अंतर्राष्ट्रीय समाचार

ईरान की मदद क्यों नहीं कर रहे हूती विद्रोही:

9 दिन बाद भी जंग से दूर शिया लड़ाके, समर्थन में सिर्फ बयान दे रहे

Metroheadlines मार्च 9, 2026 0

 

इजराइल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव फैल गया है। इस जंग में ईरान, इजराइल,सऊदी, लेबनान, UAE जैसे मिडिल ईस्ट के कुल 12 देश शामिल हो चुके हैं। हालांकि जंग के 9 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक यमन इससे दूर है।

 

यमन में हूती विद्रोही रहते हैं जो कि ईरान के सहयोगी माने जाते हैं। अक्टूबर 2023 में गाजा जंग शुरू होने के बाद कई बार इजराइल और हूती विद्रोही एक-दूसरे पर हमला कर चुके हैं। पिछले साल जून में इजराइल और ईरान के बीच 12 दिन जंग चली थी, तब भी हूती विद्रोही इस जंग में शामिल थे।

 

हालांकि इस बार 28 फरवरी से जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए, तब से अब तक हूती विद्रोहियों ने ईरान का समर्थन केवल बयानों के जरिए ही किया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि वे आगे भी इस जंग से दूर रहेंगे या नहीं।

यमन में अभी तक इजराइल और अमेरिका के हमलों से बचा हुआ है।

 

अमेरिका-इजराइल के हमले से बचना मकसद

 

अल जजीरा के मुताबिक एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि हूती जंग में हिस्सा लेंगे। फिलहाल उनका इससे दूर रहना किसी रणनीति से जुड़ा हो सकता है।

 

मिडिल ईस्ट मामलों पर नजर रखने वाले लुका नेवोला ने अल जजीरा से कहा कि हूती विद्रोहियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि अमेरिका और इजराइल की सीधी जवाबी कार्रवाई से बचा जाए।

 

पिछले साल अगस्त में इजराइल ने यमन में हवाई हमले किए थे, जिनमें हूती सरकार के कम से कम 12 सीनियर मेंबर मारे गए थे। इनमें प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी और आर्मी चीफ मोहम्मद अल-घुमारी भी शामिल थे।

 

यह हूती विद्रोहियों के लिए बहुत बड़ा नुकसान था। अमेरिका तथा इजराइल के साथ टकराव में उनकी सबसे बड़े नुकसान में से एक माना गया था।

 

 

अहमद अल रहावी की मौत 28 अगस्त 2025 को सना (यमन) में इजराइली एयरस्ट्राइक में हुई थी।

अहमद अल रहावी की मौत 28 अगस्त 2025 को सना (यमन) में इजराइली एयरस्ट्राइक में हुई थी।

 

इजराइल के हमलों के बाद हूती विद्रोही सतर्क हुए

 

इस घटना और पिछले साल हुए अन्य हमलों के बाद हूती लीडरशिप अब ज्यादा सतर्क हो गया है। उन्हें डर है कि अगर वे बड़ा कदम उठाते हैं तो उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर भारी हवाई हमले हो सकते हैं।

 

नेवोला के मुताबिक हूती विद्रोहियों को इजराइल की खुफिया क्षमता से भी डर है और उन्हें आशंका है कि उनकी टॉप लीडरशिप को निशाना बनाया जा सकता है।

 

हालांकि पिछले साल के नुकसान के बावजूद हूती विद्रोही पूरी तरह कमजोर नहीं हुए हैं और वे अब भी अपने विरोधियों पर हमले करने की क्षमता रखते हैं।

 

नेवोला के अनुसार अगर अमेरिका या इजराइल सीधे उन पर हमला करते हैं या यमन में उनके विरोधी गुट उनके खिलाफ फिर से सैन्य अभियान शुरू करते हैं, तो हूती फिर से हमले तेज कर सकते हैं।

 

हूती विद्रोही बोले- जंग के लिए तैयार हैं

 

हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इस सप्ताह कहा कि यमन ईरान और वहां की जनता के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि उनके सैनिक युद्ध के लिए तैयार हैं और हालात के हिसाब से किसी भी समय सैन्य कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

 

यमनी राजनीतिक विश्लेषक सदाम अल-हुरैबी का कहना है कि अगर ईरान उनसे मदद मांगेगा तो हूती युद्ध में शामिल हो सकते हैं। उनके मुताबिक तेहरान फिलहाल अपने सभी विकल्प एक साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहता और वह आने वाले समय के लिए हूती विद्रोहियों को एक अहम ताकत के रूप में बचाकर रखना चाहता है।

 

अल-हुरैबी ने कहा कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले नहीं रुकते, तो हूती लंबे समय तक चुप नहीं बैठेंगे। उनके अनुसार सना और हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले अन्य इलाकों में युद्ध की तैयारी चल रही है।

 

हूती विद्रोहियों के पास रेड सी में फिर से अशांति फैलाने की क्षमता है। वे ड्रोन और मिसाइल के जरिए इजराइल पर भी हमला कर सकते हैं। अल-हुरैबी का कहना है कि ऐसा होना लगभग तय है, बस यह हूती विद्रोहियों और ईरान के तय समय पर निर्भर करेगा।

 

हूती विद्रोहियों के पास कई लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता है। नेवोला के अनुसार अगर युद्ध लंबा चलता है और हूती विद्रोहियों को सीधे खतरा महसूस होता है, तो वे अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर इजराइल, अमेरिकी युद्धपोतों, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल के सहयोगी देशों जैसे संUAE और सोमालिलैंड को भी निशाना बना सकते हैं।

 

यमन में खामेनेई की मौत के बाद 1 मार्च को ईरान के समर्थन में रैली निकाली गई। इसमें खामेनेई की तस्वीर को चूमता एक युवक।

यमन में खामेनेई की मौत के बाद 1 मार्च को ईरान के समर्थन में रैली निकाली गई। इसमें खामेनेई की तस्वीर को चूमता एक युवक।

 

 

जहाजों पर हमला कर सकते हैं हूती विद्रोही

 

 

साल 2023 के आखिर से लेकर 2025 तक हूती विद्रोहियों ने रेड सी से गुजरने वाले जहाजों पर लगातार हमले किए थे। इस अभियान में कम से कम 9 नाविकों की मौत हुई और चार जहाज डूब गए। इससे रेड सी के ट्रेड पर बड़ा असर पड़ा, जहां से हर साल लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का सामान गुजरता था।

 

अमेरिका और इजराइल के हालिया हमलों में ईरान के कई राजनीतिक और सैन्य नेताओं की भी मौत हुई है। अगर ईरानी शासन कमजोर पड़ता है या गिर जाता है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान यमन के हूती विद्रोहियों को भी हो सकता है।

 

अल-हुरैबी के अनुसार अगर ईरान कमजोर होता है, तो यमन तक पहुंचने वाले ईरानी हथियारों की तस्करी कम हो सकती है या पूरी तरह बंद हो सकती है। यह हूती विद्रोहियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।

 

संयुक्त राष्ट्र ने 2022 में कहा था कि अरब सागर में पकड़े गए हजारों हथियार शायद ईरान के एक ही बंदरगाह से भेजे गए थे।

 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि रूस, चीन और ईरान में बने हथियार नावों और जमीन के रास्ते यमन में तस्करी करके पहुंचाए जाते थे। हालांकि ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

 

 

कौन हैं हूती विद्रोही

 

 

साल 2014 में यमन में गृह युद्ध शुरू हुआ। इसकी जड़ शिया-सुन्नी विवाद है। कार्नेजी मिडिल ईस्ट सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों समुदायों में हमेशा से विवाद था जो 2011 में अरब क्रांति की शुरुआत से गृह युद्ध में बदल गया। 2014 में शिया विद्रोहियों ने सुन्नी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

 

इस सरकार का नेतृत्व राष्ट्रपति अब्दरब्बू मंसूर हादी कर रहे थे। हादी ने अरब क्रांति के बाद लंबे समय से सत्ता पर काबिज पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह से फरवरी 2012 में सत्ता छीनी थी। हादी देश में बदलाव के बीच स्थिरता लाने के लिए जूझ रहे थे। उसी समय सेना दो फाड़ हो गई और अलगाववादी हूती दक्षिण में लामबंद हो गए।

 

अरब देशों में दबदबा बनाने की होड़ में ईरान और सऊदी अरब भी इस गृह युद्ध में कूद पड़े। एक तरफ हूती विद्रोहियों को शिया बहुल देश ईरान का समर्थन मिला। तो सरकार को सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब का।

 

देखते ही देखते हूती के नाम से मशहूर विद्रोहियों ने देश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। 2015 में हालात ये हो गए थे कि विद्रोहियों ने पूरी सरकार को निर्वासन में जाने पर मजबूर कर दिया था।

 

 

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UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित 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नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

भोपाल में NSG कमांडो का पावर शो:VIP पर अटैक और ड्रोन हमले को किया निष्क्रिय; सीएम बोले- काउंटर टेररिज्म ग्रुप के लिए DPR तैयार

  भोपाल में सोमवार को लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो ने पावर शॉ दिखाया। कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में घुसने, आतंकियों से मुकाबला करने, बम खोजने और निष्क्रिय करने, डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और लोगों को सुरक्षित निकालने जैसी कार्रवाई का लाइव प्रदर्शन किया।   कार्यक्रम में मोहन यादव, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, NSG के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   देखिए तस्वीरें…     NSG ने आतंकियों ने सरेंडर करवाया।     NSG के साथ डाॅग स्क्वार्ड का प्रदर्शन।     विपरीत परिस्थितियों में आम लोगों को आतंकियों से बचाते कमांडो।     सीएम बोले- 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार   इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा- सीपीजी काउंटर टेररिज्म ग्रुप बनाने के लिए मप्र सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर ली है। भविष्य में सभी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए भोपाल के ग्राम तूमड़ा में सेंटर बनाया जाएगा।   उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुनिया के सामने पहचान बन रही है। जब देश के प्रधानमंत्री भी सुरक्षित नहीं थे और राजीव गांधी की हत्या हुई थी, तब सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से सुरक्षा मुहैया कराई। जब भी देश में किसी संकट से सामना होता है, तब एनएसजी कमांडो रक्षा करते हैं। मुझे एनएसजी पर गर्व है।     'कोई हमें छेड़ेगा तो करारा जवाब मिलेगा'   सीएम कहा कि हमारी सेना देश के दुश्मनों के घर में घुसकर मारने का काम करती है। हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प से सिद्धि का अभियान है। हम सर्वजन सुखाय की बात करते हैं। जो जिस प्रकार का है, उसे उसी प्रकार की भाषा में जवाब देने की तैयारी होनी चाहिए।   डॉ. यादव ने कहा कि हमारे बलों को सभी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। भारत और प्रदेश को आगे बढ़ने में कई लोग बाधा डालते हैं। हमने नक्सलवाद पर काबू पा लिया है। मप्र पुलिस और भारत सरकार ने मिलकर ऐसी गतिविधियों को रोकने में सफलता पाई है।     'हवा में उड़ते बजरंगबली जा रहे हों'   सीएम ने कहा कि हमारे कमांडो ने क्या-क्या नहीं दिखाया। जैसे हवा में बजरंगबली जा रहे हों। हमारे जवानों ने भी शानदार करतब दिखाए। काल भैरव के गणों ने भी गजब प्रदर्शन किया। आपका प्रदर्शन अद्भुत रहा।   आकस्मिक आपदा के लिए हम अपनी सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं। हमारे जवान सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। खाली हाथ होते हुए भी वे दो-दो, चार-चार लोगों को उठाकर पटक रहे थे। यह देखकर आनंद आया।     डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान   कमांडो ने Mi-17 helicopter से स्लिथरिंग कर इमारत में प्रवेश किया और हाउस इंटरवेंशन की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की, वहीं बम निष्क्रियकरण और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी प्रदर्शन किया गया।   कमांडो ने बहुमंजिला भवन पर हमले को निष्क्रिय करने, आतंकियों से हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की ड्रिल भी प्रदर्शित की। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, क्राव मागा तकनीक और अंडरवॉटर डाइविंग से जुड़ी कार्रवाई भी दिखाई गई।  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान

  रश्मिका-विजय के रिसेप्शन में बिना चप्पल-जूते पहने पहुंचे रामचरण, वजह जान हो जाएंगे हैरान                                                                                                 Ramcharan: हैदराबाद में हुए ग्रैंड रिसेप्शन में रश्मिका और विजय ने खूब चर्चा बटोरी. हालांकि सबसे ज्यादा ध्यान राम चरण के अलग अंदाज ने खींचा, जहां वो काले कपड़ों और नंगे पैर में नजर आए.   साउथ फिल्म इंडस्ट्री के पॉपुलर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. 4 मार्च को हैदराबाद में दोनों ने एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े सितारे शामिल हुए. इस खास मौके पर जहां हर कोई कपल को बधाई देने पहुंचा, वहीं एक्टर राम चरण अपने अनोखे अंदाज की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए.   नंगे पैर रिसेप्शन में आए रामचरण रिसेप्शन में राम चरण अपनी पत्नी उपासना के साथ पहुंचे थे. उन्होंने सिर से पैर तक काले रंग के कपड़े पहने हुए थे. लेकिन लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि वो बिना जूते-चप्पल के, यानी नंगे पैर ही कार्यक्रम में आए थे. उन्हें इस तरह देखकर कई लोग हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं.   लेकिन इसके पीछे एक खास धार्मिक वजह है. राम चरण इन दिनों 'अयप्पा दीक्षा' का पालन कर रहे हैं. ये भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक कठिन और पवित्र व्रत माना जाता है. इस व्रत के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ता है.   41 दिन की दीक्षा ले रहे रामचरण व्रत में काले या नीले रंग के कपड़े पहनना, सादगी से रहना और 41 दिनों तक नंगे पैर रहना शामिल होता है. इसी कारण राम चरण रिसेप्शन में भी बिना जूते के नजर आए. अयप्पा दीक्षा को अनुशासित और कठिन माना जाता है. इस बीच भक्तों को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है. साथ ही मांसाहारी भोजन, शराब से दूर रहना और बाल या दाढ़ी भी नहीं कटवाना होता है. ये व्रत सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है. हालांकि ये पहली बार नहीं है जब राम चरण इस तरह नंगे पैर नजर आए हों. इससे पहले 2023 में ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले भी वह अयप्पा दीक्षा का पालन करते हुए दिखाई दिए थे.

अंतर्राष्ट्रीय समाचार

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नॉर्वे का भगोड़ा धोखेबाज पाकिस्तान में! जानें कौन है वह शख्स जिसले जेडी वेंस ने भी मिलाया हाथ

  Iran-US Talk: ईरान शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचने पर US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस को उमर फारूक ज़हूर से मिलवाया गया था, जिस पर कई तरह के संगीन आरोप है.   US Iran Talks 2.0: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ शांति बातचीत के पहले दौर के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे. उस वक्त से जुड़ी एक छोटी सी घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. हाल ही में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, वेंस को एक व्यक्ति से मिलवाते दिखे. बाद में नॉर्वे के अखबार VG ने उस व्यक्ति की पहचान उमर फारूक ज़हूर के रूप में की. यही से यह मामला चर्चा में आ गया.   उमर फारूक ज़हूर एक ऐसा नाम है जिसे अलग-अलग देशों में अलग नजर से देखा जाता है. नॉर्वे में वह एक वॉन्टेड व्यक्ति हैं जिन पर बड़े वित्तीय अपराधों के आरोप हैं, जबकि पाकिस्तान में उन्हें सम्मानित निवेशक के रूप में देखा जाता है. उमर फारूक ज़हूर का जन्म ओस्लो में हुआ था. उनके माता-पिता पाकिस्तान के सियालकोट से थे.   नॉर्वे में उमर फारुक खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई 2003 में हुई थी, जब एक अदालत ने उन्हें अपने ही परिवार की ट्रैवल एजेंसी से पैसे के गबन के मामले में एक साल की सजा सुनाई थी. लेकिन वह सजा सुनाए जाने के समय कोर्ट में पेश नहीं हुए और देश छोड़कर चले गए.     नॉर्वे सरकार का आरोप   साल 2010 से नॉर्वे की पुलिस उमर फारूक ज़हूर को एक बड़े बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग केस में तलाश रही है. आरोप है कि नॉर्डिया बैंक से जुड़े एक मामले में 60 मिलियन से ज्यादा नॉर्वेजियन क्रोनर की हेराफेरी हुई. नॉर्वे की एजेंसियां लगातार उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की मांग करती रही हैं, लेकिन ज़हूर इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.     स्विट्जरलैंड और अन्य देशों में जांच   ज़हूर का नाम सिर्फ नॉर्वे तक सीमित नहीं रहा. स्विट्जरलैंड में भी उनके खिलाफ जांच हुई थी. 2004 में उन पर एक नकली बैंक के जरिए निवेशकों से लगभग 20 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी के आरोप लगे. हालांकि इस मामले में उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और बाद में केस समय सीमा खत्म होने के कारण बंद हो गया. इसके अलावा 2015 में घाना के साथ एक बड़े पावर प्रोजेक्ट डील में भी उनका नाम सामने आया. हालांकि इसमें उनकी सीधी भूमिका कितनी थी, यह साफ नहीं हो पाया और इस मामले में भी कोई सजा नहीं हुई.     पाकिस्तान में अलग छवि   यूरोप में लगे आरोपों के बावजूद पाकिस्तान में ज़हूर की छवि बिल्कुल अलग है. यहां उन्हें एक सफल बिजनेस मैन और निवेश लाने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है. उन्हें देश में विदेशी निवेश लाने का श्रेय दिया गया है. मार्च 2025 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘हिलाल-ए-इम्तियाज़’ दिया. यह सम्मान उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, लॉजिस्टिक्स और एनर्जी सेक्टर में लगभग 700 मिलियन डॉलर के निवेश को आसान बनाने के लिए दिया गया.     इमरान खान केस से जुड़ाव   ज़हूर का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े तोशाखाना मामले में भी सामने आया. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस केस में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाई थी. इसी मामले में आरोप था कि इमरान खान ने सरकारी तोहफे बेचे थे. ज़हूर ने दावा किया था कि उन्होंने एक महंगी घड़ी करीब 2 मिलियन डॉलर में खरीदी थी.     इंटरपोल और कानूनी स्थिति   एक समय पर ज़हूर के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी हुआ था, जो पाकिस्तान में दर्ज एक केस से जुड़ा था. लेकिन 2022 में यह नोटिस वापस ले लिया गया, क्योंकि पाकिस्तान ने अपनी मांग वापस ले ली थी और जांच में पर्याप्त सबूत नहीं मिले. पाकिस्तान की अदालतों में भी उन्हें कुछ मामलों में राहत मिली है. 2025 में एक कोर्ट ने नॉर्वे के एक मीडिया आउटलेट के खिलाफ मानहानि केस में ज़हूर के पक्ष में फैसला दिया.     इस्लामाबाद में मौजूदगी पर सवाल   इन सब घटनाओं के बीच, 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ के साथ ज़हूर का दिखना कई सवाल खड़े करता है. यह साफ नहीं है कि वह किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे या निजी तौर पर वहां मौजूद थे, लेकिन यह बात साफ है कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसे एक देश में वॉन्टेड माना जाता है, दूसरे देश में सम्मानित है और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के करीब नजर आता है.     उमर फारूक ज़हूर की कहानी   उमर फारूक ज़हूर की कहानी एक ही व्यक्ति की दो अलग पहचान दिखाती है. नॉर्वे में वह एक बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा आरोपी है, जबकि पाकिस्तान में वह एक सम्मानित निवेशक और प्रभावशाली शख्सियत है. यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और ज्यादा दिलचस्प और जटिल बनाता है.

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- 'इजरायल कैंसर, बनाने वाले नर्क में जलेंगे', नेतन्याहू का आया तगड़ा जवाब

ईरान का सऊदी अरब की ‘रीढ़’ अल जुबैल पर हमला, इसके मायने क्या और दुनिया पर क्या होगा असर?

रिपोर्ट- ईरान जंग रोकने पर आज बन सकती है सहमति: पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका को सीजफायर प्लान सौंपा, होर्मुज खोलने का प्रस्ताव भी शामिल

ईरान ने ठुकराई अमेरिका की शर्तें, बातचीत के लिए मिलने से किया मना, खत्म नहीं होगी जंग?

  US Iran talks: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के लिए पाकिस्तान सहित   क्षेत्रीय देशों द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता प्रयास अब विफल हो गए हैं.       US Iran talks: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के लिए की जा रही मध्यस्थता प्रयासों में ठहराव आ गया है. ईरान ने तय वार्ता में हिस्सा लेने से साफ इंकार कर दिया है. यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान समेत क्षेत्रीय देशों द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कराए जाने के प्रयास अब नाकाम साबित हो रहे हैं.   ईरान ने मध्यस्थों को स्पष्ट रूप से कहा है कि वह आगामी दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार नहीं है और अमेरिका की मांगों को अस्वीकार्य मानता है. रिपोर्ट में कहा गया, “ईरान ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थों को बताया कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है और अमेरिकी मांगें अस्वीकार्य हैं.”     पाकिस्तान की भूमिका पर असर   इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की थी, लेकिन मध्यस्थता प्रयासों में प्रगति न होने के कारण यह प्रस्ताव अब टल गया है. इस्लामाबाद ने कहा था कि वह सार्थक वार्ता की मेजबानी और सुविधा देने के लिए तैयार है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि देश सम्मानित महसूस करेगा और सार्थक वार्ता में मदद देगा.”     अमेरिका की प्रतिक्रिया   अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए थे कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत में है. उन्होंने कहा था, “हम इस वार्ता में बेहद अच्छी प्रगति कर रहे हैं." हालांकि उन्होंने कोई और विवरण नहीं दिया.     ईरान का  इनकार   ईरान ने साफ कहा है कि वह पाकिस्तान के जरिए होने वाली बातचीत में शामिल नहीं है. ईरान के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने बताया कि अमेरिका से कोई सीधी बात नहीं हुई. सिर्फ दूसरे लोगों के जरिए अमेरिका की “ज्यादा और गलत” मांगें भेजी गई हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी तरफ से कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान उसमें शामिल नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होना अच्छा है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि शुरुआत किसने की. ईरान को अमेरिका की तरफ से 15 पॉइंट का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उसे “अवास्तविक और बेकार” बताते हुए ठुकरा दिया गया.

Metroheadlines अप्रैल 4, 2026 0

ईरान की वो 'ढाई चाल', जिसमें फंस गए ट्रंप… यूं ही नहीं ईरान वॉर में अमेरिका का निकल रहा दम

ट्रंप ने किया जीत का ऐलान तो ईरान ने मिसाइल दागकर दिया जवाब, अब क्या करेगा अमेरिका?

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अमेरिका की ईरान के न्यूक्लियर सेंटर पर एयर स्ट्राइक! इस्फ़हान पर करीब 2000 पाउंड के बंकर बस्टर बम गिराए

ईरान ने कबूली IRGC नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी की मौत, इजरायल ने किया था मारने का दावा ?

  Middle East Conflict: अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है.     मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां इजरायली हमले में IRGC के नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसिरी की मौत की पुष्टी हुई है. हाल ही में इजरायल ने इस बात का दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के लिए जिम्मेदार तंगसिरी की मौत हो गई है. इजरायली हमले के बाद गंभीर चोटों से वह उबर नहीं पाए. IRIB ने उनकी मौत की पुष्टी की है. इससे पहले इजरायल के रक्षामंत्री काट्ज ने पिछले हफ्ते जानकारी दी थी कि कमांडर को इजरायली सेना के लक्षित ऑपरेशन में मार गिराया गया था.    अलीरेजा तंगसिरी आरजीसी के नौसेना प्रमुख थे. वह इस पद पर साल 2018 से थे. उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. खाड़ी युद्ध में अमेरिका और इजरायल के जहाजों को चुनौती देने में उनकी भूमिका अहम रही थी. लीरेजा तंगसिरी 26 मार्च को हुए बंदर अब्बास में इजरायली हमले के दौरान गंभीर चोट के चलते घायल हो गए थे.    ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक हमले में मारे जा चुके हैं   इससे पहले इस युद्ध में कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य हस्तियों की जान जा चुकी है. सबसे पहले इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में उनके परिसर पर हवाई हमला किया गया था. वह 86 साल के थे. 1989 से ईरान शीर्ष नेतृ्त्व संभाल रहे थे.    इनके अलावा अली लारीजानी जो सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव थे. उनकी मौत 17 मार्च को हमले के दौरान हो गई थी. वह 67 साल के थे. ईरानी मीडिया के अनुसार उनके साथ उनके बेटे और उनके एक डिप्टी भी मारे गए थे.    इस्माइल खतीब ईरान के खुफिया मंत्री थे. 18 मार्च को इजरायल के हमले में उनकी मौत हो गई थी. अगस्त 2021 में उन्होंने नागरिक खुफिया तंत्र का नेतृत्व संभाला था.  इनके अलावा आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ मोहम्मद पाकपुर की 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मौत हो गई थी. इसके अलावा वायुसेना अधिकारी अजीज नासिरजादेह 28 फरवरी को तेहरान के हमले में मारे गए.   ईरान सशस्त्र बल के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी 28 फरवरी के हमले में मारे गए. बासिज अर्धसैनिक बल के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी 17 मार्च को हुए हमले में मारे गए. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसेना खुफिया प्रमुख बेहनम रजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास के बंदरगाह शहर में हमले के दौरान मारे गए.   

Metroheadlines मार्च 30, 2026 0

'सेना भेजने की नहीं पड़ेगी जरूरत', अमेरिका-ईरान के बीच कब खत्म होगा युद्ध? ट्रंप ने तय कर दी आखिरी तारीख!

' ईरान की दो-तिहाई हथियार फैक्ट्रियां तबाह ' , अमेरिकी सेंट्रल कमांड के चीफ ने किया बड़ा दावा ?

लेबनान के 10 फीसदी इलाके पर कब्जा करेगा इजरायल, रक्षा मंत्री काटजू ने कर दिया बड़ा दावा

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Metroheadlines अप्रैल 6, 2026 0

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