अंतर्राष्ट्रीय समाचार

International News :

ईरान बोला-अमेरिका ने भारत के गेस्ट शिप पर हमला किया:उन्हें करारा जवाब देंगे; अमेरिकी संसद में ईरान पर हमला रोकने वाला प्रस्ताव फेल

Metroheadlines मार्च 5, 2026 0

 

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: भारत से जुड़े जहाज पर हमले का आरोप, अमेरिकी संसद में ईरान पर हमला रोकने वाला प्रस्ताव फेल

 

 

मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका पर भारत से जुड़े एक गेस्ट शिप पर हमला करने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि इस हमले का करारा जवाब दिया जाएगा। इस बयान के बाद क्षेत्र में पहले से मौजूद सैन्य तनाव और बढ़ गया है। दूसरी ओर, अमेरिका के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव सामने आ गया है। अमेरिकी संसद में ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव मतदान में फेल हो गया। इस घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और गहरा सकता है।

 

ईरान के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने दावा किया कि जिस जहाज पर हमला हुआ है, उसका संबंध भारत से है और वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस जहाज पर हमला करके अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन किया है। ईरान ने यह भी कहा कि वह इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग करेगा और अगर अमेरिका की भूमिका साबित होती है तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

 

इस पूरे मामले ने भारत को भी अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भारत का समुद्री व्यापार बड़े पैमाने पर पश्चिम एशिया और यूरोप के रास्ते से गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर स्थिति को समझने की कोशिश कर रही है।

 

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका की आक्रामक नीतियों के कारण क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ऐसे कदम जारी रखे तो ईरान चुप नहीं बैठेगा। ईरान ने यह भी कहा कि उसके पास अपनी सुरक्षा और अपने सहयोगियों की रक्षा करने की पूरी क्षमता है।

 

दूसरी तरफ अमेरिका ने अभी तक इन आरोपों को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में कई सैन्य गतिविधियां चल रही हैं और हर घटना के पीछे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। हालांकि अमेरिका ने यह जरूर कहा है कि वह समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ काम कर रहा है।

 

इस बीच अमेरिका की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव लाया गया था जिसमें सरकार से आग्रह किया गया था कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले संसद की अनुमति ले। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मध्य-पूर्व में एक नए युद्ध को रोकना था। लेकिन जब इस प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो वह आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया और फेल हो गया।

 

इस प्रस्ताव के फेल होने के बाद अमेरिका में कई विश्लेषकों ने चिंता जताई है कि इससे सरकार को सैन्य कार्रवाई के लिए ज्यादा खुली छूट मिल सकती है। कुछ सांसदों ने कहा कि मध्य-पूर्व में पहले ही कई संघर्ष चल रहे हैं और अगर अमेरिका ने जल्दबाजी में कोई कदम उठाया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

 

अमेरिका में विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ईरान के साथ तनाव को बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य संघर्ष शुरू हो गया तो उसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री रास्ते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। अगर यहां किसी तरह का सैन्य टकराव होता है तो तेल की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

 

भारत के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है। अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

 

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे विवाद के पीछे कई जटिल भू-राजनीतिक कारण हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और ईरान के रिश्ते लगातार खराब होते गए हैं। परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ गया है। इसके बाद से दोनों देशों के बीच कई बार समुद्र में टकराव की स्थिति बन चुकी है।

 

ईरान का कहना है कि अमेरिका लगातार उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य दबाव की नीति अपना रहा है। वहीं अमेरिका का आरोप है कि ईरान क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई समूहों को समर्थन देता है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

 

हाल के महीनों में मध्य-पूर्व में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। अलग-अलग देशों के जहाजों पर हमले, ड्रोन हमले और सैन्य गतिविधियों में वृद्धि ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में भारत से जुड़े जहाज पर हमले का आरोप एक नई कड़ी के रूप में सामने आया है।

 

भारत सरकार अभी इस मामले में सार्वजनिक रूप से बहुत ज्यादा बयान देने से बच रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियां इस घटना की जानकारी जुटा रही हैं। अगर किसी भारतीय नागरिक या भारतीय संपत्ति को नुकसान हुआ है तो उसके अनुसार कदम उठाए जाएंगे।

 

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस मामले में संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करेगा। भारत के अमेरिका और ईरान दोनों देशों के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। इसलिए नई दिल्ली किसी भी ऐसे बयान से बचना चाहेगी जिससे किसी पक्ष के साथ उसके रिश्तों पर असर पड़े।

 

इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर रखे हुए है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के कुछ अधिकारियों ने भी कहा है कि समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए।

 

अगर आने वाले दिनों में इस घटना की जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं तो इससे क्षेत्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में जहाज पर हमला किसने किया और उसके पीछे क्या कारण थे। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका की संसद में प्रस्ताव के फेल होने से यह संदेश गया है कि अमेरिकी प्रशासन को विदेश नीति के मामलों में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी भी कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें अंतरराष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय सहयोगियों की भूमिका भी शामिल है।

 

मध्य-पूर्व की राजनीति लंबे समय से जटिल रही है और यहां होने वाली किसी भी घटना का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है। ऊर्जा बाजार, व्यापारिक मार्ग और सुरक्षा संतुलन जैसे कई मुद्दे इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसलिए दुनिया भर के देश इस तनाव को लेकर चिंतित हैं।

 

कुल मिलाकर, ईरान द्वारा अमेरिका पर लगाए गए आरोप और अमेरिकी संसद में प्रस्ताव के फेल होने से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना फिलहाल कम है। अगर कूटनीतिक प्रयासों से स्थिति को संभाला नहीं गया तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है, जिसका असर केवल मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

 

Popular post
MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे.  Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है.   रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे   इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्‍यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे.   गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा   करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.  

UP News: होली से पहले सरकारी कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

UP News In Hindi: सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य के शिक्षकों समेत लाखों को कर्मचारियों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान कर दिया है. इसके लिए सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है   होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह पर्व सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को पड़ रही है। सामान्यतः सरकारी कर्मचारियों का वेतन महीने के अंतिम या अगले महीने के प्रारंभिक दिनों में जारी होता है, लेकिन इस बार त्योहार और अवकाश के कारण वेतन भुगतान की तिथि प्रभावित हो रही थी। रविवार (1 मार्च) को साप्ताहिक अवकाश तथा 2 मार्च को होलिका दहन होने के कारण नियमित प्रक्रिया से वेतन जारी करना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए शनिवार (28 फरवरी) को ही वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर त्वरित समन्वय और संवेदनशीलता को दर्शाता है।   शिक्षा विभाग की भूमिका   स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से 2 मार्च से पहले वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए। यह आदेश उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि सभी संबंधित अधिकारी और वित्तीय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि होलिका दहन से पहले शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाए।   शिक्षा विभाग राज्य का एक बड़ा विभाग है, जिसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त विद्यालय और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से पहले वेतन देने के लिए विभाग को वित्तीय और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी करनी पड़ी। ट्रेजरी, बैंकिंग प्रणाली और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रिया को तेज किया गया।     वित्त विभाग ने भी इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अवकाश के कारण नियमित तिथि पर वेतन भुगतान संभव नहीं था, इसलिए विशेष अनुमति के तहत अग्रिम भुगतान का निर्णय लिया गया है। इस फैसले को राज्यपाल Anandiben Patel की मंजूरी प्राप्त होने के बाद लागू किया गया।   राज्यपाल की स्वीकृति का उल्लेख इस बात का संकेत है कि यह निर्णय केवल विभागीय स्तर का नहीं बल्कि उच्च प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इससे आदेश की वैधता और गंभीरता स्पष्ट होती है।   प्रशासनिक समन्वय और कार्यान्वयन   राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने विभागों में तैनात कर्मचारियों का वेतन 28 फरवरी तक हर हाल में जारी करें। साथ ही आदेश के पालन को लेकर सख्त हिदायत दी गई। इसका अर्थ है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।   वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निम्नलिखित स्तरों पर कार्य हुआ: वेतन बिलों की समयपूर्व तैयारी – संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) को समय से पहले वेतन बिल तैयार करने के निर्देश दिए गए। ट्रेजरी की सक्रियता – कोषागार कार्यालयों को अतिरिक्त समय तक कार्य कर बिल पास करने को कहा गया। बैंकिंग समन्वय – बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया गया कि भुगतान समय से कर्मचारियों के खातों में पहुंचे। डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग – ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाया गया कर्मचारियों में खुशी की लहर   इस निर्णय के बाद सरकारी कर्मचारियों में व्यापक खुशी देखी गई। त्योहारों के समय परिवारों की जरूरतें बढ़ जाती हैं—नए कपड़े, मिठाइयां, रंग-गुलाल, बच्चों के लिए उपहार, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने का खर्च आदि। ऐसे समय यदि वेतन में देरी हो जाए तो असुविधा होती है। सरकार द्वारा समय से पहले वेतन जारी करने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से राहत मिली है।   विशेष रूप से शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके पास वेतन आने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ती है।   आर्थिक प्रभाव राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक साथ वेतन जारी होने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा। होली के अवसर पर खरीदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ होगा। वस्त्र, मिठाई, रंग-गुलाल, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला भी माना जा सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि होती है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आती है।   राजनीतिक और सामाजिक संदेश   Yogi Adityanath की सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है। त्योहारों के समय इस प्रकार के निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और सरकार के प्रति सकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं। सरकारी कर्मचारी किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। यदि वे संतुष्ट और प्रेरित हों तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से होता है। समय पर वेतन भुगतान कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान भी है।   पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी सौगातें   पिछले वर्षों में भी त्योहारों से पहले बोनस या अग्रिम वेतन जैसी घोषणाएं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की जाती रही हैं। हालांकि हर बार परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस बार अवकाश और त्योहार की तिथियों के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि समय से पहले वेतन देने का निर्णय प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, क्योंकि इसमें बजटीय प्रबंधन और नकदी प्रवाह का संतुलन बनाए रखना होता है।   संभावित चुनौतियां   हालांकि आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि किसी विभाग में तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजी कमी या बैंकिंग समस्या उत्पन्न होती है तो कुछ कर्मचारियों को असुविधा हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।   कर्मचारियों की अपेक्षाएं   इस निर्णय के बाद कर्मचारियों में यह अपेक्षा भी बढ़ी है कि भविष्य में भी त्योहारों के समय इसी प्रकार की संवेदनशीलता दिखाई जाएगी। साथ ही वे नियमित वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता, पेंशन और अन्य वित्तीय सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर भी सरकार से सकारात्मक रुख की आशा रखते हैं।   UP NEWSYogi AdityanathHoli 2026  

हिंदी न्यूज़बिजनेसGold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव

Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमत आज घटी या बढ़ी? जानें 28 फरवरी को दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं ताजा भाव     सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज का ताजा भाव क्या है?     Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका की टैरिफ नीति इत्यादि वजहों से बाजार में लगातार बदलाव हो रहा है. आइए जानते हैं, आज शनिवार 28 फरवरी के कारोबारी दिन सोने-चांदी का ताजा भाव क्या है?     सोने के आउटलुक पर जेपी मॉर्गन का अपडेट     वैश्विक बाजार में सोने को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं. जेपी मॉर्गन ने अपना लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बढ़ाकर 4,500 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. जबकि 2026 के अंत के लिए 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान पहले की तरह कायम रखा है.   जेपी मॉर्गन के अनुसार निवेशकों के पोर्टफोलियो में स्ट्रक्चरल डायवर्सिफिकेशन का रुझान अभी जारी है. जिससे आगे भी सोने में तेजी की संभावना बनी रह सकती है.     चांदी के ताजा भाव     दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,950 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 29,500 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 3,000 रुपये चल रही है.     आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)     दिल्ली में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     मुंबई में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,65,820 रुपए 22 कैरेट - 1,52,000 रुपए 18 कैरेट - 1,30,100 रुपए     कोलकाता में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए     अहमदाबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     लखनऊ में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,880 रुपए 22 कैरेट - 1,51,150 रुपए 18 कैरेट - 1,23,700 रुपए     पटना में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,780 रुपए 22 कैरेट - 1,51,050 रुपए 18 कैरेट - 1,23,600 रुपए     हैदराबाद में सोने के दाम  (प्रति 10 ग्राम)   24 कैरेट - 1,64,730 रुपए 22 कैरेट - 1,51,000 रुपए 18 कैरेट - 1,23,550 रुपए    

नॉट आउट @100' का आगाज़, CM मोहन ने शुरू किया 100 घंटे का ऐतिहासिक क्रिकेट महोत्सव

Madhya Pradesh News: भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 का शुभारंभ किया, जिसमें 25 से अधिक राज्यों के खिलाड़ी 100 घंटे की प्रतियोगिता में भाग लेंगे.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं. दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं.    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है. प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है. समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं.   सीएम मोहन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है. उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है. इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है. प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है.    100 घंटे क्रिकेट: अद्भुत और गर्व का अवसर   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया. पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा. इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है.   उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी. उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है. यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है.   दिव्यांग बेटियों की इच्छाशक्ति को सराहा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं.  

'भूत बंगला' का पहला गाना ‘राम जी आके भला करेंगे’ हुआ रिलीज, 14 साल बाद अक्षय-प्रियदर्शन की जोड़ी ने फिर मचाया धमाल

'भूत बंगला' का पहला गाना ‘राम जी आके भला करेंगे’ हुआ रिलीज, 14 साल बाद अक्षय-प्रियदर्शन की जोड़ी ने फिर मचाया धमाल   Bhoot Bangla Song: ‘भूत बंगला’ को लेकर काफी एक्साइटमेंट है क्योंकि अक्षय कुमार और प्रियदर्शन 14 साल बाद फिर साथ काम कर रहे हैं. अब फिल्म का पहला गाना ‘राम जी आके भला करेंगे’ भी रिलीज हो चुका है.   ‘भूत बंगला’ को लेकर लोगों की एक्साइटमेंट लगातार बढ़ रही है क्योंकि ये फिल्म अक्षय कुमार और फिल्ममेकर प्रियदर्शन की OG बॉलीवुड जोड़ी को पूरे 14 साल बाद फिर से साथ ला रही है. बालाजी मोशन पिक्चर्स द्वारा प्रोड्यूस की गई इस फिल्म ने उन लोगों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है जो इस जोड़ी की आइकॉनिक कॉमेडी फिल्मों को देखकर बड़े हुए हैं.   पहला गाना हुआ रिलीज एक्साइटमेंट को और बढ़ाते हुए मेकर्स ने फिल्म का पहला गाना ‘राम जी आके भला करेंगे’ रिलीज कर दिया है. ये एक हाई एनर्जी ट्रैक है जिसमें अक्षय कुमार अपने पूरे एंटरटेनर अंदाज में नजर आ रहे हैं. गाने में पागलपन, नॉस्टैल्जिया और उनकी वही पुरानी कॉमिक एनर्जी साफ दिखती है. ये ट्रैक फिल्म की मजेदार दुनिया की एक झलक देता है.   हंसी और भूतिया मस्ती का तड़का कॉमिक एनर्जी से भरपूर ये पेपी गाना फिल्म की असली वाइब को पकड़ता है. इसके हाई बीट्स और मस्ती भरे विजुअल्स साफ बता देते हैं कि ‘भूत बंगला’ एक फुल एंटरटेनर होने वाली है. गाने में अक्षय कुमार अपने क्लासिक स्टाइल में भूतिया माहौल और अजीबोगरीब भूतों के बीच आराम से घूमते नजर आते हैं. उनका फ्रंटिक और मजेदार परफॉर्मेंस पूरे गाने को और भी दिलचस्प बना देता है.   म्यूजिक टीम ने लगाया तगड़ा तड़का इस गाने का म्यूजिक प्रीतम ने दिया है और लिरिक्स कुमार ने लिखे हैं. इसे अरमान मलिक और आरवन (देव अरिजीत) ने अपनी आवाज दी है. साथ ही मेलो डी का रैप सेगमेंट गाने को मॉडर्न टच देता है जिससे इसकी बीट्स और भी ज्यादा कैची हो जाती हैं.   शानदार स्टारकास्ट के साथ रिलीज डेट भी तय बालाजी मोशन पिक्चर्स जो बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड का हिस्सा है केप ऑफ गुड फिल्म्स के साथ मिलकर ‘भूत बंगला’ लेकर आ रहे हैं. फिल्म में अक्षय कुमार के साथ वामीका गब्बी, परेश रावल, तब्बू और राजपाल यादव लीड रोल में नजर आएंगे. प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म को अक्षय कुमार, शोभा कपूर और एकता आर कपूर ने प्रोड्यूस किया है. ये फिल्म 10 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.  

अंतर्राष्ट्रीय समाचार

View more
ईरान बोला-अमेरिका ने भारत के गेस्ट शिप पर हमला किया:उन्हें करारा जवाब देंगे; अमेरिकी संसद में ईरान पर हमला रोकने वाला प्रस्ताव फेल

  ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: भारत से जुड़े जहाज पर हमले का आरोप, अमेरिकी संसद में ईरान पर हमला रोकने वाला प्रस्ताव फेल     मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका पर भारत से जुड़े एक गेस्ट शिप पर हमला करने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि इस हमले का करारा जवाब दिया जाएगा। इस बयान के बाद क्षेत्र में पहले से मौजूद सैन्य तनाव और बढ़ गया है। दूसरी ओर, अमेरिका के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव सामने आ गया है। अमेरिकी संसद में ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव मतदान में फेल हो गया। इस घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और गहरा सकता है।   ईरान के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने दावा किया कि जिस जहाज पर हमला हुआ है, उसका संबंध भारत से है और वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस जहाज पर हमला करके अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन किया है। ईरान ने यह भी कहा कि वह इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग करेगा और अगर अमेरिका की भूमिका साबित होती है तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।   इस पूरे मामले ने भारत को भी अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भारत का समुद्री व्यापार बड़े पैमाने पर पश्चिम एशिया और यूरोप के रास्ते से गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर स्थिति को समझने की कोशिश कर रही है।   ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका की आक्रामक नीतियों के कारण क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ऐसे कदम जारी रखे तो ईरान चुप नहीं बैठेगा। ईरान ने यह भी कहा कि उसके पास अपनी सुरक्षा और अपने सहयोगियों की रक्षा करने की पूरी क्षमता है।   दूसरी तरफ अमेरिका ने अभी तक इन आरोपों को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में कई सैन्य गतिविधियां चल रही हैं और हर घटना के पीछे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। हालांकि अमेरिका ने यह जरूर कहा है कि वह समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ काम कर रहा है।   इस बीच अमेरिका की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव लाया गया था जिसमें सरकार से आग्रह किया गया था कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले संसद की अनुमति ले। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मध्य-पूर्व में एक नए युद्ध को रोकना था। लेकिन जब इस प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो वह आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया और फेल हो गया।   इस प्रस्ताव के फेल होने के बाद अमेरिका में कई विश्लेषकों ने चिंता जताई है कि इससे सरकार को सैन्य कार्रवाई के लिए ज्यादा खुली छूट मिल सकती है। कुछ सांसदों ने कहा कि मध्य-पूर्व में पहले ही कई संघर्ष चल रहे हैं और अगर अमेरिका ने जल्दबाजी में कोई कदम उठाया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।   अमेरिका में विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ईरान के साथ तनाव को बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य संघर्ष शुरू हो गया तो उसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।   विशेषज्ञों का मानना है कि फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री रास्ते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। अगर यहां किसी तरह का सैन्य टकराव होता है तो तेल की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।   भारत के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है। अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।   अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे विवाद के पीछे कई जटिल भू-राजनीतिक कारण हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और ईरान के रिश्ते लगातार खराब होते गए हैं। परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ गया है। इसके बाद से दोनों देशों के बीच कई बार समुद्र में टकराव की स्थिति बन चुकी है।   ईरान का कहना है कि अमेरिका लगातार उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य दबाव की नीति अपना रहा है। वहीं अमेरिका का आरोप है कि ईरान क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई समूहों को समर्थन देता है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।   हाल के महीनों में मध्य-पूर्व में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। अलग-अलग देशों के जहाजों पर हमले, ड्रोन हमले और सैन्य गतिविधियों में वृद्धि ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में भारत से जुड़े जहाज पर हमले का आरोप एक नई कड़ी के रूप में सामने आया है।   भारत सरकार अभी इस मामले में सार्वजनिक रूप से बहुत ज्यादा बयान देने से बच रही है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियां इस घटना की जानकारी जुटा रही हैं। अगर किसी भारतीय नागरिक या भारतीय संपत्ति को नुकसान हुआ है तो उसके अनुसार कदम उठाए जाएंगे।   कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस मामले में संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करेगा। भारत के अमेरिका और ईरान दोनों देशों के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। इसलिए नई दिल्ली किसी भी ऐसे बयान से बचना चाहेगी जिससे किसी पक्ष के साथ उसके रिश्तों पर असर पड़े।   इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर रखे हुए है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के कुछ अधिकारियों ने भी कहा है कि समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए।   अगर आने वाले दिनों में इस घटना की जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं तो इससे क्षेत्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में जहाज पर हमला किसने किया और उसके पीछे क्या कारण थे। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।   राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका की संसद में प्रस्ताव के फेल होने से यह संदेश गया है कि अमेरिकी प्रशासन को विदेश नीति के मामलों में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी भी कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें अंतरराष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय सहयोगियों की भूमिका भी शामिल है।   मध्य-पूर्व की राजनीति लंबे समय से जटिल रही है और यहां होने वाली किसी भी घटना का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है। ऊर्जा बाजार, व्यापारिक मार्ग और सुरक्षा संतुलन जैसे कई मुद्दे इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसलिए दुनिया भर के देश इस तनाव को लेकर चिंतित हैं।   कुल मिलाकर, ईरान द्वारा अमेरिका पर लगाए गए आरोप और अमेरिकी संसद में प्रस्ताव के फेल होने से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना फिलहाल कम है। अगर कूटनीतिक प्रयासों से स्थिति को संभाला नहीं गया तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है, जिसका असर केवल मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।  

Metroheadlines मार्च 5, 2026 0

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना डेंजर जोन! 1.5 करोड़ बैरल तेल यहीं से होता है सप्लाई, भारत-चीन का बड़ा नुकसान क्यों?

अफगानिस्तान का पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हमला:तालिबान के मंत्री बोले- हमने डूरंड लाइन पार की, PAK का दावा- 400 अफगान लड़ाके मारे

अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमला किया, कई शहरों में धमाके:सुप्रीम लीडर खामेनेई सुरक्षित जगह भेजे गए; अमेरिका से बातचीत के बीच अटैक !

मोदी इजराइल के होलोकॉस्ट मेमोरियल पहुंचे:हिटलर शासन में मारे गए 60 लाख यहूदियों को श्रद्धांजलि दी; राष्ट्रपति से मिले, डिफेंस डील संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे का आज दूसरा दिन है। वे गुरुवार सुबह यरूशलम के होलोकॉस्ट मेमोरियल ‘याद वाशेम’ पहुंचे। यहां उन्होंने हिटलर के नाजी शासन में मारे गए 60 लाख यहूदियों को श्रद्धांजलि दी।     इसके बाद मोदी इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मिले। दोनों नेताओं ने याद वाशेम में पौधा लगाया। मोदी ने गेस्ट बुक में भारत का संदेश भी लिखा। मोदी थोड़ी देर में इजराइली PM नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में रक्षा सहयोग, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और एडवांस टेक्नोलॉजी के लेकर बातचीत होगी। दोनों देशों के बीच बड़ी डिफेंस डील हो सकती है।   मोदी बुधवार को दो दिन के इजराइल दौरे पर पहुंचे थे। नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने एयरपोर्ट पर मोदी को रिसीव किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने इजराइली संसद नेसेट को भी संबोधित किया। उन्हें संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ दिया गया। मोदी नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।     मोदी के इजराइल दौरे की तस्वीरें…       पीएम मोदी ने यरुशलम स्थित होलोकॉस्ट मेमोरियल ‘याद वाशेम’ में फूल अर्पित किए।       दोनों नेताओं ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी शासन के अत्याचारों में मारे गए लाखों यहूदियों को श्रद्धांजलि दी।       मोदी के साथ इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी मौजूद रहे।       होलोकॉस्ट मेमोरियल ‘याद वाशेम’ में श्रद्धांजलि देकर बाहर निकलते हुए।       पीएम मोदी ने इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की।     हिटलर के शासन में मारे गए यहूदियों की याद में बना ‘यद वाशेम’ स्मारक   याद वाशेम होलोकॉस्ट के दौरान मारे गए लाखों यहूदियों की याद में बनाया गया है। यह स्मारक इजराइल की राजधानी यरुशलम में स्थित है और हर साल दुनिया भर से लोग यहां आकर इतिहास को समझते हैं और श्रद्धांजलि देते हैं।     द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी थी। इस नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है। इजराइल की संसद नेसेट ने साल 1953 में फैसला किया कि होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों की याद में एक खास स्मारक बनाया जाए।     बाद में 2005 में यहां एक आधुनिक संग्रहालय खोला गया, ताकि आने वाली पीढियां इस त्रासदी को समझ सकें। याद वाशेम परिसर में होलोकॉस्ट संग्रहालय, हॉल ऑफ नेम्स, बच्चों का स्मारक और राइटियस अमंग द नेशंस गार्डन जैसी जगहें मौजूद हैं। यहां असली दस्तावेज, तस्वीरें और पीडितों की व्यक्तिगत कहानियां सुरक्षित रखी गई हैं।   याद वाशेम नाम का अर्थ है याद और नाम, यानी जिन लोगों को मिटाने की कोशिश की गई, उनकी याद हमेशा जिंदा रहे।     जर्मनी में 1941 से 1945 के बीच हिटलर के शासन को दौरान लाखों यहूदी मारे गए थे। इसे नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है।       इजराइल के ‘यद वाशेम’ के म्यूजियम में होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों से जुड़ी यादें मौजूद हैं। यहां उनके नाम और तस्वीरें लगाई गई हैं।  

Metroheadlines फ़रवरी 26, 2026 0

0 Comments