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ईरान संग बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दी धमकी, कहा- अगर बुधवार तक नहीं हुई डील तो फिर...

  Trump on Iran: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड पूरी तरह लागू रहेगा.   अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि मौजूदा सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता. उन्होंने कहा कि अगर बुधवार तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर सकता है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल दबाव जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो बमबारी भी फिर से शुरू की जा सकती है.     होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर राजी हुआ ईरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान एक अहम वैश्विक शिपिंग रूट, यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है. एरिजोना में Turning Point USA के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह स्ट्रेट अब पूरी तरह खुला है और व्यापार के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा कॉरिडोर में से एक बना हुआ है.     “डील नहीं तो जारी रहेगा सैन्य दबाव” ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के साथ अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड पूरी तरह लागू रहेगा. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “शायद मैं इसे आगे न बढ़ाऊं, लेकिन ईरान पर ब्लॉकेड जारी रहेगा. और दुर्भाग्य से हमें फिर से बम गिराने शुरू करने पड़ सकते हैं.”     ‘न्यूक्लियर डस्ट’ वापस लाने की योजना अपने भाषण में ट्रंप ने एक विवादित योजना का भी जिक्र किया, जिसमें ईरान में पुराने अमेरिकी हमलों के बाद बचे मलबे, जिसे उन्होंने “न्यूक्लियर डस्ट” कहा, को वापस अमेरिका लाने की बात कही. इसके लिए उन्होंने संयुक्त खुदाई अभियान (जॉइंट ऑपरेशन) का प्रस्ताव दिया.     क्षेत्रीय कूटनीति का दावा, सीजफायर का श्रेय ट्रंप ने इन घटनाओं को व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि अमेरिका की कोशिशों से क्षेत्र में तनाव कम हुआ है. उन्होंने इजरायल और लेबनान के बीच हुए सीजफायर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि ऐसा समझौता पिछले 78 वर्षों में नहीं हुआ.     पाकिस्तान समेत कई देशों का जताया आभार ट्रंप ने इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि इन देशों ने क्षेत्र में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई है.     यूरोपीय सहयोगियों पर तीखा हमला ट्रंप ने अपने भाषण में यूरोप के सहयोगियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को पारंपरिक साझेदारियों पर कम निर्भर रहना चाहिए. NATO का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जरूरत के समय यह संगठन बेकार साबित हुआ.     हमने दुनिया की सबसे बड़ी सेना बनाई ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बनाई है और भविष्य की रणनीति में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा. उन्होंने खुद को एक ग्लोबल डीलमेकर बताते हुए कहा कि वह अब तक कई युद्ध खत्म करवा चुके हैं और आगे यह संख्या और बढ़ सकती है.

बालेन के आदेश से भारतीय सीमा पर बवाल, कस्टम ड्यूटी और भारतीय वाहनों को लेकर सख्ती से नेपाल में सियासी तूफान

  नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से भारतीय सीमा के साथ ही नेपाल में भी बवाल मचना शुरू हो गया है. नेपाली पार्टियों ने भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध किया है.   नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के आदेश से पड़ोसी देश में नया तूफान खड़ा हो गया है. नेपाल पुलिस ने भारत से लगने वाली सीमा शुल्क चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी है. बालेन सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि भारत से आने वाले 100 रुपये से ज्यादा की कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य रूप से वसूली जाए.    दरअसल, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग खाने-पीने की चीजें, कपड़े और घर का अन्य सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों में जाते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय व्यापारियों के साथ ही राजस्व का भी नुकसान होता है. नेपाल के इस कदम से बॉर्डर के पास मौजूद भारतीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है.      भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर सख्ती   इसके अलावा भारतीय सीमा से लगे मधेश प्रांत में भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों की आवाजाही पर भी सख्ती हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों का बिना इजाजत इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है. नेपाल में राजनीतिक पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि सख्त नियमों के चलते भारत संग लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और आर्थिक रिश्ते बिगड़ने का खतरा है.     क्या कह रहीं नेपाली पार्टियां   नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी, CPN-UML, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनता समाजवादी पार्टी समेत बड़े राजनीतिक दलों ने 12 अप्रैल को भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर रोक का विरोध करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें मांग की गई कि ऐसी गाड़ियों को पहले की तरह बॉर्डर के 30 किलोमीटर के दायरे में आजादी से चलने दिया जाए.     अधिकारी ने क्या बताया   नेपाली अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद कानूनों को लागू करना है. काठमांडू टाइम्स ने सरलाही के मुख्य जिला अधिकारी रामूराज कदरिया के हवाले से बताया कि बिना कस्टम ड्यूटी दिए गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और हम बस कानून लागू कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि नियमों के बावजूद इनका पालन नहीं हो रहा है.    एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर काठमांडू टाइम्स से बताया कि पहले लोग एक दिन का टैक्स देते थे और महीनों तक गाड़ी का इस्तेमाल करते थे. अब ऐसा नहीं होगा. हालांकि इन गाड़ियों का कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का अंदाजा है कि मधेश प्रांत के 8 जिलों में 10,000 से ज्यादा भारत में रजिस्टर्ड गाड़ियां चल रही होंगी. बॉर्डर इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर ज्यादा कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियां खरीदते हैं.     

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन: कनेक्टिविटी, पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बूस्ट

  दिल्ली और उत्तराखंड के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का आज उद्घाटन किया गया। यह विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा परियोजना न केवल दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ती है, बल्कि पूरे उत्तरी भारत की आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और औद्योगिक विकास को नई गति देने वाली साबित होगी। इस कॉरिडोर के शुरू होने से राजधानी दिल्ली से देहरादून की दूरी को तय करने में लगने वाला समय अब काफी कम हो जाएगा, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।   यह कॉरिडोर अत्याधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें मल्टी-लेन एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, स्मार्ट टोलिंग और पर्यावरण-संवेदनशील डिजाइन शामिल हैं। पहले जहां दिल्ली से देहरादून पहुंचने में 6 से 7 घंटे तक का समय लग जाता था, वहीं अब यह यात्रा लगभग 2.5 से 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।   इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ पर्यटन क्षेत्र को मिलने वाला है। देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल अब दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से अधिक सुलभ हो जाएंगे। इससे देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। पर्यटन के बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय व्यवसायों को सीधा फायदा होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।   आर्थिक दृष्टि से भी यह कॉरिडोर अत्यंत महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी से माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज और सस्ती होगी, जिससे उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के बीच व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और नए निवेश के रास्ते खुलेंगे। इस कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक क्लस्टर, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होने की संभावना है, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे।   इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष अंडरपास और ओवरपास बनाए गए हैं, ताकि जानवरों की आवाजाही बाधित न हो। साथ ही, हरित क्षेत्र को संरक्षित रखने और प्रदूषण को कम करने के लिए कई पर्यावरणीय उपाय किए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।   सुरक्षा के लिहाज से भी यह कॉरिडोर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग यूनिट्स की व्यवस्था की गई है। इससे यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए भी कई स्मार्ट उपाय अपनाए गए हैं।   सरकार का मानना है कि यह परियोजना ‘नए भारत’ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की समग्र आर्थिक प्रगति में भी योगदान मिलेगा। यह कॉरिडोर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में हो रहे तेज विकास का प्रतीक है और भविष्य में इसी तरह की और परियोजनाओं के लिए प्रेरणा बनेगा।   स्थानीय लोगों के लिए भी यह कॉरिडोर कई अवसर लेकर आया है। बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी। छोटे व्यवसायों और कुटीर उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके अलावा, रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आने की संभावना है।   कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर एक गेम-चेंजर परियोजना के रूप में उभरकर सामने आया है। यह न केवल यात्रा को आसान और तेज बनाएगा, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खोलेगा। आने वाले समय में यह कॉरिडोर उत्तर भारत की विकास गाथा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और देश की प्रगति को नई दिशा देगा। The Delhi-Dehradun Economic Corridor, being inaugurated today, is a world-class infrastructure project that will deepen connectivity, boost the economy and tourism. https://t.co/5TayGK4QLZ— Narendra Modi (@narendramodi) April 14, 2026

आसनसोल में दिखा जबरदस्त उत्साह, बोले नरेंद्र मोदी – बंगाल में विकास के लिए BJP को मिलेगा समर्थन

  📰 आसनसोल में जोश का सैलाब: पीएम नरेंद्र मोदी के विकास एजेंडे को मिला समर्थन, टीएमसी पर निशाना   पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में आसनसोल में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम में भारी भीड़ और उत्साह देखने को मिला। इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दावा किया है कि यह जनसमर्थन राज्य में बदलाव की लहर का संकेत है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिनके विकास एजेंडे को लेकर जनता में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।     🔥 आसनसोल में दिखा जबरदस्त जनउत्साह   आसनसोल में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सिर्फ एक राजनीतिक सभा नहीं बल्कि “परिवर्तन की उम्मीद” का प्रतीक बन गया है। सभा में मौजूद लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में नारे लगाए और राज्य में विकास की मांग को दोहराया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह उत्साह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल की जनता अब विकास और सुशासन चाहती है।     🏗️ विकास एजेंडा बना मुख्य मुद्दा   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को इस कार्यक्रम में प्रमुखता से रखा गया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन और डिजिटल इंडिया—का लाभ पश्चिम बंगाल के लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर राज्य में बीजेपी की सरकार बनती है, तो विकास की रफ्तार और तेज होगी।     ⚔️ टीएमसी पर सीधा हमला   इस कार्यक्रम में तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर भी जमकर निशाना साधा गया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार विकास कार्यों में बाधा डाल रही है और राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। सभा में मौजूद लोगों ने भी टीएमसी के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि वे अब बदलाव चाहते हैं।     🗳️ चुनावी संकेत और राजनीतिक संदेश   राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आसनसोल में दिखा यह जनसमर्थन आने वाले चुनावों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। पश्चिम बंगाल में पहले से ही बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। इस तरह के बड़े कार्यक्रम बीजेपी के लिए मनोबल बढ़ाने वाले साबित हो सकते हैं।     🌍 बीजेपी की रणनीति: जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना   भारतीय जनता पार्टी लगातार पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके तहत पार्टी छोटे शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में ज्यादा ध्यान दे रही है, जहां विकास और रोजगार बड़े मुद्दे हैं। आसनसोल, जो एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।     📊 विश्लेषण: क्या बदल रही है बंगाल की राजनीति?   विकास बनाम पहचान की राजनीति बीजेपी विकास के मुद्दे को आगे बढ़ा रही है, जबकि टीएमसी अपनी पारंपरिक राजनीति पर कायम है। औद्योगिक क्षेत्रों में असंतोष रोजगार और उद्योगों की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। केंद्र बनाम राज्य सरकार दोनों के बीच टकराव का असर आम जनता पर भी पड़ रहा है। গতকাল আসানসোলে উদ্দীপনার এক ঝলক। পশ্চিমবঙ্গ বিজেপির উন্নয়নের রূপরেখাকে সমর্থন করছে এবং তৃণমূলকে কখনোই সমর্থন করবে না! pic.twitter.com/IYQyJxzJge— Narendra Modi (@narendramodi) April 10, 2026

अंतर्राष्ट्रीय समाचार

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सिनेमा शादी के बाद रश्मिका-विजय जीत रहे लोगों का दिल, अब तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलो को दिया ये बड़ा तोहफा

Rashmika-Vijay Announcement: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद एक बड़ी अनाउंसमेंट कर हर किसी का दिल जीत लिया. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.                                         रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा 44 सरकारी स्कूलों को स्कॉलरशिप देंगे   न्यूली वेड कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों जहां अपनी शादी को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. वहीं ये जोड़ी अपनी वेडिंग सेलिब्रेशन के बीच तेलंगाना में एक के बाद एक समाज सेवा के काम कर सबका दिल जीत रहे हैं. अब इस कपल ने तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी अनाउंसमेंट की है.     तेलंगाना के 44 सरकारी स्कूलों के लिए विजय-रश्मिका की बड़ी अनाउंसमेंट   दरअसल उदयपुर में शादी करने के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा नागरकुरनूल ज़िले के अचमपेट डिवीज़न में एक्टर के पैतृक गांव पहुंचे थे. वहां के लोगों से बातचीत के दौरान, एक्टर ने एक ज़रूरी घोषणा की, जिस पर वहां जमा भीड़ ने ज़ोरदार तालियां बजाईं. बता दें कि अपने एनजीओ, देवरकोंडा चैरिटेबल ट्रस्ट के ज़रिए, विजय ने इलाके के 44 सरकारी स्कूलों में क्लास 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद जरूरतमंद स्टूडेंट्स की मदद करना और उन्हें बिना किसी पैसे की दिक्कत के अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए बढ़ावा देना है.   सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय तेलुगु में गांववालों से बात करते हुए दिख रहे हैं, जिसमें वह अपने शहर के स्टूडेंट्स के लिए अपना कमिटमेंट बता रहे हैं. उन्होंने कम्युनिटी को भरोसा दिलाया कि स्कॉलरशिप से सीधे तौर पर उन टीनएजर्स को फ़ायदा होगा जो ज़रूरी बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. विजय ने अपने गांव में ज्यादा बार आने का भी वादा किया, ताकि उस कम्युनिटी के साथ उनका रिश्ता और मजबूत हो सके जिसने उनके शुरुआती सालों को बनाया था     शादी की रस्में   रश्मिका और विजय ने 26 फरवरी को उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों से शादी की थी. इसके बाद, कपल ने तिरुपति बालाजी मंदिर में आशीर्वाद लिया था. उन्होंने अपनी शादी को सेलिब्रेट करते हुए कई शहरों में मिठाइयां भी बांटीं. 2 मार्च को, रश्मिका ने तेलंगाना के थुम्मानपेटा में विजय के घर पर अपनी गृहप्रवेश सेरेमनी की. कपल ने अपने नए घर पर सत्यनारायण व्रतम पूजा भी की. रश्मिका ने इस मौके पर क्रीम कांजीवरम साड़ी पहनी थी, जबकि विजय ने गांव में बातचीत के दौरान ऑरेंज टी-शर्ट और ब्लैक ट्राउजर में सिंपल लुक कैरी किया था.     कब है विजय-रश्मिका का रिसेप्शन   यह कपल 4 मार्च को हैदराबाद में इंडस्ट्री के साथियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन होस्ट करने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह इवेंट सिर्फ़ इनविटेशन पर ही होगा, और फैंस और मीडिया से सिक्योरिटी इंतज़ाम का ध्यान रखने की रिक्वेस्ट की है.     विजय-रश्मिका फिल्म   प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें तो ये जोड़ी जल्द ही राणाबली में स्क्रीन स्पेस शेयर करती नजर आएगी. ये फिल्म 11 सितंबर को थिएटर में रिलीज़ होगी.   

T20 World Cup Semifinal Streaming: सेमीफाइनल में होगी भारत और इंग्लैंड की टक्कर, जानें कब-कहां और कैसे देखें लाइव स्ट्रीमिंग

भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही.   IND vs ENG Semifinal Live Streaming: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत सेमीफाइनल में पहुंच चुका है. टीम इंडिया ने 1 मार्च को वेस्टइंडीज को रोमांचक मुकाबले में पांच विकेट से हराकर अंतिम चार में एंट्री की. इस जीत के हीरो रहे संजू सैमसन, जिन्होंने नाबाद 97 रन की बेहतरीन पारी खेली. उनकी पारी में 12 चौके और 4 छक्के शामिल रहे और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.   भारत ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि साउथ अफ्रीका शीर्ष पर रही. अब सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रुप-2 की टॉपर इंग्लैंड से होने जा रहा है. पहला सेमीफाइनल साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा. दोनों मुकाबलों के विजेता 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल खेलेंगे.   IND VS ENG मैच कब और कितने बजे होगा?   भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च, गुरुवार को खेला जाएगा. मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा. यह मुकाबला बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है, क्योंकि दोनों टीमें लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने हैं.   IND VS ENG मैच कहां खेला जाएगा?   यह अहम सेमीफाइनल मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैदान पर बड़े मुकाबलों का लंबा इतिहास रहा है और फैंस को एक बार फिर रोमांचक क्रिकेट की उम्मीद है.   IND VS ENG मैच कहां देखें लाइव?   भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. वहीं ऑनलाइन दर्शक इस मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर देख सकेंगे.   दोनों टीमों के स्क्वॉड   भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), संजू सैमसन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ईशान किशन, रिंकू सिंह, मोहम्मद सिराज, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा.   इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), रेहान अहमद, जोफ्रा आर्चर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जोस बटलर, सैम करन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक्स, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, फिल सॉल्ट, जोश टंग और ल्यूक वुड. 

इस हीरो का रिकॉर्ड तोड़ने में छूटे 'धुरंधर 2' के पसीने, पेड प्रीव्यू में मात देने से इतनी पीछे है रणवीर सिंह की फिल्म

  Dhurandhar 2 Advance Booking: रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉलीवुड की सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है. हालांकि ये एक साउथ हीरो की फिल्म को मात नहीं दे पा रही है.   रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अर्जुन रामपाल स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही गदर मचाया हुआ है. फिलहाल ये 18 मार्च, 2026 को होने वाले पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में गर्दा उड़ा रही है. वैसे ये फिल्म पहले ही 'स्त्री 2' के पेड प्रीव्यू शो को रिकॉर्ड को मिट्टी में मिलाकर बॉलीवुड के लिए इतिहास रच चुकी है. लेकिन आदित्य धर निर्देशित इस फिल्म के साउथ के एक स्टार का रिकॉर्ड तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं.   धुरंधर 2 ने पेड प्रीव्यू के लिए एडवांस बुकिंग में कितनी कर ली है कमाई?   धुरंधर को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली थी. ऐसे में इसकी सीक्वल धुरंधर द रिवेंज या धुरंधर 2 को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की तो पूरी उम्मीद है ही लेकिन ये फिल्म तो रिलीज से पहले ही कमाल कर रही है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर रही है.  सैकनिल्क के मुताबिक, इसने पेड प्रीव्यू से अब तक 18.78 करोड़ (ब्लॉक्ड सीटों को छोड़कर) कमा लिएए हैं वहीं ब्लॉक सीटों के साथ इसका पेड प्रीव्यू के लिए प्री टिकट सेल का कलेक्शन 23.99 करोड़ पहुंच चुका है.  देश भर में 8 हजार 31 शोज के लिए इसके 3 लाख 51 हजार 4 सौ 13 टिकट बिक चुके हैं.    धुरंधर 2 ने स्त्री 2 को पछाड़ बनाया नया रिकॉर्ड   बता दें कि कि 2024 में, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 ने इंडिया में पेड प्रीव्यू में 9.40 करोड़ की नेट कमाई करके नया माइलस्टोन हासिल किया था. लेकिन धुरंधर: द रिवेंज ने एडवांस बुकिंग में इससे कई गुना ज़्यादा सेल्स के साथ इसे धूल चटा दी है. इसकी के साथ .े बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्रीमियर सेल्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम भी कर चुकी है.    धुरंधर 2 के पवन कल्याण की OG को मात देने में छूटे पसीने   इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि धुरंधर 2 ने पेड पीव्यू के लिए प्री सेल्स में बेशक धमाकेदार कमाई कर ली हैं लेकिन इसका टारगेट इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी पेड प्रीव्यू कमाई का रिकॉर्ड अपने नाम करना है. दरअसल पवन कल्याण की दे कॉल हिम OG ने 21 करोड़ के बड़े नेट कलेक्शन के साथ किसी इंडियन फिल्म के लिए अब तक के सबसे ज़्यादा पेड प्रीव्यू अपने नाम किए हुए हैं. फिलहाल रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 के लिए इस रिकॉर्ड को तोड़ने में पसीने छूट रहे हैं. हालांकि अभी फिल्म के पेड प्रीव्यू शो में 6 दिन बचे हैं और इसे पवन कल्याण के रिकॉर्ड को मात देने से सिर्फ 3 करोड़ के करीब पीछे है. इसलिए पूरी उम्मीद है कि  धुरंधर 2 इस उपलब्धि को हासिल कर इतिहास रच सकती है.      

बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? बड़ा अपडेट

  Bihar New CM: नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में बीजेपी का सीएम बनना लगभग तय है. सूत्रों ने बताया कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक सीएम पद पर बने रहेंगे, वो तुरंत पद से इस्तीफा नहीं देंगे.   बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय, कब होगा नई सरकार का गठन? जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम   बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसके बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य में नई सरकार का गठन होगा।   नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है—क्या राज्य को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन बदलने वाला है? और आखिर नई सरकार का गठन कब होगा? इन सभी सवालों पर सियासी गलियारों में तेजी से चर्चा चल रही है।     नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना क्यों बड़ा फैसला माना जा रहा नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और वे कई बार मुख्यमंत्री बने। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।   लेकिन अब उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिहार की सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम एनडीए के भीतर एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बीजेपी अब सीधे राज्य की कमान संभालना चाहती है।   नीतीश कुमार ने स्वयं कहा है कि वे राज्य में बनने वाली नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देंगे। इसका मतलब यह है कि वे सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी किसी और नेता के हाथ में होगी।     नई सरकार का गठन कब होगा?   राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं और उसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।   दरअसल, राज्यसभा का नया कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाला है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि उसी समय सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार में नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा हो सकती है।   इस दौरान एनडीए के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला भी चल रहा है। इन बैठकों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर चर्चा की जा रही है।     क्या बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा?   अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं और बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। अभी तक राज्य में बीजेपी सहयोगी दल के रूप में सत्ता में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद उसके पास कभी नहीं रहा।   विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा और पार्टी अब राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसलिए यह संभावना काफी बढ़ गई है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा।     संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन-कौन?   नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।   1. सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। संगठन और राजनीति दोनों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।   2. नित्यानंद राय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वे लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और बिहार में पार्टी के प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं।   3. कोई नया चेहरा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि बीजेपी किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। इससे सामाजिक समीकरण साधने और आगामी चुनावों की रणनीति मजबूत करने की कोशिश हो सकती है।     एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन कैसे बदलेगा?   अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद संभालती है तो एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव होगा। अभी तक जेडीयू के नेतृत्व में गठबंधन सरकार चल रही थी। नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहे हैं। लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी की भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जेडीयू के भविष्य को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं।     विपक्ष की प्रतिक्रिया   इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता ने जिस चेहरे पर वोट दिया था, वही मुख्यमंत्री पद छोड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने राजनीतिक रणनीति के तहत सत्ता परिवर्तन की योजना बनाई है। हालांकि एनडीए के नेता इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं।     बिहार की राजनीति पर संभावित असर   नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। लगभग 20 साल तक राज्य की राजनीति का केंद्र रहे नेता के हटने से सत्ता संरचना पूरी तरह बदल सकती है।   इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं:   बीजेपी का प्रभाव बढ़ेगा जेडीयू की भूमिका बदल सकती है विपक्ष नई रणनीति बना सकता है सामाजिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है   क्या नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ेगी? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव काफी लंबा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में उनकी उपस्थिति एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है।     बिहार में सत्ता परिवर्तन क्यों अहम है? बिहार भारत के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है। अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो यह पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि अब तक बिहार उन कुछ हिंदीभाषी राज्यों में शामिल था जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा था।     आने वाले दिनों में क्या होगा? अगले कुछ सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संभावित घटनाक्रम इस प्रकार हो सकते हैं: नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी नए मुख्यमंत्री का चयन होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के आसपास यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो सकती है।  

MP के विकास को मिली गति! गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेलवे लाइन दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है, जिससे बालाघाट, जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ेंगे.  Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि केंद्रीय कैबिनेट ने गोंदिया–जबलपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री ने इसे महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात करार दिया और इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्रिमंडल का हृदय से आभार माना उनका कहना है कि इस परियोजना से नक्सल समस्या से मुक्त बालाघाट जिले के साथ ही जबलपुर, मंडला और सिवनी में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापार, व्यवसाय और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सेवातीर्थ में केन्द्रीय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है.   रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे   इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गोंदिया–जबलपुर रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस कार्य के पूर्ण होने से मध्‍यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे.   गोंदिया–जबलपुर लाइन में ब्रिज और वन्यजीव सुरक्षा   करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रूपए से 5 साल में पूरा होगा. जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा. इस दौरान इस लाईन में आने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रूपए अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे. साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे.  

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देशभर में शुरू होंगी 5 रीजनल एग्रो-क्लाइमेटिक कॉन्फ्रेंस, राजस्थान से हुआ ऐतिहासिक आगाज़

  भारत में कृषि सुधार की नई पहल: रीजनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस की शुरुआत राजस्थान से   केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा हाल ही में किया गया एक महत्वपूर्ण ऐलान देश के कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Twitter (अब X) पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत के अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन, विविध जलवायु, मिट्टी की संरचना, मौसम की परिस्थितियों और फसलों की भिन्नता को ध्यान में रखते हुए अब देशभर में पाँच रीजनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। इन कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याओं को समझना, समाधान खोजना और कृषि क्षेत्र को अधिक सशक्त बनाना है। इस पहल की शुरुआत राजस्थान की पवित्र भूमि से की गई है, जिसे कृषि नवाचारों और पारंपरिक खेती के संगम के रूप में देखा जा रहा है।   भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश में कृषि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। अलग-अलग राज्यों में जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता और वर्षा के पैटर्न में भारी अंतर देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में गेहूं और धान की खेती प्रमुख है, जबकि दक्षिण भारत में चावल, नारियल और मसालों की खेती अधिक होती है। इसी तरह, पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों में बाजरा और दालें उगाई जाती हैं। ऐसे में एक समान कृषि नीति या रणनीति पूरे देश पर लागू करना प्रभावी नहीं हो सकता। यही कारण है कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने क्षेत्रीय स्तर पर कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्णय लिया है।   इन रीजनल कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और अन्य संबंधित हितधारकों को एक मंच पर लाना है, जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकें और क्षेत्र विशेष की चुनौतियों का समाधान खोज सकें। इन सम्मेलनों में जल प्रबंधन, मिट्टी की उर्वरता, आधुनिक तकनीक का उपयोग, फसल विविधीकरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे इनका अधिकतम लाभ उठा सकें।   राजस्थान से इस पहल की शुरुआत करना भी एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है। राजस्थान का अधिकांश हिस्सा शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाला है, जहां जल संकट और मिट्टी की उर्वरता बड़ी चुनौतियां हैं। इसके बावजूद यहां के किसानों ने अपने अनुभव और नवाचारों के जरिए खेती को सफल बनाया है। ऐसे में यहां आयोजित पहली कॉन्फ्रेंस से अन्य क्षेत्रों के लिए भी सीखने का अवसर मिलेगा।   विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस से न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। जब नीतियां स्थानीय जरूरतों के अनुसार बनाई जाती हैं, तो उनका प्रभाव अधिक होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में पानी की कमी है, तो वहां सूखा-रोधी फसलों को बढ़ावा दिया जा सकता है। वहीं, जहां पानी की उपलब्धता अधिक है, वहां उच्च उत्पादकता वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा सकता है।   इसके अलावा, इन कॉन्फ्रेंस के जरिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों को भी बढ़ावा मिलेगा। आज के दौर में ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कृषि में तेजी से बढ़ रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से किसान अपनी फसल की स्थिति का बेहतर आकलन कर सकते हैं और समय पर सही निर्णय ले सकते हैं। सरकार इन कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किसानों को इन नई तकनीकों से परिचित कराने की योजना बना रही है।   जलवायु परिवर्तन भी आज कृषि के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अनियमित वर्षा, तापमान में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर समाधान खोजना बेहद जरूरी हो गया है। इन कॉन्फ्रेंस में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के उपायों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, जैसे कि जल संरक्षण, फसल बीमा और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना।   किसानों के लिए बाजार तक पहुंच और उचित मूल्य मिलना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई बार किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है। इन कॉन्फ्रेंस में कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन, ई-नाम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और वैल्यू एडिशन पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।   सरकार की इस पहल को देश के कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल किसानों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में यह पहल भारत को कृषि के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बना सकती है।   अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन, जलवायु, मिट्टी, मौसम और अलग-अलग फसलों के लिए हमने यह तय किया कि अब रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। पूरे देश में ऐसी पाँच रीजनल कॉन्फ्रेंस होंगी। यह हमारा सौभाग्य है कि इनका शुभारंभ राजस्थान की इस पवित्र धरा से हो रहा है। pic.twitter.com/D7qDrM7xkP— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) April 7, 2026

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गर्मी, युद्ध और अब बार‍िश-ओलावृष्ट‍ि से खतरे में खेती, ट्र‍िपल अटैक से बेहाल क‍िसान

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  देश के किसानों को इस साल फरवरी-मार्च में तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं की पैदावार में कमी, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कृषि उत्पादों के निर्यात में बाधा, और बेमौसम बारिश से तैयार फसलों को भारी नुकसान.     देश के किसानों पर एक ही महीने में तिहरी मार पड़ी है. मौसम में अचानक आए उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर और बेमौसम बारिश—इन तीनों ने मिलकर  लगभग हर प्रमुख फसल को प्रभावित कर दिया है. स्थिति ऐसी है कि अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी सभी फसलें किसी न किसी मोर्चे पर गंभीर दबाव में हैं. पूरे हालात से स‍िर्फ क‍िसान ही परेशान नहीं हैं बल्क‍ि केंद्र सरकार की भी टेंशन बढ़ गई है. पूरे हालात की समीक्षा के ल‍िए सरकार बैठक पर बैठक कर रही है. लेक‍िन सवाल यह है क‍ि इतने बड़े संकट को झेल रहे क‍िसानों के जख्म पर मरहम कौन लगाएगा?    सबसे बड़ी चिंता गेहूं को लेकर है. फरवरी-मार्च का समय गेहूं की भरपूर पैदावार के लिए बेहद अहम माना जाता है, लेकिन इस बार तापमान में अचानक वृद्धि ने हीट स्ट्रेस की स्थिति बना दी. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उपज में कमी आने की आशंका है.   दूसरा बड़ा झटका पश्चिम एशिया की जंग से लगा है. इस संघर्ष के चलते समुद्री रूट डिस्टर्ब हो गए हैं और भारत के कई प्रमुख कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग ठप हो गया है. बासमती चावल, प्याज, केला और अंगूर जैसे उत्पाद, जिनकी रमजान के दौरान पश्चिम एशिया में भारी मांग रहती है, इस बार उस बाजार तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. शिपिंग बंद होने से किसानों और निर्यातकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.   तीसरी और सबसे ताजा मार बेमौसम बारिश की है. देश के कई हिस्सों में अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया है आलू, सरसों, प्याज और दालें—जो कटाई के बिल्कुल करीब थीं—अब खराब होने के खतरे में हैं. इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ सकता है.   कुल मिलाकर, इस साल  की शुरुआत किसानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है. मौसम, अंतरराष्ट्रीय हालात और प्राकृतिक मार के मिलेजुले प्रभाव ने देश की कृषि व्यवस्था को झकझोर दिया है.   फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी का गेहूं पर असरफरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी को लेकर करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के पूर्व डायरेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह ने 'किसान तक' से कहा, पूरे हरियाणा में कोई नुकसान नहीं है और आगे भी किसी नुकसान की आशंका नहीं है.   देश के अन्य राज्यों की बात करें तो अक्तूबर अंत से दिसंबर अंत तक गेहूं की बुआई होती है. इस अलग-अलग स्टेज में मौसम के मुताबिक गेहूं की खेती होती है. अभी तक रात का तापमान अच्छा रहा है जो गेहूं की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसलिए, गेहूं के उत्पादन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. सबकुछ ठीक रहेगा.   बिहार में गेहूं की खेती पर क्या असर होगा? इसके जवाब में पूसा, बिहार के गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डीके सिंह ने कहा, जिस गेहूं की बुआई 15 दिसंबर के बाद हुई है, उस पर बुरा असर पड़ेगा. 10 से 20 दिसंबर के बीच बोई गई फसल पर आंशिक असर और नवंबर की खेती पर कोई असर नहीं होगा. डीके सिंह ने कहा, बिहार के अधिकांश जिलों में 10 से 20 दिसंबर के बीच गेहूं की बुआई है, इसलिए उत्पादन पर आंशिक असर हो सकता है. हालांकि जिन खेतों में अभी नमी है, उसका उत्पादन प्रभावित नहीं होगा.    उत्तर प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हाल रहेगा. बुंदेलखंड का इलाका गेहूं के लिए प्रमुख है, वहां गर्मी का असर देखा गया है. केवीके जालौन के अध्यक्ष और हेड डॉ. मोहम्मद मुस्तफा ने बताया कि बुंदेलखंड में इन दिनों तापमान में बढ़ोतरी हुई है. जालौन में तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया है जबकि झांसी में 40 डिग्री तक. ऐसे में बढ़ते तापमान का गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा.   लगातार 1 हफ्ते तक तापमान में बढ़ोतरी का असर गेहूं के बालियों के दानों पर पड़ता है. इससे दाने पतले हो जाते हैं. ऐसे में प्रति एकड़ उत्पादन में 5 से 7% गिरावट देखने को मिलेगी. जिन किसानों ने मार्च की शुरुआत में हल्की सिंचाई कर दी थी, उन पर असर कम दिखाई देगा.     गर्मी का सबसे अधिक असर पंजाब के मालवा क्षेत्र में देखा जा रहा है. संगरूर जिले के किसान हरजिंदर सिंह ने 'किसान तक' से कहा, फरवरी के अंतिम सप्ताह में तेज गर्मी पड़ी. अचानक बढ़ी गर्मी ने गेहूं को भारी नुकसान पहुंचाया है. गेहूं के दाने में बदलाव आ गया. उस दौरान मौसम कुछ ठंडा रहता तो गेहूं के दाने फूलते, लेकिन अचानक गर्मी से दाना कमजोर रह गया. ठंड से जहां दाना बढ़ता है, वहीं गर्मी से दाने सिकुड़ते हैं. इससे गेहूं का वजन कम हो गया.   संगरूर में 16 एकड़ की खेती करने वाले हरजिंदर सिंह ने बताया कि इस बार प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल गेहूं का नुकसान होगा. यह असर केवल संगरूर तक सीमित नहीं नहीं बल्कि कई जिले चपेट में हैं. मानसा, पटियाला, बठिंडा, मलेर कोटला, मोगा और बरनाला जिलों में गेहूं को बहुत अधिक नुकसान है. मालवा पट्टी के जितने जिले हैं, जहां गेहूं की अधिक खेती होती है, वहां गेहूं का उत्पादन बड़े पैमाने पर कम रहेगा.    संगरूर जिले में लड्डी गांव के किसान जगतार सिंह ने बताया  पहले गर्मी ने गेहूं को नुकसान पहुंचाया और अब बारिश ने पूरा तबाह कर दिया. गेहूं की उपज में 30 फीसद तक गिरावट आ सकती है. प्रति एकड़ 4 क्विंटल तक कमी की आशंका है. जगतार सिंह ने कहा कि संगरूर जिले के लगभग सभी किसान गर्मी और बेमौसम बारिश से प्रभावित हुए हैं.    पंजाब से सटे हरियाणा में किसानों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी. वे बताते हैं कि हीट स्ट्रेस जैसी कोई समस्या नहीं है, लेकिन अचानक हुई बारिश ने गेहूं को नुकसान पहुंचाया है. किसानों ने बताया कि फरवरी-मार्च की बढ़ी गर्मी से पहले ही गेहूं के दाने अपने फाइनल स्टेज में आ गए थे, इसलिए गर्मी का कोई असर नहीं नहीं होगा.   पश्चिम एशिया की लड़ाई किसानों पर भारी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत के निर्यात को बहुत प्रभावित किया है. बासमती चावल, प्याज, अंगूर, केला, आलू जैसी उपज का निर्यात ठप हो गया है. इसका सबसे अधिक नुकसान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों को उठाना पड़ा है.    मिडिल ईस्ट भारत के कृषि निर्यात का बहुत बड़ा बाजार है. भारत से हर साल बड़ी मात्रा में बासमती चावल, प्याज, अंगूर, अनार और दालें खाड़ी देशों में भेजे  जाते हैं. ईरान, सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात, इनमें प्रमुख बाजार हैं. लेकिन अब युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में बाधा आ गई है. जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, कंटेनर बंदरगाहों पर फंस रहे हैं और लॉजिस्टिक संकट पैदा हो गया है.   पंजाब बासमती राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (PBREA) के डायरेक्टर अशोक सेठी के अनुसार, मिडिल ईस्ट के देशों में बिरयानी की भारी लोकप्रियता के कारण भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यात इसी क्षेत्र में   होता है. यही वजह है कि यह इलाका भारतीय बासमती का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजार माना जाता है. लेकिन वर्तमान में इस क्षेत्र में चल रहे युद्ध ने पूरे बासमती कारोबार को गहरे संकट में धकेल दिया है.   सेठी बताते हैं कि अधिकांश निर्यात उधार पर होता है, जिसके चलते बड़ी मात्रा में भुगतान अटका हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ECGC) के माध्यम से व्यापारियों को भुगतान की गारंटी उपलब्ध कराई जाए.    उनके मुताबिक, यदि निर्यात पूरी तरह बंद हो गया या कम हुआ, दोनों ही स्थितियों में किसानों को बड़ा नुकसान होगा, क्योंकि निर्यात घटने से बासमती के दाम गिरेंगे और इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा. भुगतान में अड़चनों के चलते कई सौदों के रद्द होने की आशंका भी बढ़ गई है.   राजस्थान के बूंदी को बासमती का कटोरा कहा जाता है. यहां से बड़ी मात्रा में चावल का निर्यात खाड़ी देशों, विशेष रूप से ईरान और आसपास के क्षेत्रों में होता रहा है. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से निर्यात गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं. व्यापारियों के अनुसार, जैसे ही युद्ध की स्थिति बनी, विदेशी खरीदारों ने ऑर्डर रोक दिए और नए सौदों से दूरी बना ली.   बासमती से बुरा हाल महाराष्ट्र के प्याज, केला और अंगूर का हुआ है. बीच रमजान में इन उपजों की मांग ठप हो गई. पूरे पश्चिम एशिया के देश भारत के कृषि उत्पादों पर निर्भर हैं, लेकिन लड़ाई ने सबकुछ चौपट कर दिया. रमजान और ईद के दौरान खाड़ी देशों में बढ़ने वाली केला मांग ने हमेशा महाराष्ट्र के जलगांव और मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के किसानों को अच्छी कमाई दिलाई है, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह उलट गए हैं.   ईरान–अमेरिकी लड़ाई के चलते खाड़ी देशों के रास्ते बंद होने, माल वापस लौट आने और जेबेल अली जैसे बड़े बंदरगाहों पर लोडिंग–अनलोडिंग रुक जाने से निर्यात प्रभावित हुआ है. हजारों टन केला खेतों, ट्रकों और कंटेनरों में फंसा है. कई खेप बीच रास्ते से वापस लौट रही है, जिससे किसानों पर भारी आर्थिक मार पड़ी है.   जुन्नर का नारंगा इलाका महाराष्ट्र में अंगूर का हब है. यहां से हजारों टन फल और सब्जियां दुनिया के कई देशों में एक्सपोर्ट होते हैं. हालिया घटनाक्रम के  बारे में किसान प्रकाश वाघ कहते हैं, रमजान का महीना है, लेकिन अंगूर किसानों में मायूसी है.   इस महीने अंगूर की सबसे अधिक सप्लाई पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के देशों में भेजी जाती है. मगर ईरान-अमेरिका की लड़ाई से सबकुछ ठप हो गया है. प्रकाश वाघ हर साल लगभग 50-60 क्विंटल अंगूर निर्यात करते हैं, लेकिन अभी तक 5-6 क्विंटल ही सप्लाई कर सके हैं. इस लड़ाई से उन्हें 50 लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है.   बेमौसम बारिश से किसान और फसल तबाह जानकारों की मानें तो किसानों को जितना नुकसान हीट स्ट्रेस और लड़ाई से नहीं हुआ, उससे कहीं अधिक मार्च महीने की बेमौसम बारिश ने कर दिया. देश का लगभग हर क्षेत्र बारिश से प्रभावित है. हरियाणा में करनाल के रहने वाले कमलदीप बताते हैं कि हालिया बारिश से गेहूं और लहसुन को बहुत नुकसान हुआ है. 13 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू होनी है, लेकिन कटाई के आसपास ही बारिश होने से फसल को क्षति हुई है. गेहूं की फसल गिर गई है और लहसुन के खेत में पानी भर गया है. इससे किसानों पर तगड़ी मार पड़ी है.   हरियाणा में ही रेवाड़ी के देशराज चौहान बताते हैं, बारिश से सरसों, गेहूं, चना और ग्वार की फसल पर असर है. जिन किसानों ने अपनी सरसों , गेहूं, चना और ग्वार की फसल पर असर है. जिन किसानों ने अपनी सरसों मंडी में बेच दी है, उन्हें तो फायदा होगा, लेकिन जिनकी उपज मंडी में अभी तुली नहीं है वे बहुत नुकसान में हैं. कई किसानों की सरसों मंडी में बह गई, अब उनकी लागत भी नहीं निकल पाएगी.   बारिश और तेज हवा से गेहूं की फसल गिर गई है जिससे दाने कमजोर होंगे और उत्पादन गिर जाएगा. देशराज कहते हैं, खेतों में गिरी फसल को काटने का खर्च भी बढ़ेगा. अब मजदूरों को गेहूं को सुलझा कर काटना होगा जिससे समय बढ़ेगा. मजदूर कटाई के लिए पहले 5 हजार रुपये प्रति किल्ले मांगते थे, लेकिन अब 10 हजार रुपये मांगेंगे. इससे किसानों को डबल नुकसान होगा.    महाराष्ट्र  में भी बारिश से बहुत नुकसान है. अमरावती में ओलावृष्टि का कहर देखा गया है. यहां गेहूं, संतरा, तरबूज, नींबू-प्याज सहित कई फसलें बर्बाद हो गई हैं. तेज हवा और बारिश के साथ ओले गिरे हैं जिससे कटाई की कगार पर खड़ी रबी फसल तबाह हो गई है. किसानों ने मुआवजे की मांग तेज कर दी है.   कुल मिलाकर, देश के कई राज्यों के किसानों पर इस समय तिहरी मार पड़ी है—हीट स्ट्रेस से गेहूं प्रभावित हुआ, पश्चिम एशिया की लड़ाई के कारण बासमती सहित कई कृषि उत्पादों का निर्यात ठप पड़ा, और ऊपर से बेमौसम बारिश ने तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया. इन तीनों संकटों का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है. 

Metroheadlines मार्च 20, 2026 0

धर्म और अध्यात्म

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अप्रैल में भौम प्रदोष व्रत कब ? नोट करें डेट, मांगलिक दोष से मुक्ति पाने का दिन

  Bhaum Pradosh vrat april 2026: भौम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026 को है. मांगलिक दोष से मुक्ति, शीघ्र विवाह, साहस पाने के लिए ये व्रत फलदायी माना गया है. भौम प्रदोष व्रत में पूजा का मुहूर्त, विधि देखें   Bhaum Pradosh Vrat 2026: वैशाख माह का दूसरा प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026 को है. मंगलवार होने से ये भौम प्रदोष व्रत होगा. मंगलवार का दिन मंगल ग्रह से जुड़ा होने के कारण यह व्रत विशेष रूप से शक्ति, साहस और ऋण मुक्ति देने वाला माना जाता है. भौम प्रदोष को मंगल प्रदोष भी कहा जाता है.     भौम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त   वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल 2026 को शाम 6.51 पर शुरू होगी और अगले दिन 29 अप्रैल 2026 को शाम 7.51 पर समाप्त होगी.   इस दिन पूजा के लिए शाम 6.54 से रात 09.04 तक शुभ मुहूर्त है. इस समय प्रदोष काल रहेगा. इस काल में शिवलिंग का अभिषेक समस्त कार्यों को पूर्ण करने वाला माना जाता है.     भौम प्रदोष व्रत के लाभ   भौम प्रदोष का व्रत ऋण से मुक्ति, भूमि-भवन आदि सम्बन्धित विवादों के निवारण तथा शारीरिक बल की वृद्धि हेतु किया जाता है. मंगल ग्रह से सम्बन्धित नकारात्मक प्रभावों से रक्षा में भी यह व्रत सहायक सिद्ध होता है.वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर करने और विवाह में देरी को समाप्त करने के लिए भी यह व्रत किया जाता है.   इस दिन उपवास और पूजा करने से मन की शुद्धि होती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त होती है. व्यक्ति के अंदर धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच विकसित होती है.     भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि   भौम प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद का समय) में की जाती है. इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखने का नियम होता है. शाम के समय पुनः स्नान कर पूजा स्थान को शुद्ध करें और भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें. गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें. शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें. दीपक जलाकर शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना कहें और अंत में आरती करके प्रसाद बांटें. व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है. लाल वस्त्र, मसूर दाल या गुड़ का दान मंगल ग्रह को शांत करने के लिए लाभकारी होता है.   भौम प्रदोष व्रत के नियम   इस दिन झूठ बोलना, किसी से बहस करना या क्रोध करना अशुभ माना जाता है. मंगल ग्रह का संबंध ऊर्जा और क्रोध से होता है, इसलिए इस दिन गुस्सा करने से उसका नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है. शांत और संयमित व्यवहार रखना बहुत जरूरी है. माता-पिता, गुरु, बुजुर्ग या जरूरतमंद का अपमान नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से पुण्य कम होता है और भगवान शिव की कृपा भी नहीं मिलती. सेवा, दया और सम्मान का भाव रखना इस व्रत में बहुत महत्वपूर्ण है. इस दिन चोरी, छल, कपट या किसी को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों से पूरी तरह बचना चाहिए. साथ ही, बुरी संगति या गलत विचारों से भी दूरी बनाए रखें. व्रत का उद्देश्य आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाना होता है. व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत जरूरी होता है. इससे मन की एकाग्रता बनी रहती है और पूजा का फल अधिक मिलता है.

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0

वैशाख अमावस्या 16 या 17 अप्रैल कब ? स्नान-दान का मुहूर्त, पितृ पूजा किस दिन करें

हनुमान जयंती पर पढ़ें ये पावन कथा, जानें कैसे शिव के अंशावतार में जन्मे बजरंगबली

अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय

आज सोम प्रदोष व्रत और अनंग त्रयोदशी का संयोग, पूजा का मुहूर्त, पूरा पंचांग देखें ?

  Aaj Ka Panchang 30 March 2026: 30 मार्च 2026 सोम प्रदोष व्रत और अनंग त्रयोदशी है.   जानें आज का अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल, चंद्रमा का गोचर, शुभ-अशुभ समय और इस दिन का उपाय.     Hindi Panchang 30 मार्च 2026: 30 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल पक्ष का सोम प्रदोष व्रत और अनंग त्रयोदशी का संयोग बना है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ कामदेव (जिन्हें 'अनंग' कहा जाता है) और रति की पूजा की जाती है, मान्यता है इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है. इस दिन कामदेव के मंत्र क्लीं कामदेवाय नमः का 21 बार जप करना चाहिए.   30 मार्च का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 30 March 2026)   तिथि द्वादशी (29 मार्च 2026, सुबह 7.46 - 30 मार्च 2026, सुबह 7.09, इसके बाद त्रयोदशी शुरू) वार सोमवार नक्षत्र मघा योग शूल, रवि योग सूर्योदय सुबह 7.15 सूर्यास्त सुबह 5.38 चंद्रोदय  दोपहर 4.16 चंद्रोस्त सुबह 5.00, 31 मार्च चंद्र राशि सिंह चौघड़िया मुहूर्त सुबह का चौघड़िया शुभ सुबह 6.14 - सुबह 7.47 शाम का चौघड़िया लाभ शाम 5.05 - रात 8.05     राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal) राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें) सुबह 7.49 - सुबह 9.20 यमगण्ड काल सुबह 10.53 - दोपहर 12.26  गुलिक काल दोपहर 1.59 - दोपहर 3.32 विडाल योग दोपहर 2.48 - सुबह 6.13, 31 मार्च     ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 30 March 2026) सूर्य मीन चंद्रमा सिंह मंगल कुंभ बुध कुंभ गुरु मिथुन शुक्र मेष शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह   30 मार्च 2026 का राशिफल   ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है. मेष: आज भाग्य साथ देगा, कार्यों में सफलता और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ेगा. वृषभ: खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन सहयोग मिलेगा—आत्मविश्वास संतुलित रखें. मिथुन: आय में वृद्धि और प्रेम जीवन में खुशियां, दिन उत्साह से भरा रहेगा. कर्क: करियर में सफलता और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी. सिंह: यात्रा और निवेश के योग, लेकिन सेहत और विरोधियों से सावधान रहें. कन्या: आत्मविश्वास से काम करें, तनाव से बचें और परिवार का सहयोग मिलेगा. तुला: प्रमोशन और धन लाभ के योग, रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी. वृश्चिक: खर्च बढ़ेंगे, लेकिन कार्यक्षेत्र में सराहना और मानसिक मजबूती रहेगी. धनु: आय में वृद्धि और प्रेम संबंधों में गहराई, नए अवसर मिलेंगे. मकर: प्रॉपर्टी से लाभ और परिवार में अच्छा तालमेल रहेगा. कुंभ: आत्मविश्वास बढ़ेगा, लेकिन निवेश और रिश्तों में सावधानी जरूरी है. मीन: आर्थिक लाभ और सुख-समृद्धि, परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा.   FAQs: 30 मार्च 2026   Q.कौन सा उपाय करें ? शादी हो चुकी है तो उसमें प्यार को बरकरार रखना चाहते हैं तो सोमवार के दिन दूध में थोड़ा सा केसर और कुछ फूल डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं.   Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ? इस दिन शूल और रवि योग बन रहा है.

Metroheadlines मार्च 30, 2026 0

अप्रैल-मई में शादी के शुभ दिन! जानें सही समय और तिथियां, कहीं चूक न जाएं!

महाअष्टमी पर PM Modi समेत कई राजनेताओं ने X पर दिया संदेश, महागौरी से की शक्ति-समृद्धि की प्रार्थना ?

अष्टमी-नवमी कब है कन्या पूजन? जानें महत्व, पूजा विधि और हर उम्र की कन्या का फल!

नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता की पूजा से बच्चों में बढ़ती है एकाग्रता! जानें विधि, मंत्र, भोग

  Chaitra Navratri 2026 Day 5 Puja: 23 मार्च को चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने से ऐश्वर्य और एकाग्रता मिलती है. ऐसे में माता की साधना के लिए इस दिन क्या करें जान लें.   Chaitra Navratri 2026 Day 5 Puja: नवरात्रि के 5वें दिन 23 मार्च 2026 को मां स्कंदमाता की पूजा होगी. ये माता दुर्गा की पांचवीं शक्ति हैं. स्कंदमाता” का अर्थ है- भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता.इनकी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, इसलिए इन्हें मातृत्व और करुणा का प्रतीक माना जाता है.   स्कंदमाता का स्वरूप   स्कंदमाता मां दुर्गा का अत्यंत करुणामयी और कल्याणकारी रूप हैं. चार भुजाएं होती हैं दो हाथों में कमल पुष्प एक हाथ में बाल स्कंद (कार्तिकेय) एक हाथ वरमुद्रा में वाहन - सिंह कमल के आसन पर विराजमान (इसी कारण “पद्मासना” भी कहा जाता है)   स्कंदमाता की पूजा करने के लाभ   यह स्वरूप ममता, दया और शक्ति का संगम है. मान्यता है कि जो लोग संतान प्राप्ति में बाधाएं झेल रहे, माता की कृपा से उनके घर जल्द ही किलकारियां गूंजती हैं. जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं. भक्त को भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है. स्कंदमाता भक्तों को एकाग्र रहना सिखाती हैं. वह बताती हैं कि जीवन अच्छे-बुरे के बीच एक देवासुर संग्राम है और हम खुद अपने सेनापति हैं. स्कंदमाता की पूजा करते रहने से हमें सैन्य संचालन की शक्ति मिलती रहती है. उनकी पूजा-आराधना से साधक को परम शांति और सुख का अनुभव होता है.   मां स्कंदमाता की पूजा विधि   सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सिल्वर रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि इस दिन सोमवार है. माता को कुमकुम, रोली, और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं. पूजा के दौरान "ॐ देवी स्कंदमातायै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें. कपूर या घी के दीपक से मां स्कंदमाता की आरती उतारें और स्तुति करें, जैसे: "या देवी सर्वभूतेषु मा स्कंद माता रूपेण संस्थिता". आरती उतारें और गोधुलि बेला में पुन माता की पूजा करें.   मां स्कंदमाता का भोग   मां स्कंदमाता की आराधना होती है. इस दिन केला या केले से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है.   मां स्कंदमाता मंत्र   पूजा मंत्र - ॐ देवी स्कंदमातायै नम: ध्यान मंत्र - सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।   स्कंदमाता की आरती   जय तेरी हो स्कंदमाता, पांचवां नाम तुम्हारा आता। सब के मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी। जय तेरी हो स्कंदमाता तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हर दम तुम्हें ध्याता रहूं मैं। कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा। जय तेरी हो स्कंदमाता कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरो में तेरा बसेरा। हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाए तेरे भक्त प्यारे। जय तेरी हो स्कंदमाता भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो। इंद्र आदि देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे। जय तेरी हो स्कंदमाता दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए, तुम ही खंडा हाथ उठाएं। दास को सदा बचाने आईं, चमन की आस पुराने आई। जय तेरी हो स्कंदमाता   स्कंदमाता देती हैं ये सीख   स्कंदमाता का यह रूप बताता है कि मोह माया में रहते हुए भी किस तरह बुद्धि और विवेक से असुरों का नाश करना चाहिए. माता को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है इसलिए इन्हें अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है.

Metroheadlines मार्च 23, 2026 0

Happy Cheti Chand 2026 Wishes: चेटी चंड 20 मार्च 2026 आज झूलेलाल जयंती मनाई जा रही है.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से पाएं तप, ज्ञान और मनोवांछित फल! जानें विधि, मंत्र और आरती

चैत्र नवरात्रि के 9 दिन और 9 भोग, जानें किस देवी को कौन सा भोग लगाना शुभ

चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 या 18 मार्च कब ? शिव पूजा का मुहूर्त देखें

  Chaitra Masik Shivratri 2026: चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 मार्च को है. ये व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, शादी के लिए सुयोग्य जीवनसाथी, आर्थिक लाभ के लिए रखा जाता है.   Chaitra Masik Shivratri 2026: महाशिवरात्रि के बाद साल 2026 की पहली चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 मार्च 2026 को है. यह नियमित रूप से भगवान शिव की कृपा पाने के लिए किया जाने वाला व्रत है, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है. मासिक शिवरात्रि, महाशिवरात्रि से थोड़ी अलग होती है, इसकी पूजा विधि में अंतर है. ऐसे में चैत्र मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें व्रत, पूजन और क्या है इसके नियम.   चैत्र मासिक शिवरात्रि 2026 मुहूर्त   चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 17 मार्च 2026 को सुबह 9.23 पर शुरू होगी और अगले दिन 18 मार्च 2026 को सुबह 8.25 पर समाप्त होगी. पूजा मुहूर्त - देर रात 12.07 - देर रात 12.55, 18 मार्च   मासिक शिवरात्रि व्रत कैसे करें व्रत का संकल्प - व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें. इसके बाद घर के मंदिर या शिवालय में जाकर पूजा करें. शिवलिंग का अभिषेक करें. महाशिवरात्रि पर पूजा बड़े स्तर पर की जाती है लेकिन मासिक शिवरात्रि पर सामान्य रूप से पूजन कर सकते हैं. इन चीजों से करें पूजा - जल या गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग, सफेद फूल का इस्तेमाल करें. पूजा करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.   दिनभर व्रत रखें निर्जला व्रत (बिना जल के) फलाहार व्रत या केवल एक समय भोजन कर सकते हैं.   रात्रि में विशेष पूजा - मान्यता है कि इस दिन रात्रि काल में महादेव शिवलिंग में प्रकट रहते हैं.   अगले दिन व्रत का पारण - अगले दिन सुबह भगवान शिव की पूजा करके व्रत का पारण किया जाता है और जरूरतमंद लोगों को दान दिया जाता है.   मासिक शिवरात्रि व्रत के नियम व्रत के दिन सात्विक भोजन करें और लहसुन-प्याज से परहेज करें. मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें. क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहें. ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है. भगवान शिव के मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करें. संभव हो तो मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक अवश्य करें.  

Metroheadlines मार्च 17, 2026 0

Premanand Maharaj ने बताया भूत कैसे बदलते हैं रूप? जानें डर के पीछे का चौकानें वाला सच?

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Chaitra Navratri 2026: खरमास में चैत्र नवरात्रि, क्या घर, वाहन खरीदी, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं ?

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कभी भी जारी हो सकता है 10वीं-12वीं रिजल्ट पर बड़ा अपडेट

  UP Board Result 2026: यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट 2026 जल्द जारी हो सकता है. जिन्हें छात्र-छात्राएं आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाकर चेक कर सकते हैं   उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है. माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश जल्द ही कक्षा 10वीं और 12वीं का रिजल्ट 2026 जारी करने जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट मुताबिक बोर्ड ने रिजल्ट की तैयारी पूरी कर ली है और इसे इस सप्ताह कभी भी घोषित किया जा सकता है. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों की नजर अब सिर्फ रिजल्ट डेट और टाइम पर टिकी हुई है. नतीजे आने के बाद उन्हें upmsp.edu.in पर देखा जा सकेगा.   मीडिया रिपोर्ट्स और बोर्ड सूत्रों के अनुसार, कॉपियों की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. करीब डेढ़ लाख शिक्षकों ने लाखों कॉपियों का मूल्यांकन किया है. इसके साथ ही स्कूलों द्वारा इंटरनल और प्रैक्टिकल मार्क्स भी पहले ही अपलोड किए जा चुके हैं.अब रिजल्ट पूरी तरह तैयार है और 22 से 25 अप्रैल के बीच किसी भी दिन इसे जारी किया जा सकता है.     एक साथ जारी होंगे 10वीं और 12वीं के रिजल्ट   हर साल की तरह इस बार भी 10वीं और 12वीं दोनों क्लास के रिजल्ट एक साथ जारी होने की संभावना है. रिजल्ट की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की जाएगी, जिसमें टॉपर्स लिस्ट और पास प्रतिशत जैसी जानकारी भी साझा की जाएगी.   कहां जारी होगा रिजल्ट? upmsp.edu.in upresults.nic.in   कैसे चेक करें UP Board Result 2026 सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं. “UP Board 10th Result 2026” या “UP Board 12th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें. अपना रोल नंबर और स्कूल कोड दर्ज करें. सबमिट बटन पर क्लिक करें. आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा. भविष्य के लिए इसे डाउनलोड या प्रिंट कर लें.

Metroheadlines अप्रैल 21, 2026 0

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राजस्थान बोर्ड 12वीं का रिजल्ट जल्द, जानें कब और कैसे देखें अपना स्कोर

  RBSE 12th Result 2026: राजस्थान बोर्ड 12वीं के छात्रों का इंतजार अब खत्म होने वाला है.जल्द ही रिजल्ट जारी किया जाएगा, जिसे छात्र घर बैठे ऑनलाइन आधिकारिक वेबसाइट rajresults.nic.in⁠ पर चेक कर सकते हैं.   राजस्थान बोर्ड की 12वीं परीक्षा देने वाले लाखों छात्र इस समय अपने रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.अच्छी खबर यह है कि बोर्ड अब रिजल्ट जारी करने की तैयारी लगभग पूरी कर चुका है और कभी भी परिणाम घोषित किया जा सकता है.मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान बोर्ड 12वीं का रिजल्ट मार्च के आखिरी दिनों में जारी किया जा सकता है. हालांकि बोर्ड की तरफ से अभी तक कोई फाइनल तारीख और समय घोषित नहीं किया गया है. ऐसे में छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे ऑफिशियल अपडेट पर नजर बनाए रखें.   कहां चेक कर पाएंगे रिजल्ट? रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इसे ऑनलाइन आसानी से चेक कर सकेंगे. इसके लिए उन्हें राजस्थान बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट  rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाना होगा. वहीं से रोल नंबर डालकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं.     रिजल्ट में क्या जानकारी मिलेगी? जब आप अपना रिजल्ट खोलेंगे तो उसमें आपकी जरूरी जानकारी दी होगी, जैसे आपका नाम, रोल नंबर, हर विषय के नंबर, कुल अंक और पास या फेल का स्टेटस. ध्यान रखें कि ऑनलाइन दिखने वाला रिजल्ट अस्थायी होगा, असली मार्कशीट आपको बाद में स्कूल से मिलेगी.     वेबसाइट स्लो हो तो क्या करें ?  रिजल्ट के दिन एक साथ बहुत सारे छात्र वेबसाइट खोलते हैं, जिससे साइट स्लो हो जाती है या कभी-कभी बंद भी हो जाती है. अगर आपके साथ ऐसा होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है, थोड़ी देर बाद फिर से कोशिश करें. ऐसे करें  RBSE 12th Result 2026 रिजल्ट चेक  सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rajresults.nic.in⁠ पर जायें.  वहां “RBSE 12th Result 2026” का लिंक  पर क्लिक करें. इसके बाद अपना रोल नंबर डालें और सबमिट बटन दबाएं. आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा, जिसे आप डाउनलोड या प्रिंट भी कर सकते हैं.   इस बार क्या खास है? राजस्थान बोर्ड की 12वीं परीक्षाएं इस साल 12 फरवरी से शुरू होकर 11 मार्च तक चली थीं. इस परीक्षा में करीब 9 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया और पूरे राज्य में लगभग 6,170 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे. जानकारी के मुताबिक, 10वीं के रिजल्ट के दौरान राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने यह संकेत दिया था कि 12वीं के तीनों स्ट्रीम आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स के नतीजे 31 मार्च 2026 तक जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर बहुत जल्द रिजल्ट की तारीख और समय की आधिकारिक घोषणा कर सकता है.

Metroheadlines मार्च 30, 2026 0

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इंतजार खत्म होने वाला है, शिक्षा मंत्री ने बताई राजस्थान बोर्ड 12वीं रिजल्ट की तारीख!

  राजस्थान बोर्ड 12वीं के लाखों छात्रों का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है.शिक्षा मंत्री ने कहा कि रिजल्ट 31 मार्च 2026 को जारी किया जा सकता है. जाने कैसे चेक कर सकते रिजल्ट..     माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की तरफ से आज 10वीं क्लास का रिजल्ट जारी किया गया है. ऐसे में अब 12वीं क्लास के छात्र-छात्राओं को रिजल्ट का इंतजार है. रिपोर्ट्स के मुताबिक नतीजे मार्च माह में आ सकते हैं. हालांकि राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से कहा गया है कि 12वीं बोर्ड का रिजल्ट 31 मार्च 2026 को संभव है. नतीजे जल्द जारी हों इसके लिए कार्य किया जा रहा है.   10 वीं के बाद अब 12 वीं के रिजल्ट का इंतजार   इस साल के 10वीं बोर्ड रिजल्ट में सीकर जिले की रहने वाली चेष्टा शर्मा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 99.00 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है. अब सभी की नजर 12वीं के रिजल्ट पर है. छात्र और अभिभावक दोनों ही इसके जारी होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड इस बार भी रिजल्ट समय पर जारी करेगा, जिससे नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत बिना किसी देरी के हो सके. ऐसे में छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक अपडेट्स पर नजर बनाए रखें.   परीक्षा कब हुई थी? राजस्थान बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षाएं इस साल 12 फरवरी से 11 मार्च 2026 के बीच आयोजित की गई थीं. परीक्षा खत्म होने के बाद से ही छात्र रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.   रिजल्ट कैसे करें चेक?   सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. “RBSE Result 2026” लिंक पर क्लिक करें. रोल नंबर दर्ज करें. सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा. मार्कशीट डाउनलोड कर लें.   SMS से भी कर सकते हैं चेक  अगर वेबसाइट स्लो चल रही हो या खुल नहीं रही हो, तो छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. यह तरीका काफी आसान और तेज होता है.इसके लिए छात्र को अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में जाएं. नया मैसेज टाइप करें RJ12 <स्पेस> आपका रोल नंबर अब इस मैसेज को 5676750 या बोर्ड द्वारा दिए गए नंबर पर भेज दें.कुछ ही सेकंड में आपके मोबाइल पर रिजल्ट आ जाएगा.   Digi lockerसे भी कर सकते हैं चेक  रिजल्ट सबसे पहले DigiLocker ऐप डाउनलोड करें या वेबसाइट पर जाएं. अपना मोबाइल नंबर या आधार से अकाउंट लॉगिन/साइनअप करें. “Education” या “Board Results” सेक्शन में जाएं. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) चुनें. अपनी कक्षा सेलेक्ट करें. रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करें. आपकी डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी. इसे डाउनलोड या सेव कर लें.  

Metroheadlines मार्च 24, 2026 0

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MDS 2026 के लिए आवेदन शुरू, डेंटल पीजी में दाखिले का मौका; 30 मार्च तक करें रजिस्ट्रेशन

  NEET MDS 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और उम्मीदवार 30 मार्च 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं.   डेंटल क्षेत्र में आगे पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अहम खबर है. नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट - मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (NEET MDS 2026) के लिए आवेदन प्रक्रिया अब जारी है. राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (चिकित्सा विज्ञान) ने इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है. देशभर के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट nbe.edu.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. बोर्ड के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 14 मार्च से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार तय समय सीमा के भीतर अपना फॉर्म भर सकते हैं.   परीक्षा बोर्ड ने उम्मीदवारों को आवेदन के लिए लगभग दो सप्ताह का समय दिया है. इच्छुक छात्र 30 मार्च 2026 रात 11:55 बजे तक अपना आवेदन फॉर्म ऑनलाइन भर सकते हैं. छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें और जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें. कई बार आखिरी दिन वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने के कारण तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं.   2 मई को होगी परीक्षा   NEET MDS 2026 परीक्षा का आयोजन 2 मई 2026 को किया जाएगा. यह परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में होगी. परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी, जो दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी. इस तरह उम्मीदवारों को सवाल हल करने के लिए तीन घंटे का समय दिया जाएगा. परीक्षा के बाद बोर्ड द्वारा 2 जून 2026 को परिणाम घोषित किए जाने की संभावना है.   कौन कर सकता है आवेदन   इस परीक्षा में वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) से मान्यता प्राप्त संस्थान से बीडीएस (BDS) की डिग्री प्राप्त की हो. इसके अलावा उम्मीदवार के पास DCI या किसी राज्य डेंटल काउंसिल से जारी प्रोविजनल या स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र होना भी जरूरी है. साथ ही उम्मीदवारों को 31 मई 2026 तक 12 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होगी. तभी वे इस परीक्षा के लिए पात्र माने जाएंगे.  

Metroheadlines मार्च 14, 2026 0

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