड के पास दुनिया के अहम तेल रास्ते

 

खार्ग आइलैंड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है।

दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर इस इलाके में हमला होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनल को तबाह कर दिया जाए या उस पर कब्जा कर लिया जाए, तो ईरान की सबसे बड़ी आय बंद हो सकती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा ईरान की सरकार और उसकी सैन्य ताकत के लिए सबसे बड़ा आर्थिक सहारा है। अगर यह कमाई रुक जाती है तो ईरान के लिए लंबे समय तक युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

 

 

हमला हुआ तो क्या असर होगा

 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ तो इसके दो बड़े असर हो सकते हैं:

  • ईरान की तेल से होने वाली कमाई अचानक गिर सकती है
  • दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं

कुछ अनुमानों के मुताबिक अगर यहां से सप्लाई रुकती है तो तेल की कीमत प्रति बैरल करीब 10 डॉलर तक बढ़ सकती है।

 

 

ईरान की तेल उत्पादन क्षमता

 

इस समय ईरान करीब 33 लाख बैरल कच्चा तेल का प्रोडक्शन करता है। इसके अलावा लगभग 13 लाख बैरल कंडेन्सेट और अन्य लिक्विड ईंधन का भी प्रोडक्शन करता है है। इस तरह कुल ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का 4.5% हिस्सा ईरान से आता है।

ईरान के बड़े तेल क्षेत्र जैसे अहवाज, मरून और गचसरान से पाइपलाइन सीधे खार्ग आइलैंड तक आती हैं। यहां तेल को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर टैंकर जहाजों में भरकर दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जाता है।

आइलैंड पर करीब 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है। फिलहाल अनुमान है कि यहां लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल स्टोरेज में मौजूद है, जो सामान्य हालात में 10 से 12 दिन के निर्यात के बराबर है।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंग शुरू होने से ठीक पहले ईरान ने खार्ग आइलैंड से ऑयल एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा दिया था।

15 से 20 फरवरी के बीच तेल निर्यात 30 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गया था, जो नॉर्मल लेवल से लगभग तीन गुना था। माना जा रहा है कि ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा तेल बाहर भेजने की कोशिश की।

 

 

ईरान-इराक वॉर में इस आइलैंड पर हमला हुआ था

 

खार्ग आइलैंड पहले भी कई बार रणनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है। 1979 के ईरान बंधक संकट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को सलाह दी गई थी कि इस आइलैंड पर कब्जा कर लिया जाए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

1980 के दशक में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के समय अमेरिका ने ईरान की कुछ अन्य तेल सुविधाओं पर हमला किया था, लेकिन खार्ग आइलैंड को निशाना नहीं बनाया गया।

हालांकि ईरान-इराक वॉर के दौरान इराकी हमलों में इस आइलैंड के तेल टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन बाद में ईरान ने इसे दोबारा बना लिया।

 

 

अभी तक हमला क्यों नहीं किया गया

 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि खार्ग आइलैंड पर हमला करने से दुनिया भर के तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और फैल सकता है।

 

यही वजह है कि अभी तक अमेरिका और उसके सहयोगी देश पहले ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर कैपिसिटी को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

इसलिए फिलहाल यह छोटा सा आइलैंड सीधे युद्ध का मैदान नहीं बना है, लेकिन आने वाले समय में जंग की दिशा तय करने में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।

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इजराइली मीडिया वाइनेट की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सेना इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि कुछ देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने दिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उन देशों को पहले इजराइल और अमेरिका के राजदूतों को अपने देश से निकालना होगा।

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हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

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ये हैं सबसे गलत और खतरनाक फूड कॉम्बिनेशन, आयुर्वेद में भी है इनका जिक्र

  Causes Of Bloating And Gas: हम क्या खाते हैं, इसका हमारी सेहत पर काफी असर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन फूड कॉम्बिनेशन से आपको बचना चाहिए और आयुर्वेद इसको लेकर क्या कहता है   Which Foods Should Not Be Eaten Together: खाना खाते समय हमें कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत होती है. हम क्या खाते हैं और किन चीजों को साथ में मिलाकर खाते हैं, इसका सीधा असर हमारे डाइजेशन शक्ति पर पड़ता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन पाचन को बिगाड़ सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक तत्व जमा कर सकते हैं. इसका नतीजा गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. चलिए आपको आयुर्वेद के हिसाब से बताते हैं कि किन कॉम्बिनेशन से हमें बचना चाहिए.      क्या कहता है आयुर्वेद?     आयुर्वेद के बारे में जानकारी देने वाली संस्था kevaayurveda के अनुसार, आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की वात, पित्त, कफ और पाचन क्षमता अलग होती है कुछ खानें की चीजें एक-दूसरे के विपरीत गुण रखते हैं. यदि इन्हें बार-बार साथ में खाया जाए तो डाइजेशन सिस्टम पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है. इससे गैस, कब्ज, सीने में जलन, मुंहासे, कमजोर इम्यूनिटी और डाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.     किन फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए?     kevaayurveda के अनुसार, कुछ प्रमुख गलत फूड कॉम्बिनेशन जिनसे बचने की सलाह दी जाती है, उनमें सबसे पहले आता है दूध और मछली. आयुर्वेद के अनुसार दूध ठंडा और भारी होता है, जबकि मछली गर्म तासीर वाली मानी जाती है. दोनों को साथ लेने से पाचन गड़बड़ा सकता है और स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसी तरह दूध के साथ खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू या अनानास भी ठीक नहीं माने जाते, क्योंकि ये पेट में दूध को फाड़ सकते हैं और गैस या एसिडिटी बढ़ा सकते हैं.   गरम भोजन के साथ शहद मिलाना भी आयुर्वेद में हानिकारक बताया गया है. शहद को गर्म करने से उसके गुण बदल सकते हैं और शरीर में टॉक्सिक प्रभाव पैदा हो सकता है. भारी भोजन के तुरंत बाद फल खाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि फल जल्दी पचते हैं और भारी भोजन के साथ पेट में फर्मेंटेशन शुरू कर सकते हैं. दही और चीनी का मेल भी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. दही पहले से ही खट्टा और ठंडा होता है, जबकि रिफाइंड चीनी शरीर में असंतुलन बढ़ा सकती है. रात में दही को फल या ठंडी चीजों के साथ लेना कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी या साइनस की समस्या हो सकती है. बासी भोजन के साथ दूध लेना भी पाचन के लिए सही नहीं माना गया.     किन चीजों का सेवन करना चाहिए?     आयुर्वेद सलाह देता है कि मौसमी आहार लें, जरूरत से ज्यादा न खाएं और अदरक, जीरा, सौंफ जैसे मसालों का उपयोग करें, जो डाइजेशन को मजबूत बनाते हैं. सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाने से डाइजेशन मजबूत रहती है, न्यूट्रिशन तत्वों का ऑब्जर्वेशन बेहतर होता है और शरीर संतुलित रहता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह नियम और भी लाभकारी माने जाते हैं.  

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले किए:महिलाओं-बच्चे समेत 4 लोगों की मौत, 15 घायल; तालिबान बोला- इसका जवाब देंगे

  पाकिस्तान ने गुरुवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। रॉयटर्स के मुताबिक, काबुल में घरों पर हुई बमबारी में 4 लोगों की मौत और 15 घायल हो गए। इसमें महिलाएं और बच्चे शामिल है। हमलों में कई घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।   वहीं, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के मुताबिक, यह हमला प्राइवेट एयरलाइन 'काम एयर' के फ्यूल डिपो पर किया गया, जो सिविलियन विमानों और UN के विमानों को भी फ्यूल सप्लाई करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा।   पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के ठिकानों पर की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि हाल के महीनों में देश में बढ़ते आतंकी हमलों के बाद यह ऑपरेशन शुरू किया गया।     काबुल में शुक्रवार की रात पाकिस्तानी हवाई हमले में क्षतिग्रस्त हुए एक घर के बाहर घायल अफगान नागरिक बैठे हुए।   पाकिस्तान ने तालिबान नेताओं के गढ़ को निशाना बनाया   तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पाकिस्तानी हमले कंधार और पक्तिका प्रांतों में भी किए गए। कंधार तालिबान नेताओं का गढ़ माना जाता है।   वहीं, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।   दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।   पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात   पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी।   पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया।   अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को 'सही समय पर कड़ा जवाब' दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।   पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।   पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 415 तालिबान लड़ाके मारे पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ हमले को ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन नाम दिया था और काबुल समेत कई प्रांतों में हमले किए। ‘गजब लिल हक’ का मतलब है, अपने हक के लिए खड़े होना। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक अब तक - 415 तालिबान लड़ाके मारे गए 580 से ज्यादा घायल हुए 182 पोस्ट तबाह की गईं 31 पोस्ट पर कब्जा किया गया 185 टैंक और सैन्य वाहन तबाह किए गए पाकिस्तानी वायुसेना ने दावा किया था कि उसने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया। वहीं तालिबान का कहना है कि उसके सिर्फ 8 से 13 लड़ाके मारे गए और कुछ घायल हुए। उसने दावा किया था कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया।   1 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए   पिछले कुछ हफ्तों में अफगान और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में 56 नागरिक मारे गए हैं। इनमें 24 बच्चे भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक इन हमलों के कारण करीब 1.15 लाख लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं।   पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों?   2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।   ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर   ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के मुताबिक, बुर्किना फासो के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन चुका है, जबकि 2024 में यह चौथे स्थान पर था। TTP के हमलों में 90% की वृद्धि हुई है। बलूच आर्मी (BLA) के हमलों में 60% बढ़ोतरी हुई है। इस्लामिक स्टेट- खुरासान (IS-K) ने अब पाकिस्तानी शहरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।   दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव   अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है।   पाकिस्तान-अफगानिस्तान में जंग के हालात:PAK बोला- 274 अफगान लड़ाके मारे, 400 से ज्यादा घायल, तालिबान हमलों के पीछे भारत   पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालात जंग जैसे हो गए हैं। पाकिस्तान एयरफोर्स ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में फिर से एयरस्ट्राइक की है। वहीं तालिबान ने दावा किया है कि उसने इस्लामाबाद के फैजाबाद सैन्य ठिकाने समेत कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया।

Metroheadlines मार्च 13, 2026 0

Dubai Airport Drone Attack: दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन से हमला, एक भारतीय समेत 4 लोग घायल

दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:

9 दिन बाद भी जंग से दूर शिया लड़ाके, समर्थन में सिर्फ बयान दे रहे

नेपाल में कांग्रेस-वामपंथी पार्टियों का सफाया:चार साल पुरानी पार्टी RSP ने 36 सीटें जीतीं, 83 पर बढ़त; बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना तय

नेपाल में आम चुनाव की मतगणना जारी है। 165 सीटों पर शुरुआती रुझान आ चुके हैं। रैपर और काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।    RSP ने अब तक 42 सीटें जीत ली हैं, जबकि 78 सीटों पर आगे चल रही है। यह पार्टी सिर्फ 4 साल पहले एक पत्रकार रहे रबि लामिछाने ने बनाई थी।    पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा-5 सीट पर बालेन शाह से 40 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं। उन्हें सिर्फ 15,409 हजार वोट मिले हैं, जबकि बालेन शाह को 55,934 वोट मिल चुके हैं। ओली ने झापा-5 सीट से 2017 और 2022 का चुनाव जीता था।   नेपाल में 110 सीटें पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर मिलती हैं। इसमें वोटर किसी उम्मीदवार को नहीं बल्कि किसी पार्टी को वोट देती है। पूरे देश में पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उन्हें संसद में सीटें मिलती हैं।   इसमें भी बालेन शाह की RSP आगे है। चुनाव आयोग के अनुसार अब तक RSP को 54.8 प्रतिशत वोट मिले हैं।   पिछले साल सितंबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद 5 मार्च को हुए चुनाव में 58% लोगों ने वोट डाले। वोटों की गिनती पूरी होने में 3 से 4 दिन लगने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने कहा है कि 9 मार्च तक काउंटिंग पूरी करने की कोशिश की जाएगी।   नेपाल में 2 तरीके से सांसदों का चुनाव   नेपाल में चुनाव की व्यवस्था मिश्रित चुनाव प्रणाली पर आधारित है। यानी यहां दो तरीकों से सांसद चुने जाते हैं- सीधे चुनाव से और पार्टी को मिले कुल वोट के हिसाब से।   सीधा चुनाव (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट)   संसद की 275 में से 165 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। हर इलाके (निर्वाचन क्षेत्र) में लोग अपने उम्मीदवार को वोट देते हैं। जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वही जीतता है।   वोट % के आधार पर सीटें (प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन)   बाकी बची 110 सीटें पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर मिलती हैं। इसमें वोटर किसी उम्मीदवार को नहीं बल्कि किसी पार्टी को वोट देती है। पूरे देश में पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उन्हें संसद में सीटें मिलती हैं।   इस सिस्टम का मकसद यह है कि छोटे दलों और अलग-अलग सामाजिक समूहों को भी संसद में जगह मिल सके और कोई एक पार्टी पूरी तरह हावी न हो।   नेपाल चुनाव के अबतक के नतीजे…       पार्टी जीत बढ़त राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 42 78 नेपाली कांग्रेस 6 6 CPN-UML 2 9 नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) 2 7 अन्य 1 5   नेपाल चुनाव से जुड़ीं 3 तस्वीरें…     नेपाल के आम चुनाव के नतीजों की घोषणा से पहले शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) के समर्थक चुनाव आयोग के बाहर नारे लगाते हुए।     नेपाल के आम चुनाव के नतीजों की घोषणा से पहले शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) के समर्थक चुनाव आयोग के बाहर इकट्ठा हुए।     नेपाल के आम चुनाव के नतीजों की घोषणा के दौरान शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) के समर्थक चुनाव आयोग के बाहर पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘घंटी’ को बजाते हुए।    

Metroheadlines मार्च 7, 2026 0

भारत विरोधी ओली 4000 वोटों से पीछे:बालेन शाह से अपने गढ़ में मिल रही हार, 4 साल पुरानी पार्टी RSP सबसे आगे

ईरान बोला-अमेरिका ने भारत के गेस्ट शिप पर हमला किया:उन्हें करारा जवाब देंगे; अमेरिकी संसद में ईरान पर हमला रोकने वाला प्रस्ताव फेल

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना डेंजर जोन! 1.5 करोड़ बैरल तेल यहीं से होता है सप्लाई, भारत-चीन का बड़ा नुकसान क्यों?

अफगानिस्तान का पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हमला:तालिबान के मंत्री बोले- हमने डूरंड लाइन पार की, PAK का दावा- 400 अफगान लड़ाके मारे

  फगानिस्तान का पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हमला? डूरंड लाइन पार करने का दावा, पाकिस्तान बोला- 400 अफगान लड़ाके मारे     दक्षिण एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहा सीमा विवाद अब खुली सैन्य झड़पों में बदलता दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में अफगान तालिबान के एक मंत्री ने दावा किया है कि उनकी सेनाओं ने डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान के रणनीतिक महत्व के Noor Khan Airbase पर कार्रवाई की।   वहीं पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि इस ऑपरेशन को नाकाम कर दिया गया और करीब 400 अफगान लड़ाकों को मार गिराया गया। दोनों देशों के दावों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।     क्या है नूरखान एयरबेस?   रावलपिंडी में स्थित नूरखान एयरबेस पाकिस्तान के सबसे अहम सैन्य अड्डों में गिना जाता है। यह न केवल वायुसेना का प्रमुख केंद्र है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजधानी इस्लामाबाद के नजदीक है।   किसी भी संभावित हमले या घुसपैठ की खबर ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है।     तालिबान मंत्री का बड़ा बयान   अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज Taliban के एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया कि उनकी फोर्सेज ने विवादित डूरंड लाइन पार कर “रक्षात्मक कार्रवाई” की।   मंत्री के मुताबिक, यह कदम पाकिस्तान की ओर से सीमा पर लगातार हो रही गोलाबारी और कथित घुसपैठ के जवाब में उठाया गया। उन्होंने कहा कि “अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता और सीमा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।”   हालांकि, इस दावे के समर्थन में अभी तक स्वतंत्र रूप से कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।   पाकिस्तान का पलटवार और 400 लड़ाकों के मारे जाने का दावा   पाकिस्तानी सेना ने अफगान दावे को “भ्रामक और अतिरंजित” बताया है। सेना के प्रवक्ता के अनुसार, अफगान सीमा से बड़ी संख्या में सशस्त्र लड़ाकों ने घुसपैठ की कोशिश की, जिसे नाकाम कर दिया गया।   पाकिस्तान ने दावा किया कि जवाबी कार्रवाई में लगभग 400 अफगान लड़ाके मारे गए। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक संभव नहीं हो पाई है।   विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में हताहतों का दावा असाधारण है और इसकी पुष्टि के लिए सैटेलाइट इमेज, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट या स्वतंत्र मीडिया जांच की आवश्यकता होगी।     डूरंड लाइन विवाद: जड़ में पुराना तनाव   अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का प्रमुख कारण डूरंड लाइन है। 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगान अमीर के बीच खींची गई इस सीमा को पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से इसे मान्यता नहीं दी।   तालिबान के सत्ता में आने के बाद भी इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। सीमा पर बाड़ लगाने, चेकपोस्ट निर्माण और सैन्य तैनाती को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार झड़पें हो चुकी हैं।     हालिया घटनाक्रम: तनाव क्यों बढ़ा?   विशेषज्ञों के मुताबिक हाल के महीनों में:   सीमा पार आतंकी गतिविधियों के आरोप टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) की सक्रियता सीमा चौकियों पर गोलीबारी शरणार्थी मुद्दा इन सभी कारणों ने दोनों देशों के रिश्तों को और बिगाड़ा है।   पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ हमले होते हैं। वहीं तालिबान सरकार कहती है कि वह किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन इस्तेमाल नहीं होने देगी।     क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव   यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ सकता है। चीन, जो पाकिस्तान का करीबी सहयोगी है, स्थिति पर नजर रखे हुए है। अमेरिका और नाटो बलों की वापसी के बाद अफगानिस्तान की स्थिरता पहले ही सवालों के घेरे में है। मध्य एशिया के देश भी संभावित अस्थिरता को लेकर चिंतित हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है।     सैन्य विश्लेषण: क्या संभव है एयरबेस पर हमला?   सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि नूरखान एयरबेस जैसे हाई-सिक्योरिटी ठिकाने पर सीधे हमले की संभावना बेहद जटिल होती है। ऐसे ठिकानों पर: मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट रडार विशेष कमांडो तैनाती जैसी व्यवस्थाएं होती हैं।   यदि कोई घुसपैठ हुई भी हो, तो वह सीमित स्तर पर रही होगी। बड़े पैमाने के हमले की पुष्टि के लिए विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं।     क्या बढ़ सकता है संघर्ष?   वर्तमान हालात में तीन संभावनाएं सामने आती हैं:   सीमित झड़पें और बयानबाजी – तनाव कुछ दिनों में कूटनीतिक बातचीत से शांत हो सकता है। सीमा पर लगातार सैन्य कार्रवाई – दोनों ओर से जवाबी हमले जारी रह सकते हैं। पूर्ण सैन्य टकराव – यह स्थिति बेहद गंभीर होगी और क्षेत्रीय अस्थिरता को जन्म दे सकती है। फिलहाल दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से युद्ध की घोषणा नहीं की है, लेकिन बयानबाजी तीखी होती जा रही है।     नागरिकों पर असर सीमा के आसपास रहने वाले लोगों में भय का माहौल है। कई गांवों से अस्थायी पलायन की खबरें सामने आई हैं। व्यापार और ट्रांजिट मार्ग भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।

Metroheadlines मार्च 2, 2026 0

अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमला किया, कई शहरों में धमाके:सुप्रीम लीडर खामेनेई सुरक्षित जगह भेजे गए; अमेरिका से बातचीत के बीच अटैक !

मोदी इजराइल के होलोकॉस्ट मेमोरियल पहुंचे:हिटलर शासन में मारे गए 60 लाख यहूदियों को श्रद्धांजलि दी; राष्ट्रपति से मिले, डिफेंस डील संभव

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